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  • कम उम्र में परेशान कर रही कमर दर्द? तो फाॅलो करें ये 5 आसान उपाय…

    कम उम्र में परेशान कर रही कमर दर्द? तो फाॅलो करें ये 5 आसान उपाय…

    Health Tips: अनियमित दिनचर्या और गलत खानपान कई बीमारियों की वजह बन सकता है। इसमें कमर दर्द टॉप पर है। इसको आम भाषा में बैक पेन भी कहा जाता है। महिला हो या फिर पुरुष, आज कल कमर दर्द एक आम समस्‍या बन गई है। इस परेशानी से आज के समय में आधी से ज्यादा आबादी परेशान है। बेशक, कमर दर्द के कई कारण माने जाते हैं, लेकिन लंबे समय तक एक ही पॉश्चर में बैठकर काम करना या शरीर में कैल्शियम और विटामिन की कमी होना इसके मूल कारणों में से एक हैं। सामान्यता ये दिक्कत 30 की उम्र के बाद शुरू होती है, लेकिन वर्तमान में यह बीमारी युवाओं को भी आगोश में ले रही है। यह दर्द लोगों का उठने-बैठने तक में भी तबाह कर देता है। हालांकि कुछ उपायों को अपनाने से आप इस दर्द को हमेशा के लिए दूर कर सकते हैं।

    एक्सपर्ट के अनुसार, खुद को फिट और हेल्दी रखने के लिए नियमित तौर पर व्यायाम बेहद जरूरी है। ऐसा करने से न केवल कमर का दर्द ठीक होता है, बल्कि शरीर की फिटनेस भी बनी रहती है। साथ ही वॉकिंग और स्विमिंग भी अच्छे विकल्पों में से एक हैं। वहीं, रोजाना कम से कम 20 मिनट पैदल चलें। ऐसा करने से रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है।

    यदि आप किसी तरह का वजन उठा रहे हैं तो ध्यान रहे कि आप इसे आराम से उठाएं। क्योंकि अचानक या गलत तरीके से वजन उठाने से आपकी कमर में दर्द हो सकता है। कोशिश करें कि झटके से उठने, बैठने या सोने से भी बचें, ताकि कमर पर अचानक प्रेशर न पड़े। इसके अलावा, पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और हरी सब्जियों और फलों का सेवन करें।

    अनियमित दिनचर्या और गलत खानपान लगातार शरीर का मोटापा बढ़ा रहे हैं। ये शरीर के साथ कमर दर्द में भी तकलीफ देता है। इसको कंट्रोल करने के लिए नियमित एक्सरसाइज के साथ अच्छे खानपान पर ध्यान दें। ऐसा करने से कमर में होने वाला दर्द भी दूर हो सकता है।

    घंटों एक ही पोजीशन में बैठे रहना भी कमर दर्द का एक बड़ा कारण है। बेहतर होगा कि बैठने की मुद्रा को हर 15-20 मिनट में बदलते रहें, ताकि आपकी मांसपेशियां अच्छे से काम कर सकें। ऐसा करने से आप कमर दर्द से बचे रहेंगे।

    देर तक काम करते वक्त आपको कुछ सावधानियां बरतना बेहद जरूरी है। यदि आप लैपटॉप और डेस्कटॉप पर काम कर रहे हैं तो ध्यान रखें कि कंप्यूटर का माउस 90 डिग्री के कोण पर हो। वहीं, मोबाइल इस्तेमाल करते हुए गर्दन न झुकाएं बल्कि सिर्फ नजर नीची करें।

  • पंजाब : मुस्लिम कारीगर बना रहे रावण, मेघनाथ और कुंभकरण के पुतले, देखें वीडियो

    पंजाब : मुस्लिम कारीगर बना रहे रावण, मेघनाथ और कुंभकरण के पुतले, देखें वीडियो

    नंगल : 24 अक्तूबर को देशभर में मनाए जाने वाले दशहरा पर्व के दौरान रावण, मेधनाथ व कुंभकर्ण के पुतलों को भगवान राम द्वारा आग के हवाले किया जाता है। जिसके उपरांत बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक दशहरा पर्व संपन्न होता है। लेकिन आप को पता है कि रावण, मेधनाथ व कुंभकर्ण के पुतले बनाने में कारीगरों को कितनी कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। यूपी से लगभग एक दर्जन से भी अधिक आए कारीगर बीते लगभग 15 दिनों से श्री लक्ष्मी नरायण मन्दिर में इन विशालकाय पुतलों को बनाने में जुटे हुए है और खास बात यह भी है कि पुतले बनाने में लगे सभी कारीगर मुस्लिम समाज से आते है और इनके पूर्वजों ने इस काम को शुरू किया था।

    जो पीढ़ी दर पीढी आगे बढ़ता गया। यही परिवार वर्ष 2005 से लगातार नंगल पंहुच कर इस काम को आगे बढ़ा रहा है। यहीं से जिला रूपनगर सहित पड़ोसी राज्य हिमाचल के विभिन्न शहरों में यहां भी दशहरा पर्व का मेल सजता है। वहां रावण, मेधनाथ व कुभकर्ण के पुतले बना कर भेजता है। इन कारीगरों की माने तो पुतले बनाने में आसाम से आए बांस की लकड़ी, सूतली, रंगीन पेपर, पराली के अलावा पटाखों का प्रयोग किया जाता है। इन कारीगरों ने कहा कि पुतलों का साईज देख कर ही इसके दाम तय किए जाते है।

