Home Himachal गगरेट में सुनियोजित विकास और अवैध निर्माण रोकथाम पर जन-जागरूकता शिविर आयोजित

गगरेट में सुनियोजित विकास और अवैध निर्माण रोकथाम पर जन-जागरूकता शिविर आयोजित

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गगरेट में सुनियोजित विकास और अवैध निर्माण रोकथाम पर जन-जागरूकता शिविर आयोजित

नगर एवं ग्राम योजना अधिनियम व विकास योजनाओं पर ग्रामीण किए जागरूक

अम्ब, (12 फरवरी) सुशील पंडित: नगर योजना कार्यालय अम्ब ने आज (बृहस्पतिवार) को नगर पंचायत गगरेट के सभागार में एक जन-जागरूकता शिविर का आयोजन किया। शिविर की अध्यक्षता योजना अधिकारी परमेन्दर सिंह ने की। इस अवसर पर नगर योजना कार्यालय अम्ब से शिव कुमार, राजेश कुमार व दर्शन कुमार सहित नगर पंचायत गगरेट एवं अम्ब के अधिकारी व कर्मचारी भी उपस्थित रहे। इस दौरान परमिंदर सिंह ने उपस्थित जनप्रतिनिधियों को हिमाचल प्रदेश नगर एवं ग्राम योजना अधिनियम, 1977 तथा अम्ब–गगरेट योजना क्षेत्र में लागू नियमों, विनियमों और विकास योजना के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी प्रदान की। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में स्थानीय जनता को इन नियमों के प्रति जागरूक करें, ताकि क्षेत्र का सुनियोजित विकास सुनिश्चित किया जा सके। योजना अधिकारी परमेन्दर सिंह ने बताया कि यदि कोई व्यक्ति भूमि खरीदकर निर्माण करना चाहता है, तो उसे नगर योजना कार्यालय से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य है। उन्होंने नगर एवं ग्राम योजना अधिनियम, 1977 की धारा 16(सी) के प्रावधानों की भी विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भूमि की बिक्री से पूर्व संबंधित प्लॉट का विभाग से स्वीकृत होना आवश्यक है। साथ ही, क्रेता को भी यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वह केवल विभाग द्वारा स्वीकृत एवं उप-विभाजित प्लॉट ही खरीदे, जिससे उसे उचित आकार का प्लॉट, मार्ग तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हो सकें और नियोजित आवास निर्माण संभव हो।

रेरा अधिनियम के प्रावधानों से भी कराया अवगत

शिविर के दौरान योजना अधिकारी ने उपस्थित जनप्रतिनिधियों को भू-संपदा (विनियमन और विकास) अधिनियम (रेरा) के प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अधिसूचित योजना क्षेत्र में 500 वर्ग मीटर भूमि पर प्लॉट या 8 से अधिक अपार्टमेंट का निर्माण एवं विक्रय किए जाने की स्थिति में भू-संपदा अधिनियम के तहत पंजीकरण अनिवार्य है। इसके अतिरिक्त, जिला के किसी भी क्षेत्र में 1000 वर्ग मीटर से अधिक भूमि पर प्लॉट या अपार्टमेंट का निर्माण एवं विक्रय अथवा किसी भी प्रकार का विकासात्मक कार्य किए जाने पर उस क्षेत्र को डीम्ड योजना क्षेत्र माना जाएगा, जहां विभागीय स्वीकृति और भू-संपदा अधिनियम के तहत पंजीकरण आवश्यक होगा। परमेन्दर सिंह ने अवैध निर्माण से उत्पन्न होने वाली संभावित समस्याओं और भविष्य की कानूनी कठिनाइयों के बारे में भी जानकारी दी तथा सभी से आग्रह किया कि बिना विभागीय स्वीकृति के किसी भी प्रकार का निर्माण न करें, ताकि क्षेत्र का संतुलित, सुव्यवस्थित और पर्यावरण-अनुकूल विकास सुनिश्चित किया जा सके।
 

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