डेली संवाद, चंडीगढ़। Punjab News: पंजाब में पहली बार भ्रष्टाचार के एक बड़े मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने पंजाब विजिलेंस ब्यूरो के मुख्यालय में दबिश देकर पूरे सिस्टम को हिला दिया है। 20 लाख रुपये की रिश्वत मांगने और बाद में 13 लाख रुपये में सौदा तय करने के आरोप में अब तक तीन लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इस कार्रवाई ने न केवल पंजाब विजिलेंस विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी उजागर किया है कि भ्रष्टाचार रोकने वाला विभाग खुद भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों में घिर गया है।
- 35 किलोमीटर पीछा कर पकड़े आरोपी
- आरोपियों के ठिकानों से मिले 9 लाख रुपये
- 12 पन्नों की व्हाट्सएप चैट बनी सबसे बड़ा सबूत
- अदालत में रो पड़े आरोपी
- बीजेपी नेताओं से नजदीकी की चर्चा
- AK-47 से लैस गनमैन भी जांच के घेरे में
- स्टेट टैक्स अधिकारी की शिकायत से खुला मामला
- विजिलेंस मुख्यालय में लगातार दो दिन रेड
- विजिलेंस विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
सीबीआई ने इस मामले में राघव गोयल, उसके पिता विकास उर्फ विक्की गोयल और ड्राइवर अंकित वाधवा को गिरफ्तार किया है। वहीं पंजाब विजिलेंस प्रमुख शरद सत्य चौहान के रीडर ओपी राणा की तलाश जारी है। अदालत से उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट भी जारी करवा लिए गए हैं। सीबीआई का दावा है कि रिश्वत की पूरी डील किसी “बड़े साहब” के नाम पर चल रही थी, लेकिन अब तक यह साफ नहीं हो पाया कि वह कोई वरिष्ठ अधिकारी था या कोई राजनीतिक व्यक्ति।

35 किलोमीटर पीछा कर पकड़े आरोपी
सीबीआई ने 11 मई को चंडीगढ़ (Chandigarh) में जाल बिछाकर कार्रवाई की थी। शिकायतकर्ता स्टेट टैक्स अधिकारी को एक होटल में बुलाया गया, जहां आरोपियों को 13 लाख रुपये नकद और एक महंगा मोबाइल फोन दिया जाना था। जैसे ही आरोपी रकम लेने पहुंचे, सीबीआई टीम ने रेड कर दी। इस दौरान अंकित वाधवा को मौके पर ही रंगे हाथों पकड़ लिया गया।
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रेड की भनक लगते ही राघव गोयल, विकास गोयल और ओपी राणा मौके से फरार होने लगे। बताया जा रहा है कि उनके साथ मौजूद पंजाब पुलिस के गनमैनों ने उन्हें इशारा किया था। इसके बाद सीबीआई ने चंडीगढ़ से लेकर हरियाणा सीमा तक करीब 35 किलोमीटर तक उनका पीछा किया और अंबाला के पास जाकर राघव और विकास गोयल को पकड़ लिया। हालांकि ओपी राणा फरार होने में सफल रहा।
आरोपियों के ठिकानों से मिले 9 लाख रुपये
सीबीआई ने बाद में कई ठिकानों पर छापेमारी की। इस दौरान 9 लाख रुपये नकद और कई आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए गए। मोहाली स्थित विजिलेंस मुख्यालय में भी देर रात तक जांच चली।
बताया गया कि कुछ कमरों को सील कर दिया गया था और कई फाइलें एजेंसी ने अपने कब्जे में ले लीं। सीबीआई को शक है कि विजिलेंस विभाग के भीतर से गोपनीय दस्तावेज निजी लोगों तक पहुंचाए जा रहे थे।

12 पन्नों की व्हाट्सएप चैट बनी सबसे बड़ा सबूत
सीबीआई ने अदालत में बताया कि आरोपियों के मोबाइल फोन से करीब 12 पन्नों की व्हाट्सएप चैट बरामद हुई है। इन चैट्स में ओपी राणा और राघव गोयल के बीच लंबे समय से बातचीत चल रही थी। जांच एजेंसी के अनुसार, चैटिंग से साफ संकेत मिलते हैं कि विजिलेंस विभाग से जुड़ी गोपनीय जानकारियां बाहर साझा की जा रही थीं।
सीबीआई के अनुसार, शुरुआत में शिकायत को बंद करवाने के लिए 20 लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई थी, लेकिन बाद में सौदा 13 लाख रुपये में तय हुआ। इसके अलावा ओपी राणा के लिए एक सैमसंग गैलेक्सी जेड फोल्ड-7 मोबाइल फोन देने की भी बात हुई थी। चैट में फोन का रंग, मॉडल और डिजाइन तक भेजे गए थे।
जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि चैट में कई बार “बड़े साहब” का जिक्र हुआ है। इसमें यह भी लिखा गया था कि अगर उनकी बात नहीं मानी गई तो केस दर्ज हो सकता है। अब सीबीआई यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर रिश्वत की रकम किस वरिष्ठ अधिकारी या प्रभावशाली व्यक्ति के लिए मांगी जा रही थी।

