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Punjab News: Diesel-Petrol और खाद संकट को लेकर किसान नेता सरवन पंधेर ने केंद्र सरकार पर साधे निशाने, देखें वीडियो

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Punjab News: Diesel-Petrol और खाद संकट को लेकर किसान नेता सरवन पंधेर ने केंद्र सरकार पर साधे निशाने, देखें वीडियो

अमृतसरः किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री के हालिया बयानों पर कड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि डीजल, पेट्रोल और खाद के इस्तेमाल को कम करने के बारे में दिए जा रहे बयान असल में सरकार की असफल विदेश नीति को छिपाने की एक कोशिश है। सरकार “राष्ट्रीय हित” के नाम पर लोगों को भावनात्मक रूप से भड़का रही है, जबकि देश इस समय एक गंभीर आर्थिक और कृषि संकट का सामना कर रहा है।

पंधेर ने कहा कि पिछले 4 महीनों से डीजल, पेट्रोल और खाद को लेकर जो स्थिति बनी हुई है, वह सरकार की गलत नीतियों का नतीजा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत के पास रूस से सस्ता तेल और खाद हासिल करने का विकल्प मौजूद था, लेकिन अमेरिका के दबाव में आकर सरकार ने अलग फैसले लिए, जिसकी वजह से आज देश संकट में है। अगर सरकार ने इस संकट का पहले ही अनुमान लगा लिया था, तो देश में तेल और खाद का पर्याप्त भंडार क्यों नहीं बनाया गया?

पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि एक समय जब देश में अनाज की कमी थी, तब “जय जवान, जय किसान” का नारा दिया गया था और किसानों को अधिक उत्पादन के लिए खाद और दवाओं का इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया गया था। इनका इस्तेमाल कृषि विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में भी शामिल किया गया था। अब अगर केंद्र सरकार खाद के इस्तेमाल को कम करने की बात कर रही है, तो लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या पहले की नीति गलत थी, या फिर मौजूदा सरकार गलत दिशा में जा रही है।

उन्होंने कहा कि आने वाले समय में पेट्रोल, डीजल और खाद की कीमतें बढ़ सकती हैं, और सरकार लोगों को मानसिक रूप से तैयार करने के लिए अभी से “राष्ट्रीय हित” का भावनात्मक दांव खेल रही है। उन्होंने दावा किया कि सरकार की विदेश नीति और आर्थिक नियोजन की कमी के कारण महंगाई आम लोगों पर एक बड़ा बोझ बनने वाली है। किसान नेता ने कोविड-19 के दौरान लागू की गई नीतियों पर भी सवाल उठाए और कहा कि अब नए वायरसों के नाम पर फिर से पाबंदियां लगाने की तैयारी हो सकती है। उन्होंने लोगों से सतर्क रहने की अपील की और कहा कि सरकार के कई फैसले लोगों की मर्जी के बिना ही लागू कर दिए जाते हैं। उन्होंने साफ किया कि किसानों से धक्का बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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