हादसे का सीसीटीवी फुटेज सामने आया है, इसमें दिख रहा है कि 7 जुलाई को सुबह 11 बजकर 15 मिनट पर सुरंग से तेज लहर के साथ आया मलबा एक टैंकर को तिनके की तरह बहाकर ले गया। दो लोग इसके मलबे में फंसे। पुलिस, एनडीआरएफ की टीम रेस्क्यू कर रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मलबा हटाने के लिए भारी मशीनों की जरूरत होगी। अधिकारियों के अनुसार, लगातार बारिश के कारण सोमवार से ही सुरंग कंस्ट्रक्शन का काम रोक दिया गया था। मलप्पुरम-वायनाड टनल प्रोजेक्ट के तहत मलप्पुरम को वायनाड से सुरंग (टनल) के जरिए जोड़ना है। टनल की लंबाई करीब लगभग 8.17 किमी है। इसकी लागत करीब ₹2,100–2,200 करोड़ है। दो साल पहले भी वायनाड में एक के बाद एक तीन भूस्खलन हुए थे, जिसमें 400 से ज्यादा जानें चली गई थीं। इस बीच, हादसे को लेकर केरल सरकार के मंत्रियों ने कोंकण रेलवे पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं। घटनास्थल के लिए रवाना होने से पहले राज्य के कृषि मंत्री टी सिद्दीकी ने कहा, “यह कोई प्राकृतिक भूस्खलन नहीं है, बल्कि एक ‘मैन-मेड’ (इंसान की गलती से हुआ) हादसा है। यह सीधे-सीधे लापरवाही का मामला है। जिला कलेक्टर ने पहले ही लिखित में कोंकण रेलवे को चेतावनी दी थी कि इस साइट पर भूस्खलन का भारी खतरा है, लेकिन उनकी तरफ से कोई कदम नहीं उठाया गया।”