Home National Sharad Purnima: आखिर क्यों इतनी खास होती है आज की रात, क्या हैं इस पर्व की मान्यताएं

Sharad Purnima: आखिर क्यों इतनी खास होती है आज की रात, क्या हैं इस पर्व की मान्यताएं

0
Sharad Purnima: आखिर क्यों इतनी खास होती है आज की रात, क्या हैं इस पर्व की मान्यताएं

नई दिल्लीः हिंदू धर्म पूर्णिमा और तीज, त्योहारों का विशेष महत्व होता है जिसे बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है। आश्विन मास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहते हैं। इसे कोजागरी पूर्णिमा या रास पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस दिन चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है और उसकी किरणों में अमृत का संचार होता है। सनातन धर्म में पूर्णिमा तिथि भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी को समर्पित है। आश्विन माह की पूर्णिमा तिथि को शरद पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। इस पर्व को साधक अधिक उत्साह के साथ मनाते हैं। साथ ही शुभ मुहूर्त में गंगा स्नान और दान करते हैं। इसके बाद विधिपूर्वक विष्णु जी की उपासना करते हैं।

धार्मिक मत है कि ऐसा करने से जातक को जीवन में शुभ फल मिलता है। साथ ही सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इसके अलावा कार्यों में आ रही रुकावट से छुटकारा मिलता है। इस दिन देवी महालक्ष्मी, चंद्रदेव और भगवान श्री कृष्ण का पूजन करने का भी विशेष महत्व है। पंचांग के अनुसार, आश्विन माह की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 16 अक्टूबर को रात्रि 08 बजकर 40 मिनट पर होगी। वहीं, इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 17 अक्टूबर को शाम को 04 बजकर 55 मिनट पर होगा। ऐसे में शरद पूर्णिमा का पर्व 16 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इस दिन चंद्रोदय शाम को 05 बजकर 05 मिनट पर होगा।

लेकिन ये बहुत कम लोग जानते हैं कि आखिर शरद पूर्णिमा क्यों मनाई जाती है और क्या होता है इसका महत्वा। तो चलिए जानते हैं इसके पीछे की वजह। हिंदू धर्म में मान्यता है कि हर गुण किसी न किसी कला से जुड़ा होता है। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को मनाई जाने वाली शरद पूर्णिमा का धार्मिक और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बहुत महत्व है, क्योंकि पूरे वर्ष में केवल इसी दिन चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से निपुण होता है और इससे निकलने वाली किरणें इस रात्रि में अमृत बरसाती हैं। अमृत बरसने के कारण ही शरद पूर्णिमा की रात्रि को दूध की खीर बनाकर चंद्रमा की रोशनी में रखी जाती है।

इस संबंध में माना जाता है कि इस रात खीर में चंद्रमा की किरणें पड़ने से यह अमृत समान गुणकारी और सेहत के लिए फायदेमंद हो जाती हैं। इस खीर को खाने से कई प्रकार के रोगों से मुक्ति मिलती है। मान्यता है कि, शरद पूर्णिमा की रात में प्रभु श्रीकृष्ण ने दिव्य प्रेम का अदभूत नृत्य किया था। उस समय प्रभु की बांसुरी के धुन पर गोपियां वृंदावन को छोड़कर जंगल चली गईं थी। वहां वे सभी श्रीकृष्ण के साथ नृत्य करती रहीं। शरद पूर्णिमा को कोजागरा पूर्णिमा कहा जाता है। इस अवसर पर कुछ जगहों पर उपवास रखने की भी परंपरा है। इस अवसर पर रखे जाने वाले व्रत को कोजागरा व्रत और कौमुदी व्रत भी कहा जाता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here