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  • Punjab News : 4 ग्लॉक पिस्टल और 7 मैगजीन सहित 2 गिरफ्तार, देखें वीडियो

    Punjab News : 4 ग्लॉक पिस्टल और 7 मैगजीन सहित 2 गिरफ्तार, देखें वीडियो

    अमृतसर : देहात के थाना राजा सांसी की पुलिस ने अवैध हथियारो के साथ 2 युवको को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान हरमन सिंह पुत्र गुरदेव सिंह और सुखदेव सिंह पुत्र बलदेव सिंह वासी गांव झंजोटी के रूप मे हुई है।

    इस संबंध में जानकारी देते हुए जांच अधिकारी दिलबाग सिंह ने बताया कि पुलिस को सूचना मिली थी कि कुछ युवक नाजायज असला लेकर इलाके में घूम रहे हैं। सूचना मिलते ही पुलिस ने नाकाबंदी कर संदिग्ध उक्त युवकों को रोका। तलाशी के दौरान उनके कब्जे में से 4 ग्लॉक पिस्टल और 7 मैगजीन और 9 जिंदा कारतूस बरामद बरमाद हुए है।

    पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उन्हें माननीय अदालत में पेश किया। अदालत ने आरोपियों को पुलिस रिमांड पर भेज दिया है ताकि आरोपियों से पूछताछ की जा सके। पुलिस आरोपियों से जानने की कोशिश कर रही है कि नाजायज असला कहां से लाया गया था। असला किसे सप्लाई किया जाना था और इसके पीछे कौन सा गिरोह या नेटवर्क सक्रिय है। पुलिस आरोपियों को पुनः अदालत में पेश कर रिमांड बढ़ाने की मांग की जाएगी ताकि इस मामले से जुड़े अन्य लोगों तक भी पहुंचा जा सके।

  • राज्यपाल ने ‘चलो हिमाचल’ अभियान का पोस्टर जारी किया

    राज्यपाल ने ‘चलो हिमाचल’ अभियान का पोस्टर जारी किया

    शिमला: गोविंद सागर एडवेंचर एंड वाटर स्पोर्ट्स एसोसिएशन के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज लोकभवन में राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता से शिष्टाचार भेंट की। इस मौके पर राज्यपाल ने एसोसिएशन के ‘चलो हिमाचल’ अभियान का पोस्टर जारी किया। इस अभियान का उद्देश्य हिमाचल प्रदेश के प्रमुख जलाशयों एवं झीलों में साहसिक पर्यटन और जल क्रीड़ा गतिविधियों को प्रोत्साहित करना है।

    इस अवसर पर राज्यपाल ने एसोसिएशन के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश को साहसिक पर्यटन और ईको-टूरिज्म के प्रमुख गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में यह एक सराहनीय पहल है। उन्होंने कहा कि पर्यटन प्रदेश की अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख आधार है और राज्य की प्राकृतिक सुंदरता तथा साहसिक पर्यटन की अपार संभावनाओं को प्रभावी ढंग से प्रदर्शित करने वाली ऐसी पहल अधिक से अधिक पर्यटकों को आकर्षित करने के साथ-साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर भी सृजित करेंगी।

    प्रदेश के पर्यटन क्षेत्र को सुदृढ़ बनाने और हिमाचल प्रदेश को देश-विदेश के पर्यटकों के पसंदीदा पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने के लिए सभी हितधारकों को मिलकर कार्य करना चाहिए।
    इस अवसर पर एसोसिएशन के संस्थापक सदस्य ईशान अख्तर ने राज्यपाल को ‘चलो बिलासपुर, चलो हिमाचल’ अभियान की विस्तृत जानकारी दी।

    एसोसिएशन का बिलासपुर जिले की गोविंद सागर झील और कोल डैम, कांगड़ा जिले के पौंग डैम तथा चंबा जिले के चमेरा डैम में विभिन्न साहसिक खेल गतिविधियों के आयोजन का प्रस्ताव है।
    उन्होंने कहा कि प्रस्तावित आयोजनों में वाटर स्पोर्ट्स चैंपियनशिप, पैराग्लाइडिंग प्रतियोगिताएं, कार एवं मोटरसाइकिल रेसिंग चौंपियनशिप तथा बिलासपुर से भाखड़ा बांध में लगभग 50 किलोमीटर की अंतरराष्ट्रीय ओपन वाटर स्विमिंग चौंपियनशिप शामिल है।

    इन आयोजनों से हिमाचल प्रदेश को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान मिलेगी तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। इस अवसर पर एसोसिएशन के संस्थापक सदस्य ईशान अख्तर तथा कार्यकारी सदस्य बिलाल अहमद शाह ने राज्यपाल को सम्मानित किया। एसोसिएशन के अध्यक्ष सराज अख्तर, हेमराज ठाकुर, अधिवक्ता इमरान खान, पवन शर्मा सहित एसोसिएशन के अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य इस अवसर पर उपस्थित थे।

