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बड़ा प्रशासनिक फेरबदलः IAS सहित 72 अधिकारियों के हुए तबादलें

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बड़ा प्रशासनिक फेरबदलः IAS सहित 72 अधिकारियों के हुए तबादलें

नई दिल्लीः देश की राजधानी दिल्ली में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया। दरअसल, भाजपा की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की सरकार द्वारा 72 अधिकारियों के तबादलें किए गए हैं। जिसमें से 36 IAS सहित 72 सीनियर अधिकारियों के तबादलें शामिल है। इनमें से कई अधिकारियों को अन्य पद भी दिया गया है। वहीं, आईएएस अधिकारी संजीव आहूजा को सचिव (शिक्षा) नियुक्त किया गया है।

इस फेरबदल में 36 दानिक्स (दिल्ली, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह सिविल सेवा) अधिकारियों को भी शामिल किया गया है। संतोष डी. वैद्य (आईएएस, 1998) को प्रधान सचिव (गृह) नियुक्त किया गया है। वे वित्त, योजना और उद्योग विभागों का अतिरिक्त प्रभार भी संभालेंगे। वर्तमान में अतिरिक्त मुख्य सचिव (समाज कल्याण) का पदभार संभाल रहे बिपुल पाठक (आईएएस, 1992) को अनुसूचित जाति/जनजाति/पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।

दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डूसिब) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रुपेश कुमार ठाकुर (आईएएस, 2006) को सचिव (स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण) नियुक्त किया गया है। वे निखिल कुमार (आईएएस, 2002) का स्थान लेंगे, जिन्हें आयुक्त (व्यापार एवं कर) बनाया गया है। हाल ही में दिल्ली सरकार में शामिल हुए 2011 बैच के आईएएस अधिकारी संजीव आहूजा को सचिव (शिक्षा) नियुक्त किया गया है। वे उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा का अतिरिक्त प्रभार भी संभालेंगे। सरकार के इस फैसले को शिक्षा व्यवस्था में बेहतर समन्वय और नीतिगत कार्यों को गति देने की दिशा में अहम माना जा रहा है। संजीव आहूजा के पास प्रशासनिक अनुभव है और उनसे स्कूल, कॉलेज व तकनीकी संस्थानों से जुड़े सुधारात्मक कदमों को आगे बढ़ाने की उम्मीद की जा रही है।

1998 बैच के आईएएस अधिकारी संतोष डी. वैद्य को प्रधान सचिव (गृह) नियुक्त किया गया है। इस नई जिम्मेदारी के साथ उन्हें वित्त, योजना और उद्योग विभागों का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है, जिससे उनकी भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। वहीं, वर्तमान में अतिरिक्त मुख्य सचिव (समाज कल्याण) के पद पर कार्यरत 1992 बैच के आईएएस अधिकारी बिपुल पाठक को अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। इस प्रशासनिक फेरबदल को विभिन्न विभागों में नीतिगत कार्यों को तेज करने और बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

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