चंडीगढ़: हरियाणा विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान कर्मचारियों के हितों में बड़ा कदम उठाते हुए सरकार ने हरियाणा लिपिकीय सेवा (भर्ती और सेवा की शर्तें) विधेयक, 2026’ पारित किया। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा प्रस्तुत किया गया विधेयक सदन द्वारा पारित किया गया।
सदन में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि यह विधेयक चतुर्थ श्रेणी (ग्रुप-डी) कर्मचारियों के लिए पदोन्नति प्रक्रिया को अधिक सरल, तेज और न्यायसंगत बनाएगा। वर्ष 2018 में हरियाणा ग्रुप डी कर्मचारी (भर्ती तथा सेवा की शर्तें) अधिनियम, 2018 के माध्यम से ग्रुप डी के लिए कॉमन कैडर व्यवस्था लागू की गई थी, जिससे फील्ड कैडर के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को पदोन्नति के समान अवसर मिलने लगे।

पहले सीमित पदों के कारण बहुत कम कर्मचारियों को ही पदोन्नति का अवसर मिल पाता था। साथ ही, केवल अपने-अपने विभागों तक सीमित पदोन्नति के अवसर होने के कारण भी कर्मचारियों की प्रगति बाधित होती थी। विधेयक के अंतर्गत अब चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की लिपिक पद पर पदोन्नति का कोटा 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 30 प्रतिशत कर दिया गया है, जिससे अधिक संख्या में कर्मचारी पदोन्नत हो सकेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व में कई विभागों में कर्मचारियों को पदोन्नति के लिए 10 से 15 वर्षों तक प्रतीक्षा करनी पड़ती थी। उन्होंने कहा कि कॉमन कैडर व्यवस्था, बढ़े हुए पदोन्नति कोटा और कम सेवा अवधि के कारण अब पदोन्नति प्रक्रिया अधिक तेज होगी और अधिक संख्या में कर्मचारियों को समयबद्ध अवसर मिल सकेंगे।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विश्वास व्यक्त किया कि यह विधेयक कर्मचारियों के हितों की रक्षा करते हुए प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाएगा। यदि विपक्ष इस महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा के दौरान सदन में उपस्थित होता, तो राज्य के कर्मचारियों के हित में एक व्यापक सहमति बन सकती थी, तथापि सरकार कर्मचारियों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है।







सर्वेक्षण के दौरान विद्यार्थियों ने लगभग 140 परिवारों (households) से घर-घर जाकर प्रत्यक्ष संवाद स्थापित किया और उनके सामाजिक-आर्थिक जीवन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी एकत्रित की। इस डेटा संग्रहण में परिवार संरचना, शिक्षा स्तर, रोजगार एवं आय के स्रोत, कृषि गतिविधियां, आवास की स्थिति तथा मूलभूत सुविधाओं—जैसे स्वच्छ पेयजल, बिजली, शौचालय, एलपीजी गैस और इंटरनेट—की उपलब्धता का विश्लेषण किया गया।
इसके अतिरिक्त स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, आयुष्मान भारत जैसी स्वास्थ्य योजनाओं की स्थिति तथा मनरेगा, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री आवास योजना, जनधन योजना और सार्वजनिक वितरण प्रणाली जैसी सरकारी योजनाओं के लाभों की पहुंच का भी आकलन किया गया।
सर्वेक्षण के दौरान विद्यार्थियों ने डेटा संग्रहण में आने वाली चुनौतियों को भी अपने प्राध्यापकों के साथ साझा किया। उन्होंने बताया कि कई स्थानों पर लोगों ने प्रारंभ में जानकारी देने में झिझक दिखाई तथा कुछ परिवारों ने निजी जानकारी साझा करने में संकोच किया। इसके अलावा दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंच, समय की कमी, भाषा व संचार से जुड़ी कठिनाइयां तथा अधूरी या अस्पष्ट जानकारी जैसी समस्याएं भी सामने आईं। हालांकि, प्राध्यापकों के मार्गदर्शन और टीमवर्क के माध्यम से विद्यार्थियों ने इन चुनौतियों का सफलतापूर्वक समाधान किया और सर्वेक्षण को पूर्ण किया।
सर्वेक्षण के निष्कर्षों में यह सामने आया कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के सीमित अवसर, स्वास्थ्य एवं शिक्षा सेवाओं तक सीमित पहुंच तथा बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसी चुनौतियां अब भी मौजूद हैं। वहीं कुछ क्षेत्रों में पर्यटन एवं सहायक गतिविधियों के माध्यम से आय के नए अवसर विकसित होने की संभावनाएं भी देखी गईं। प्राचार्य डॉ. मीता शर्मा ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के फील्ड सर्वे विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करते हैं और उनके शोध कौशल को सुदृढ़ बनाते हैं। यह पहल विद्यार्थियों के समग्र विकास के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति को उजागर करने में भी सहायक सिद्ध होगी।