    यहां तक नंगल की बात है तो श्री सनातन धर्म सभा को तीन पुतले डेढ लाख रूपए में देने तय हुए है। कारीगर मोहम्मद जाहिर व मोहम्मद शाहिद ने कहा कि जब भी हम यहां आते है धर्म की सीमाओं से उपर उठ लोगों का भरपूर प्यार उन्हें मिलता है। इन कारीगरों ने कहा कि यह काम मात्र दशहरा पर्व तक ही होता है और उसके उपरांत वह फ्लावर डैकोरेशन का काम करते है।

  • सरकारी अस्पतालों में 4 दिन के नवजात को लेकर भटकता रहा पिता, हुई मौत

    सरकारी अस्पतालों में 4 दिन के नवजात को लेकर भटकता रहा पिता, हुई मौत

    लखनऊः राजधानी लखनऊ में सरकारी अस्पतालों में वेंटिलेटर नहीं मिलने से 4 दिन की नवजात बच्ची की मौत का मामला सामने आया है। मासूम की इलाज के अभाव में मौत से परिजन बेहद सदमे में हैं। सरकारी अस्पतालों से निराशा हाथ लगने पर उन्होंने मासूम को प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया, जहां के महंगा खर्च नहीं दे पाने की हालत में एक बार फिर सरकारी अस्पतालों के चक्कर काटे। इसी भागदौड़ में मासूम की सांसे उखड़ गईं। आरोप है कि केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर में सांसे थमने के बाद मासूम को भर्ती कर उसके कागज तैयार किए गए, ताकि मामले को दबाया जा सके। लखनऊ के राजाजीपुरम क्षेत्र के बख्तामऊ निवासी फाजिल पेशे से मजूदर है। फाजिल ने बताया कि उसकी पत्नी शमीम बानो को प्रसव पीड़ा होने पर विगत 10 अक्टूबर को लोकबंधु अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां उसी दिन देर रात नार्मल डिलीवरी से बच्ची का जन्म हुआ। कुछ देर बाद बच्ची की तबियत बिगड़ने लगी। इस पर डॉक्टरों ने उसे केजीएमयू रेफर कर दिया। आरोप है कि परिजन बच्ची को एम्बुलेंस से केजीएमयू लेकर पहुंचे, जहां बताया गया कि पीडियाट्रिक वेंटिलेटर बेड खाली नहीं हैं।

    इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने फा​जिल को मासूम बच्ची को दूसरे अस्पताल ले जाने को कहा। मासूम की हालत बिगड़ने पर आनन फानन में फाजिल उसे सिविल, लोहिया संस्थान और एसजीपीजीआई में ले गया, लेकिन कई दालिखा हीं मिला। फाजिल के मुताबिक सभी जगह से निराशा हाथ लगने पर उसने मासूम बच्ची को कृष्णानगर के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती कराया। जहां महज दो दिन में 13 हजार रुपए ले लिए गए। फाजिल ने बताया​ कि पेशे से मजदूर होने के कारण वह इतना महंगा इलाज कराने में असमर्थ थे, इस वजह से उन्होंने शनिवार को एक बार फिर एम्बुलेंस से बच्ची को लेकर सरकारी अस्पतालों के चक्कर काटे। उन्होंने बताया कि वह बच्ची को लेकर केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। जहां वेंटिलेटर बेड नहीं होने का हवाला देकर फिर वापस कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने एसजीपीजीआई समेत अन्य अस्पतालों में चक्कर काटे। बाद में एसजीपीजीआई में नर्सिंग स्टॉफ एसोसिएशन की पूर्व अध्यक्ष सीमा शुक्ला ने केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर प्रभारी डॉ. संदीप तिवारी से फोन पर बातचीत की। उन्होंने किसी तरह बच्ची को भर्ती करने का अनुरोध किया।


    इसके बाद फाजिल शाम चार बजे बच्ची को लेकर ट्रॉमा सेंटर पहुंचा, लेकिन इलाज शुरू होने से पहले ही उसकी सांसे थम चुकी थी। इसके बावजूद डॉक्टरों ने भर्ती करने की खानापूर्ति की। अगर सही समय पर पहले ही उसकी बच्ची को इलाज मिल जाता तो उसकी जान बच सकती थी। नवजात बच्ची की मौत के बाद फाजिल और परिजन बेहद गमगीन हैं। उधर इस प्रकरण में केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. सुधीर सिंह ने कहा कि ट्रॉमा सेंटर में मरीजों का दबाव अधिक रहता है। जो भी मरीज आते हैं, उन्हें प्रमुखता से इलाज मुहैया कराया जाता है। अगर वेंटिलेटर खाली हो तो बच्ची को जरूर दिया जाता। बताया जा रहा है कि लखनऊ के सरकारी संस्थानों और अस्पतालों में एनआईसीयू के सिर्फ नौ वेंटिलेटर हैं।

