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  • Jalandhar News: जिससे हुआ रिश्ता, उसी के परिवार ने करवाया किडनैपिंग का पर्चा दर्ज, पीड़ित लड़के का आरोप, देखें वीडियो

    Jalandhar News: जिससे हुआ रिश्ता, उसी के परिवार ने करवाया किडनैपिंग का पर्चा दर्ज, पीड़ित लड़के का आरोप, देखें वीडियो

    जालंधर: शहर के एक युवक और उसके परिवार ने युवती व उसके परिजनों पर विदेश जाने से रोकने की नीयत से झूठा मामला दर्ज कराने का आरोप लगाया है। युवक का कहना है कि दोनों परिवार आपस में रिश्तेदार हैं और लंबे समय से एक-दूसरे के घर आना-जाना रहा है। परिवारों की सहमति से कुछ रिश्तेदारों की मौजूदगी में उसका और लड़की का रिश्ता तय किया गया था। उनके अनुसार फरवरी 2026 के अंत में उन्होंने बेटी को बताया था कि वह वर्क परमिट पर विदेश जाने की तैयारी कर रहा है और 22 मार्च को उसका मेडिकल निर्धारित है।

    आरोप है कि यह जानकारी मिलने के बाद युवती का व्यवहार बदल गया और उसने उस पर दबाव बनाना शुरू कर दिया कि उसे भी साथ विदेश ले जाया जाए तथा उसके दस्तावेज तैयार करवाए जाएं, जहां लड़के का कहना है कि जब उसने ऐसा करना संभव नहीं बताया तो उसे कथित तौर पर झूठे मामले में फंसाने की धमकियां दी गईं। युवक ने बताया कि 11 मार्च को उसे मुस्कान के क्लासमेड सितिश ने फोन करके बुलाया कि उसकी बाइक खराब हो गई है और वह सितिश को स्कूल छोड़ने के लिए गया था।

    इसके बाद वह 12 मार्च की सुबह वह अपने भाई के साथ सितिश को स्कूल छोड़ने गया। लड़के का आरोप है कि स्कूल पहुंचने पर लड़की स्वयं कार में आकर बैठ गई और निजी बातचीत के लिए कुछ देर घूमने की बात कही। युवक का दावा है कि बाद में उसे सुरक्षित रूप से स्कूल के बाहर छोड़ दिया गया, जहां से वह परीक्षा देने चली गई। लड़के और उसके परिवार का आरोप है कि उन्हें विदेश जाने से रोकने के उद्देश्य से सुनियोजित तरीके से झूठे आरोप लगाकर मामला दर्ज कराया गया है।

     

  • जनगणना-2026 के सफल आयोजन में निभाएं अपनी सक्रिय भूमिका

    जनगणना-2026 के सफल आयोजन में निभाएं अपनी सक्रिय भूमिका

    ऊना सुशील पंडित : उपायुक्त ऊना जतिन लाल ने जिला के सभी नागरिकों से जनगणना-2026 के प्रथम चरण में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जनगणना किसी भी राज्य और देश के समग्र एवं संतुलित विकास की आधारशिला होती है। इसके माध्यम से प्राप्त आंकड़े भविष्य की विकास योजनाओं, जनकल्याणकारी कार्यक्रमों तथा आधारभूत सुविधाओं के प्रभावी विस्तार और क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उपायुक्त ने बताया कि हिमाचल प्रदेश में जनगणना-2026 के प्रथम चरण का आयोजन 16 जून से 15 जुलाई तक किया जाएगा। इसके साथ ही नागरिकों की सुविधा के लिए स्व-गणना (सेल्फ एन्यूमरेशन) की व्यवस्था भी उपलब्ध करवाई गई है, जिसके तहत 1 से 15 जून तक नागरिक se.census.gov.in पोर्टल पर जाकर स्वयं अपने परिवार की जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं।

    उन्होंने कहा कि स्व-गणना की सुविधा जनभागीदारी को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। पोर्टल पर जानकारी सफलतापूर्वक दर्ज करने के बाद नागरिकों को एक विशिष्ट स्व-गणना आईडी प्राप्त होगी, जिसे घर-घर सर्वेक्षण के दौरान आने वाले प्रगणक को उपलब्ध करवाना होगा। उपायुक्त ने बताया कि निर्धारित अवधि के दौरान प्रगणक प्रत्येक घर तक पहुंचकर मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से परिवार, आवास, उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं तथा परिसंपत्तियों से संबंधित अधिसूचित जानकारी एकत्रित करेंगे। उन्होंने आश्वस्त किया कि जनगणना के दौरान प्राप्त सभी सूचनाएं पूर्णतः गोपनीय रखी जाएंगी तथा उनका उपयोग केवल जनगणना संबंधी उद्देश्यों के लिए ही किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रथम चरण में घरों, परिवारों और उपलब्ध सुविधाओं से संबंधित महत्वपूर्ण आंकड़े संकलित किए जाएंगे। ये आंकड़े शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क, आवास सहित विभिन्न विकासात्मक योजनाओं को अधिक प्रभावी, समावेशी और जनोन्मुख बनाने में सहायक सिद्ध होंगे।