  • मशरूम उत्पादन इकाई स्थापित करने के लिए किसान ले सकते हैं 80 हजार रुपये तक की सब्सिडी: Mohinder Bhagat

    मशरूम उत्पादन इकाई स्थापित करने के लिए किसान ले सकते हैं 80 हजार रुपये तक की सब्सिडी: Mohinder Bhagat

    चंडीगढ़: मुख्यमंत्री स. भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार किसानों को पारंपरिक खेती से बागवानी की ओर प्रेरित करने और उनकी आय बढ़ाने के लिए बड़ी सहृदयता से काम कर रही है। इस उद्देश्य के तहत बागवानी विभाग, पंजाब द्वारा स्टेट प्लान स्कीम के अंतर्गत किसानों को मशरूम उत्पादन इकाई स्थापित करने के लिए 80 हजार रुपये तक की सब्सिडी दी जा रही है।

    इस संबंध में जानकारी देते हुए बागवानी मंत्री मोहिंदर भगत ने बताया कि किसान लगभग 2 लाख रुपये की लागत से एक छोटी मशरूम उत्पादन इकाई स्थापित कर सकते हैं, जिस पर बागवानी विभाग द्वारा 40 प्रतिशत सब्सिडी, अधिकतम 80 हजार रुपये तक दी जाती है। उन्होंने कहा कि मशरूम की खेती कम जमीन और पानी के बहुत कम उपयोग से की जा सकती है। उन्होंने कहा कि कम लागत वाली इस काश्तकारी से अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है।

    एक छोटी मशरूम इकाई लगभग 1800 वर्ग फुट क्षेत्र में स्थापित की जा सकती है, इसलिए छोटे किसान भी इस योजना का लाभ ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार बागवानी क्षेत्र को और अधिक बढ़ावा देने और किसानों की आय में वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।

    सब्सिडी लेने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी देते हुए मंत्री ने कहा कि इस योजना का लाभ लेने के इच्छुक किसान अपने नजदीकी जिला बागवानी अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा किसानों को मशरूम उत्पादन संबंधी तकनीकी सलाह, प्रशिक्षण और हर संभव जानकारी भी उपलब्ध करवाई जा रही है।

     

  • पंचकूला जोन के बिजली उपभोक्ताओं की शिकायतों का होगा त्वरित समाधान, 6, 13, 20 और 27 जुलाई को आयोजित होंगी विशेष बैठकें

    पंचकूला जोन के बिजली उपभोक्ताओं की शिकायतों का होगा त्वरित समाधान, 6, 13, 20 और 27 जुलाई को आयोजित होंगी विशेष बैठकें

    चंडीगढ़: उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम उपभोक्ताओं को विश्वसनीय, अच्छी वोल्टेज और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। ‘पूर्ण उपभोक्ता संतुष्टि’ के लक्ष्य के तहत बिजली निगम द्वारा उपभोक्ताओं की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए अनेक महत्वाकांक्षी कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में जुलाई 2026 के दौरान पंचकूला जोन के उपभोक्ता शिकायत निवारण मंच की कार्यवाही का शेड्यूल जारी कर दिया गया है।

    उक्त जानकारी देते हुए बिजली निगम के एक प्रवक्ता ने बताया कि 6, 13, 20 और 27 जुलाई को सुबह 11:30 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक यू.एच.बी.वी.एन. मुख्यालय, विद्युत सदन, इंडस्ट्रियल प्लॉट नंबर 3 और 4, सेक्टर-14, पंचकूला में पंचकूला जोन के कुरुक्षेत्र अंबाला, पंचकूला, कैथल और यमुनानगर के उपभोक्ताओं की समस्याओं का समाधान किया जाएगा।

    शिकायत निवारण मंच रेगुलेशन के 2.8.2 के अनुसार प्रत्येक मामले में 1 लाख रुपये से अधिक और 3 लाख रुपये तक की राशि के वित्तीय विवादों से संबंधित शिकायतों की सुनवाई करेगा। पंचकूला जोन के अंतर्गत आने वाले जिलों के उपभोक्ताओं के गलत बिलों, बिजली की दरों से सम्बंधित मामलों, मीटर सिक्योरिटी से जुड़े मामलों, ख़राब हुए मीटरों से सम्बंधित मामलों, वोल्टेज से जुड़े हुए मामलों का निस्तारण किया जाएगा। इस दौरान बिजली चोरी, बिजली के दुरुपयोग और घातक गैर-घातक दुर्घटना आदि मामलों पर विचार नहीं किया जाएगा।

