Home Himachal>Una दिल्ली के जंतर-मंतर पर युवाओं पर लाठीचार्ज दुर्भाग्यपूर्ण, गलत पर आंदोलन करना विपक्ष का लोकतांत्रिक अधिकार: विवेक शर्मा

दिल्ली के जंतर-मंतर पर युवाओं पर लाठीचार्ज दुर्भाग्यपूर्ण, गलत पर आंदोलन करना विपक्ष का लोकतांत्रिक अधिकार: विवेक शर्मा

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दिल्ली के जंतर-मंतर पर युवाओं पर लाठीचार्ज दुर्भाग्यपूर्ण, गलत पर आंदोलन करना विपक्ष का लोकतांत्रिक अधिकार: विवेक शर्मा

दिल्ली में पेपर लीक के मामले में प्रदर्शन कर रहे युवाओं खासकर बेटियों पर पुलिस का लाठीचार्ज बेहद शर्मनाक

ऊना,सुशील पंडित: कुटलैहड़ क्षेत्र के विधायक विवेक शर्मा ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर पेपर लीक मामले को लेकर प्रदर्शन कर रहे युवाओं और विद्यार्थियों पर पुलिस द्वारा किए गए कथित लाठीचार्ज की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि देश के लाखों युवा अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं और रोजगार तथा पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया की मांग कर रहे हैं।

ऐसे में पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दे पर आंदोलन करना विपक्ष का लोकतांत्रिक अधिकार है तथा देश के लाखों युवाओं का इस आंदोलन को समर्थन देना भी स्वाभाविक और जायज़ है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अपनी बात शांतिपूर्ण ढंग से रखने का अधिकार प्रत्येक नागरिक को संविधान ने दिया है, इसलिए आंदोलनों को बलपूर्वक दबाने की बजाय संवाद के माध्यम से समाधान तलाशना चाहिए। विधायक ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान खासकर छात्राओं और बेटियों पर पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि घायल अवस्था में कई छात्राएं पुलिस अधिकारियों से सवाल कर रही थीं कि यदि वे उनकी अपनी बेटियां होतीं, तो क्या तब भी उनके साथ ऐसा ही व्यवहार किया जाता।

विधायक ने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं पूरे देश को झकझोरने वाली हैं और इससे युवाओं का लोकतांत्रिक व्यवस्था पर विश्वास कमजोर होता है। उन्होंने कहा कि अपनी बात रखने आए विद्यार्थियों के साथ संवेदन शील व्यवहार होना चाहिए था, न कि बल प्रयोग। विधायक विवेक शर्मा ने केंद्र सरकार पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि एक ओर सरकार “बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ” का नारा देकर महिलाओं के सम्मान और शिक्षा की बात करती है, वहीं दूसरी ओर आंदोलन कर रही बेटियों पर पुलिस लाठीचार्ज करती है।

उन्होंने कहा कि पेपर लीक मामले में प्रदर्शन कारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। उनका कहना था कि युवाओं की मांगों को सुनने और निष्पक्ष जांच कराने के बजाय बल प्रयोग करना उचित नहीं कहा जा सकता। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह युवाओं की भावनाओं को समझे और भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए।

 

 

 

 

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