    इनमें से लोहिया संस्थान में छह, बलरामपुर में एक, केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर के एनआईसीयू में दो पीडियाट्रिक वेंटिलेटर उपलब्ध हैं। इनमें हमेशा कोई न कोई मरीज रहता है। ऐसे में बेहद मुश्किल से ही नए मरीज को इलाज मिल पाता है। सामान्य तौ पर एक शिशु को वेंटिलेटर से ठीक होने में दो सप्ताह का वक्त लग जाता है। इससे पहले जून माह में भी वेंटिलेटर के अभाव में नवजात की मौत हो गई थी। तब बहराइच निवासी सईद नवजात को लेकर राजधानी आए थे। उन्हें भी कई अस्पतालों के चक्कर काटने के बाद पीडियाट्रिक वेंटिलेटर नहीं मिला था। बाद में केजीएमयू में एम्बुलेंस में ही मासूम की सांसे उखड़ गई। इस घटना के बाद डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने अस्पतालों को निर्देश दिया था कि अगर वेंटिलेटर खाली नहीं हैं तो बाइपेप के जरिए इलाज दिया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी हालत में मरीज को वापस नहीं लौटाया जाए। हालांकि इसके बाद भी अस्पतालों की स्थिति में सुधार देखने को नहीं मिल रहा है।

  • पंजाबः दर्दनाक हादसा, झूले से गिरकर बच्चे की मौत, देखें वीडियो

    पंजाबः दर्दनाक हादसा, झूले से गिरकर बच्चे की मौत, देखें वीडियो

    फिरोजपुर : भारत-पाकिस्तान से सटे सरहदी गांव दुलचीके में बड़ा हादसा हुआ है। इस हादसे में 1 बच्चों की मौत हो गई। जबकि एक बच्चे की हालत गंभीर है। यह हादसा झूला टूटने से हुआ। घटनाक्रम के अनुसार गांव दुलचीके में लगे मेले दौरान झूला झूलते समय 3 बच्चों के गले में टूटी हुई रस्सी फंस गई। जिससे बच्चे झूले से नीचे गिर गए। झूला रुकने तक तीनों बच्चे झूले से टकराने की वजह से गंभीर रूप से घायल हो गए।

    इनमें से एक बच्चें की मौत हो गई, जबकि एक बच्चा गंभीर घायल है। मृतक बच्चे की पहचान अमनदीप (15) पुत्र जोगिंदर सिंह वासी कालू वाला के रूप में हुई है। बच्चे का सिविल अस्पताल में पोस्टमॉर्टम चल रहा है। मृतक के पिता ने बताया कि वह अपने बेटे के साथ मेला देखने गया था और उसका बेटा झूला झूलने की जिद करने लगा, तो उन्होंने उसे झूले पर चढ़ा दिया। कुछ समय पहले झूला धीरे चल रहा था तो एकदम से झूला चलाने वाले ने झूला तेज चलाना शुरु कर दिया।

    झूले पर बैठे 2 और लड़कों ने कहा कि हमारे पैसे अभी और बचते है, झूला कुछ देर और झूलना है। गुस्साए झूला चालक ने झूले को और तेज कर दिया। जिससे कि झूले की केबल तार टूट गई और तीनों झूले पर सवार बच्चे झूले से नीचे गिर गए। वह झूला उन बच्चों पर आ गिरा। जिससे कि एक बच्चे की मौके पर ही मौत हो गई और 2 गंभीर रूप से घायल हो गए है। आरोपी झूला चालक झूले लेकर अपने वहां से फरार हो गया है।

  • जालंधरः दमकल विभाग की ड्राइविंग सीट पर बैठा बंदर, कर्मियों में मचा हड़कंप, देखें वीडियो

    जालंधरः दमकल विभाग की ड्राइविंग सीट पर बैठा बंदर, कर्मियों में मचा हड़कंप, देखें वीडियो

    जालंधर, ENS: दमकल विभाग के दफ्तर में उस समय हड़कंप मच गया, जब दमकल विभाग की गाड़ी में बंदर आ गया। इस दौरान दमकल विभाग के कर्मी सहम गए। वहीं बंदर द्वारा कोई जानी नुकसान करने का कोई मामला सामने नहीं आया है। हालांकि वहां लोगों द्वारा बंदर को काबू करने की कोशिश भी की गई।

     लेकिन वह कभी दमकल की गाड़ी की छत पर तो कभी गाड़ी की ड्राइविंग सीट पर बैठ जाता है। बंदर के गाड़ी की ड्राइविंग सीट पर बैठने की तस्वीर भी सामने आई है। जिसमें देख कर ऐसा लग रहा है कि जैसे मानों दमकल विभाग की गाड़ी बंदर खुद चलाएगा।

