एजेंसी ने बताया कि पहले भूकंप का केंद्र शिमाने प्रांत के पूर्वी हिस्से में था और इसमें सुनामी का कोई खतरा नहीं है। चूगोकू इलेक्ट्रिक पावर शिमाने परमाणु ऊर्जा संयंत्र का संचालन करती है, जो भूकंप के केंद्र से लगभग 32 किलोमीटर (20 मील) दूर स्थित है। जापान की न्यूक्लियर रेगुलेशन अथॉरिटी ने कहा कि संयंत्र में किसी तरह की कोई अनियमितता नहीं पाई गई है। एक प्रवक्ता ने बताया कि बिजली कंपनी संयंत्र की यूनिट नंबर-2 पर पड़े किसी भी संभावित प्रभाव की जांच कर रही है, जो दिसंबर 2024 से चालू है। इस यूनिट को मार्च 2011 में फुकुशिमा में हुई आपदाओं के बाद बंद कर दिया गया था। जापान दुनिया के सबसे अधिक भूकंपीय रूप से सक्रिय क्षेत्रों में से एक है, जहां भूकंप आना आम बात है। जापान के शिंदो तीव्रता पैमाने पर इस भूकंप का असर पश्चिमी शहर यासुगी में ‘ऊपरी पांच’ दर्ज किया गया। इस स्तर पर भारी फर्नीचर गिर सकता है और गाड़ी चलाने वालों को अपनी गाड़ी पर नियंत्रण रखने में मुश्किल हो सकती है। जेएमए ने बताया कि इसके तुरंत बाद इसी क्षेत्र में 4.5, 5.1, 3.8 और 5.4 तीव्रता के कई छोटे झटके महसूस किए गए। राहत की बात कही कि सुनामी की चेतावनी नहीं दी गई। जापान प्रशांत महासागर के ‘रिंग ऑफ फायर’ के पास चार प्रमुख टेक्टोनिक प्लेटों पर स्थित है। इस वजह से जापान दुनिया के सबसे अधिक भूकं संवेदनशील देशों में से एक है। जापान में हर साल करीब 1,500 भूकंप आते हैं। इनमें से ज्यादातर हल्के होते हैं लेकिन कई बार ये बड़ा नुकसान करते हैं। भूकंप का असर तीव्रता के साथ-साथ उसकी गहराई और स्थान पर निर्भर करता है।6.2 तीव्रता से लगे भू*कंप के तेज झ*टकें नहीं जारी की गई थी चे*तावनी pic.twitter.com/pg5Td55tcI
— Encounter India (@Encounter_India) January 6, 2026