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BJP में शामिल हुए राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल

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BJP में शामिल हुए राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल
नई दिल्लीः भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल पहुंचे। जहां तीनों विधायक आप पार्टी छोड़ने के कुछ देर बाद भाजपा में शामिल हो गए। तीनों सांसदों ने दो-तिहाई भाजपा में विलय की घोषणा की। जहां भाजपा की लीडरशीप में मुंह मीठा करवाकर तीनों का पार्टी में शामिल होने पर स्वागत किया। आप पार्टी के भीतर 2 अप्रैल 2026 से शुरू हुआ सियासी तूफान 22 दिनों के भीतर बड़े राजनीतिक संकट में बदल गया। दरअसल, राज्यसभा में पार्टी के डिप्टी लीडर रहे राघव चड्ढा के साथ-साथ 7 सांसदों ने पार्टी छोड़ दी। पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल होने पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा, “मैं पहले भी कहता रहा हूं कि भाजपा की पंजाबियों से बनती नहीं है, जिससे पंजाबी खुश होते हैं, उसे यह खराब करने की कोशिश करती है। जब हमारी सरकार बनी तो हमारा आरडीएफ का पैसा रोका गया। “पार्टी बड़ी होती है, संगठन बड़ा होता है, व्यक्ति नहीं। ये छह-सात लोग जो गए हैं, वे पंजाबियों के साथ गद्दारी करके गए है। यहां बैठे-बैठे इन्हें पद मिल गए , इन्हें किसी से वोट मांगने की जरूरत नहीं पड़ी। अब ये अपनी राजनीतिक नहीं जान बचाने के लिए वहां गए हैं, लेकिन वहां भी इनका कुछ नहीं होना है। वहां भी इन्हें इस्तेमाल करके छोड़ दिया जाएगा। पहले देख लो कैप्टन साहब की बात कोई नहीं सुनता। सिंधिया का हाल भी सबके सामने है।”

सीएम ने कहा कि मैं ईडी वालों से कहता हूं कि भगवंत मान के घर पर छापा मारो। संजय सिंह के घर पर रेड की थी। क्या मिला है। आओ दम है तो भगवंत मान को खरीद कर दिखाओ। वह करेंसी अभी बनी नहीं, जिससे मान को खरीदा जा सके। थोड़ा दुख जरूर हुआ है। जब पार्टी बनाई थी, तब यह लोग अपने कामों में लगे थे। राघव चड्‌ढा को जल बोर्ड का चेयरमैन बनाया था। बिना वोट मांगे राज्यसभा मेंबर बनाया। हमारा संगठन एकजुट है। एक दो लोगों के जाने से पार्टी को कोई फर्क नहीं पड़ता है।

मान ने कहा कि भाजपा हमारी सरकार के कामों से डरे हुए हैं। इन्होंने जरूर सर्वे करवाया होगा, जिसमें उन्हें पता चला होगा कि उनकी स्थिति बिल्कुल मजबूत नहीं है। इसलिए हमारी पार्टी को तोड़ने की कोशिश की गई। पंजाबी दिल से प्यार करते हैं, लेकिन अगर कोई उनसे धोखा करता है, तो वे उसे पीढ़ियों तक याद रखते हैं।” मान ने कहा कि मैं सख्त शब्दों में इस चीज की निंदा करता हूं। अमित शाह को यह बात पसंद नहीं आई होगी कि भगवंत मान का कोई विकल्प नहीं है। रवनीत बिट्‌टू तीन-चार दिन पहले राघव चड्‌ढा को गालियां निकाल रहे थे। अब कैसे मिलेंगे।

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