  • ਪੰਜਾਬ : PRTC ਦੀ ਬੱਸ ਤੇ ਕਾਰ ‘ਚ ਹੋਈ ਟੱਕਰ, ਉੱਡੇ ਪਰਖੱਚੇ, ਦੇਖੋ ਵੀਡਿਓ

    ਪੰਜਾਬ : PRTC ਦੀ ਬੱਸ ਤੇ ਕਾਰ ‘ਚ ਹੋਈ ਟੱਕਰ, ਉੱਡੇ ਪਰਖੱਚੇ, ਦੇਖੋ ਵੀਡਿਓ

    ਹੁਸ਼ਿਆਰਪੁਰ : ਲੁਧਿਆਣਾ ਜਾ ਰਹੀ ਪੀਆਰਟੀਸੀ ਦੀ ਬੱਸ ਅਤੇ ਫਿਲੌਰ ਤੋਂ ਗੁਰਾਇਆ ਵੱਲ ਆ ਰਹੀ ਇੱਕ ਕਾਰ ਵਿਚਕਾਰ ਆਹਮੋ-ਸਾਹਮਣੇ ਟੱਕਰ ਹੋਣ ਕਾਰਨ ਕਾਰ ਦੇ ਪਰਖੱਚੇ ਉੱਡ ਗਏ। ਕਾਰ ‘ਚ ਸਵਾਰ ਵਿਅਕਤੀ ਅਤੇ ਮਹਿਲਾ ਗੰਭੀਰ ਰੂਪ ‘ਚ ਜ਼ਖਮੀ ਹੋ ਗਏ। ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਫਗਵਾੜਾ ਹਸਪਤਾਲ ‘ਚ ਦਾਖਲ ਕਰਵਾਇਆ ਗਿਆ। ਜਿੱਥੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਇਲਾਜ ਚੱਲ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਇਸ ਸਬੰਧ ‘ਚ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿੰਦੇ ਹੋਏ ਬੱਸ ਡਰਾਈਵਰ ਭੁਪਿੰਦਰ ਸਿੰਘ ਵਾਸੀ ਮੋਗਾ ਨੇ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਉਹ ਹੁਸ਼ਿਆਰਪੁਰ ਤੋਂ ਲੁਧਿਆਣਾ ਆ ਰਹੇ ਸਨ ਕਿ ਗੁਰਾਇਆ ਬੱਸ ਸਟੈਂਡ ਤੋਂ ਹੁੰਦੇ ਹੋਏ ਕਮਾਲਪੁਰ ਪਿੰਡ ਦੇ ਗੇਟ ਕੋਲ ਪਹੁੰਚੇ। ਤਾਂ ਸਾਹਮਣੇ ਗਲਤ ਸਾਈਡ ਤੋਂ ਆ ਰਹੀ ਕਾਰ ਨੇ ਬੱਸ ਵੱਲ ਕਾਰ ਮੋੜ ਦਿੱਤੀ।

    ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਬ੍ਰੇਕ ਲਗਾਉਣ ਦੀ ਕਾਫੀ ਕੋਸ਼ਿਸ਼ ਕੀਤੀ, ਪਰ ਦੋਵੇਂ ਇਕ-ਦੂਜੇ ਨਾਲ ਟਕਰਾ ਗਏ। ਜਿਸ ਕਾਰਨ ਇਹ ਹਾਦਸਾ ਵਾਪਰ ਗਿਆ। ਬੱਸ ਦੇ ਡਰਾਈਵਰ ਨੇ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਉਸ ਨੇ ਸਵਾਰੀਆਂ ਦੀ ਮਦਦ ਨਾਲ ਕਿਸੇ ਤਰ੍ਹਾਂ ਕਾਰ ਚੋਂ ਜ਼ਖਮੀਆਂ ਨੂੰ ਬਾਹਰ ਕੱਢਿਆ। ਰਾਹਗੀਰਾਂ ਦੀ ਮਦਦ ਨਾਲ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਸਿਵਲ ਹਸਪਤਾਲ ਫਗਵਾੜਾ ਚ ਦਾਖਲ ਕਰਵਾਇਆ ਗਿਆ। ਜਿੱਥੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਇਲਾਜ ਚੱਲ ਰਿਹਾ ਹੈ।  ਜ਼ਖਮੀ ਵਿਅਕਤੀ ਗੁਰਮੁੱਖ ਸਿੰਘ ਵਾਸੀ ਜਲੰਧਰ ਨੇ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਉਹ ਆਪਣੇ ਘਰ ਕੰਮ ਕਰਨ ਵਾਲੀ ਔਰਤ ਪੂਜਾ ਨੂੰ ਫਿਲੌਰ ਦੇ ਪਿੰਡ ਨਗਰ ਵਿਖੇ ਡਾਕਟਰ ਕੋਲ ਲੈ ਕੇ ਵਾਪਸ ਆ ਰਿਹਾ ਸੀ

