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क्या पानी और बिजली बर्बाद करने से पुण्य का है कोई Connection? Premanand Maharaj से जानें

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क्या पानी और बिजली बर्बाद करने से पुण्य का है कोई Connection? Premanand Maharaj से जानें
धर्म: आज के समय में पानी और बिजली एक जरुरी संसाधन है जिनके बिना रोजमर्रा की जिंदगी की कल्पना करना भी मुश्किल है लेकिन इन्हीं जरुरी चीजों का इस्तेमाल हम बिना सोचे-समझे कर देते हैं। हाल ही में हुए एकांतिक वार्तालाप के दौरान एक शख्स ने संत प्रेमानंद महाराज से सीधे सवाल पूछ लिया कि क्या पानी और बिजली की बर्बादी करने से पुण्य नष्ट हो जाता है। यह आदत सिर्फ जाने-अनजाने हम सब में होती है। कई बार हम सोचते भी नहीं है कि हमारी छोटी-छोटी आदतें कितना बड़ा फर्क डालती हैं। हम सब में होती है। कई बार हम सोचते भी नहीं कि हमारी छोटी-छोटी आदतें कितना बड़ा फर्क डालती है। कई बार हम सोचते भी नहीं कि हमारी छोटी-छोटी आदतें कितना बड़ा फर्क डालती है। नल खुला छोड़ देना जरुरत से ज्यादा पानी इस्तेमाल करना या कमरे से निकलते समय लाइट और पंखा बंद न करना ये सब हमें आम लगता है लेकिन प्रेमानंद महाराज के अनुसार, यही छोटी-छोटी लापरवाहियां धीरे-धीरे प्रकृति के संतुलन को बिगाड़ देती हैं।

पानी है जीवन का आधार

महाराज पानी को सिर्फ एक सुविधा ही नहीं बल्कि जीवन का आधार मानते हैं। उनका कहना है कि पानी की एक-एक बूंद कीमती है। जब हम इसे बेवजह बहाते हैं तो हम अनजाने में प्रकृति के प्रति असम्मान दिखाते हैं। उनका संदेश है कि पानी बचाना आदत नहीं बल्कि जिम्मेदारी होनी चाहिए। बिजली को लेकर भी उन्होंने साफ संदेश दिया है। कई बार लोग जरुरत न होने पर भी लाइटें जलती छोड़ देते हैं या उपकरण चलते रहने देते हैं। यह न सिर्फ ऊर्जा की बर्बादी है बल्कि एक तरह की लापरवाही भी है। महाराज के अनुसार, जितनी जरुरत हो उतनी ही बिजली का इस्तेमाल करना समझदारी है।

कर्मों की भाषा बेहद जरुरी है

प्रेमानंद महाराज ने सबसे महत्वपूर्ण संदेश दिया कि हर छोटा काम हमारे कर्मों से जुड़ा होता है। यदि हम संसाधनों का सम्मान करते हैं तो वह हमारे जीवन में पॉजिटिविटी लाता है लेकिन यदि हम बर्बादी करते हैं तो उसका असर व्यवहार और जीवन की दिशा पर भी पड़ता है।  

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