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Punjab News: नर्सरी के बच्चे की वायरल वीडियों से बदली परिवार की किस्मत, आगे आई आर्थिक संस्थाएं

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Punjab News: नर्सरी के बच्चे की वायरल वीडियों से बदली परिवार की किस्मत, आगे आई आर्थिक संस्थाएं

फिरोजपुरः कस्बा ममदोट के साथ लगते गांव सैदे के नोल की एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुई थी। दरअसल, वायरल वीडियो में नर्सरी कक्षा के अमृत बहुत दर्द भरे शब्दों के साथ अपने अध्यापक लखविंदर सिंह को बताता है कि मैं आज स्कूल का होमवर्क करके नहीं आया। बच्चा इसकी वजह बताता हुए कहता है कि आटा ना होने के कारण घर में खाना नहीं बना और मैं रोटी भी नहीं खाकर आया। वहीं अध्यापक लखविंदर सिंह ने बताया कि जब उसने इस बच्चे की जब उसने वीडियो बनाकर तो बच्चों द्वारा बोले गए शब्दों ने उसको रुला कर रख दिया।

वहीं इस वायरल वीडियो के बाद बच्चे के चलते परिवार की किस्मत बदल गई। इस वीडियो को देखने के बाद कांग्रेस नेता व समाजसेवी रमिंदर आवला बच्चे के घर पहुंचे। उन्होंने परिवार की हालत देखकर मौके पर ही परिवार को 51,000 की राशि दी, साथ ही बच्चे के माता-पिता दोनों को तलवंडी स्थित अपनी बिजली फैक्ट्री में नौकरी भी दे दी। रमिंदर आवला की सहायता से परिवार उनके प्रति भावुक नजर आया। दरअसल, इस मामले में पता चला कि पिता की आंखें खराब होने के बाद जब परिवार के गुजर-बसर की सभी उम्मीदें खत्म हो गईं थी, तब एक मासूम बच्चे की मासूमियत ने एक बार फिर परिवार में भविष्य की न केवल उम्मीदें जगाई हैं बल्कि बच्चों के शिक्षक द्वारा वायरल किए गए वीडियो देखकर समाजसेवी एवं कांग्रेस नेता ने अपनी बिजली फैक्ट्री में बच्चे की माता और पिता को नौकरी दी।

अन्य संस्थाएं भी परिवार की सहायता के लिए आगे आई हैं। दरअसल, छात्र के पिता तेजिंदर सिंह की आंखें कुछ दिनों से खराब हो गई हैं। ठीक से दिखाई न देने के कारण उन्होंने काम पर जाना बंद कर दिया है। परिवार में आय का कोई अन्य साधन न होने के कारण इस समय पूरा परिवार बहुत ही मुश्किल हालात में गुजारा कर रहा है। पिता तेजिंदर सिंह का नीला कार्ड भी नहीं बना है जिस कारण आटा दाल स्कीम का भी लाभ नहीं मिल पा रहा है।

ऐसे में किसी दिन परिवार में रोटी बनती थी, किसी दिन परिवार भूखा ही सोता था। घर पहुंचकर पता चला कि पूरा परिवार एक ही कमरे में गुजारा कर रहा है। कमरे में खिड़की और दरवाजे तक नहीं। कपड़े का पर्दा डालकर परिवार के लोग गुजारा करते हैं। आय का कोई साधन न होने के कारण बच्चे की मां घरों पर काम करके जो भी कमाती है, उससे कुछ दिनों के लिए खाने का इंतजाम हो जाता है।

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