    ਤਾਂ ਸਰਵਿਸ ਲਾਈਨ ‘ਤੇ ਉਸ ਦੀ ਕਾਰ ਅਤੇ ਬੱਸ ਦਾ ਹਾਦਸਾ ਹੋ ਗਿਆ। ਜਿਸ ‘ਚ ਉਹ ਖੁਦ ਵੀ ਅਤੇ ਉਸ ਦੇ ਘਰ ਕੰਮ ਕਰਨ ਵਾਲੀ ਮਹਿਲਾ ਜ਼ਖਮੀ ਹੋ ਗਈ। ਇਸ ਸਬੰਧੀ ਮੌਕੇ ‘ਤੇ ਪਹੁੰਚੇ ਏ.ਐਸ.ਆਈ ਸੁਰਿੰਦਰ ਮੋਹਨ ਨੇ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਹਾਦਸਾ ਕਾਰ ਗਲਤ ਸਾਈਡ ਤੋਂ ਆਉਣ ਕਾਰਨ ਵਾਪਰਿਆ ਜਾਪਦਾ ਹੈ। ਬਾਕੀ ਮਾਮਲੇ ਦੀ ਜਾਂਚ ਕੀਤੀ ਜਾ ਰਹੀ ਹੈ ਅਤੇ ਜਾਂਚ ਉਪਰੰਤ ਬਣਦੀ ਕਾਰਵਾਈ ਕੀਤੀ ਜਾਵੇਗੀ।

  • जालंधरः नशा तस्करों को पकड़ने गई पुलिस पर चली गोलियां, 2 मुलाजिम घायल

    जालंधरः नशा तस्करों को पकड़ने गई पुलिस पर चली गोलियां, 2 मुलाजिम घायल

    जालंधर, ENS: पंजाब में नशा तस्करों के खिलाफ पुलिस द्वारा सख्ती से कार्रवाई की जा रही है। वहीं नशा तस्करों को लेकर बड़ी खबर सामने आई है कि फिल्लौर पुलिस गुप्त सूचना के आधार पर नशा तस्करों को काबू करने गई पुलिस की तस्करों के साथ मुठभेड़ हो गई। इस दौरान तस्कर द्वारा पुलिस पर गोलीयां चलाई गई, जिसके बाद पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई में गोलियां चलाई। इस घटना में 2 पुलिस मुलाजिम घायल हो गए। पुलिस ने नशा तस्कर को गिरफ्तार कर उसके पास से भारी मात्रा में सामान बरामद किया।

    प्राप्त सूचना के अनुसार फिल्लौर पुलिस को प्रातः 3 बजे सूचना मिली कि एक बड़ा नशा तस्कर जो पंजाब में नशे का किंगपीन है और उसने नशा तस्करी के माध्यम से करोड़ों रुपयों का साम्राज्य खड़ा किया हुआ है। वह नूरमहल के एरिया में एक कोठी में छिप कर बैठा है। पुलिस ने नशा तस्कर को पकड़ने के लिए कोठी की घेराबंदी की तो नशा तस्कर ने कोठी के अंदर से पुलिस पर गोलियां चलानी शुरू कर दी। जिससे दो पुलिस मुलाजिम घायल हो गए। यह भी पता चला है कि पुलिस ने नशा तस्कर को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल कर ली है। जिसके पास से भारी मात्रा में सामान बरामद हुआ है। जिसका खुलासा उच्च अधिकारी दोपहर 2 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए बड़ा खुलासा कर सकते है।

  • जालंधर : शारदीय नवरात्रि आज से आरंभ, मंदिरों में लगी श्रद्धालुओं की भीड़, देखेें वीडियो

    जालंधर : शारदीय नवरात्रि आज से आरंभ, मंदिरों में लगी श्रद्धालुओं की भीड़, देखेें वीडियो

    जालंधर : आज से मां दुर्गा की पूजा-उपासना का महापर्व शारदीय नवरात्रि आरंभ हो गए हैं। मातारानी का ये महाउत्सव 15 अक्तूबर, रविवार से आरंभ होगा और 23 अक्तूबर को समाप्त होगा। नवरात्रि के ये पावन दिन शुभ कार्यों के लिए बेहद ही उत्तम माने जाते हैं। इन दिनों कई शुभ कार्य किए जाते हैं। प्रतिपदा तिथि 14 अक्तूबर शनिवार की रात 11:26 मिनट से प्रारंभ होकर 15 अक्तूबर को देर रात 12:33 मिनट पर समाप्त हो रही है।

    शक्ति की भक्ति का पर्व शारदीय नवरात्रि आज से शुरू हो गए है। मां दुर्गा के 9 स्वरूपों को समर्पित है। हर दिन माता के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा होती है। माता की पहली शक्ति मां शैलपुत्री की पूजा होगी। 9 दिन की अखंड ज्योत प्रजवल्ति की जाएगी। इसके बाद अगले नौ दिन तक मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना होगी। श्रद्धालु व्रत रखेंगे। श्री देवी तलाब में सुबह से ही श्रद्धालु माता रानी के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।

  • शारदीय नवरात्रि में घटस्थापना के लिए 46 मिनट का ये मुहूर्त है सबसे शुभ

    शारदीय नवरात्रि में घटस्थापना के लिए 46 मिनट का ये मुहूर्त है सबसे शुभ

    शारदीय नवरात्रि आज से प्रारंभ हो गए हैं। नवरात्रि में पहले दिन यानी प्रतपदा तिथि पर घटस्थापना की जाती है। घटस्थापना अभिजीत मुहूर्त में करना शुभ माना जाता है। 15 अक्टूबर को यानी आज अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 44 मिनट से 12 बजकर 30 मिनट तक है।

