Home spiritual महाशिवरात्रि पर रहेगा भद्रा का साया, जानें भगवान शिव की पूजा करने का शुभ मुहूर्त

महाशिवरात्रि पर रहेगा भद्रा का साया, जानें भगवान शिव की पूजा करने का शुभ मुहूर्त

0
महाशिवरात्रि पर रहेगा भद्रा का साया, जानें भगवान शिव की पूजा करने का शुभ मुहूर्त
धर्म : फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर हर साल महाशिवरात्रि का त्योहार मनाया जाता है। इस साल यह पावन त्योहार 15 फरवरी को मनाया जाएगा। खास बात यह है कि इस बार महाशिवरात्रि के दिन भद्रा का योग भी बन रहा है। ऐसे में कई भक्तों के मन में यह भी सवाल आ रहा है कि इससे शिव पूजा या फिर जलाभिषेक पर कोई असर होगा या नहीं।

महाशिवरात्रि पर कब तक रहेगा भाद्रा का साया

पंचाग के अनुसार, 15 फरवरी की शाम करीबन 5:04 बजे से भद्रा शुरु होगी और इसका समापन 16 फरवरी की सुबह 5:23 मिनट पर होगा। ऐसे में करीबन 12 घंटे 19 मिनट तक भद्रा का साया रहेगा हालांकि चिंता की कोई बात नहीं है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस बार भद्रा का वास पाताल लोक में बताया जा रहा है। शास्त्रों में ऐसा बोला गया है कि जब भद्रा पाताल में हो तो इसका असर पृथ्वी पर नहीं होता। ऐसे में महाशिवरात्रि के दिन भक्त किसी आसमंजस के भगवान शिव का अभिषेक और पूजा-पाठ कर सकते हैं। श्रद्धा और सच्चे मन से की गई आराधना ही सबसे ज्यादा फल देती है।

जलाभिषेक का मुहूर्त

इस बार महाशिवरात्रि पर भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए दिनभर कई शुभ मुहूर्त हैं। इस दौरान कभी भी भक्त पूजा-अर्चना कर सकते हैं। पहला मुहूर्त सुबह 8:24 मिनट से शुरु होगा और 9:48 तक रहेगा। इसके बाद दूसरा शुभ मुहूर्त सुबह 9:48 से लेकर 11:11 तक रहेगा। तीसरा मुहूर्त सर्वोत्तम होगा जो कि सुबह 11:11 से लेकर 12:35 तक रहेगा। इसमें जल चढ़ाना बहुत शुभ और फलदायी रहेगा। इसके साथ ही जो श्रद्धालु शाम को पूजा करना चाहते हैं वो 6:11 मिनट से 7:47 मिनट के बीच में अभिषेक कर सकते हैं। इन सभी मुहूर्तों में श्रद्धा और सच्चे मन से शिवलिंग पर जल चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होगी।

ऐसे करें जलाभिषेक

महाशिवरात्रि वाले दिन सबसे पहले सुबह स्नान करके साफ और हल्के रंग के कपड़े पहन लें। फिर मन में भगवान शिव को ज्यादा करें और ऊं नम: शिवाय मंत्र का जाप करें। पूजा के स्थान पर दीपक जलाएं । यदि संभव तो उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके पूजा करें। उसके बाद तांबे या मिट्टी के लोटे में साफ जल भर लें। उसमें चाहें तो आप गंगाजल, थोड़ा सा कच्चा दूध या शहद भी डाल सकते हैं। शिवलिंग पर धीरे-धीरे जल चढ़ाएं। इस बात का ध्यान रखें कि जल शिवलिंग के ऊपर से प्रवाहित हो। इधर-उधर न बिखरे। जल चढ़ाने के बाद बेलपत्र, धतूरा, सफेद फूल या आक के फूल अर्पित करें। बेलपत्र चढ़ाते समय उसकी डंडी आपकी ओर न हो इस बात का भी ध्यान रखें। इसके बाद चंदन का तिलक लगाएं। धूप-दीप दिखाएं। पूजा के दौरान कम से कम 108 बार ऊं नम: शिवाय का जाप करें। यदि समय हो तो शिव चालीसा या रुद्राष्टक का पाठ भी करें। अंत में हाथ जोड़कर अपनी मनोकामना शांत मन से बताएं।          

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here