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Punjab News: सबसे बड़ी ठगी, ‘क्रिप्टो क्वीन’ ने नकली वेबसाइट के जरिए ठगे ₹19.84 करोड़, केस दर्ज

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Punjab News: सबसे बड़ी ठगी, ‘क्रिप्टो क्वीन’ ने नकली वेबसाइट के जरिए ठगे ₹19.84 करोड़, केस दर्ज

लुधियानाः जिले में साइबर सेल में व्यक्ति ने नकली वेबसाइट पर करोड़ों रुपए ठगी को लेकर शिकायत दी है। व्यक्ति ने पुलिस को दी शिकायत में कहा कि साइबर अपराधियों ने उसके साथ ‘पिग बुचरिंग’ तकनीक से 19.84 करोड़ की ठगी को अंजाम दिया है। बता दें कि यह पंजाब का सबसे बड़ा व्यक्तिगत साइबर फ्रॉड माना जा रहा है। ठगी के इस तरीके में पहले भरोसा बनाया जाता है, फिर निवेश के नाम पर बड़ी रकम ठगी जाती है। पीड़ित सीनियर सिटीजन जगदीप सिंघल ने शिकायत में बताया कि फेसबुक पर हुई एक साधारण दोस्ती के बाद उन्हें विश्वास में लेकर डिजिटल ठगी की गई। पीड़ित ने कहा कि मई 2025 में ‘अनामिका रॉय’ नाम की महिला ने उनसे संपर्क किया।

दोनों में बातचीत धीरे-धीरे दोस्ती में बदली और फिर क्रिप्टो ट्रेडिंग में मोटे मुनाफे का लालच दिया गया। ठगों ने खुद को एक्सपर्ट बताते हुए एक इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म पर निवेश कराने का दावा किया। पीड़ित से क्वाइनएक्स-वीआईपी 2 नाम की वेबसाइट पर ई-वॉलेट बनवाया गया, जो असली प्लेटफॉर्म की हूबहू कॉपी थी। जैसे-जैसे निवेश बढ़ता गया, वेबसाइट पर बैलेंस भी बढ़ता दिखाया जाता रहा। खास बात यह रही कि शुरुआत में छोटी रकम पर फर्जी मुनाफा दिखाकर भरोसा और मजबूत किया गया। जैसे ही पीड़ित का कॉन्फिडेंस बढ़ा, उसे बड़े अमाउंट निवेश करने के लिए उकसाया गया। इस ठगी में इस्तेमाल वेबसाइट असली क्रिप्टो एक्सचेंज की कॉपी थी। डिजाइन, इंटरफेस और ट्रांजेक्शन स्क्रीन बिल्कुल असली जैसे बनाए गए थे।

यूजर जब पैसा डालता था तो सिस्टम में उसका बैलेंस बढ़ता दिखता था, लेकिन असल में यह सिर्फ एक विजुअल ट्रिक थी। बैकएंड में कोई असली ट्रेडिंग नहीं होती थी। जैसे ही यूजर विड्रॉअल का विकल्प चुनता, सिस्टम एरर या पेंडिंग स्टेटस दिखाता और साथ में नए-नए चार्ज जोड़ दिए जाते। इस तरह पीड़ित को लगता रहा कि बस आखिरी पेमेंट के बाद पैसा मिल जाएगा। जांच में सामने आया कि ठगों ने 15 अलग-अलग बैंकों में 76 खाते खोल रखे थे, जिन्हें ‘म्यूल अकाउंट’ कहा जाता है।

इन खातों का इस्तेमाल पैसे को तेजी से एक जगह से दूसरी जगह घुमाने के लिए किया जाता है, ताकि ट्रेस करना मुश्किल हो जाए। बड़ी रकम को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर अलग-अलग खातों में भेजा गया। इसके बाद कुछ रकम को तुरंत कैश में बदला गया, जबकि बाकी को डिजिटल वॉलेट्स में शिफ्ट कर दिया गया। साइबर एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यही तरीका ठगों को जांच एजेंसियों से बचने में मदद करता है। अब पुलिस इन सभी खातों को फ्रीज कर ट्रांजेक्शन ट्रेल खंगाल रही है, जिससे गिरोह तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।

 

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