    उपायुक्त ने बताया कि जनगणना कार्य को सुचारू एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से संपन्न करवाने के लिए नगर निगम कार्यालय ऊना में प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ बुधवार से कर दिया गया है। प्रशिक्षण के माध्यम से संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को जनगणना प्रक्रिया, डिजिटल उपकरणों के उपयोग तथा आंकड़ों के सटीक संकलन संबंधी आवश्यक जानकारी प्रदान की जा रही है।
    उन्होंने स्वयं भी स्व-गणना प्रक्रिया में भाग लेते हुए नागरिकों को इस सुविधा का अधिकतम लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया। उपायुक्त ने कहा कि जनगणना केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि विकास के भविष्य को दिशा देने वाला राष्ट्रीय अभियान है, जिसमें प्रत्येक नागरिक की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने सभी जिलावासियों से आग्रह किया कि वे स्व-गणना सुविधा का अधिकाधिक उपयोग करें तथा जनगणना अधिकारियों को पूर्ण सहयोग प्रदान करें। जब जनगणना अधिकारी आपके घर आएं, तो उन्हें सही, पूर्ण और तथ्यात्मक जानकारी उपलब्ध करवाएं, ताकि क्षेत्र की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप विकास योजनाओं का प्रभावी निर्माण किया जा सके और विकसित हिमाचल के संकल्प को साकार किया जा सके।

     

  • राजस्व मंत्री ने मंत्रिमंडलीय उप-समिति बैठक की अध्यक्षता की, शिमला एवं प्रमुख शहरी क्षेत्रों में सुगम यातायात सुनिश्चित करने के दिए निर्देश

    राजस्व मंत्री ने मंत्रिमंडलीय उप-समिति बैठक की अध्यक्षता की, शिमला एवं प्रमुख शहरी क्षेत्रों में सुगम यातायात सुनिश्चित करने के दिए निर्देश

    शिमला: राजस्व, बागवानी एवं जनजातीय विकास मंत्री जगत सिंह नेगी की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रिमंडलीय उप-समिति की बैठक हुई। बैठक में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह और लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह भी उपस्थित रहे। शिमला शहर, मुख्य औद्योगिक क्षेत्रों जैसे बीबीएन और जिला मुख्यालयों में भीड़ कम करने तथा विशेष रूप से मंडियों को स्थानांतरित करने के संबंध में यह मंत्रिमंडलीय उप-समिति गठित की गई है।

    बैठक में बीबीएन क्षेत्र में एक नई टाउनशिप योजना और चंडीगढ़ शहर की तर्ज पर एक सैटेलाइट टाउन की स्थापना पर विस्तार से चर्चा की गई। सोलन के उपायुक्त और हिमुडा के सीईओ ने अवगत करवाया कि 7042-18 बीघा भूमि को समेकित कर लिया गया है। बैठक में भूमि पूलिंग नीति को पंजाब जैसे अन्य राज्यों की भूमि पूलिंग नीतियों के अनुरूप तैयार करने का निर्णय लिया। इसके अतिरिक्त शिमला शहर में भीड़ कम करने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। मंत्रिमंडलीय उप-समिति ने विभिन्न भीड़-भाड़ वाले चिन्हित स्थानों की समीक्षा की। इनमें छोटा शिमला चौक, संजौली चौक, बालूगंज जंक्शन, टूटीकंडी जंक्शन, ढली बाइपास-टनल चौक, कसुम्पटी जंक्शन, ढली बस स्टैंड चौक, आईजीएमसी बाइपास चौक, खलीनी चौक, यूनिवर्सिटी जंक्शन, विक्ट्री टनल चौक, टॉलैंड जंक्शन, लोकल बस स्टैंड और नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग द्वारा अन्य चिन्हित स्थान थे।

    बैठक में लोक निर्माण विभाग, एचपीआरआईडीसी और आरटीडीसी को निर्देश दिए गए कि वे इन जंक्शनों का नियमित निरीक्षण कर प्रस्तावों को पूरा करने के लिए समय-सीमा निर्धारित करें। समिति ने शहर के भीतर ट्रैफिक में अवरोध और भीड़ का कारण बनने वाली मंडियों को शिमला के बाहर, नव-निर्मित फोरलेन सड़क मार्ग पर स्थित उपयुक्त स्थानों पर स्थानांतरित करने पर भी चर्चा की।

    पुलिस अधीक्षक शिमला को निर्देश दिए गए कि वे शोघी, धामी आदि विभिन्न स्थानों पर सुचारू यातायात प्रबंधन के लिए कड़े कदम उठाएं। साथ ही सड़कों के दोनों ओर वाहन पार्क न किए जाएं और जहां भी आवश्यकता हो वहां उचित पार्किंग व्यवस्था की पहचान की जाए। बैठक में विधायक हरीश जनारथा, निदेशक शहरी विकास नीरज कुमार, उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप, नगर निगम आयुक्त भूपेन्द्र अत्री और टीसीपी विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।

  • समाज को शिक्षित करने और सकारात्मक परिवर्तन लाने में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका

