तभी अचानक एक भयानक कड़कड़ाहट के साथ मंडप के मुख्य पिलर मुड़ गए और कंक्रीट की भारी-भरकम छत सीधे भक्तों के ऊपर भरभराकर गिर गई। कंक्रीट के मलबे के नीचे दबने से लोगों को संभलने या भागने का एक पल भी मौका नहीं मिला। घटनास्थल पर मौजूद स्थानीय युवकों और ग्रामीणों ने तुरंत अपनी जान की परवाह न करते हुए राहत कार्य शुरू किया। मलबे के भारी ढेरों को हाथों से हटाने की कोशिशें की गईं, लेकिन पिलरों और भारी कंक्रीट स्लैब को हटाने के लिए भारी मशीनों की जरूरत महसूस हुई। यशवाड़ी गांव छत्रपति संभाजीनगर से करीब 190 किमी दूर मनवत रोड पर है। सूचना मिलते ही परभणी जिला प्रशासन, स्थानीय पुलिस बल और आपदा प्रबंधन की टीमें क्रेन, कटर और पोकलेन मशीनों के साथ यशवाड़ी गांव पहुंचीं। मलबे के नीचे दबे लोगों तक ऑक्सीजन पहुंचाने और उन्हें जल्द से जल्द बाहर निकालने के लिए राहत कार्य को युद्ध स्तर पर चलाया जा रहा है। पुलिस अधिकारी ने बताया, “मंदिर के ‘सभा-मंडप’ (बाहरी हॉल) का छत दोपहर करीब 3.30 बजे गिर गया। पुलिस और जिला प्रशासन ने अपनी टीमें भेज दी हैं और बचाव अभियान चल रहा है। अब तक मलबे के नीचे से करीब 25 लोगों को निकाला गया है।”View this post on Instagram