Home spiritual इस दिन मनाई जाएगी Hanuman Jayanti, जानें पूजा-विधि और शुभ मुहूर्त

इस दिन मनाई जाएगी Hanuman Jayanti, जानें पूजा-विधि और शुभ मुहूर्त

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इस दिन मनाई जाएगी Hanuman Jayanti, जानें पूजा-विधि और शुभ मुहूर्त
धर्म: चैत्र शुक्ल पूर्णिमा तिथि पर हर साल हनुमान जयंती मनाई जाती है। मान्यताओं के अनुसार, इस दिन अंजनी के पुत्र हनुमान का जन्म हुआ था। हनुमान जी को भगवान शंकर का अंश माना जाता है इसलिए वो शिवजी के रुद्रावतार भी कहे जाते हैं। ऐसा कहा जाता है कि हनुमान जयंती पर विधिवत पूजा-अर्चना ने बजरंगबली को खुश किया जा सकता है। इस दिन जो लोग व्रत रखकर हनुमान जी की पूजा करते हैं। उनके सार संकट दूर हो जाते हैं। तो चलिए जानते हैं कि इस बार हनुमान जयंती कब मनाई जाएगी।

आखिर कब है हनुमान जयंती?

हिंदू पंचाग के अनुसार, इस साल चैत्र पूर्णिमा 1 अप्रैल को सुबह 7 बजकर 6 मिनट से लेकर 2 अप्रैल को सुबह 7 बजकर 41 मिनट तक रहने वाली है। उदयातिथि के अनुसार, हनुमान जयंती का त्योहार 2 अप्रैल दिन गुरुवार को रखा जाएगा।

शुभ मुहूर्त

इस साल हनुमान जयंती पर सुबह और शाम के समय दो अबूझ मुहूर्त रहने वाले हैं। हिंदू पंचागों के अनुसार, 2 अप्रैल को हनुमान जयंती पर सुबह 6 बजकर 10 मिनट से लेकर सुबह 7 बजकर 44 मिनट तक पूजा के लिए सबसे अच्छे मुहूर्त है। इसके बाद शाम को 6 बजकर 39 मिनट से लेकर रात 8 बजकर 6 मिनट तक दूसरा मुहूर्त रहेगा। अप्रैल को हनुमान जयंती पर सुबह 6 बजकर 10 मिनट से लेकर सुबह 7 बजकर 44 मिनट तक पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त है। इसके बाद शाम को 6 बजकर 39 मिनट से लेकर रात 8 बजकर 6 मिनट तक पूजा का दूसरा मुहूर्त रहेगा।

शुभ योग

इस साल हनुमान जयंती पर ध्रुव योग और हस्त नक्षत्र का संयोग रहने वाला है। ध्रुव योग सूर्योदय से लेकर दोपहर 2 बजकर 20 मिनट तक रहेगा। इसके बाद व्याघात योग शुरु हो जाएगा। फिर शाम को 5 बजकर 38 मिनट तक हस्त नक्षत्र भई रहने वाला है। इसके बाद चित्रा नक्षत्र लग जाएगा।

पूजा विधि

हनुमान जंयती वाले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद लाल कपड़े पहनें। इसके बाद व्रत पूजा का संकल्प लें। इसके बाद पूजा के लिए लकड़ी की चौकी पर लाल या सफेद रंग का कपड़ा डालें। उस पर हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित करें। उनके सामने घी का दीपक और अगरबत्ती जलाएं। हनुमान जी को लाल सिंदूर, चंदन और चमेली का तेल अर्पित करें। इस दिन बजरंगबली को चोला भी चढ़ाया जाता है। पंचामृत और लड्डू के प्रसाद का भोग महावीर बजरंगी को लगाना न भूलें। इसके बाद वहीं बैठक उनके मंत्रों का जाप करें। उनकी आरती उतारें।  

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