Home Mohali Punjab News: अवैध वीजे से UK पहुंचे 14 नागरिकों के मामले में SIT का गठन, AIG रीचा करेंगी जांच

Punjab News: अवैध वीजे से UK पहुंचे 14 नागरिकों के मामले में SIT का गठन, AIG रीचा करेंगी जांच

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Punjab News: अवैध वीजे से UK पहुंचे 14 नागरिकों के मामले में SIT का गठन, AIG रीचा करेंगी जांच

मोहालीः पंजाब के 14 भारतीय नागरिकों को बिना वैध वीजा के यूनाइटेड किंगडम (यूके) भेजने को लेकर मामला गरमा गया है। दरअसल, इन भारतीयों ने विदेश पहुंचकर शरण (असाइलम) की मांग की। हालांकि इस मामले को लेकर मोहाली स्थित पंजाब राज्य अपराध पुलिस मुख्यालय में एफआईआर दर्ज की गई थी। वहीं अब मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया। ऐसे में एएआईजी रीचा अग्निहोत्री को एसआईटी का मुख्य नियुक्त किया गया, जो मामले की गहनता से जांच करेंगी।

दरअसल, यह पूरा मामला उस समय सामने आया जब भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अधीन सब्सिडियरी इंटेलिजेंस ब्यूरो के ज्वाइंट डायरेक्टर ने 24 मार्च को पंजाब पुलिस को एक गोपनीय इनपुट भेजा गया। इस इनपुट में बताया गया कि पंजाब के रहने वाले 14 लोग जनवरी 2026 के दौरान अमृतसर स्थित श्री गुरु रामदास जी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से एयर इंडिया की फ्लाइट्स AI-169 और AI-117 के जरिए यूके रवाना हुए, जबकि उनके पास वैध वीजा नहीं था। इसके बावजूद वे सफलतापूर्वक विदेश पहुंच गए, जो गंभीर सुरक्षा चूक की ओर इशारा करता है।

जांच में सामने आया कि इन यात्रियों के टिकट अलग अलग ट्रैवल एजेंसियों के माध्यम से बुक किए गए थे, जिनमें लार्ड्स ट्रैवल प्राइवेट लिमिटेड (नई दिल्ली), ट्रैवल बुटीक ऑनलाइन (गुरुग्राम), साहिल टूर एंड ट्रैवल्स (पहाड़गंज, दिल्ली), रिया ट्रैवल्स एंड टूर (मुंबई) और फ्लाई24ऑवर्स हालिडे प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। इस नेटवर्क की कड़ियां तब और मजबूत होती नजर आईं जब यह सामने आया कि लुधियाना स्थित सरदारसंस ट्रैवल्स नामक एक एजेंट ने भी इस प्रक्रिया में भूमिका निभाई और उसने ट्रैवल बुटीक आनलाइन के जरिए दो यात्रियों के टिकट बुक करवाए।

पूरे मामले का सबसे अहम और चौंकाने वाला पहलू एक ही मोबाइल नंबर का बार बार इस्तेमाल है। जांच एजेंसियों के अनुसार, 14 में से 10 यात्रियों की टिकट बुकिंग के दौरान एक ही मोबाइल नंबर का उपयोग किया गया। इससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि यह कोई सामान्य यात्रा नहीं बल्कि एक संगठित नेटवर्क के तहत अंजाम दिया गया आपरेशन था। यही मोबाइल नंबर अब जांच का मुख्य सुराग बन गया है।

 

 

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