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उत्तर प्रदेश

UP News: सनातनी एकजुट हों तो हिंदू विरोधी षड्यंत्र करने वाले भारत का बाल बांका भी नहीं कर पाएंगेः सीएम योगी

Mahabir
Last updated: June 2, 2026 5:08 am
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डेली संवाद, मथुरा। UP News: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संतों की उपस्थिति में सनातन समाज से एकजुट होने का आह्वान किया। रामनगरी का उदाहरण देते हुए सीएम ने कहा कि 2017 के पहले अयोध्या में तीन घंटे बिजली मिलती थी। जय श्रीराम बोलने पर लड्डू नहीं, डंडे-लाठियां मिलती थीं। गलियां संकरी थीं और भवन जर्जर। आवागमन के साधन भी सीमित थे, लेकिन आज अयोध्या त्रेतायुग का स्मरण कराती है। पूज्य संत एक मंच पर आए, एक स्वर में बोले तो 500 वर्ष का कलंक मिट गया और अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण हो गया।

Contents
  • किसी का भी हित सनातन व देशहित से बड़ा नहीं हो सकता
  • हमारी सरकार ने संभल को संभाला
  • गोस्वामी तुलसीदास ने कहा था, भारत के राजा एक ही– प्रभु श्रीराम
  • श्रीरामकथा, श्रीमद्भागवत महापुराण, शिव महापुराण की कथा भारत की कथा
  • हर गांव में रामलीला, जाति या मत-संप्रदाय का भेद नहीं होता
  • मलूकदास जी ने गोरक्षा व भूखे को अन्न देने को बनाया जीवन का मिशन
  • कृष्ण कन्हैया व राधारानी के दिव्य तेज से आलोकित है ब्रजभूमि
  • 1916 में राष्ट्रपिता ने देखी थी काशी की दुर्दशा
  • माघ मेला, कुम्भ, महाकुम्भ की धरती है प्रयागराज

जब संतों की एकता में इतनी शक्ति है तो सभी सनातनी एकजुट होकर ताकत का अहसास कराना प्रारंभ कर दें तो कोई भी विधर्मी और विधर्मी की आड़ में उनकी जूठन खाकर हिंदू विरोधी षड्यंत्र करने वाले भारत का बाल बांका भी नहीं कर पाएंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार को संत श्रीमद् जगद्गुरु द्वाराचार्य श्री मलूकदास जी महाराज की 452वीं जयंती पर आयोजित श्रीसीताराम निकुंज अष्टयाम लीला महोत्सव कार्यक्रम में वृंदावन पहुंचे। श्रीमलूकपीठ आश्रम में मुख्यमंत्री ने दर्शन-पूजन किया, फिर गोपूजन कर गायों को गुड़ खिलाया।

किसी का भी हित सनातन व देशहित से बड़ा नहीं हो सकता

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम योगी (Yogi Adityanath) ने कहा कि बिना रुके, थके, डिगे, झुके इस यात्रा को चरैवेति-चरैवेति के संकल्प के साथ निरंतर बढ़ाना होगा। व्यक्तिगत स्वार्थ भारत राष्ट्र और सनातन धर्म के मार्ग में बाधा नहीं बनना चाहिए। मेरा हित सनातन व देशहित से बड़ा नहीं हो सकता। पूज्य संतों ने जब व्यक्तिगत, आश्रम, संप्रदाय व पंथ हित को एक तरफ रखकर सनातन हित के बारे में सोचना प्रारंभ किया, तब यह व्यापक जागृति, दिव्य तेज, चमत्कार देखने को मिला।

कई पीढ़ियां चली गईं, लेकिन राम मंदिर का दर्शन नहीं कर पाईं। हमारी पीढ़ी सौभाग्यशाली है, जो अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन, जन्मभूमि की मुक्ति, श्रीराम मंदिर निर्माण और फिर भव्य प्राण-प्रतिष्ठा की साक्षी बनी। 1528 में राम मंदिर को बाबर के सिपहसालार मीर बांकी ने तोड़ा था। 500 वर्ष पूरे भी नहीं हुए और हमने भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण कराया। यही भारत का गौरव है और यह तब होता है, जब संतों का आशीर्वाद और सशक्त नेतृत्व होता है। डबल इंजन की स्पीड होती है तो ताकत भी देखने को मिलती है।

Yogi Adityanath arrived in Vrindavan to attend the 'Shri Sitaram Nikunj Ashtayam Leela Mahotsav' program
Yogi Adityanath arrived in Vrindavan to attend the ‘Shri Sitaram Nikunj Ashtayam Leela Mahotsav’ program

हमारी सरकार ने संभल को संभाला

मुख्यमंत्री ने कहा कि संभल में 1526 में श्रीहरिहर मंदिर को बाबर की औलादों ने तोड़ा था। वहां 67 तीर्थ, 19 कूप थे, सब कुछ मिट गया था। 1976-78 में दंगे हुए, सैकड़ों हिंदुओं को मार दिया गया। 1995-96 में सपा सरकार में दरिंदों के मुकदमे वापस कर दिए गए। मुझे उस परिवार का एक सदस्य मिला। उसने बताया कि हमारी प्रॉपर्टी को लूट लिया गया। हम दिल्ली भागकर जान बचा रहे हैं। तब मैंने उनसे कहा कि कागज लेकर आओ, आपकी प्रॉपर्टी पर फिर से कब्जा कराएंगे। हमारी सरकार ने 84 कोसी परिक्रमा के लिए पैसा दिया।