    समाज को शिक्षित करने और सकारात्मक परिवर्तन लाने में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका

    शिमला: राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने आज लोक भवन में हिमाचल प्रदेश की प्रेरणादायक उपलब्धियों पर आधारित कॉफी टेबल बुक ‘हाई फ्लायर’ का लोकार्पण किया। उन्होंने इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में कहा कि लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। समाचारों के प्रसार के साथ-साथ मीडिया समाज को शिक्षित करने, जनमत को दिशा देने तथा सकारात्मक बदलाव के लिए प्रेरित करने का कार्य भी करता है।

    कविन्द्र गुप्ता ने हिमाचल प्रदेश के विकास और प्रगति में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तियों को पहचान दिलाने की इस पहल की सराहना की। इस अवसर पर उन्होंने पुस्तक में शामिल कई विशिष्ट उपलब्धि हासिल करने वाले व्यक्तियों को सम्मानित भी किया।

    राज्यपाल ने सम्मानित प्रतिभाओं को बधाई देते हुए कहा कि उनकी मेहनत, समर्पण और प्रतिबद्धता ने समाज को अधिक समावेशी और प्रगतिशील बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनकी सफलता की कहानियां विशेष रूप से युवाओं को अपने लक्ष्य हासिल करने के लिए आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित करेंगी।

     

    कविन्द्र गुप्ता ने कहा कि प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध संस्कृति और गौरवशाली परंपराओं से परिपूर्ण हिमाचल प्रदेश सदैव प्रतिभा और अपार संभावनाओं की भूमि रहा है। उन्होंने कहा कि युवा प्रदेश के भविष्य के ध्वजवाहक है और ‘हाई फ्लायर’ जैसे मंच विशिष्ट प्रतिभाओं कोे समाज के सामने लाकर उत्कृष्टता, नवाचार और ऊंची आकांक्षाओं को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    राज्यपाल ने नशे की बढ़ती समस्या पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि नशा आज समाज के सामने सबसे गंभीर चुनौतियों में से एक है और युवाओं के भविष्य के लिए बड़ा खतरा बन चुकी है। उन्होंने कहा कि जब लोग अपनी सांस्कृतिक जड़ों और मूल्यों से दूर हो जाते हैं तो इस प्रकार की समस्याएं बढ़ने लगती हैं।

     

    राज्यपाल ने कहा कि केवल सरकार के प्रयासों से नशे की समस्या का पूर्ण समाधान संभव नहीं है। इसके लिए समाज को जागरूक रहकर, जन-जागरूकता अभियानों में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी तथा निवारक उपायों को समर्थन देना होगा। उन्होंने कहा कि इस दिशा में मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। मीडिया नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता फैलाने और लोगों को इसके विरुद्ध अभियान से जोड़ने में प्रभावी योगदान दे सकता है।

    इससे पूर्व, पुस्तक के संपादक बविंद्र वशिष्ठ ने राज्यपाल का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इस पुस्तक का उद्देश्य हिमाचल प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट उपलब्धियां हासिल करने वाले व्यक्तियों की प्रेरक कहानियों को पहचान देना, उनका सम्मान करना और उन्हें व्यापक स्तर पर साझा करना है। ब्यूरो प्रमुख सुरेश शांडिल्य ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों की प्रमुख हस्तियां, मीडिया प्रतिनिधि तथा अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

     

  • मुख्यमंत्री ने डी.के. शिवकुमार को कर्नाटक के मुख्यमंत्री बनने पर दी बधाई

    मुख्यमंत्री ने डी.के. शिवकुमार को कर्नाटक के मुख्यमंत्री बनने पर दी बधाई

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज बेंगलुरु में कर्नाटक के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने पर डी.के. शिवकुमार को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री बेंगलूरू में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि डी.के. शिवकुमार के नेतृत्व में कर्नाटक विकास और जन कल्याण के नए आयाम स्थापित करेगा। उन्होंने शिव कुमार के सफल कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं दी।

  • हरियाणा में 15.70 करोड़ रुपये की लागत से छह जिलों में बनेंगे 26 नए सरकारी आयुर्वेदिक औषधालय

    हरियाणा में 15.70 करोड़ रुपये की लागत से छह जिलों में बनेंगे 26 नए सरकारी आयुर्वेदिक औषधालय

    चंडीगढ़: हरियाणा सरकार राज्य के छह जिलों में लगभग 15.70 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 26 नए सरकारी आयुर्वेदिक औषधालय का निर्माण करेगी। इस पहल का उद्देश्य आयुष स्वास्थ्य सेवा बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक स्वास्थ्य सेवाओं तक लोगों की पहुंच में सुधार करना है।

    स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा आयुष विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने आज यहाँ जानकारी देते हुए बताया कि ये औषधालय यमुनानगर में 10, महेंद्रगढ़ में 6, रेवाड़ी में 5, कुरुक्षेत्र में 3, करनाल में 1 और गुरुग्राम में 1 बनाए जाएंगे। अनावर्ती नागरिक कार्य श्रेणी के तहत इस परियोजना की कुल लागत 1,570.22 लाख रुपये (15.70 करोड़ रुपये) अनुमानित है।

    डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि इन 26 सरकारी आयुर्वेदिक औषधालयों के निर्माण के लिए लागत अनुमान हरियाणा के विकास एवं पंचायत विभाग से प्राप्त हो चुके हैं। यमुनानगर जिले में भांगेरा, ताजेवाला, खुर्दबन, तलकौर, महियुद्दीनपुर, दारपुर, ढाकवाला, दादुपुर हेड, दमोली और लेड़ा खादर गांवों में 10 औषधालय बनाए जाएंगे, जिनमें से प्रत्येक औषधालय की अनुमानित लागत 59.17 लाख रुपये है। कुरुक्षेत्र जिले में अजराना कलां में 59.15 लाख रुपये, कलसा में 59.74 लाख रुपये और मोहरी में 59.15 लाख रुपये की लागत से औषधालय स्थापित किए जाएंगे, जबकि करनाल जिले के फफड़ाना गांव में 59.17 लाख रुपये की लागत से एक औषधालय का निर्माण किया जाएगा।

    रेवाड़ी जिले में रोहराई, झाबुआ, जयसिंहपुर खेड़ा और करावरा मानकपुर गांवों में 59.17 लाख रुपये प्रति औषधालय की लागत से चार, तथा लीसान गांव में 59.00 लाख रुपये की लागत से एक औषधालय बनाया जाएगा। महेंद्रगढ़ जिले में गुढ़ा, बावनिया, रसूलपुर, बुचावास, सुरजनवास और रामबास गांवों में छह औषधालय बनाए जाएंगे, जिनमें से प्रत्येक औषधालय की निर्माण लागत 64.50 लाख रुपये अनुमानित है। गुरुग्राम जिले में सहजावास गांव में 58.63 लाख रुपये की अनुमानित लागत से एक औषधालय स्थापित किया जाएगा।

    डॉ. मिश्रा ने कहा कि ये नए औषधालय विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में आयुर्वेदिक स्वास्थ्य सेवाओं के दायरे का विस्तार करेंगे और हरियाणा के आयुष बुनियादी ढांचे को और मजबूत करेंगे। इस परियोजना को संबंधित एजेंसियों के समन्वय से पंचायती राज विभाग के माध्यम से पूरा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस पहल से निवारक और पारंपरिक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता में सुधार होगा और चिन्हित जिलों के निवासियों के लिए गुणवत्तापूर्ण आयुर्वेदिक उपचार सुविधाओं तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित होगी।

     

  • अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर व्यापक जन भागीदारी सुनिश्चित बनाने को लेकर आयुष विभाग की बैठक आयोजित

    अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर व्यापक जन भागीदारी सुनिश्चित बनाने को लेकर आयुष विभाग की बैठक आयोजित

    अम्ब सुशील पंडित : अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (आईडीवाई)-2026 के सफल, प्रभावी एवं जनभागीदारी आधारित आयोजन को सुनिश्चित बनाने के उद्देश्य से उपमंडल आयुष विभाग अम्ब द्वारा आयुष स्वास्थ्य केंद्र भंजाल में एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। इस दौरान अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की तैयारियों के अलावा आयुष विभाग की विभिन्न योजनाओं एवं गतिविधियों की भी समीक्षा की गई। बैठक की अध्यक्षता उपमंडलीय आयुष चिकित्सा अधिकारी, अम्ब डॉ. राजेश शर्मा ने की। बैठक में उपमंडल अम्ब एवं गगरेट के समस्त आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारियों ने भाग लिया। इस अवसर पर डॉ. राजेश शर्मा ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस-2026 के आयोजन से संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करते हुए अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में योग के व्यापक प्रचार-प्रसार एवं जन-जागरूकता गतिविधियों को गति देने के निर्देश दिए।
    उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस से पूर्व विभिन्न सरकारी एवं गैर-सरकारी कार्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों, पंचायत स्तर के संस्थानों तथा सामुदायिक स्थलों पर प्री-आईडीवाई गतिविधियों और योग वाई-ब्रेक सत्रों का नियमित आयोजन सुनिश्चित किया जाए, ताकि समाज के प्रत्येक वर्ग को योग के महत्व और उसके स्वास्थ्य लाभों से अवगत करवाया जा सके। इस दौरान 21 जून को आयोजित होने वाले मुख्य अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस समारोह की तैयारियों की भी विस्तृत समीक्षा की गई। कार्यक्रम के सफल संचालन हेतु विभिन्न अधिकारियों की जिम्मेदारियां निर्धारित की गईं तथा निर्देश दिए गए कि योग को जन-आंदोलन का स्वरूप देने के लिए व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया जाए। इसके साथ ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संस्थाओं, महिला मंडलों, युवा संगठनों तथा आम नागरिकों की अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी बल दिया गया। डॉ. राजेश शर्मा ने कहा कि योग भारत की प्राचीन और अमूल्य धरोहर है, जो स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का सशक्त माध्यम है। योग का नियमित अभ्यास न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाता है, बल्कि मानसिक संतुलन, सकारात्मक सोच और आध्यात्मिक उन्नति में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है। उन्होंने सभी अधिकारियों से अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस-2026 को जन-जन का उत्सव बनाते हुए इसे एक जन-आंदोलन के रूप में मनाने का आह्वान किया। इस अवसर पर आयुष संस्थानों में संचालित पंचकर्म सेवाओं, औषधीय (हर्बल) उद्यानों के संरक्षण एवं विकास तथा राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के अंतर्गत विभागीय सहभागिता एवं रोगी रेफरल गतिविधियों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई। उपमंडलीय आयुष चिकित्सा अधिकारी ने सभी आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारियों को निर्देशित किया कि पंचकर्म सेवाओं को और अधिक प्रभावी एवं जनहितकारी बनाया जाए, औषधीय उद्यानों का नियमित रखरखाव एवं संवर्धन सुनिश्चित किया जाए तथा राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम में सक्रिय भूमिका निभाते हुए क्षय रोगियों की पहचान, परामर्श और रेफरल गतिविधियों को और अधिक सुदृढ़ किया जाए।
  • हरियाणा में 24 साल बाद मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण, 15 जून से शुरू होगा घर-घर सत्यापन अभियान