  • मुख्य सचिव ने आपदा तैयारियों में जनभागीदारी, तकनीक और समन्वय को और मजबूत बनाने पर बल दिया

    मुख्य सचिव ने आपदा तैयारियों में जनभागीदारी, तकनीक और समन्वय को और मजबूत बनाने पर बल दिया

    शिमला: मुख्य सचिव कमलेश कुमार पंत ने कहा कि आपदा प्रबंधन केवल आपदा आने पर की जाने वाली प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि एक सतत प्रक्रिया है, जिसके लिए सभी संबंधित विभागों, संस्थाओं और समुदायों के बीच प्रभावी समन्वय आवश्यक है। उन्होंने कहा कि संस्थागत व्यवस्थाओं को और मजबूत बनाने, जनभागीदारी बढ़ाने तथा आधुनिक तकनीक के अधिकाधिक उपयोग से ही हिमाचल प्रदेश को आपदा के प्रति अधिक सक्षम और सुरक्षित बनाया जा सकता है।

    मुख्य सचिव आज यहां राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) तथा हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एचपीएसडीएमए) द्वारा आयोजित पोस्ट डिजास्टर रिव्यू सेमिनार की अध्यक्षता कर रहे थे। हिमाचल प्रदेश अपनी भौगोलिक परिस्थितियों, दुर्गम पर्वतीय क्षेत्र तथा संवेदनशील हिमालयी पारिस्थितिकी के कारण बादल फटने, बाढ़, भूस्खलन तथा जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न अन्य आपदाओं के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हैं। बीते वर्षों में विशेषकर मानसून के दौरान आई प्राकृतिक आपदाओं से राज्य की आपदा प्रबंधन प्रणाली की क्षमताओं और चुनौतियों का पता चला है।

    हाल के वर्षों में विभिन्न आपदाओं के दौरान राज्य सरकार के विभागों, सशस्त्र बलों, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल, पुलिस, अग्निशमन सेवाओं, जिला प्रशासन, पंचायती राज संस्थाओं, स्वयंसेवकों तथा स्थानीय समुदायों के समन्वित प्रयासों से जनहानि को कम करने में सफलता मिली है। प्रत्येक आपदा भविष्य की तैयारियों को और बेहतर बनाने का अवसर भी प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि पूर्व में आई आपदाओं की समीक्षा से संचालन संबंधी कमियों की पहचान करने, संस्थागत क्षमता का आकलन करने तथा मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) को और प्रभावी बनाने में सहायता मिलती है।

    आपदाओं के दौरान सड़क संपर्क बाधित होना, संचार व्यवस्था प्रभावित होना, दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंचने में कठिनाई, प्रतिकूल मौसम, संसाधनों की उपलब्धता तथा वास्तविक समय में सूचना प्राप्त करने जैसी चुनौतियां सामने आईं। ऐसे में विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और तकनीक आधारित त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली विकसित करना आवश्यक है। मुख्य सचिव ने कहा कि यह सेमिनार इन चुनौतियों का विश्लेषण करने, श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों का रिकॉर्ड रखने तथा भविष्य में आपदा प्रबंधन को अधिक प्रभावी, समन्वित और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में महत्त्वपूर्ण मंच है।

    आपदा प्रबंधन में समुदाय की भूमिका पर विशेष बल देते हुए कहा कि किसी भी आपदा के समय स्थानीय लोग ही सबसे पहले राहत एवं बचाव कार्य शुरू करते हैं। इसलिए जागरूकता कार्यक्रमों, क्षमता निर्माण तथा स्वयंसेवी नेटवर्क के माध्यम से समुदायों को सशक्त बनाना अत्यंत आवश्यक है। आपदा रक्षक योजना’ का उल्लेख करते हुए कहा कि इस पहल का उद्देश्य प्रशिक्षित सामुदायिक स्वयंसेवकों का ऐसा नेटवर्क तैयार करना है, जो पेशेवर राहत दलों के पहुंचने तक आपदा प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल सहायता प्रदान कर सके। उन्होंने कहा कि ये स्वयंसेवक खोज एवं बचाव, प्राथमिक उपचार, सुरक्षित निकासी तथा कमजोर वर्गों की सहायता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

    मुख्य सचिव ने संसाधन मानचित्रण (रिसोर्स मैपिंग) के महत्व पर बल देते हुए कहा कि जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण स्तर पर उपलब्ध मानव संसाधन, मशीनरी, चिकित्सा सुविधाओं, राहत शिविरों, आपातकालीन उपकरणों, परिवहन साधनों तथा संचार व्यवस्था का अद्यतन विवरण हर समय उपलब्ध रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) के साथ एकीकृत यह व्यवस्था आपदा के समय संसाधनों के प्रभावी उपयोग और त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करेगी।