यह भी पढ़ें: Japnoor Travels के सतनाम सिंह पर 45 लाख रुपए ठगी का आरोप, किसानों ने दफ्तर घेरा

प्रशासन से कहा कि टू-लेन सड़क, सराय, धर्मशाला बनाओ और यात्रा प्रारंभ कराओ। 67 तीर्थों व 19 कूपों से कब्जे हटवाए। सीएम योगी ने संत राजेंद्रदास जी महाराज के कथन का जिक्र करते हुए कहा कि मलूकदास जी ने चार मुगल बादशाहों (अकबर, जहांगीर, शाहजहां व औरंगजेब) के कालखंड की क्रूरता को देखा। भारत के संतों की दिव्य परंपरा कभी किसी विधर्मी के सामने अपने मूल्यों व आदर्शों से विचलित नहीं होती। उन्होंने उस समय जिस चेतना को जागरूक किया, आज का आध्यात्मिक व सांस्कृतिक भारत उसी पर आधारित है।

गोस्वामी तुलसीदास ने कहा था, भारत के राजा एक ही– प्रभु श्रीराम

सीएम ने संत तुलसीदास की चर्चा की और कहा कि अकबर के नवरत्न उन्हें लालच देकर अकबर व मुगल बादशाहों के पास ले जाना चाहते थे, लेकिन संत तुलसीदास ने कहा कि मैं किसी बादशाह को नहीं जानता-पहचानता। भारत के राजा एक ही हैं। रामलीला में हम आज भी यही कहते हैं कि राजा रामचंद्र जी की जय।

मुगलकालखंड में यह नारा संत तुलसीदास ने दिया था, यानी भारत का राजा कोई विधर्मी नहीं हो सकता। भारत के एक ही सनातन राजा हैं, वह हैं प्रभु श्रीराम, उनके अलावा कोई नहीं। तुलसीदास जी को गरीण ब्राह्मण कहने वालों पर सीएम ने तंज कसा और कहा कि उनसे बड़ा धनी कौन था, जिसने सबसे बड़े बादशाह के प्रस्ताव को ठुकरा दिया। रामलीलाओं के माध्यम से उन्होंने भारत में जिस जनचेतना को जागरूक किया, वह हर भारतीय के लिए प्रेरणा बनी।

श्रीरामकथा, श्रीमद्भागवत महापुराण, शिव महापुराण की कथा भारत की कथा

मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीरामकथा, श्रीमद्भागवत महापुराण, शिव महापुराण की कथा भारत की कथा है। कोई फिल्म बनती है तो दो-चार, 10-15 दिन चलती है, फिर लोग भूल जाते हैं। लेकिन भारत की दिव्य चेतना, आध्यात्मिक-सांस्कृतिक प्रभाव है कि संतों की कथा में लाखों श्रद्धालु उपस्थित होते हैं।

हर सनातन धर्मावलंबी जानता है कि अगला प्रसंग कौन सा आने वाला है, फिर भी कथा व्यास इन प्रसंगों के साथ समसामयिकता को जोड़कर मजबूती के साथ प्रस्तुत करते हैं तो लाखों श्रद्धालु घंटों बैठकर उसे श्रवण-अंगीकार करते हैं और उससे जीवन पथ को आलोकित करते हुए आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

हर गांव में रामलीला, जाति या मत-संप्रदाय का भेद नहीं होता

सीएम योगी ने कहा कि अक्टूबर से दिसंबर तक उत्तर भारत के हर गांव में देर रात तक रामलीला होती है। इसमें सरकार सहयोग नहीं करती। गांव के लोग ही चंदा एकत्र करते हैं। रामलीला के पात्र भी गांव के लोग बनते हैं। पूरा गांव एकजुट होकर रामलीला का मंचन करता है और इसके संवाद के माध्यम से श्रीराम के साथ अपना तारतम्य स्थापित करता है। उसमें जाति, मत, संप्रदाय का भी भेद नहीं होता है। एक जगह पर पुरुष, महिला, बुजुर्गों समेत पूरा गांव एकजुट होता है। मध्यकाल में इसकी शुरुआत संत तुलसीदास ने की थी।

सीएम ने कहा कि संत रामानंदाचार्य ने अलग-अलग जाति के महापुरुषों को शिष्य बनाया। संत रैदास, कबीर उन्हीं के शिष्य हैं। इसी परंपरा की 22वीं पीढ़ी में जगद्गुरु मलूकदास जी महाराज का अविर्भाव होता है। इस परंपरा ने पंथ, संप्रदाय के बारे में नहीं, बल्कि भारत और सनातन धर्म के बारे में सोचा, तब भारत झंझावतों से मुक्त हो पाया है।

