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Punjab News: Congress-BJP गठजोड़ को लेकर जिला प्रधान संजय तलवार का आया बयान, देखें वीडियो

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Punjab News: Congress-BJP गठजोड़ को लेकर जिला प्रधान संजय तलवार का आया बयान, देखें वीडियो

लुधियानाः पंजाब में 5 नगर निगम चुनावों के नतीजे जारी होने के बाद 2 जिलों में सियासत गरमा गई है। एक ओर जालंधर में जहां आप पार्टी ने कांग्रेस और भाजपा को झटका देकर पार्षदों को पार्टी में शामिल करके बहुमत आंकड़ा पार कर लिया है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस से गए पार्षदों को लेकर कांग्रेस पार्टी ने उन पर एक्शन लेने का ऐलान कर दिया है। दूसरी ओर लुधियाना में भी आप पार्टी बहुमत का आकंड़ा पार नहीं कर पाई। वहीं दूसरी कांग्रेस और भाजपा में गठबंधन का फार्मूला शुरू हो गया है।

मेयर बनाने के मामले में जिला कांग्रेस के प्रधान संजय तलवाड़ ने कहा कि ढाई साल से सत्ताधारियों ने चुनाव न करवाकर निगम पर कब्जा जमा रखा था। लोगों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। इसलिए कांग्रेस किसी कीमत पर आप को समर्थन नहीं देगी। हां हमारे पास अन्य विकल्प अभी खुले है। दरअसल, 95 सीटों पर हुए चुनावों में आप पार्टी को 41 सीटें हासिल हुई थी। जबकि बहुमत के आंकड़े के लिए 48 सीटों की जरूरत है। दूसरी ओर कांग्रेस को 30 सीटें और भाजपा के 19 सीटें है।

हालांकि कांग्रेस और भाजपा से एक-एक निर्दलीय उम्मीदवार भी चुनाव मैदान में थे, जो कांग्रेस और भाजपा का समर्थन कर रहे हैं। फिर भी कांग्रेस के पास 31 और भाजपा के पास 20 सीटें हैं। अकाली दल ने 2 और निर्दलीय उम्मीदवारों ने 3 सीटें जीती हैं। आम आदमी पार्टी को मेयर की सीट तक पहुंचने से रोकने के लिए विपक्षी कांग्रेस और भाजपा गठबंधन बनाने की तैयारी में हैं।

33 साल पुराना फार्मूला फिर से मेयर बनाने के लिए दोहराया जा सकता है। कांग्रेस ने बीते दिन ही स्पष्ट कर दिया था कि वह आप को किसी सूरत में भी सर्मथन नहीं देंगे लेकिन शहर के विकास के लिए वह अन्य दलों को विकल्प के रूप में देख सकते हैं। 33 साल बाद एक बार फिर कांग्रेस और भाजपा गठजोड़ कर सकती है। साल 1991 में पहली बार नगर निगम के चुनाव हुए थे। इन चुनाव में बीजेपी को बड़ी पार्टी होने के बावजूद बहुमत नहीं मिला था। उस समय पंजाब में स्व. बेअंत सिंह की सरकार थी।

दोनों दलों ने उस समय एक दूसरे को समर्थन देने का ऐलान किया था। दोनों पक्षों में इस शर्त पर गठजोड़ हुआ था कि ढाई साल भाजपा तो ढाई साल कांग्रेस का मेयर बनेगा। इस समझौते के बाद ही 12 जून 1991 में लुधियाना का पहला मेयर चुना गया था। ढाई साल चौधरी सत्य प्रकाश का कार्यकाल देखने के बाद कांग्रेस ने फैसला लिया था कि अगले ढाई साल भी वही मेयर रहेंगे। 11 जून 1996 तक यह गठजोड़ पूरे 5 साल चला।

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