    हरियाणा में 24 साल बाद मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण, 15 जून से शुरू होगा घर-घर सत्यापन अभियान

    चंडीगढ़: हरियाणा में लगभग 24 वर्ष बाद मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण) अभियान शुरू होने जा रहा है। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार यह व्यापक अभियान 15 जून से 14 जुलाई 2026 तक चलाया जाएगा, जिसके तहत बूथ स्तर पर घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन किया जाएगा। अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 22 सितंबर 2026 को किया जाएगा।

    हरियाणा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) श्री ए. श्रीनिवास ने बुधवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी उपायुक्त-सह-जिला निर्वाचन अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की और निर्देश दिए कि ईआरओ,एईआरओ, बीएलओ तथा सुपरवाइजर्स को समयबद्ध प्रशिक्षण देकर अभियान को सफल बनाया जाए।

    बैठक में सीईओ ने राज्य में मतदाता सूचियों की मैपिंग की धीमी प्रगति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि अब तक केवल 64.26 प्रतिशत मैपिंग का कार्य पूरा हुआ है, जबकि फरीदाबाद, गुरुग्राम, सोनीपत, पानीपत और पंचकूला जैसे जिलों में यह आंकड़ा 60 प्रतिशत से भी कम है। उन्होंने इसे गंभीर विषय बताते हुए कहा कि संबंधित जिलों में आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों के साथ बैठकें कर जनसहयोग सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने स्वयं अगले सप्ताह इन जिलों का दौरा करने की घोषणा भी की।

    श्रीनिवास ने बताया कि मतदाताओं की सुविधा के लिए ‘गणना फॉर्म’ हिंदी भाषा में उपलब्ध कराए जाएंगे और 5 जून 2026 से इन्हें आधिकारिक वेबसाइट से डाउनलोड किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि जिन घरों से गणना फॉर्म वापस नहीं मिलेंगे, वहां बीएलओ पड़ोसियों से जानकारी लेकर अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत अथवा डुप्लिकेट मतदाताओं की पहचान करेंगे। प्रत्येक ऐसे घर का कम से कम तीन बार दौरा करना बीएलओ के लिए अनिवार्य होगा।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी घर में मतदाता उपस्थित नहीं है तो परिवार का कोई भी वयस्क सदस्य गणना फॉर्म पर हस्ताक्षर कर उसे बीएलओ को सौंप सकता है। ऑनलाइन फॉर्म भरने वाले मतदाताओं के मामलों में भी बीएलओ घर जाकर सत्यापन करेंगे। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि जिन मतदाताओं के नाम प्रारूप सूची में शामिल नहीं होंगे, उनकी बूथवार सूची पंचायत भवनों, शहरी निकाय कार्यालयों और बीडीपीओ कार्यालयों के नोटिस बोर्डों पर प्रदर्शित की जाएगी। साथ ही नाम शामिल न होने के संभावित कारण भी सार्वजनिक किए जाएंगे। ऐसी सूचियां सीईओ तथा जिला निर्वाचन अधिकारियों की वेबसाइटों पर भी उपलब्ध रहेंगी।

    राजनीतिक दलों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे राजनीतिक दलों के साथ बैठक कर जल्द से जल्द बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) नियुक्त करवाएं। इसके अतिरिक्त स्वयंसेवकों का सहयोग भी लिया जाएगा। सीईओ ने कहा कि हरियाणा में अंतिम बार विशेष गहन पुनरीक्षण वर्ष 2002 में कराया गया था। उन्होंने खुलासा किया कि अन्य राज्यों की तुलना में हरियाणा के चुनावी डेटा में लगभग 18 प्रतिशत तार्किक त्रुटियां पाई गई हैं, जिनमें गलत नाम और वर्तनी संबंधी त्रुटियां प्रमुख हैं। 21 मई 2026 तक राज्य में कुल 2 करोड़ 6 लाख 52 हजार 760 पंजीकृत मतदाता तथा 20 हजार 629 मतदान केंद्र हैं। फतेहाबाद जिला 87.44 प्रतिशत मैपिंग के साथ राज्य में सबसे आगे है।