    आश्विन शुक्ल पक्ष के शारदीय नवरात्रि आज से शुरू हो चुके हैं। इस बार शारदीय नवरात्रि 15 अक्टूबर से शुरू होंगे और दशहरे के साथ 24 अक्टूबर को इसका समापन होगा। इसे शक्ति प्राप्त करने की नवरात्रि भी कहा जाता है। नवरात्रि का शुभारंभ प्रतिपदा तिथि पर घटस्थापना के साथ होता है। घटस्थापना में देवी के नाम का कलश स्थापित किया जाता है। इसके बाद ही व्रत और देवी के स्वरूपों की पूजा आरंभ होती है। आइए जानते हैं कि शारदीय नवरात्रि में आज घटस्थापना का मुहूर्त क्या है।

    नवरात्रि में घटस्थापना नवरात्रि के प्रथम दिन प्रतिप्रदा तिथि पर की जाती है। घटस्थापना अभिजीत मुहूर्त में करना शुभ माना जाता है। अभिजीत मुहूर्त 15 अक्टूबर यानी आज सुबह 11 बजकर 44 मिनट से 12 बजकर 30 मिनट तक है। आप 46 मिनट की इस अवधि में घटस्थापना कर सकते हैं।

    कलश को भगवान विष्णु का रूप माना जाता है। इसलिए शुभ कार्यों से पहले कलश स्थापित करना अनिवार्य है। नवरात्रि में देवी दुर्गा की पूजा से पहले कलश स्थापित किया जाता है। इस दिन सुबह जल्दी उठें और स्नानादि के बाद व्रत-पूजा का संकल्प लें। इसके बाद पूजा स्थल की साफ-सफाई करें, जहां कलश में जल भरकर रखा जाता है।

    घटस्थापना में सबसे पहले कलश पर कलावा लपेटें। इसके बाद कलश के मुख पर आम या अशोक के पत्ते लगाएं। फिर नारियल को लाल चुनरी में लपटेकर कलश के ऊपर रख दें। इस कलश में साबुत सुपारी, फूल, इत्र, अक्षत, पंचरत्न और सिक्का डालना न भूलें। इस कलश को माता की चौकी के दाईं ओर रख दें। इसके बाद धूप, दीप जलाकर मां दुर्गा का आवाहन करें और शास्त्रों के मुताबिक मां दुर्गा की पूजा-उपासना करें।

    नवरात्रि में पूजा कैसे करें?

    नवरात्रि में पूरे नौ दिन सुबह-शाम दोनों समय पूजा करें. दोनों समय मंत्र का जाप करें और आरती भी करें। नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ करना सबसे उत्तम रहेगा। इसका नियमित पाठ करते रहें। अलग-अलग दिन अलग-अलग प्रसाद का भोग लगाएं। या दो दो लौंग रोज अर्पित करें।

    ज्योतिष के अनुसार, शारदीय नवरात्रि इस वर्ष बेहद खास रहने वाले हैं। दरअसल, शारदीय नवरात्रि में 30 साल बाद एक बड़ा ही दुर्लभ संयोग बन रहा है। शारदीय नवरात्रि पर बुधादित्य योग, शश राजयोग और भद्र राजयोग एकसाथ बन रहे हैं। ऐसे में देवी के स्वरूपों की उपासना कहीं ज्यादा मंगलकारी और फलदायी हो सकती है।

    शारदीय नवरात्रि में अपने घर में सात्विकता बनाए रखें। दोनों वेला देवी की पूजा-उपासना करें। अगर उपवास रखें तो केवल जल और फल ग्रहण करें। घर में लहसुन, प्याज या मांस-मछली का सेवन वर्जित है। व्रत रखने वाले लोग काले रंग के कपड़े बिल्कुल न पहनें। चौकी के पास जहां कलश और अखंड ज्योति जलाई जाती है, उस स्थान को कभी सूना न छोड़ें।

    शारदीय नवरात्रि 2023 तिथियां
    रविवार, 15 अक्टूबर 2023- मां शैलपुत्री (पहला दिन) प्रतिपदा तिथि
    सोमवार, 16 अक्टूबर 2023- मां ब्रह्मचारिणी (दूसरा दिन) द्वितीया तिथि
    मंगलवार, 17 अक्टूबर 2023- मां चंद्रघंटा (तीसरा दिन) तृतीया तिथि
    बुधवार, 18 अक्टूबर 2023- मां कुष्मांडा (चौथा दिन) चतुर्थी तिथि
    गुरुवार, 19 अक्टूबर 2023- मां स्कंदमाता (पांचवा दिन) पंचमी तिथि
    शुक्रवार, 20 अक्टूबर 2023- मां कात्यायनी (छठा दिन) षष्ठी तिथि
    शनिवार, 21 अक्टूबर 2023- मां कालरात्रि (सातवां दिन) सप्तमी तिथि
    रविवार, 22 अक्टूबर 2023- मां महागौरी (आठवां दिन) दुर्गा अष्टमी
    सोमवार, 23 अक्टूबर 2023- महानवमी, (नौवां दिन) शरद नवरात्र व्रत पारण
    मंगलवार, 24 अक्टूबर 2023- मां दुर्गा प्रतिमा विसर्जन, दशमी तिथि (दशहरा)