अदालत में रो पड़े आरोपी
मंगलवार को राघव गोयल और विकास गोयल को अदालत में पेश किया गया। सुनवाई के दौरान दोनों आरोपी भावुक हो गए। विकास गोयल अदालत में जज के सामने फूट-फूटकर रोने लगा और हाथ जोड़कर माफी मांगने लगा। आरोपी पक्ष के वकील ने दलील दी कि ओपी राणा ऐसा अधिकारी नहीं है जो किसी शिकायत को बंद करवा सके। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि गिरफ्तारी का आधार स्पष्ट नहीं बताया गया और एफआईआर की कॉपी तक उपलब्ध नहीं करवाई गई।
हालांकि सीबीआई प्रॉसिक्यूटर नरेंद्र और इंस्पेक्टर पवन कुमार ने अदालत को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी और दस्तावेज पेश किए। इसके बाद अदालत ने राघव और विकास गोयल को 3 दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया, जबकि ड्राइवर अंकित वाधवा को न्यायिक हिरासत में भेजा गया।
बीजेपी नेताओं से नजदीकी की चर्चा
इस पूरे मामले में गिरफ्तार कथित मिडिलमैन राघव गोयल की कई तस्वीरें बीजेपी नेताओं के साथ भी सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि उसे प्रधानमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह का निमंत्रण भी मिला था। हालांकि सीबीआई ने अभी तक किसी राजनीतिक भूमिका की पुष्टि नहीं की है, लेकिन इन तस्वीरों के सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
यह मामला अब केवल रिश्वतखोरी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर निजी लोगों की पहुंच सरकार और जांच एजेंसियों के शीर्ष स्तर तक कैसे बनी हुई थी।
AK-47 से लैस गनमैन भी जांच के घेरे में
सीबीआई ने अपने बयान में कहा है कि राघव गोयल और विकास गोयल अपने साथ पंजाब पुलिस के दो सरकारी गनमैन लेकर घूमते थे, जो AK-47 जैसे आधुनिक हथियारों से लैस थे। एजेंसी अब यह जांच कर रही है कि आखिर निजी व्यक्तियों को सरकारी सुरक्षा किस आधार पर दी गई थी।
सीबीआई का कहना है कि गनमैनों की भूमिका भी संदिग्ध लग रही है, क्योंकि रेड के दौरान उन्होंने आरोपियों को भागने का संकेत दिया था। अब यह पता लगाया जा रहा है कि क्या गनमैन भी इस पूरे नेटवर्क का हिस्सा थे या नहीं।
स्टेट टैक्स अधिकारी की शिकायत से खुला मामला
इस पूरे मामले की शुरुआत पंजाब के एक स्टेट टैक्स अधिकारी की शिकायत से हुई। अधिकारी ने आरोप लगाया कि उसके खिलाफ विजिलेंस विभाग में लंबित शिकायत को बंद करवाने के लिए विकास उर्फ विक्की गोयल और उसके बेटे राघव गोयल ने 20 लाख रुपये की मांग की थी।
शिकायतकर्ता के अनुसार, दोनों आरोपी खुद को विजिलेंस अधिकारियों का करीबी बताते थे और दावा करते थे कि उनकी पहुंच विभाग के बड़े अधिकारियों तक है। उन्होंने कहा था कि रिश्वत देने के बाद शिकायत बंद कर दी जाएगी। इसके बाद अधिकारी ने सीबीआई से संपर्क किया और एजेंसी ने पूरे मामले में ट्रैप लगाया। इसी कार्रवाई के दौरान पूरा नेटवर्क उजागर हुआ।

विजिलेंस मुख्यालय में लगातार दो दिन रेड
सीबीआई की टीम ने पहले दिन देर रात तक मोहाली स्थित विजिलेंस मुख्यालय में जांच की। इसके बाद मंगलवार सुबह करीब 7 बजे टीम दोबारा मुख्यालय पहुंची और पहली मंजिल पर स्थित कार्यालयों में छानबीन शुरू कर दी। शुरुआत में कर्मचारियों को अंदर जाने से रोक दिया गया था।
करीब 10 बजे विजिलेंस प्रमुख शरद सत्य चौहान अपने दफ्तर पहुंचे, लेकिन उन्होंने मीडिया से कोई बातचीत नहीं की। इसी दौरान सेक्टर-23 और अन्य ठिकानों पर भी सीबीआई ने दबिश दी, जहां से नकदी और कई दस्तावेज बरामद किए गए।
विजिलेंस विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
इस कार्रवाई के बाद पंजाब विजिलेंस ब्यूरो की साख पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। जिस विभाग का काम भ्रष्टाचार रोकना है, उसी के अधिकारियों और कर्मचारियों पर रिश्वत लेने और गोपनीय जानकारी लीक करने के आरोप लग रहे हैं। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि सीबीआई की इस कार्रवाई के बाद कई और बड़े नाम सामने आ सकते हैं।
एजेंसी अब यह भी जांच कर रही है कि क्या विजिलेंस विभाग में लंबे समय से कोई संगठित रिश्वतखोरी नेटवर्क काम कर रहा था।फिलहाल सीबीआई फरार रीडर ओपी राणा की तलाश में जुटी हुई है। वहीं, बरामद चैट, दस्तावेज और डिजिटल सबूतों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