    हिमाचल प्रदेश में आपदा प्रबंधन प्रणाली को मजबूत बनाने में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा दिए जा रहे तकनीकी सहयोग और मार्गदर्शन की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि सेमिनार से प्राप्त सुझाव राज्य की संस्थागत तैयारियों को और सुदृढ़ करेंगे तथा हिमाचल प्रदेश को अधिक सुरक्षित एवं आपदा-सक्षम बनाने में सहायक सिद्ध होंगे। इस अवसर पर एनडीएमए के सदस्य एवं विभागाध्यक्ष कृष्णा एस. वत्सा ने वर्ष 2023 और 2025 की आपदाओं के दौरान हिमाचल प्रदेश सरकार की तैयारियों और प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में एसडीआरएफ ने सक्रिय और प्रभावी भूमिका निभाई है तथा भविष्य में त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता और आपदा न्यूनीकरण के लिए राज्य की क्षमता को और सुदृढ़ करने की आवश्यकता है।

    एनडीएमए, एसडीएमए, एनडीआरएफ, सशस्त्र बलों, अर्द्धसैनिक बलों, विभिन्न विभागों तथा जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने सेमिनार में भाग लिया और अपने अनुभव साझा किए तथा आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं आपदा पूर्व तैयारियों को और सुदृढ़ बनाने के संबंध में सुझाव प्रस्तुत किए। एसडीएमए के उपाध्यक्ष दीपक राठौर, एनडीएमए की सदस्य रीता मिसल तथा निदेशक-सह-विशेष सचिव (राजस्व एवं आपदा प्रबंधन) डॉ. पुष्पेंद्र राणा भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

  • Punjab News : Uzbekistan के साथ व्यापार के अवसर तलाशने की खाद्य आयोग ने की शुरुआत

    Punjab News : Uzbekistan के साथ व्यापार के अवसर तलाशने की खाद्य आयोग ने की शुरुआत

    चेयरमैन बाल मुकंद शर्मा ने उभरते बाजार के लिए एग्री-टेक को प्रमुख निर्यात स्तंभ के रूप में प्राथमिकता दी

    चंडीगढ़ : पंजाब राज्य खाद्य आयोग द्वारा मैग्सीपा में इन्वेस्ट पंजाब, पंजाब एग्रो और पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना के सहयोग से पंजाब और उज्बेकिस्तान गणराज्य के बीच व्यापार और व्यावसायिक अवसरों की खोज के लिए एक व्यापक विचार-विमर्श किया गया। बैठक के दौरान यह पता चला कि उज्बेकिस्तान सरकार वहां निवेश चाहती है। हालांकि, पंजाब के उत्पादों की उज्बेक बाजार में अनुकूलता को परखने के लिए स्थानीय बाजार का विस्तृत सर्वेक्षण करना पहला और महत्वपूर्ण कदम होगा। खाद्य क्षेत्र को उज्बेकिस्तान में पंजाब के लिए एक निश्चित प्रारंभिक मंच के रूप में पहचाना गया। 15,000 से अधिक भारतीय छात्रों और दुनिया के चौथे सबसे बड़े सोने के उत्पादक होने के साथ-साथ एल्यूमीनियम जैसी दुर्लभ धातुओं से समृद्ध होने के कारण, उज्बेकिस्तान के पास पंजाब के साथ दीर्घकालिक आर्थिक सहयोग बनाए रखने की क्षमता है। पंजाब राज्य खाद्य आयोग के चेयरमैन बाल मुकंद शर्मा ने बासमती चावल, कृषि मशीनरी, ट्रैक्टर, मसाले, सरसों का तेल, पाम तेल, देसी घी, चाय पत्ती, स्किम्ड मिल्क पाउडर, ड्रिप सिंचाई, जल संसाधन, नवीकरणीय ऊर्जा और सबसे महत्वपूर्ण मार्कफेड एवं मिल्कफेड के प्रोसेस्ड फूड के निर्यात की संभावना पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रोसेस्ड फूड का निर्यात रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, क्योंकि उज्बेकिस्तान के पास कच्चे माल की पर्याप्त मात्रा मौजूद है, लेकिन कोल्ड स्टोरेज की सुविधाएं सीमित हैं। बैठक के दौरान पंजाब से निर्यात किए जाने वाले माल के डिस्चार्ज पोर्ट के बारे में भी विस्तार से चर्चा की गई। ताशकंद से वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से जुड़े ए.आई. विशेषज्ञ, उज्बेकिस्तान के वीजा निवासी और ए.के.ए.सी.ओ.आर.पी ग्लोबल टेक के जनरल डायरेक्टर योगेश कुमार ने कहा कि मध्य एशियाई बाजार पंजाब के लिए एक नई और आशाजनक सीमा है। उन्होंने आगे कहा कि उज्बेकिस्तान में डिजिटल क्रांति भी तेजी से जोर पकड़ रही है।
  • हरियाणा विजन-2047: किसानों की आय बढ़ाने के लिए आधुनिक और टिकाऊ कृषि पर सरकार का फोकस