मलूकदास जी ने गोरक्षा व भूखे को अन्न देने को बनाया जीवन का मिशन

मुख्यमंत्री ने कहा कि जगद्गुरु मलूकदास जी ने मानवता के आंसू पोंछने, गोरक्षा, भूखे को अन्न देने को जीवन का मिशन बनाया था। उन्होंने उपदेश दिया कि दूसरे के दुख को अपना समझने वाला व्यक्ति ही सच्चा है। जीव के प्रति करुणा का भाव ही संतों की परंपरा है। 451 वर्ष पहले जो दिव्य ज्योति प्रयागराज की धरती पर प्रकट हुई, उसने संपूर्ण भारत को आलोकित किया।

ब्रजभूमि आकर उन्होंने वैष्णव परंपरा की अलख जगाने का दायित्व अपने हाथों में लिया। आज मलूकदास जी महाराज की दिव्य समाधि के दर्शन के समय भी उनके दिव्य तेज का अहसास हुआ। उनके प्रकटीकरण व दिव्य समाधि लेने की तिथि (वैशाख कृष्ण पंचमी) एक ही है।

कृष्ण कन्हैया व राधारानी के दिव्य तेज से आलोकित है ब्रजभूमि

सीएम ने कहा कि ब्रजभूमि कृष्ण कन्हैया व राधारानी के दिव्य तेज से आलोकित है। हर सनातन धर्मावलंबी यहां के रज-रज में श्रीकृष्ण कन्हैया व राधा रानी का दर्शन करता है। यहां के दिव्य तीर्थ मथुरा, वृंदावन, गोवर्धन, बरसाना, गोकुल, नंदगांव, बलदेव हमें प्रेरणा प्रदान करते हैं।

डबल इंजन सरकार ब्रज तीर्थ विकास परिषद का गठन कर संतों के मार्गदर्शन में यहां की परंपरा व विरासत के संरक्षण व उन्नयन का प्रयास कर रही है। हमारा मानना है कि विकास तभी सार्थक है, जब विरासत रहेगी और आज दोनों कार्य साथ चल रहे हैं।

1916 में राष्ट्रपिता ने देखी थी काशी की दुर्दशा

सीएम ने कहा कि पीएम मोदी के मार्गदर्शन में काशी विश्वनाथ धाम दिव्य बन गया है। 1916 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी काशी हिंदू विश्वविद्यालय के उद्घाटन कार्यक्रम में आए थे तो उनके मन में काशी की महिमा का दर्शन करने का भाव आया। तब उन्होंने यहां की दुर्दशा का जिक्र किया। उन्होंने चारों तरफ गंदगी, संकरी गलियां, भिनभिनाती मक्खियों को देखा तो कहा कि कोई जीव यहां गिर जाए तो लगेगा कि नरक में आ गया है।

कभी 50 लोग नहीं कर पाते थे काशी विश्वनाथ धाम में दर्शन, आज 50 हजार लोग कर सकते हैं, यही है डबल इंजन की गति
सीएम ने कहा कि 2017 में मुख्यमंत्री बनने पर जब मैं काशी गया तो उस समय भी एक साथ 50 लोग दर्शन नहीं कर सकते थे। गली संकरी थी, लेकिन आज एक साथ 50 हजार श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर सकते हैं। 50 से 50 हजार पहुंचने की यही यात्रा डबल इंजन की गति है। यह गति जब प्रगति की ओर जाती है तो उत्थान करती है और यही सनातन धर्म है। यह गति जब नकारात्मक और सनातन विरोधी होती है तो उसकी दुर्गति होती है। हम इसे प्रगति की ओर ले जा रहे हैं।

माघ मेला, कुम्भ, महाकुम्भ की धरती है प्रयागराज

सीएम योगी ने कहा कि संत जगद्गुरु मलूकदास जी महाराज ने वैष्णव परंपरा की अलग जगाने का दायित्व अपने हाथ में लिया। प्रयागराज जगद्गुरु रामानंदाचार्य की भी जन्मभूमि है। इस धरती पर मां गंगा, यमुना व सरस्वती की त्रिवेणी में आस्था की डुबकी लगाने के लिए हर सनातन धर्मावलंबी प्रतीक्षा करता है। यह माघ मेला, कुम्भ, महाकुम्भ की धरती है। प्रयागराज में जन्म लेकर वहां से विभिन्न तीर्थों (ब्रज, अयोध्या, चित्रकूट, प्रयागराज, काशी, जगन्नाथपुरी) में जाकर आध्यात्मिक व सांस्कृतिक चेतना को जागरूक करने का कार्य किया गया।

इस दौरान मलूक पीठ के पीठाधीश्वर स्वामी श्री राजेंद्र दास देवाचार्य महाराज, संत बलराम दास देवाचार्य जी महाराज, संत फूलडोल बिहारी दास जी, राम वृषपाल दास जी, किशोर देवदास देव जी, रसिक माधव दास जी, किशोर देवदास जी, मदन मोहन दास जी, रसिया बाबा जी महाराज, महंत रामलखन दास जी, कैबिनेट मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण, राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी आदि मौजूद रहे।

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