डेली संवाद, चंडीगढ़/मोहाली। Punjab News: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मोहाली स्थित रॉयल एस्टेट ग्रुप (Royal Estate Group) के प्रमोटर प्रवीण कंसल और नीरज कंसल को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया है। इससे पहले ईडी ने पिछले सप्ताह चंडीगढ़ और मोहाली में कंपनी से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। दोनों प्रमोटरों पर मोहाली में प्रोजेक्ट के लिए गलत तरीके से CLU (Change of Land Use) लेने और जमीन की खरीद-फरोख्त में अनियमितताओं के गंभीर आरोप हैं।
इस मामले में मोहाली (Mohali) विजिलेंस (Punjab Vigilance) पहले ही प्रवीण कंसल, नीरज कंसल, इंदु कंसल और नायब तहसीलदार तरसेम मित्तल के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कर चुकी है। आरोप है कि सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत से नियमों का उल्लंघन कर जमीन से जुड़े दस्तावेजों में हेरफेर किया गया।
प्रमोटरों को कोई राहत नहीं
मामला तब और गंभीर हो गया जब इस केस में सुप्रीम कोर्ट से भी प्रमोटरों को कोई राहत नहीं मिली। हाई कोर्ट ने पहले ही आदेश दिए थे कि आरोपियों को कस्टडी में लेकर पूछताछ की जाए। इसके बाद कंपनी के प्रमोटर कथित रूप से फरार हो गए थे, जिसके चलते पुलिस उनकी तलाश कर रही थी।
यह पूरा विवाद 11 जून को दर्ज हुए उस केस से जुड़ा है जिसमें आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने फर्जी दस्तावेज तैयार करने और जालसाजी के आरोपों में एफआईआर दर्ज की थी। शिकायतकर्ताओं नरेश कुमार गर्ग और प्यारे लाल गर्ग ने आरोप लगाया कि 2011 में खरीदी गई संपत्ति को 2013 में उनकी जानकारी और सहमति के बिना एक कंपनी के नाम ट्रांसफर कर दिया गया।
फर्जी दस्तावेजों के जरिए मालिकाना हक बदला
शिकायत के अनुसार यह ट्रांसफर तथाकथित सप्लीमेंट्री सेल डीड के आधार पर किया गया, जिसे बाद में फर्जी बोर्ड प्रस्ताव पर आधारित बताया गया। आरोप है कि इस पूरे ट्रांजैक्शन में सरकारी अधिकारी की भी मिलीभगत रही और बिना नियमों के रजिस्ट्री कर दी गई। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि प्रमोटरों ने साजिश रचकर संपत्ति पर अवैध रूप से कब्जा किया और फर्जी दस्तावेजों के जरिए मालिकाना हक बदल दिया।
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वहीं कंपनी की ओर से कोर्ट में दलील दी गई कि यह कोई धोखाधड़ी नहीं बल्कि एक तकनीकी गलती थी। कंपनी का कहना है कि मूल सेल डीड में खरीदार के नाम में त्रुटि हो गई थी, जिसे बाद में बोर्ड प्रस्ताव के जरिए सही किया गया। प्रमोटरों का दावा है कि शिकायतकर्ता इस पूरी प्रक्रिया से अवगत थे और यह एक सिविल विवाद है, न कि आपराधिक मामला। उन्होंने यह भी कहा कि वे जांच में शामिल हो चुके हैं, इसलिए कस्टडी की आवश्यकता नहीं है।
दूसरी ओर सरकारी पक्ष और शिकायतकर्ताओं ने आरोपों को गंभीर बताते हुए कहा कि यह सुनियोजित साजिश का मामला है। उनका कहना है कि सप्लीमेंट्री सेल डीड के जरिए मालिकाना हक बदलना कानूनी रूप से मान्य नहीं है और सभी मालिकों की मौजूदगी के बिना ऐसा ट्रांजैक्शन अवैध है।
रॉयल एस्टेट ग्रुप की मुश्किलें
हाई कोर्ट ने भी अपने आदेश में कहा था कि प्रथम दृष्टया मामला गंभीर है और दस्तावेजों से धोखाधड़ी व साजिश के संकेत मिलते हैं। कोर्ट ने यह भी माना कि बिना मालिक की सहमति के संपत्ति ट्रांसफर की गई और आवश्यक मूल दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए। इसके आधार पर अदालत ने आरोपियों की कस्टोडियल पूछताछ को उचित ठहराया था।
अब ईडी की गिरफ्तारी के बाद मामले की जांच और तेज हो गई है, जिससे रॉयल एस्टेट ग्रुप की मुश्किलें और बढ़ती नजर आ रही हैं। इसके साथ ही इस ग्रुप से जुड़े तमाम प्रापर्टी डीलर, बिल्डर और कालोनाइजरों की मुश्किलें बढ़ने वाली है। इसमें जालंधर, मोहाली, पटियाला, खरड़ और लुधियाना के कुछ बड़े कालोनाइजर शामिल बताए जा रहे हैं। इडी फिलहाल इन कारोबारियों का कच्चा चिट्ठा इकट्ठा कर रही है।