    श्रीनिवास ने बताया कि सभी जिला मुख्यालयों तथा विधानसभा क्षेत्रों में हेल्पलाइन नंबर 1950 आधारित विशेष हेल्पडेस्क स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने जिला प्रशासन को निर्देश दिए कि मीडिया के माध्यम से व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाए तथा पुनरीक्षण प्रक्रिया से जुड़ी गतिविधियों का वीडियो रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाए। निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार एसआईआर कार्य में लगे अधिकारियों एवं कर्मचारियों का तबादला आयोग की पूर्व अनुमति के बिना नहीं किया जाएगा। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जिला निर्वाचन अधिकारी, निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी तथा सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों के पद रिक्त न रहें।

    बैठक में एक महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि पहली बार निर्वाचन आयोग ने मंडलायुक्तों को विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के दौरान रोल ऑब्जर्बर की जिम्मेदारी सौंपी है, जिससे पूरी प्रक्रिया की निगरानी और पारदर्शिता और अधिक मजबूत होगी। बैठक में अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी श्रीमती रितु, अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी अपूर्व, संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी राज कुमार लोहान तथा मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

  • मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की ‘गो ग्लोबल’ अप्रोच को मिली नई गति

    मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की ‘गो ग्लोबल’ अप्रोच को मिली नई गति

    चंडीगढ़: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप राज्य सरकार लगातार ऐसे प्रयास कर रही है, जिनसे किसान आधुनिक कृषि तकनीकों, नए बाजारों और वैश्विक अवसरों से जुड़ सकें। इसी के तहत उन्होंने ‘गो ग्लोबल’ अप्रोच को नई गति दी है। जिसके तहत अब हरियाणा के किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) तंजानिया, केन्या सहित अन्य अफ्रीकी देशों में भी खेती और कृषि कारोबार के अवसरों का लाभ उठा सकेंगे। पंचकूला के मोरनी में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की उपस्थिति में देश की प्रतिष्ठित मसाला कंपनी एमडीएच और हरियाणा के छ: किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के बीच महत्वपूर्ण करार हुआ। विदेश सहयोग विभाग और बागवानी विभाग द्वारा क्रियान्वित इस पहल का उद्देश्य किसानों को वैश्विक बाजारों से जोड़ना, उनकी आय बढ़ाना तथा कृषि क्षेत्र में नए अवसर सृजित करना है। संवाद कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अपने संबोधन में कहा कि इस बार के बजट में मोरनी क्षेत्र को विकसित करने की घोषणा की गई थी, उसी के अनुरूप मोरनी क्षेत्र में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में आज यह एमओयू किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को किसी भी प्रकार के घाटा होने की स्थिति में भरपाई की जाएगी। इसके अलावा प्राकृतिक खेती करने वालों किसानो को बाजार भाव से 10 प्रतिशत अधिक फसल मूल्य कंपनी द्वारा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि लगभग 4 हजार एकड़ में प्राकृतिक खेती प्रारंभरिक चरण में शुरू की जाए। हरियाणा सरकार किसानों को केवल पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि उन्हें कृषि उद्यमिता, मूल्य संवर्धन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जोड़कर आत्मनिर्भर एवं समृद्ध बनाना चाहती है। इसी सोच के तहत किसानों को वैश्विक बाजारों तक पहुंच दिलाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इस समझौते के तहत पंचकूला जिले के मोरनी क्षेत्र में अदरक, हल्दी, मिर्च सहित विभिन्न मसाला फसलों की व्यावसायिक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। एमडीएच किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन, गुणवत्तापूर्ण उत्पादन, विपणन तथा खरीद संबंधी सहयोग प्रदान करेगी। साथ ही हरियाणा में कीटनाशक-मुक्त और टिकाऊ खेती को प्रोत्साहित करते हुए किसानों से सीधे खरीद व्यवस्था को भी मजबूत बनाया जाएगा। यह समझौता हरियाणा के किसानों को वैश्विक कृषि व्यापार से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके तहत तंजानिया, केन्या तथा अन्य अफ्रीकी देशों में कृषि एवं व्यापार की संभावनाओं को विकसित किया जाएगा। भविष्य में यदि हरियाणा के एफपीओ इन देशों में भूमि लेकर अदरक, हल्दी, मिर्च एवं अन्य मसाला फसलों की खेती करते हैं, तो एमडीएच वहां उत्पादित फसलों की खरीद के लिए भी इच्छुक रहेगी। इससे हरियाणा के किसान पहली बार देश की सीमाओं से बाहर जाकर अफ्रीकी देशों में खेती और कृषि कारोबार से जुड़ सकेंगे। राज्य सरकार का उद्देश्य हरियाणा के किसानों को स्थानीय बाजारों तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उन्हें वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और अंतरराष्ट्रीय बाजारों का हिस्सा बनाना है। यह पहल किसानों की आय बढ़ाने, कृषि निर्यात को प्रोत्साहन देने और हरियाणा को वैश्विक कृषि व्यापार के मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

