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Jalandhar News: Punjab में पराली के 10 हजार मामले आए सामने, चीफ इंजीनियर krunesh Garg ने किया खुलासा, देखें वीडियो

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Jalandhar News: Punjab में पराली के 10 हजार मामले आए सामने, चीफ इंजीनियर krunesh Garg ने किया खुलासा, देखें वीडियो

जालंधर, ENS: राज्य में पराली जलाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने को लेकर सरकार द्वारा पुख्ता प्रबंध किए जा रहे है। लेकिन उसके बावजूद इस साल पंजाब में इस साल पराली के 10 हजार मामले सामने आए है। मामले की जानकारी देते हुए पंजाब प्रदूषण बोर्ड के चीफ इंजीनियर krunesh Garg बताया कि पिछले साल पराली जलाने के 36 हजार मामले सामने आए थे, हालांकि इस बार पराली जलाने के मामलों में काफी गिरावट देखने को मिली है। krunesh Garg ने बताया कि इस साल किसानों द्वारा सेटेलाइट के द्वारा प्राप्त हुए आंकड़ों के मुताबिक पराली जलाने के 10 हजार मामले पाए गए है। उन्होंने कहा कि 4900 मामलो में कंपोजिशन लगा दिया है।

अधिकारी ने बताया कि उन मामलों में अब तक में एक करोड़ 84 लाख रुपए का कंपोजिशन लगाया जा चुका है। जिसमें से एक करोड़ 14 लाख रुपए वसूल भी कर लिए गए है। अधिकारी ने बताया कि 4870 केसों में किसानों के रेवेन्यू रिकार्ड में रेड एंट्री कर ली है। चीफ इंजीनियर ने कहा कि जहां अधिकारियों ने कार्रवाई नहीं की है, वहीं पर भी किसानों के खिलाफ केस दर्ज किए गए है। उन्होंने कहा कि अधिकतर मामले मालवा से सामने आए है। हालांकि इस साल पुलिस और अधिकारियों ने काफी अच्छा काम किया है। उन्होंने कहा कि 9000 नोडल अफसरों को पराली जलाने से रोकने के लिए तैनात किया गया था।

उन्होंने कहा कि किसानों को पराली जलाने से रोकने के लिए इस बार सबसे अधिक जागरूक किया है। उन्होंने कहा कि अब किसान भी काफी ज्यादा जागरूक हुए है और यही कारण है कि पराली जलाने के मामलों में कमी आई है। चीफ इंजीनियर ने बताया कि पराली के लिए पंजाब सरकार द्वारा एक एक्शन प्लान पर काम किया जा रहा है। जिसमें पराली को खेतो में जलाने के लिए उसको खेतों में मिक्स करने के लिए मशीने मुहैय्या करवाई गई है। जिसे क्रोबराइजिंग मशीनरी कहते है और उस पर सब्सीडी दी जा रही है।

उन्होंने कहा कि कोशिश की जा रही है कि पराली एक पूंजी की तरह किसानों के उपयोग हो और किसानों को इसका फायदा हो। चीफ इंजीनियर ने कहा कि आपको यह जानकर खुशी होगी कि पिछले साल 2 मिलियन टन पराली एक्स सीटू मेनेजमेंट को जानी थी जोकि इस साल 5 मिलियन टन से ज्यादा जाने का हमारा अनुमान है। चीफ इंजीनियर ने प्रदूषण को लेकर कहा कि सभी पराली जलाने को मुख्य कारण मानते है, लेकिन इसके कई ओर कारण है। उन्होंने कहा कि कई बार वेदर और मैथलॉजी प्रदूषण में अहम रोल अदा करती है।

उन्होंने कहा कि कई बार हवा का रुख इस तरह का हो जाता है कि एक जगह पर पल्यूटन इकट्ठे हो जाते है। उन्होंने कहा कि सर्दियों में हमारी मिक्सिंग हाइट कम हो जाती है। वहीं सुबह और रात के समय प्रदूषण बढ़ने को लेकर अधिकारी ने कहा कि AQI लैवल नवंबर के शुरुआत में बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि हमारे पास नासा की ओर से सेटेलाइट डाटा आता है, जिसके बाद अधिकारी पराली जलाने की घटनाओं पर जाकर जांच करते है।

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