पुणेः एफडीए की ओर से ताबड़तोड़ कार्रवाई की गई। दरअसल, हाल ही में एफडीए ने अपने विशेष निरीक्षण अभियान के तहत होटल, कैफे और ढाबों के लाइसेंस रद्द कर दिए थे, जिसमें रैडिसन होटल भी शामिल था। वहीं रैडिसन होटल की ओर से एफडीए के इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। बॉम्बे हाईकोर्ट में नवी मुंबई के पार्क इन बाय रैडिसन होटल की याचिका पर सुनवाई हो रही थी, तभी कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र वी घुगे और एक अन्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने एफडीए को ये अहम बातें रखी। जस्टिस रविंद्र घुगे और जस्टिस गौतम अखंड की पीठ ने हल्के-फुल्के अंदाज़ में यह सवाल उठाया कि आखिर इस प्रकिया का मापदंड क्या होना चाहिए, जब चर्चा कीड़ों-मकोड़ों पर पहुंची तो पीठ ने मौखिक रूप से टिप्पणी करते हुए कहा, “पिछले सप्ताह मेरी मेज़ पर, बिल्कुल सामने, एक बड़ा कीड़ा बैठा था। अब हम क्या कर सकते हैं।
हम भारत में हैं। मैं अभी आपको एक मक्खी के बारे में बता रहा था, है न? अभी भी यहां एक मक्खी उड़ रही है। हम भारत में हैं; हमें व्यावहारिक और यथार्थवादी दृष्टिकोण अपनाना होगा।” बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक होटल का फूड लाइसेंस निरस्त करने के मामले पर अहम टिप्पणी की। उन्होंने महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कोर्ट ने कहा, हम भारत में हैं। खाद्य सुरक्षा के नियम लागू करते समय हमें व्यावहारिक (रियलिस्टिक) दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। हालांकि अदालत ने यह भी कहा कि जन स्वास्थ्य से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
दरअसल, एफडीए की ओर से होटल में अचानक निरीक्षण किया था। जांच के दौरान होटल में दो कीड़े मिले, ऐसे में एफडीए ने होटल का फूड लाइसेंस निलंबित कर दिया था। यह होटल उन्हीं 100 होटलों में शामिल था जिनके लाइसेंस एफडीए ने निलंबित किए। होटल की ओर से पेश वकील ने दलील दी, “मुद्दा एक कॉकरोच या 10 कॉकरोच का नहीं है। लेकिन केवल एक चेकलिस्ट के आधार पर लाइसेंस निलंबित नहीं किया जा सकता।” वकील ने यह भी तर्क दिया कि एफडीए ने लाइसेंस निलंबित करने जैसी कार्रवाई से पहले अपने फैसले के समर्थन में लिखित रूप में पर्याप्त और ठोस कारण दर्ज नहीं किए थे। इस मामले को लेकर अगली सुनवाई शुक्रवार को होगी।