    मुख्यमंत्री के प्रयासों की सराहना की:

    एमडीएच के मालिक राजीव गुलाटी ने हरियाणा सरकार की इस पहल की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि यह दीर्घकालिक उद्देश्य केवल औद्योगिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि एक मजबूत एग्रीकल्चरल इकोसिस्टम तैयार करना है, जिसमें सरकार, किसान और उद्योग साझेदार के रूप में मिलकर कार्य करें। हरियाणा सरकार की प्रगतिशील नीतियों तथा माननीय मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी द्वारा ऑर्गेनिक फार्मिंग को दिए जा रहे निरंतर प्रोत्साहन के माध्यम से एमडीएच एक ऐसी प्रोक्योरमेंट प्रणाली विकसित करने का अवसर देखता है, जिसमें पेस्टिसाइड-फ्री और प्रीमियम क्वालिटी कृषि उत्पादों को प्राथमिकता दी जाए। जैसे-जैसे हरियाणा ऑर्गेनिक और सस्टेनेबल एग्रीकल्चर के क्षेत्र में अपनी पहचान को और मजबूत करेगा, एमडीएच स्थानीय किसानों को समर्थन देने तथा एश्योर्ड प्रोक्योरमेंट के माध्यम से उनके उत्पादों के लिए स्थायी बाजार उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा। इससे किसानों को गुणवत्तापूर्ण उत्पादन के लिए प्रोत्साहन मिलेगा और उनकी आय में वृद्धि का मार्ग भी प्रशस्त होगा। इससे हरियाणा स्पाइस वैल्यू चेन में अपनी अहम भूमिका निभाएगा। इससे वैश्विक मांग और आपूर्ति के बीच बेहतर संतुलन स्थापित करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के निरंतर प्रयासों से हरियाणा ग्लोबल स्पाइस इकोसिस्टम में एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित होगा। विदेश सहयोग विभाग में मुख्यमंत्री के सलाहकार पवन चौधरी ने बताया कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में विभाग द्वारा किसानों और एफपीओ को वैश्विक अवसरों से जोड़ने के लिए लगातार कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एमडीएच के साथ हुआ यह समझौता हरियाणा के किसानों को तंजानिया, केन्या सहित अन्य अफ्रीकी देशों में कृषि एवं व्यापार के नए अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस दौरान मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी, अतिरिक्त मुख्य सचिव विजेंद्र कुमार, विदेश सहयोग विभाग की प्रधान सचिव अमनीत पी कुमार, हॉर्टिकल्चर विभागाध्यक्ष डॉ अर्जुन सैनी सहित प्रशासनिक अधिकारी और एफपीओ से जुड़े किसान भी मौजूद थे।  
  • शिक्षा क्षेत्र में प्रमुख सुधारों की प्रगति की समीक्षा बैठक आयोजित

    शिक्षा क्षेत्र में प्रमुख सुधारों की प्रगति की समीक्षा बैठक आयोजित

    शिमला: शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने आज यहां शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए शिक्षा क्षेत्र में चल रही विभिन्न योजनाओं एवं सुधारों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार ने शिक्षा क्षेत्र को सर्वाेच्च प्राथमिकता प्रदान की है तथा अनेक महत्त्वपूर्ण सुधार लागू किए हैं, जिनके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार स्नातक डिग्री पूर्ण कर चुके विद्यार्थियों के लिए अप्रेंटिसशिप समाहित डिग्री कार्यक्रम प्रारम्भ करने जा रही है। इस पहल के तहत विद्यार्थियों को विभिन्न उद्योगों के साथ कार्य करने का अवसर मिलेगा तथा उन्हें स्टाइपेंड भी प्रदान किया जाएगा। इससे उनके कौशल विकास के साथ-साथ रोजगार की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।

    शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा महाविद्यालय स्तर पर विदेशी भाषाओं के पाठ्यक्रम भी शुरू किए जाने की योजना है, जिससे विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर की भाषा दक्षता प्राप्त होगी और अंतरराष्ट्रीय रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। उन्होंने कौशल आधारित स्नातक पाठ्यक्रम (बी.वोक.) की सफलता का उल्लेख करते हुए कहा कि इस कार्यक्रम से विद्यार्थियों से उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली है। इसी को देखते हुए सरकार इस योजना के अंतर्गत चार नए पाठ्यक्रम शुरू करने की तैयारी कर रही है।

    शिक्षा मंत्री ने कहा कि बजट घोषणा के अनुरूप शिक्षा विभाग के अंतर्गत कार्यरत एसएमसी अध्यापकों, मिड-डे मील कर्मियों, जल वाहकों, कंप्यूटर शिक्षकों तथा बहु-उद्देशीय कर्मियों के मानदेय में 500 रुपये प्रति माह की वृद्धि की गई है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड परीक्षाओं में विद्यार्थियों के प्रदर्शन की समीक्षा करते हुए कक्षा 10वीं और 12वीं कक्षा के परीक्षा परिणामों का विस्तृत विश्लेषण किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को जवाबदेही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए तथा कहा कि लगातार खराब प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों की वार्षिक वेतन वृद्धि रोकी जा सकती है। उन्होंने बायोमैट्रिक उपस्थिति को अनिवार्य बनाने और अनुपालना न होने की स्थिति में वेतन कटौती जैसे कदमों पर भी बल दिया।

