Home Haryana|Panchkula रिटायरमेंट के दिन IAS प्रदीप डागर गिरफ्तार, कोर्ट से मिला इतने दिनों का रिमांड

रिटायरमेंट के दिन IAS प्रदीप डागर गिरफ्तार, कोर्ट से मिला इतने दिनों का रिमांड

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रिटायरमेंट के दिन IAS प्रदीप डागर गिरफ्तार, कोर्ट से मिला इतने दिनों का रिमांड

पंचकूलाः बहुचर्चित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक फंड घोटाले का मामला लगातार गरमा रहा है। वहीं इस मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने कार्रवाई करते हुए आईएएस अधिकारी प्रदीप कुमार डागर को गिरफ्तार कर लिया, जिन्हें मंगलवार को देर रात ही पंचकूला की विशेष अदालत में पेश किया गया। सीबीआई के द्वारा पूछताछ के लिए 2 दिन के रिमांड पर लिया है। आईएएस अधिकारी प्रदीप कुमार डागर से पूछताछ में दूसरे आईएएस के नामों का भी खुलासा हो सकता है, जो इस घोटाले में शामिल हैं।

सीबीआई जांच के दौरान हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) के बैंक खातों में 169 करोड़ रुपए की गड़बड़ी सामने आई। इस मामले में पुलिस ने एक डाटा एंट्री ऑपरेटर को गिरफ्तार किया था, जिसने बताया कि एक आईएएस अफसर के कहने पर यह पैसा चंडीगढ़ सेक्टर-32 स्थित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक शाखा में ट्रांसफर हुआ।प्रमोटी आईएएस अधिकारी प्रदीप डागर अगस्त 2022 से दिसंबर 2025 तक एसएसपीसीबी के मेंबर सचिव रहे हैं। बता दें कि सरकार ने डागर को 8 अप्रैल 2026 को ही सस्पेंड कर दिया था। उस समय वे हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) में सदस्य सचिव थे। सीबीआई के मुताबिक प्रदीप लंबे समय से जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे। इसके अलावा जांच एजेंसी से बचने की कोशिश कर रहे थे। उनकी लोकेशन ट्रेस करने के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया है। खास बात ये है कि प्रदीप का आज रिटायरमेंट था।

मगर, गिरफ्तारी के डर से वे अंडरग्राउंड थे। उन्होंने अग्रिम जमानत याचिका भी लगाई थी, जिस पर 2 जुलाई को सुनवाई होनी है। इससे पहले ही सीबीआई ने उन्हें अरेस्ट कर लिया। बता दें कि अब तक इस मामले में प्रदीप डागर को मिलाकर तीन आईएएस अरेस्ट हो चुके है। इससे पहले आईएएस आरके सिंह और पंकज अग्रवाल की गिरफ्तारी हुई थी। इस पूरे बैंक घोटाले में किसी एक विभाग से जुड़ी सबसे बड़ी हेराफेरी माना जा रहा है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने बताया कि यह मामला हरियाणा सरकार के अनुरोध पर स्टेट विजिलेंस एवं एंटी करप्शन ब्यूरो से सीबीआई को सौंपा गया था।यह घोटाला IDFC फर्स्ट बैंक, सेक्टर-32 शाखा से जुड़े उस बड़े बैंकिंग फ्रॉड का हिस्सा है, जिसमें हरियाणा सरकार के आठ विभागों के करीब 504 करोड़ रुपए फर्जी एफडी और शेल कंपनियों के जरिए कथित तौर पर निकाल लिए गए।

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