लुधियानाः प्रवर्तन निदेशालय की दिल्ली विंग ने पंजाब में एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश किया है। जिसमें ईडी ने 5 लोगों पर थाना जमालपुर में केस भी दर्ज करवाया है। जानकारी के अनुसार मंडी गोविंदगढ़ में 3089.57 करोड़ रुपए के फर्जी बिलिंग और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है।
इस मामले में कई बैंक अधिकारी और चार्टर्ड अकाउंटेंट भी जांच के दायरे में हैं। आरोपियों ने अवैध लेन-देन छिपाने के लिए कृषि उत्पाद बाजार समिति (एपीएमसी) खातों का उपयोग किया। उन्होंने फर्जी बिलिंग की रकम को कृषि भुगतान के नाम पर खपाया। इसके बाद तुरंत नकदी निकालकर ठिकाने लगा दी गई।
एजेंसी के अनुसार बिना किसी वास्तविक खरीद-बिक्री के कागजी बिलों का ट्रांसफर किया गया। इससे सरकार से करोड़ों रुपए का फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट हासिल किया गया। ईडी के सहायक निदेशक सूरज कुमार यादव की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज किया है। इसमें अमित कुमार गोयल, मनीष कुमार, गौरव अग्रवाल, गुरदीप सिंह और बलवंत सिंह नामजद हैं। ये मामला सरकार के इंटेलिजेंस सॉफ्टवेयर द्वारा संदिग्ध लेन-देन चिह्नित करने के बाद सामने आया।
इस घोटाले में आरोपियों ने मनी लॉन्ड्रिंग के लिए जानबूझकर एपीएमसी खातों को चुना। एपीएमसी राज्य सरकारों द्वारा संचालित एक व्यवस्था है। इन खातों में रोजाना करोड़ों रुपए का भारी नकद लेन-देन होता है। इससे बैंकिंग और कर स्क्रूटनी सिस्टम में ये लेन-देन सामान्य दिखते हैं। आरोपियों ने इसी छूट का फायदा उठाकर कर चोरी को अंजाम दिया।
ईडी ने पंजाब स्मॉल इंडस्ट्रीज एंड एक्सपोर्ट कॉरपोरेशन (पीएसीआईईसी) के चीफ जनरल मैनेजर को 40 एकड़ जमीन आवंटन मामले में समन जारी किया है। यह मामला उद्योग मंत्री संजीव अरोड़ा से जुड़ी फर्म रितेश प्रॉपर्टीज को हुए भूमि आबंटन से जुड़ा है। ईडी ने आरोप लगाया है कि अरोड़ा से जुड़ी कंपनियों ने शेल कंपनियों के माध्यम से मोबाइल कारोबार में 157.12 करोड़ रुपए की फर्जी बिक्री दिखाकर निर्यात का टैक्स लाभ हासिल किया। गौरतलब है कि इसी मामले में ईडी पहले भी जालंधर के ठेकेदार अमित बजाज के ठिकानों पर छापेमारी कर चुकी है।