मृतकों में पाडवा (डूंगरपुर) निवासी पिंकी भाटिया (36), विनोद नरेश डामोर (30), मुकेश जीवाजी डिंडोर (34), 9 वर्षीय मासूम प्रीत हितेश भाटिया, महेंद्र कुमार भोगीलाल पंड्या (68), हरजिंगभाई वलजीभाई कटारा (30) और एक अज्ञात व्यक्ति शामिल हैं। रोजाना की तरह बस अपने निर्धारित समय पर बांसवाड़ा से रवाना हुई थी। सुबह करीब 4:00 बजे जब बस कोटंबी स्टेडियम के पास पहुंची, तब लगभग सभी मुसाफिर गहरी नींद में सो रहे थे। अचानक एक गगनभेदी आवाज के साथ बस हाईवे किनारे खड़े ट्रक में जा घुसी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बस का अगला हिस्सा मलबे के ढेर में बदल गया। आगे की सीटों पर बैठे यात्रियों को संभलने या चीखने तक का मौका नहीं मिला। घटना की सूचना मिलते ही जारोद पुलिस के साथ-साथ एनडीआरएफ की छठी बटालियन, एसडीआरएफ और वडोदरा फायर ब्रिगेड की टीमों को मौके पर बुलाना पड़ा। एनडीआरएफ के कमांडेंट सुरेंद्र सिंह ने बताया कि सुबह 4:40 बजे राहत कार्य शुरू किया गया। बस के केबिन और अगली सीटों में लोग बुरी तरह फंसे हुए थे। राहत कर्मियों ने आधुनिक गैस कटर मशीनों और क्रेन की मदद से बस की लोहे की बॉडी को काटकर अंदर फंसे यात्रियों को बाहर निकाला। करीब 24 लोगों को कड़ी मशक्कत के बाद सुरक्षित निकाला गया, जबकि मौके से 5 शव बरामद हुए। कुल मिलाकर इस हादसे ने 7 जिंदगियां लील लीं। हादसे में घायल हुए 27 यात्रियों को तुरंत वडोदरा के एसएसजी अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों के मुताबिक, एक घायल यात्री की हालत बेहद नाजुक है, जो आईसीयू में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहा है।