  • ਪੰਜਾਬ : ਪ੍ਰਸਿੱਧ ਹਨੂੰਮਾਨ ਮੰਦਿਰ ‘ਚ ਲੰਗੂਰ ਮੇਲਾ ਸ਼ੁਰੂ, ਦੇਖੋ ਵੀਡਿਓ

    ਪੰਜਾਬ : ਪ੍ਰਸਿੱਧ ਹਨੂੰਮਾਨ ਮੰਦਿਰ ‘ਚ ਲੰਗੂਰ ਮੇਲਾ ਸ਼ੁਰੂ, ਦੇਖੋ ਵੀਡਿਓ

    ਨਵਜੰਮੇ ਬੱਚਿਆਂ ਤੋਂ ਲੈ ਕੇ ਨੌਜਵਾਨ ਤੱਕ ਇਸ ਮੰਦਰ ‘ਚ ਬਣਦੇ ਹਨ ਲੰਗੂਰ

    ਅੰਮ੍ਰਿਤਸਰ : ਵਿਸ਼ਵ ਪ੍ਰਸਿੱਧ ਸ਼੍ਰੀ ਲੰਗੂਰ ਮੇਲਾ ਅੱਜ ਐਤਵਾਰ ਨੂੰ ਜੈ ਸ਼੍ਰੀ ਰਾਮ ਅਤੇ ਜੈ ਸ਼੍ਰੀ ਹਨੂੰਮਾਨ ਦੇ ਜੈਕਾਰਿਆਂ ਨਾਲ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਗਿਆ ਹੈ ਸਿਰ ’ਤੇ ਟੋਪੀ ਵਾਲਾ ਲਾਲ ਤੇ ਚਾਂਦੀ ਦਾ ਚੋਲਾ, ਹੱਥ ’ਚ ਸੋਟੀ ਫੜੀ, ਪੈਰਾਂ ’ਚ ਘੁੰਗਰੂ ਬੰਨ੍ਹ ਕੇ ਅਤੇ ਢੋਲ ਦੀ ਧੁਨ ’ਤੇ ਝੂਲਦੇ ਲੰਗੂਰਾਂ ਦੇ ਬਣੇ ਬੱਚੇ ਸਭ ਦੀ ਖਿੱਚ ਦਾ ਕੇਂਦਰ ਬਣੇ। ਇਹ ਅਦਭੁਤ ਧਾਰਮਿਕ ਨਜ਼ਾਰਾ ਪੂਰੀ ਦੁਨੀਆ ‘ਚ ਸ਼੍ਰੀ ਦੁਰਗਿਆਣਾ ਤੀਰਥ ਕੰਪਲੈਕਸ ਸਥਿਤ ਅਸਥਾਨ ਸ਼੍ਰੀ ਵੱਡਾ ਹਨੂੰਮਾਨ ਮੰਦਰ ‘ਚ ਸ਼ਾਰਦੀਯ ਨਵਰਾਤਰੀ ਦੇ ਪਹਿਲੇ ਦਿਨ ਹੋਣ ਵਾਲੇ ਸ਼੍ਰੀ ਲੰਗੂਰ ਮੇਲੇ ‘ਚ ਹੀ ਦੇਖਣ ਨੂੰ ਮਿਲਦਾ ਹੈ। ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਕਿ ਜੋ ਵੀ ਇਸ ਚਮਤਕਾਰੀ ਮੰਦਰ ‘ਚ ਆ ਕੇ ਪੁੱਤਰ ਦੀ ਇੱਛਾ ਰੱਖਦਾ ਹੈ, ਉਸ ਦੀ ਇੱਛਾ ਪੂਰੀ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ। ਹਰ ਸਾਲ ਜੋੜੇ ਆਪਣੀਆਂ ਮਨੋਕਾਮਨਾਵਾਂ ਦੀ ਪੂਰਤੀ ‘ਤੇ ਇਸ ਮੰਦਰ ‘ਚ ਆਉਂਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਬੱਚਿਆਂ ਨੂੰ ਲਾਲ ਅਤੇ ਚਾਂਦੀ ਦੇ ਚੋਲਿਆਂ ‘ਚ ਲੰਗੂਰਾਂ ਦੇ ਰੂਪ ‘ਚ ਸਜਾਉਂਦੇ ਹਨ।