    हरियाणा विजन-2047: किसानों की आय बढ़ाने के लिए आधुनिक और टिकाऊ कृषि पर सरकार का फोकस

    चंडीगढ़: हरियाणा को विजन-2047 के अनुरूप कृषि क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाने और किसानों की आय बढ़ाने के लक्ष्य को लेकर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शुक्रवार को हरियाणा सिविल सचिवालय में कृषि विभाग के आगामी पांच वर्षों के रोडमैप एवं कार्ययोजना की समीक्षा की। बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि खेती को आधुनिक तकनीकों से जोड़कर, लागत कम कर और बेहतर बाजार उपलब्ध कराकर किसानों की आमदनी बढ़ाई जाए।

    मुख्यमंत्री ने विभाग से संबंधित मुख्यमंत्री घोषणाओं, बजट घोषणाओं और संकल्प पत्र में शामिल कार्यों की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि विजन-2047 के लक्ष्यों को तय समय सीमा में धरातल पर उतारा जाए, ताकि हर किसान तक योजनाओं का लाभ पहुंचे और कृषि अधिक लाभकारी बन सके।

    बैठक के दौरान मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री विजयेंद्र कुमार, भविष्य विभाग की प्रधान सचिव अमनीत पी कुमार, कृषि विभाग के महानिदेशक राजनारायण कौशिक, मुख्यमंत्री के ओएसडी व स्वर्ण जयंती हरियाणा राजकोषीय प्रबंधन संस्थान के महानिदेशक डॉ. राज नेहरू, मुख्यमंत्री के ओएसडी वीरेन्द्र बढ़खालसा सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।

    बैठक में सेम प्रभावित भूमि को सेम मुक्त बनाने के अभियान की समीक्षा भी की गई। अधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष 1.40 लाख एकड़ भूमि को सेम मुक्त करने का लक्ष्य लेकर कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि भविष्य में कहीं भी इस प्रकार की समस्या उत्पन्न न हो, इसके लिए अभी से वैज्ञानिक योजना तैयार की जाए तथा सैटेलाइट के माध्यम से नियमित निगरानी की व्यवस्था विकसित की जाए।

    स्वायल हेल्थ कार्ड योजना की समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में 15 लाख स्वायल हेल्थ कार्ड जारी करने का लक्ष्य रखा गया है। पहले चरण में 3.75 लाख मिट्टी के नमूने लिए जाने हैं, जिनमें से अब तक 50,620 नमूने एकत्र किए जा चुके हैं। शेष लक्ष्य जुलाई तक पूरा किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इस अभियान में स्कूलों के विद्यार्थियों, कॉलेज के छात्रों और ग्रामीण युवाओं को स्वयंसेवक के रूप में जोड़ा जाए, ताकि वे मिट्टी परीक्षण की प्रक्रिया को समझ सकें और कृषि के प्रति उनकी रुचि भी बढ़े।

    जिन जिलों में यूरिया की खपत अधिक है, वहां मिट्टी परीक्षण की रिपोर्ट का विश्लेषण कर यह पता लगाया जाए कि वास्तव में नाइट्रोजन की कमी है या किसान आवश्यकता से अधिक यूरिया का उपयोग कर रहे हैं। इसके आधार पर किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के प्रति जागरूक करने की रणनीति तैयार की जाए।

    बैठक में प्राकृतिक खेती और जैविक (ऑर्गेनिक) खेती को बढ़ावा देने पर भी विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि 10 जिलों में प्राकृतिक और जैविक उत्पादों की बिक्री के लिए विशेष व्यवस्था की जा रही है। हिसार और गुरुग्राम में अलग मंडियां स्थापित की जाएंगी, जबकि अन्य आठ मंडियों में इनके लिए अलग स्थान निर्धारित किया जाएगा। किसानों की फसलों के प्रमाणीकरण की व्यवस्था को भी और मजबूत करने पर चर्चा हुई।

    मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्राकृतिक और जैविक खेती से तैयार फसलों की खरीद के लिए मंडियों में अलग रजिस्टर की व्यवस्था की जाए तथा हैफेड के माध्यम से इनके मार्केटिंग, बेच और खरीद की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाए।