    शिक्षा मंत्री ने कहा कि विभिन्न श्रेणियों के 1,131 एसएमसी शिक्षकों की नियुक्तियां एलडीआर श्रेणी के माध्यम से की गई हैं। इसके अतिरिक्त 714 पीजीटी तथा 102 डीपीई पदों के लिए एलडीआर प्रक्रिया शीघ्र आरम्भ की जाएगी। कंप्यूटर शिक्षकों के मामलों में आवश्यक नियम संशोधन किए जाएंगे। उन्होंने अधिकारियों को राज्य चयन आयोग और हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग को भेजे गए शिक्षकों के रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने के भी निर्देश दिए।

    उन्होंने कहा कि सरकार की घोषणा के अनुरूप बागवानी विषय को विद्यालयों में व्यावसायिक शिक्षा के रूप में आरम्भ किया जा चुका है। उन्होंने विभाग को विशेष रूप से बागवानी प्रधान क्षेत्रों में इस कार्यक्रम का और विस्तार करने के निर्देश दिए। ठाकुर ने विद्यार्थियों को टैबलेट वितरण की समीक्षा करते हुए विभाग को इस प्रक्रिया में तेजी लाने तथा प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) प्रणाली अपनाने के निर्देश दिए, ताकि पात्र विद्यार्थी अपनी आवश्यकता एवं पसंद के अनुसार उपकरण खरीद सकें। उन्होंने उप-निदेशकों को निर्देश देते हुए कहा कि उपलब्ध करवाई गई राशि का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के लिए सुनिश्चित किया जाए। बैठक में शिक्षा मंत्री ने विभाग को उपनिदेशकों की पदोन्नति संबंधी विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की औपचारिकताएं शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिला अटॉर्नी के पद सृजित करने संबंधी प्रस्ताव मंत्रिमंडल के समक्ष शीघ्र ही प्रस्तुत किया जाएगा।

    शिक्षा मंत्री ने कहा कि वर्तमान शैक्षणिक सत्र में राज्य के 148 सरकारी विद्यालयों को सीबीएसई संबद्धता प्राप्त हो चुकी है। उन्होंने कहा कि भविष्य में और अधिक विद्यालयों को सीबीएसई पाठ्यक्रम से जोड़ा जाएगा। उन्होंने सभी ग्रीष्मकालीन एवं शीतकालीन अवकाश वाले विद्यालयों में बोर्ड कक्षाओं को छोड़कर दिसंबर माह में परीक्षाएं आयोजित करने के निर्देश भी दिए।

    बैठक के दौरान विभाग के अधिकारियों द्वारा पीडीएनए कार्यों की समीक्षा करते हुए बताया गया कि वर्ष 2023 और 2025 की आपदाओं से क्षतिग्रस्त विद्यालयों के पुनर्निर्माण एवं मरम्मत कार्यों के लिए लोक निर्माण विभाग तथा हिमुडा को 19 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। उन्होंने अधिकारियों को गैर-कार्यशील केंद्रीय विद्यालयों से संबंधित लंबित औपचारिकताओं को शीघ्र पूरा कर उन्हें जल्द संचालित करने के निर्देश दिए।

    शिक्षा मंत्री ने डॉ. वाईएस परमार विद्यार्थी ऋण योजना की भी समीक्षा की। इस योजना अन्तर्गत विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए एक प्रतिशत ब्याज की दर से 20 लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध करवाया जा रहा है। उन्होंने इस योजना की प्रक्रिया को और अधिक सरल बनाने के निर्देश दिए ताकि पात्र लाभार्थियों को योजना का लाभ सुनिश्चित हो सके।

    शिक्षा मंत्री ने शिक्षा विभाग, समग्र शिक्षा तथा शिक्षक समुदाय की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (पीजीआई) 2.0 में हिमाचल प्रदेश ने उल्लेखनीय उपलब्धि प्राप्त की है। राज्य ने राष्ट्रीय स्तर पर छठा स्थान तथा राज्यों में तीसरा स्थान प्राप्त किया है। इसके अतिरिक्त देश में दूसरे सर्वाेच्च ग्रेड वाली प्रचेस्टा-2 श्रेणी में द्वितीय स्थान हासिल किया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि शिक्षा विभाग इसी समर्पण और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करते हुए अन्य राज्यों के लिए भी एक आदर्श स्थापित करेगा।

    बैठक में सचिव शिक्षा राकेश कंवर, समग्र शिक्षा के परियोजना निदेशक राजेश शर्मा, स्कूल शिक्षा निदेशक आशीष कोहली, निदेशक उच्च शिक्षा डॉ. हरीश कुमार अवस्थी सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।