लुधियानाः जिले के थाना सलेम टाबरी के अंतर्गत आते इलाके में इंसानियत शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। जहां प्रॉपर्टी को लेकर खून सफेद हो गए। दरअसल, प्रॉपर्टी को लेकर कोर्ट में केस चल रहा है। लेकिन इस केस के दौरान आज परिवार में खूनी झड़प हो गई। इस दौरान उस समय माहौल तनावपूर्ण हो गया, जब भाई-भाई संपत्ति को लेकर एक-दूसरे के सामने खून के प्यासे हो गए। दोनों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए। पहले पक्ष का कहना है कि उसने मेहनत की कमाई से जगह खरीदी है, लेकिन भाई ने पैसों की लालच में आकर संपत्ति पर कब्ज़ा कर लिया। आरोप है कि उसने कई बार मुजे मारवाने की कोशिश भी की। इस मामले को लेकर कोर्ट में केस चल रहा है।
आरोप है कि कुछ दिनों पहले मेरे घर पर आकर मारपीट की गई। वहीं दूसरे पक्ष का कहना है कि निस्संदेह जो जमीन मेरे भाई ने खरीदी थी, उस पर मैं ही काम कर रहा था और मामले के कोर्ट में होने के बावजूद मेरे भाई ने मेरे साथ मारपीट की और जान लेने की कोशिश की। अब दोनों पक्ष इंसाफ की मांग कर रहे हैं। इस हमले में मां भी घायल हो गई। सोनू कुमार ने कहा कि छोटे भाई के साथ झगड़ा हुआ है। छोटे भाई की 6 महीने पहले ही शादी हुई थी। पीड़ित का कहना है कि भाई की यह दूसरी शादी है और शादी के बाद वह विवाद करने लगा। सोनू ने माना की जिम की जगह नाम भाई के है और जिम को चला वहीं रहा है। जगह को 2021 में खरीदा थी। इस हादसे में दोनों पक्षों के लोग घायल हुए है। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया। इस दौरान दोनों पक्षों ने पुलिस से इंसाफ की गुहार लगाई है।










सर्वेक्षण के दौरान विद्यार्थियों ने लगभग 140 परिवारों (households) से घर-घर जाकर प्रत्यक्ष संवाद स्थापित किया और उनके सामाजिक-आर्थिक जीवन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी एकत्रित की। इस डेटा संग्रहण में परिवार संरचना, शिक्षा स्तर, रोजगार एवं आय के स्रोत, कृषि गतिविधियां, आवास की स्थिति तथा मूलभूत सुविधाओं—जैसे स्वच्छ पेयजल, बिजली, शौचालय, एलपीजी गैस और इंटरनेट—की उपलब्धता का विश्लेषण किया गया।
इसके अतिरिक्त स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, आयुष्मान भारत जैसी स्वास्थ्य योजनाओं की स्थिति तथा मनरेगा, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री आवास योजना, जनधन योजना और सार्वजनिक वितरण प्रणाली जैसी सरकारी योजनाओं के लाभों की पहुंच का भी आकलन किया गया।
सर्वेक्षण के दौरान विद्यार्थियों ने डेटा संग्रहण में आने वाली चुनौतियों को भी अपने प्राध्यापकों के साथ साझा किया। उन्होंने बताया कि कई स्थानों पर लोगों ने प्रारंभ में जानकारी देने में झिझक दिखाई तथा कुछ परिवारों ने निजी जानकारी साझा करने में संकोच किया। इसके अलावा दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंच, समय की कमी, भाषा व संचार से जुड़ी कठिनाइयां तथा अधूरी या अस्पष्ट जानकारी जैसी समस्याएं भी सामने आईं। हालांकि, प्राध्यापकों के मार्गदर्शन और टीमवर्क के माध्यम से विद्यार्थियों ने इन चुनौतियों का सफलतापूर्वक समाधान किया और सर्वेक्षण को पूर्ण किया।
सर्वेक्षण के निष्कर्षों में यह सामने आया कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के सीमित अवसर, स्वास्थ्य एवं शिक्षा सेवाओं तक सीमित पहुंच तथा बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसी चुनौतियां अब भी मौजूद हैं। वहीं कुछ क्षेत्रों में पर्यटन एवं सहायक गतिविधियों के माध्यम से आय के नए अवसर विकसित होने की संभावनाएं भी देखी गईं। प्राचार्य डॉ. मीता शर्मा ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के फील्ड सर्वे विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करते हैं और उनके शोध कौशल को सुदृढ़ बनाते हैं। यह पहल विद्यार्थियों के समग्र विकास के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति को उजागर करने में भी सहायक सिद्ध होगी।




