Home Himachal>Una हटली में शिव महापुराण कथा के पंचम दिवस पर भगवान शंकर के स्वरूपों का हुआ दिव्य वर्णन

हटली में शिव महापुराण कथा के पंचम दिवस पर भगवान शंकर के स्वरूपों का हुआ दिव्य वर्णन

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हटली में शिव महापुराण कथा के पंचम दिवस पर भगवान शंकर के स्वरूपों का हुआ दिव्य वर्णन

कथा व्यास तरुण डोगरा ने बेलपत्र, रुद्राक्ष व विभूति के महत्व पर डाला प्रकाश, शिव कथा को बताया पापों से मुक्ति दिलाने वाली

ऊना/सुशील पंडित: उपमंडल बंगाणा के अंतर्गत श्री राम नाटक क्लब हटली में चल रही पावन शिव महापुराण कथा के पंचम दिवस पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कथा स्थल पर भक्तों ने श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ भगवान शिव का स्मरण करते हुए कथा श्रवण किया। इस अवसर पर कथा व्यास आचार्य तरुण डोगरा ने भगवान शंकर के विभिन्न स्वरूपों का विस्तार से वर्णन करते हुए उपस्थित श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान किया।

कथा के पंचम दिवस पर आचार्य ने कहा कि भगवान शंकर की कथा अत्यंत मंगलदायिनी है। उन्होंने बताया कि शिव महापुराण का श्रवण करने से मनुष्य के जीवन में आने वाले कष्ट दूर होते हैं और व्यक्ति को मानसिक शांति की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव की कथा सभी प्रकार के पापों से मुक्ति दिलाने वाली है तथा जो व्यक्ति सच्चे मन से शिव कथा का श्रवण करता है, उसका जीवन पवित्र और सफल बन जाता है। आचार्य  तरुण डोगरा ने अपने प्रवचन में भगवान शंकर के स्वयंभू स्वरूपों का भी वर्णन किया।

उन्होंने बताया कि भगवान शंकर के स्वयंभू प्रतिष्ठित चर बिंदु और गुरु लिंग का विशेष महत्व होता है। इन का श्रद्धा और विश्वास के साथ पूजन करने से जीव को मुक्ति के मार्ग में प्रवेश करने का अवसर प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि गुरु लिंग का पूजन आत्मा को शुद्ध करने वाला और मोक्ष के मार्ग को प्रशस्त करने वाला माना गया है,कथा के दौरान आचार्य  तरुण डोगरा ने तीर्थों का भी महत्व बताया। उन्होंने कहा कि तीर्थ स्थान केवल जल या भूमि का नाम नहीं होता, बल्कि वहां की पवित्रता, श्रद्धा और आस्था ही उसे तीर्थ बनाती है। उन्होंने श्रद्धालुओं को बताया कि तीर्थों में जाकर स्नान, पूजा और दान करने से मनुष्य के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं और मन को शांति मिलती है।

इस अवसर पर भगवान शंकर को अर्पित की जाने वाली पवित्र वस्तुओं का भी विस्तार से वर्णन किया गया। आचार्य ने कहा कि भगवान शिव को चढ़ाए जाने वाले बेलपत्र का अत्यंत विशेष महत्व है। बेलपत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है और श्रद्धा से अर्पित किया गया एक बेलपत्र भी भक्त के सभी कष्टों को दूर करने में सहायक होता है। उन्होंने कहा कि बेलपत्र अर्पित करते समय शुद्ध मन और सच्चे भाव का होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने रुद्राक्ष के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रुद्राक्ष भगवान शिव के आंसुओं से उत्पन्न माना गया है और इसे धारण करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। रुद्राक्ष धारण करने से मन की एकाग्रता बढ़ती है और नकारात्मक विचारों से मुक्ति मिलती है। उन्होंने बताया कि रुद्राक्ष केवल एक आभूषण नहीं बल्कि एक आध्यात्मिक साधन है, जो साधक को आत्मिक उन्नति की ओर ले जाता है। इसके साथ ही विभूति के महत्व का भी वर्णन किया गया।  विभूति का तिलक लगाने से मनुष्य को यह स्मरण रहता है कि यह शरीर नश्वर है और अंततः मिट्टी में मिल जाना है।

विभूति व्यक्ति को अहंकार से दूर रहने और जीवन में सादगी अपनाने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि विभूति का प्रयोग आध्यात्मिक शक्ति और आत्मविश्वास को बढ़ाने वाला माना गया है।कथा व्यास ने भगवान शंकर के स्वरूप का वर्णन करते हुए मंगलाचरण के माध्यम से बताया कि भगवान शिव अनादि स्वरूप हैं। अर्थात भगवान शिव का न कोई आदि है, न मध्य और न ही अंत है। वे सदैव एक समान और शांत स्वरूप में विराजमान रहते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान सदाशिव हर परिस्थिति में परम शांति का स्वरूप धारण करते हैं और अपने भक्तों पर सदैव कृपा बनाए रखते हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में चाहे कितनी भी कठिन परिस्थितियां क्यों न आएं, यदि मनुष्य भगवान शिव का स्मरण करता है तो उसे हर समस्या से उबरने की शक्ति मिलती है।

उन्होंने कहा कि शिव भक्ति मनुष्य को धैर्य, संयम और सहन शीलता का पाठ पढ़ाती है और जीवन को सकारात्मक दिशा प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति शिव कथा का श्रवण करता है और भगवान शिव की भक्ति करता है, उसके जीवन में सदैव सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है। इस मौके पर महासचिव संजय सोनी मंच संचालक किशन दत्त शास्त्री कमल देव शास्त्री,किशन देव शर्मा,विवेक शील शर्मा,सुरेन्द्र राणा दिनेश खत्री अनिल बंटू बाबा सुमित सहगल बबीता साईं नीटू भाई ओम प्रकाश सोनी समर धीमान आदि सभी सदस्यों ने अपनी सेवाएं प्रदान की।

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