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सीजफायर डील के बाद भी बेस पर ड्रोन से हमला

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सीजफायर डील के बाद भी बेस पर ड्रोन से हमला

नई दिल्लीः अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर डील के बाद मिडिल ईस्ट में एक देश को छोड़कर बाकि जगह एक हद तक हिंसा रुक गई है, वह देश लेबनान है। जिसपर इजरायल ने 30 सालों में सबसे बड़ा हमला किया है। इजरायल ईरान के खिलाफ जंग रोकने पर तो सहमत हो गया है, लेकिन लेबनान में उसने तबाही मचा दी है। इजरायल का दावा है कि वह लेबनान में बसे हिज्बुल्लाह को निशाना बना रहा है। वहीं बताया जा रहा है कि अब कुवैत के बेस पर ड्रोन से हमला किया है। दरअसल, कुवैत ने आरोप लगाया है कि ईरान और उसके सहयोगी समूहों ने 2 सप्ताह के युद्धविराम के बावजूद वीरवार को ड्रोन हमले किए। वहीं, सऊदी अरब ने कहा कि हाल ही में हुए हमलों में उसकी एक अहम तेल पाइपलाइन को नुकसान पहुंचा है।

कुवैत के विदेश मंत्रालय ने सरकारी समाचार एजेंसी KUNA के जरिए जारी बयान में कहा कि वीरवार देर रात ड्रोन हमलों में “कुवैत की कुछ महत्वपूर्ण सुविधाओं” को निशाना बनाया गया। इस घटना ने अमेरिका और ईरान के बीच शनिवार को इस्लामाबाद में होने वाली प्रस्तावित वार्ता से पहले युद्धविराम पर दबाव बढ़ा दिया है। उधर, सऊदी प्रेस एजेंसी ने एक अज्ञात अधिकारी के हवाले से बताया कि हालिया हमले में देश की महत्वपूर्ण ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को नुकसान पहुंचा है। यह पाइपलाइन तेल को लाल सागर तक पहुंचाती है और होरमुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता कम करती है, जिस पर ईरान का नियंत्रण माना जाता है।

इस बीच, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गुरुवार को कहा कि उन्होंने लेबनान के साथ जल्द से जल्द सीधे वार्ता की अनुमति दे दी है। इस वार्ता का उद्देश्य ईरान समर्थित हिजबुल्लाह को निरस्त्र करना और दोनों देशों के बीच संबंध स्थापित करना है। हालांकि, नेतन्याहू ने यह भी स्पष्ट किया कि इजरायल और लेबनान के बीच कोई युद्धविराम नहीं है और उत्तरी इजरायल की सुरक्षा बहाल होने तक हिजबुल्लाह पर हमले जारी रहेंगे।

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