    बैठक में डीएसआर (डायरेक्ट सीडेड राइस) तकनीक को बढ़ावा देने, किसानों को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि का व्यापक प्रचार-प्रसार करने और अधिक से अधिक किसानों को इस तकनीक से जोड़ने पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने पराली जलाने की घटनाओं को जागरूकता और आधुनिक मशीनों के उपयोग के माध्यम से शून्य करने का लक्ष्य तय करते हुए विशेष रूप से पंजाब सीमा से लगे जिलों में रीपर सहित अन्य आवश्यक कृषि मशीनरी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

    फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए ‘मेरा पानी-मेरी विरासत’ योजना और ड्रिप सिंचाई को लेकर भी रणनीति पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कपास उत्पादक क्षेत्रों में आधुनिक चुगाई मशीनों के उपयोग को बढ़ावा देने तथा किसानों को नई तकनीकों की जानकारी देने के लिए अगस्त माह में हिसार में विशेष कृषि मेले का आयोजन करने के निर्देश दिए।

    हरियाणा विजन-2047 का लक्ष्य केवल कृषि उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि किसानों की आय बढ़ाना और खेती को भविष्य के अनुरूप बनाना है।इसके लिए किसानों को दलहन, बागवानी और अन्य लाभकारी फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाए, प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जाए और आधुनिक तकनीकों को खेत तक पहुंचाया जाए, ताकि प्रदेश का किसान आर्थिक रूप से और अधिक समृद्ध बन सके।

     

  • खड्ड में 12 दिवसीय फास्ट फूड कुकिंग प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू

    खड्ड में 12 दिवसीय फास्ट फूड कुकिंग प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू

    ऊना, सुशील पंडित: विकासखंड हरोली की ग्राम पंचायत खड्ड में शुक्रवार को 12 दिवसीय फास्ट फूड कुकिंग प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि एवं जिले के मुख्य अग्रणी जिला प्रबंधक विजय सिंह ने  किया। विजय सिंह ने प्रतिभागियों को भविष्य में स्वरोजगार स्थापित करने के लिए आवश्यकता पड़ने पर बैंक ऋण उपलब्ध कराने में हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया। उन्होंने आत्मनिर्भरता के महत्व पर बल देते हुए युवाओं से प्रशिक्षण के माध्यम से अपने कौशल को विकसित करने का आह्वान किया।
    इस अवसर पर पंजाब नेशनल बैंक स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी), ऊना के निदेशक सुधीर कुमार शर्मा ने प्रतिभागियों से प्रशिक्षण का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि फास्ट फूड बनाने का प्रशिक्षण के साथ साथ प्रतिभागियों को स्वरोजगार स्थापित करने, उद्यमिता विकास, बैंकिंग प्रक्रियाओं तथा सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की भी जानकारी दी जाएगी, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।
    निदेशक सुधीर कुमार शर्मा ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को निःशुल्क भोजन, अध्ययन सामग्री, प्रशिक्षण ड्रेस तथा प्रशिक्षण पूर्ण होने पर सरकारी मान्यता प्राप्त प्रमाण-पत्र प्रदान किया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण में अधिकतम 35 प्रतिभागियों को शामिल किया जा सकता है तथा अधिक से अधिक पात्र एवं इच्छुक लोगों से इसका लाभ उठाने की अपील की। कार्यक्रम में वित्तीय सलाहकार राज डोगरा, जिला परिषद सदस्य इंदुबाला, ग्राम पंचायत प्रधान उर्मिला देवी, उपप्रधान अमित कुमार तथा संस्थान की संकाय सदस्य रजनी भी उपस्थित रहीं।
  • Haryana Vision 2047: किसानों की आय बढ़ाने के लिए आधुनिक और टिकाऊ कृषि पर सरकार का फोकस, मुख्यमंत्री ने कृषि विभाग के 5 वर्षीय रोडमैप की समीक्षा की

    Haryana Vision 2047: किसानों की आय बढ़ाने के लिए आधुनिक और टिकाऊ कृषि पर सरकार का फोकस, मुख्यमंत्री ने कृषि विभाग के 5 वर्षीय रोडमैप की समीक्षा की

    चंडीगढ़: हरियाणा को विजन-2047 के अनुरूप कृषि क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाने और किसानों की आय बढ़ाने के लक्ष्य को लेकर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शुक्रवार को हरियाणा सिविल सचिवालय में कृषि विभाग के आगामी पांच वर्षों के रोडमैप एवं कार्ययोजना की समीक्षा की। बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि खेती को आधुनिक तकनीकों से जोड़कर, लागत कम कर और बेहतर बाजार उपलब्ध कराकर किसानों की आमदनी बढ़ाई जाए।

