ऊना,सुशील पंडित: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिल्ली जंतर मंतर प्रदर्शन में कुछ युवाओं द्वारा उनके विरुद्ध अभद्र अश्लील अमर्यादित टिप्पणियों के बावजूद क्षमा किए जाने पर राजनीतिक लेखक समीक्षक मयंक मधुर ने मोदी के वक्तव्य में प्रभु श्रीराम की करुणा की झलक दिखाई देने की बात कही है ।
जारी बयान में उन्होंने कहा कि हाल ही में जंतर-मंतर पर घटित घटनाक्रम और उसके उपरांत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा व्यक्त किए गए उदगार भारतीय राजनीति और समाज में एक अभूतपूर्व मिसाल प्रस्तुत करते हैं। व्यक्तिगत हमलों और यहाँ तक कि अपनी स्वर्गीय माता जी के प्रति अभद्र भाषा का सामना करने के बावजूद, प्रधानमंत्री ने जिस धैर्य, क्षमाशीलता और पितृवत वात्सल्य का परिचय दिया है, वह सर्वथा अनुकरणीय है।
भारतीय संस्कृति में ‘क्षमा वीरस्य भूषणम्’ का विचार सदैव से सर्वोपरि रहा है। प्रधानमंत्री के वक्तव्य-“बच्चे हमारे हैं, गलतियाँ बचपन का हिस्सा हैं, और गुमराह बच्चों को गले लगाकर राह दिखाना ही हमारा धर्म है”-में स्पष्ट रूप से त्रेता युग के मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के जीवन आदर्शों की झलक दिखाई देती है।
जिस प्रकार प्रभु श्री राम ने अपनी निंदा और कटु वचनों को सहकर भी प्रजा के प्रति दया, त्याग और समभाव का परिचय दिया, उसी प्रकार आज के युग में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी व्यक्तिगत पीड़ा से ऊपर उठकर सम्पूर्ण राष्ट्र के युवाओं को अपने संतान-तुल्य मानकर राह दिखा रहे हैं। उन्होंने दाँत और जीभ का अनुपम उदाहरण देते हुए समाज को यह सन्देश दिया कि कटुता का उत्तर प्रतिशोध से नहीं, बल्कि प्रेम, मार्गदर्शन और समावेशन से दिया जाता है।
यह वक्तव्य केवल एक राजनेता की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि राष्ट्र-पिता तुल्य उस महान नेतृत्व का परिचय है जो आधुनिक भारत में प्रभु श्री राम के करुणा, दया, त्याग और अपरिमित प्रेम के स्वरूप को साकार करता है। आज की युवा पीढ़ी के लिए प्रधानमंत्री का यह आह्वान-“आओ गलतियों से सीखें और देश निर्माण में भागीदार बनें”-एक नव-जागरण का सन्देश है।
प्रधानमंत्री का यह दृष्टिकोण दर्शाता है कि सच्चा नेतृत्व केवल दण्ड या अदालत के चक्कर कटवाने में नहीं, बल्कि दिग्भ्रमित युवाओं को सही दिशा देकर राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की नींव रखने में निहित है।