    ਹਨੂੰਮਾਨ ਮੰਦਿਰ ਵਿਖੇ ਹਰ ਸਾਲ ਲੱਗਣ ਵਾਲਾ ਵਿਸ਼ਵ ਪ੍ਰਸਿੱਧ ਲੰਗੂਰ ਮੇਲਾ ਪਹਿਲੇ ਨਰਾਤੇ ਉਤੇ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਗਿਆ ਹੈ। ਇਸ ਮੇਲੇ ਵਿੱਚ ਨਵਜੰਮੇ ਬੱਚਿਆਂ ਤੋਂ ਲੈ ਕੇ ਨੌਜਵਾਨ ਤੱਕ ਲੰਗੂਰ ਬਣਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਪੂਰੇ ਦਸ ਦਿਨ ਬ੍ਰਹਮਚਾਰੀ ਵਰਤ ਰੱਖਣ ਦੇ ਨਾਲ-ਨਾਲ ਪੂਰਾ ਸਾਤਵਿਕ ਜੀਵਨ ਬਤੀਤ ਕਰਦੇ ਹਨ। ਇਹ 10 ਦਿਨਾਂ ਵਰਤ ਦੁਸਹਿਰੇ ਵਾਲੇ ਦਿਨ ਸਮਾਪਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ। ਇਸ ਦੌਰਾਨ ਵੱਡੀ ਗਿਣਤੀ ਵਿੱਚ ਸ਼ਰਧਾਲੂ ਸਵੇਰ ਤੋਂ ਹੀ ਹਨੁਮਾਨ ਮੰਦਿਰ ਵਿੱਚ ਮੱਥਾ ਟੇਕਣ ਵਾਸਤੇ ਪਹੁੰਚੇ ਹੋਏ ਹਨ। ਮੰਦਿਰ ਦੇ ਵਿੱਚ ਵੱਡੀਆਂ ਵੱਡੀਆਂ ਸ਼ਰਧਾਲੂਆਂ ਦੀਆਂ ਲਾਈਨਾਂ ਦੇਖਣ ਨੂੰ ਮਿਲ ਰਹੀਆਂ ਹਨ। ਸ਼ਰਧਾਲੂ ਦਾ ਕਹਿਣਾ ਹੈ ਕਿ ਉਹ ਸਵੇਰੇ 4 ਵਜੇ ਤੋਂ ਹੀ ਲਾਈਨਾਂ ਵਿੱਚ ਮੱਥਾ ਟੇਕਣ ਵਾਸਤੇ ਲੱਗੇ ਹੋਏ ਸਨ ਅਤੇ ਤਿੰਨ ਘੰਟੇ ਬਾਅਦ ਉਹਨਾਂ ਨੇ ਦਰਸ਼ਨ ਕੀਤੇ ਹਨ।

    ਜਿਕਰਯੋਗ ਹੈ ਕਿ ਇਸ ਮੰਦਰ ਸਬੰਧੀ ਇਹ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਕਿ ਇਸ ਮੰਦਰ ‘ਚ ਸਥਾਪਿਤ ਸ਼੍ਰੀ ਹਨੂੰਮਾਨ ਜੀ ਦੀ ਮੂਰਤੀ ਇੱਥੇ ਆਪਣੇ ਆਪ ਪ੍ਰਗਟ ਹੋਈ ਸੀ। ਜਦੋਂ ਸ਼੍ਰੀ ਰਾਮ ਨੇ ਇੱਕ ਧੋਬੀ ਦੇ ਵਿਅੰਗ ‘ਤੇ ਸੀਤਾ ਮਾਤਾ ਨੂੰ ਬਨਵਾਸ ਲਈ ਭੇਜਿਆ ਸੀ। ਇਸ ਲਈ ਉਸਨੇ ਉਸ ਸਮੇਂ ਮਹਾਰਿਸ਼ੀ ਵਾਲਮੀਕਿ ਦੇ ਆਸ਼ਰਮ ਵਿੱਚ ਸ਼ਰਨ ਲਈ ਅਤੇ ਉੱਥੇ ਆਪਣੇ ਦੋ ਪੁੱਤਰਾਂ ਲਵ ਅਤੇ ਕੁਸ਼ ਨੂੰ ਜਨਮ ਦਿੱਤਾ। ਇਸ ਦੌਰਾਨ ਸ਼੍ਰੀ ਰਾਮ ਨੇ ਅਸ਼ਵਮੇਧ ਯੱਗ ਕੀਤਾ ਅਤੇ ਸੰਸਾਰ ਨੂੰ ਜਿੱਤਣ ਲਈ ਆਪਣਾ ਘੋੜਾ ਛੱਡ ਦਿੱਤਾ। ਜਿਸ ਨੂੰ ਲਵ ਤੇ ਕੁਸ਼ ਨੇ ਇਸ ਸਥਾਨ ‘ਤੇ ਫੜ ਕੇ ਬੋਹੜ ਦੇ ਦਰੱਖਤ ਨਾਲ ਬੰਨ੍ਹ ਦਿੱਤਾ ਸੀ। ਇਸ ‘ਤੇ ਜਦੋਂ ਸ਼੍ਰੀ ਹਨੂੰਮਾਨ ਘੋੜੇ ਨੂੰ ਲਵ ਤੇ ਕੁਸ਼ ਤੋਂ ਛੁਡਾਉਣ ਲਈ ਪਹੁੰਚੇ। ਤਾਂ ਲਵ ਤੇ ਕੁਸ਼ ਦੋਵਾਂ ਨੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਬੰਦੀ ਬਣਾ ਲਿਆ ਤੇ ਹਨੂੰਮਾਨ ਨੂੰ ਇਸ ਸਥਾਨ ‘ਤੇ ਬਿਠਾਇਆ। ਉਦੋਂ ਤੋਂ ਸ਼੍ਰੀ ਹਨੂੰਮਾਨ ਜੀ ਦੀ ਮੂਰਤੀ ਇੱਥੇ ਪ੍ਰਗਟ ਹੋਈ ਹੈ।