    मुख्यमंत्री ने विभाग से संबंधित मुख्यमंत्री घोषणाओं, बजट घोषणाओं और संकल्प पत्र में शामिल कार्यों की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि विजन-2047 के लक्ष्यों को तय समय सीमा में धरातल पर उतारा जाए, ताकि हर किसान तक योजनाओं का लाभ पहुंचे और कृषि अधिक लाभकारी बन सके।

    बैठक के दौरान मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विजयेंद्र कुमार, भविष्य विभाग की प्रधान सचिव अमनीत पी कुमार, कृषि विभाग के महानिदेशक राजनारायण कौशिक, मुख्यमंत्री के ओएसडी व स्वर्ण जयंती हरियाणा राजकोषीय प्रबंधन संस्थान के महानिदेशक डॉ. राज नेहरू, मुख्यमंत्री के ओएसडी श्री वीरेन्द्र बढ़खालसा सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।

    बैठक में सेम प्रभावित भूमि को सेम मुक्त बनाने के अभियान की समीक्षा भी की गई। अधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष 1.40 लाख एकड़ भूमि को सेम मुक्त करने का लक्ष्य लेकर कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि भविष्य में कहीं भी इस प्रकार की समस्या उत्पन्न न हो, इसके लिए अभी से वैज्ञानिक योजना तैयार की जाए तथा सैटेलाइट के माध्यम से नियमित निगरानी की व्यवस्था विकसित की जाए।

    स्वायल हेल्थ कार्ड योजना की समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में 15 लाख स्वायल हेल्थ कार्ड जारी करने का लक्ष्य रखा गया है। पहले चरण में 3.75 लाख मिट्टी के नमूने लिए जाने हैं, जिनमें से अब तक 50,620 नमूने एकत्र किए जा चुके हैं। शेष लक्ष्य जुलाई तक पूरा किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इस अभियान में स्कूलों के विद्यार्थियों, कॉलेज के छात्रों और ग्रामीण युवाओं को स्वयंसेवक के रूप में जोड़ा जाए, ताकि वे मिट्टी परीक्षण की प्रक्रिया को समझ सकें और कृषि के प्रति उनकी रुचि भी बढ़े।

    मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जिन जिलों में यूरिया की खपत अधिक है, वहां मिट्टी परीक्षण की रिपोर्ट का विश्लेषण कर यह पता लगाया जाए कि वास्तव में नाइट्रोजन की कमी है या किसान आवश्यकता से अधिक यूरिया का उपयोग कर रहे हैं। इसके आधार पर किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के प्रति जागरूक करने की रणनीति तैयार की जाए।

    बैठक में प्राकृतिक खेती और जैविक (ऑर्गेनिक) खेती को बढ़ावा देने पर भी विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि 10 जिलों में प्राकृतिक और जैविक उत्पादों की बिक्री के लिए विशेष व्यवस्था की जा रही है। हिसार और गुरुग्राम में अलग मंडियां स्थापित की जाएंगी, जबकि अन्य आठ मंडियों में इनके लिए अलग स्थान निर्धारित किया जाएगा। किसानों की फसलों के प्रमाणीकरण की व्यवस्था को भी और मजबूत करने पर चर्चा हुई।

    मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्राकृतिक और जैविक खेती से तैयार फसलों की खरीद के लिए मंडियों में अलग रजिस्टर की व्यवस्था की जाए तथा हैफेड के माध्यम से इनके मार्केटिंग, बेच और खरीद की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाए।

    बैठक में डीएसआर (डायरेक्ट सीडेड राइस) तकनीक को बढ़ावा देने, किसानों को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि का व्यापक प्रचार-प्रसार करने और अधिक से अधिक किसानों को इस तकनीक से जोड़ने पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने पराली जलाने की घटनाओं को जागरूकता और आधुनिक मशीनों के उपयोग के माध्यम से शून्य करने का लक्ष्य तय करते हुए विशेष रूप से पंजाब सीमा से लगे जिलों में रीपर सहित अन्य आवश्यक कृषि मशीनरी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

    फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए ‘मेरा पानी-मेरी विरासत’ योजना और ड्रिप सिंचाई को लेकर भी रणनीति पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कपास उत्पादक क्षेत्रों में आधुनिक चुगाई मशीनों के उपयोग को बढ़ावा देने तथा किसानों को नई तकनीकों की जानकारी देने के लिए अगस्त माह में हिसार में विशेष कृषि मेले का आयोजन करने के निर्देश दिए।

