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केंद्रीय मंत्री को मिली जान से मारने की धमकी, बढ़ाई गई सुरक्षा

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केंद्रीय मंत्री को मिली जान से मारने की धमकी, बढ़ाई गई सुरक्षा

नई दिल्लीः केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी को शुक्रवार को जान से मारने की धमकी मिली है। बताया जा रहा है कि अनजान नंबर से उनके पर्सनल असिस्टेंट, विश्वेंद्र शाह को फोन और WhatsApp के जरिए जान से मारने की धमकी भरा फोन आया है। इस मामले को लेकर केंद्रिय मंत्री ने पुलिस में शिकायत दर्ज करा दी है। इसके बाद जयंत चौधरी की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई। धमकी देने वाले की पहचान पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद के इस्माइल के तौर पर हुई है। आरोप है कि उसके पास मंत्री के आधिकारिक दौरे के प्लान की एक कॉपी थी। दिल्ली पुलिस ने शिकायत दर्ज कर ली है और पश्चिम बंगाल पुलिस भी इस पूरे मामले की जांच कर रही है।

बताया ये भी जा रहा था है कि धमकी देने वाले ने 2-3 दिन तक जयंत चौधरी के घर की रेकी भी की थी। दिल्ली पुलिस ने एक बयान में बताया कि केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत चौधरी को जान से मारने की धमकी मिली है। पुलिस को उनकी टीम की ओर से एक शिकायत मिली है, जिसकी जांच की जा रही है। दिल्ली पुलिस के अनुसार, धमकी भरा यह कॉल एक भारतीय नंबर से आया था। इस बीच केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी के आवास के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

बता दें कि राष्ट्रीय लोक दल के प्रमुख जयंत चौधरी ने इस सप्ताह की शुरुआत में कहा था कि किसान, किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) के जरिए बेहतर बाजारों तक पहुंच बनाकर अपने कारोबार का विस्तार कर सकते हैं और आर्थिक रूप से मजबूत बनने के लिए उन्हें एक संगठित तरीके से काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सरकार ने किसानों को आसानी से कर्ज देने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड की सीमा बढ़ा दी है, लेकिन इन योजनाओं का पूरा फायदा तभी मिलेगा जब किसान जागरूक होंगे और समूहों में मिलकर काम करेंगे।

उत्तर प्रदेश में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, ‘किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनने के लिए एक संगठित तरीके से काम करने की जरूरत है और वे किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) के जरिए बेहतर बाजारों तक पहुंच बनाकर अपने कारोबार का विस्तार कर सकते हैं।’ चौधरी ने कहा कि किसान स्वभाव से ही जोखिम उठाने वाले होते हैं, क्योंकि वे खेती में हर मौसम में जोखिम उठाते हैं। उन्होंने कहा, ‘अगर किसानों की युवा पीढ़ी खेती के साथ-साथ कारोबार और प्रबंधन की समझ भी विकसित कर ले, तो गाँवों की हालत में काफी बदलाव आ सकता है।’

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