Home Punjab>Amritsar Punjab News: ननकाना साहिब, पंजा साहिब और करतारपुर साहिब के दर्शन कर भावुक हुए श्रद्धालु, देखें वीडियो

Punjab News: ननकाना साहिब, पंजा साहिब और करतारपुर साहिब के दर्शन कर भावुक हुए श्रद्धालु, देखें वीडियो

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Punjab News: ननकाना साहिब, पंजा साहिब और करतारपुर साहिब के दर्शन कर भावुक हुए श्रद्धालु, देखें वीडियो

दोनों देशों की सरकारों से की ये खास अपील

अमृतसरः महाराजा रणजीत सिंह की पुण्यतिथि के अवसर पर पाकिस्तान गए सिख श्रद्धालुओं का जत्था आज अटारी-वाघा सीमा के रास्ते वापस भारत पहुंच गया। इस दौरान श्रद्धालुओं के चेहरों पर खुशी और आध्यात्मिक संतुष्टि साफ तौर पर देखी जा सकती थी। श्रद्धालुओं ने पाकिस्तान में स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारों के दर्शन करके अपने अनुभव साझा किए और वहां मिले सम्मान और प्रबंधों की भरपूर सराहना की। अमृतसर के रहने वाले श्रद्धालु बलवीर सिंह ने बताया कि वे पाकिस्तान दौरे के दौरान सबसे पहले श्री ननकाना साहिब में गुरु नानक देव जी के जन्म स्थान के दर्शन करने गए। इसके बाद उन्होंने गुरुद्वारा श्री पंजा साहिब, श्री दरबार साहिब करतारपुर और लाहौर में स्थित अन्य ऐतिहासिक गुरुद्वारों के दर्शन किए। उन्होंने कहा कि जिन स्थानों पर सिख इतिहास से जुड़ी महत्वपूर्ण घटनाएं घटित हुईं, उन स्थानों पर जाकर मन को अलौकिक शांति और खुशी प्राप्त हुई। बलवीर सिंह ने कहा कि पाकिस्तान सरकार द्वारा श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए पुख्ता प्रबंध किए गए थे। हर समय सुरक्षाकर्मी उनके साथ मौजूद रहते थे और पूरे दौरे के दौरान उन्हें किसी भी प्रकार की कोई परेशानी नहीं हुई। उन्होंने कहा कि यह खुशी शब्दों में बयान नहीं की जा सकती और यदि दोनों देशों के बीच संबंध और बेहतर हों तो लोगों में प्यार और साझापन और बढ़ेगा। इस अवसर पर श्रद्धालु हरजीत कौर ने बताया कि जत्था 21 जून को पाकिस्तान के लिए रवाना हुआ था और आज 30 जून को वापस लौटा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में उनके लिए बहुत ही शानदार प्रबंध किए गए थे और वहां के लोगों ने बहुत प्यार और सम्मान के साथ उनका स्वागत किया। उन्होंने कहा कि ननकाना साहिब, पंजा साहिब, करतारपुर साहिब सहित अन्य गुरुद्वारों के दर्शन करके उनकी लंबे समय से चली आ रही मनोकामना पूरी हुई है। श्रद्धालुओं ने भारत और पाकिस्तान की सरकारों से अपील करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच वीज़ा प्रक्रिया को और सरल बनाया जाए और श्रद्धालुओं को गुरुद्वारों के दर्शनों के लिए अधिक से अधिक अवसर प्रदान किए जाएं, ताकि साझी विरासत और आपसी भाईचारे को और मजबूती मिल सके।  

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