    हरियाणा विजन-2047 का लक्ष्य केवल कृषि उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि किसानों की आय बढ़ाना और खेती को भविष्य के अनुरूप बनाना है।इसके लिए किसानों को दलहन, बागवानी और अन्य लाभकारी फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाए, प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जाए और आधुनिक तकनीकों को खेत तक पहुंचाया जाए, ताकि प्रदेश का किसान आर्थिक रूप से और अधिक समृद्ध बन सके।

  • स्वास्थ्य विभाग का बड़ा फैसला, सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में गर्भवती महिलाओं की “मुफ्त ओरल हेल्थ स्क्रीनिंग” की जाएगी : Aarti Singh Rao

    स्वास्थ्य विभाग का बड़ा फैसला, सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में गर्भवती महिलाओं की “मुफ्त ओरल हेल्थ स्क्रीनिंग” की जाएगी : Aarti Singh Rao

    चंडीगढ़: हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने प्रदेश के सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों को गर्भवती महिलाओं की “मुफ्त ओरल हेल्थ स्क्रीनिंग” करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि मातृ स्वास्थ्य देखभाल को और अधिक मजबूत और व्यापक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राज्य के सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) और ई-पीएमएसएमए (ePMSMA) दिवसों पर आने वाली हर गर्भवती महिला के लिए ओरल (मौखिक/दांतों की) स्वास्थ्य जांच को अनिवार्य कर दिया है।

    स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि ‘मुस्कान से मातृत्व तक’ नाम की इस अनूठी पहल का मुख्य उद्देश्य गर्भावस्था के दौरान होने वाली दांतों और मसूड़ों की समस्याओं का समय रहते पता लगाना और उनका उचित इलाज करना है, ताकि मां और नवजात शिशु दोनों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाया जा सके। स्वास्थ्य विभाग ने सभी गर्भवती महिलाओं और उनके परिवारों से इस पहल में सक्रिय रूप से भाग लेने की अपील की है ताकि हर मां और बच्चे का भविष्य सुरक्षित और स्वस्थ हो सके।

    आरती सिंह राव ने इसे सरकार का ऐतिहासिक निर्णय बताया और कहा कि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के शरीर में कई तरह के हार्मोनल और शारीरिक बदलाव होते हैं। इन बदलावों के कारण मसूड़ों की बीमारी (जिंजिवाइटिस) और दांतों में सड़न जैसी मौखिक स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा काफी बढ़ जाता है।

    स्वास्थ्य मंत्री ने सचेत करते हुए कहा कि गर्भावस्था के दौरान ओरल हेल्थ का ध्यान न रखने या इसमें लापरवाही बरतने से समय से पहले प्रसव (प्रीटर्म बर्थ) और जन्म के समय बच्चे का वजन कम होने जैसे गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। ऐसे में नियमित ओरल चेक-अप से इन समस्याओं की शुरुआती चरण में ही पहचान हो जाती है, जिससे सही समय पर इलाज और परामर्श देना आसान हो जाता है। उन्होंने सभी भावी माताओं से अपील की कि वे हर महीने की 9, 10, 23 तारीख और महीने के आखिरी वर्किंग डे (कार्य दिवस) पर सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में मिलने वाली इस मुफ्त ओरल हेल्थ स्क्रीनिंग सेवा का लाभ जरूर उठाएं।

    राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM), हरियाणा के मिशन डायरेक्टर डॉ. आर. एस. ढिल्लों ने इस पहल के जमीनी क्रियान्वयन के बारे में बताया कि इस अभियान के तहत प्रसव पूर्व क्लीनिक (एंटीनेटल क्लीनिक) में आने वाली सभी गर्भवती महिलाओं की बुनियादी ओरल हेल्थ स्क्रीनिंग प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा की जाएगी। यदि किसी महिला को दांतों के विशेष इलाज की आवश्यकता होगी, तो उसे आगे की जांच और उपचार के लिए नजदीकी सरकारी दंत चिकित्सा केंद्र में रेफर किया जाएगा।

    डॉ. ढिल्लों ने कहा कि इस व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए राज्य के सभी सिविल सर्जनों को कड़े निर्देश जारी किए जा चुके हैं ताकि प्रसव पूर्व देखभाल करने वाली टीमों और डेंटल टीमों के बीच बेहतर तालमेल बना रहे और लाभार्थियों को बिना किसी परेशानी के स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। इसके साथ ही, स्वास्थ्य कर्मी गर्भवती महिलाओं को ओरल हाइजीन बनाए रखने, ब्रश करने के सही तरीकों, पौष्टिक आहार और गर्भावस्था के दौरान समय पर दांतों के इलाज के महत्व के बारे में भी जागरूक करेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि डॉक्टरी देखरेख में गर्भावस्था के दौरान दांतों की सामान्य जांच और इलाज पूरी तरह से सुरक्षित है।