- पाचन पर बुरा असर
- चटनी में अनहेल्दी फैट्स
- वजन बढ़ने का खतरा


Donkey Milk Soap: आजकल हर कोई चाहता है कि उसकी त्वचा (स्किन) चमकदार और जवां दिखे। इसके लिए लोग तरह-तरह के तरीके अपनाते हैं-कोई महंगी क्रीम्स खरीदता है, तो कोई घरेलू नुस्खों का सहारा लेता है। भारत में जहां लोग आयुर्वेद और प्राकृतिक चीजों पर भरोसा करते हैं, वहीं अब दुनिया के कुछ देशों में एक अनोखा ब्यूटी ट्रेंड देखने को मिल रहा है-गधी के दूध से बना साबुन (Donkey Milk Soap)।
क्या है गधी के दूध वाला साबुन ट्रेंड?
पहली बार सुनकर यह थोड़ा अजीब लगता है, लेकिन यह सच है कि अब दुबई, जॉर्डन और कई अन्य देशों में लोग गधी के दूध से बने साबुन का इस्तेमाल कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर इस ट्रेंड की खूब चर्चा है। लोग दावा करते हैं कि यह साबुन स्किन को ग्लोइंग बनाता है, झुर्रियों को कम करता है, और उम्र बढ़ने के असर (एजिंग इफेक्ट) को धीमा करता है।
जॉर्डन से शुरू हुई यह अनोखी पहल
गल्फ न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, Attan Donkey Milk Soap नाम की एक कंपनी ने जॉर्डन की राजधानी अम्मान से लगभग 35 किलोमीटर दूर मदाबा (Madaba) नाम के इलाके में इस साबुन का उत्पादन शुरू किया है।
कंपनी के पास 12 गधी हैं और इन्हीं के दूध से साबुन तैयार किया जाता है। शुरुआत में जब इस साबुन की बात सामने आई, तो लोग इसे मजाक समझने लगे। लेकिन जब लोगों ने इसे इस्तेमाल किया, तो उन्हें इसके फायदे महसूस हुए। अब हालात ऐसे हैं कि इसकी डिमांड तेजी से बढ़ रही है और विदेशों से भी ऑर्डर आ रहे हैं।
पूरी तरह नेचुरल और केमिकल-फ्री साबुन
कंपनी का कहना है कि उनका साबुन पूरी तरह से प्राकृतिक (Natural) और केमिकल-फ्री (Chemical-Free) है।इसमें किसी भी तरह का हानिकारक पदार्थ नहीं डाला जाता। लोग बताते हैं कि यह साबुन त्वचा को नर्म और मुलायम बनाता है और चेहरे की चमक बढ़ाता है।
क्यों खास है गधी का दूध?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, गधी के दूध में प्रोटीन, मिनरल्स और विटामिन्स की भरपूर मात्रा होती है। ये तत्व त्वचा को मॉइस्चराइज रखते हैं और उसे ड्राई होने से बचाते हैं। साथ ही, इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स त्वचा को सूरज की किरणों, प्रदूषण और झुर्रियों से बचाते हैं। यही वजह है कि यह साबुन एजिंग की प्रक्रिया को धीमा करता है।
क्या है एक्सपर्ट्स की राय…
अम्मान के एक ब्यूटी सेंटर की डाइटिशियन बताती हैं कि गधी के दूध में मैग्नीशियम, कॉपर, सोडियम, मैंगनीज, जिंक, कैल्शियम और आयरन जैसे जरूरी तत्व पाए जाते हैं, जो स्किन को पोषण देते हैं और उसे हेल्दी बनाए रखते हैं। उनके मुताबिक, इसमें पाया जाने वाला व्हे प्रोटीन (Whey Protein) भी बहुत फायदेमंद होता है।
इसमें एंटीमाइक्रोबियल गुण होते हैं, यानी यह त्वचा पर वायरस और बैक्टीरिया को पनपने से रोकता है। इससे स्किन संक्रमण (इन्फेक्शन) से सुरक्षित रहती है और स्वस्थ और चमकदार दिखती है।

दुनिया भर में लोग अपनी उम्र बढ़ाने के लिये अच्छा खान-पान व व्याम करते हैं। साथ ही वैज्ञानिक भी इस खोज में हमेशा शोध करते रहते हैं, कि इंसानों की उम्र 50 से 100 साल नहीं, बल्कि 150 साल तक कर दिया जाए। वहीं, चीन के वैज्ञानिक ऐसी ही एक दवा पर काम कर रहे हैं जो उम्र बढ़ाने का दावा करती है। वैज्ञानिक ने यह दवा अंगूर के बीज से निकले एक प्राकृतिक तत्व पर आधारित है। लेकिन वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है की यह अभी सिर्फ दावा है, इंसानों पर टेस्टिंग अभी भी बाकी है।
कंपनी का दावा- उम्र बढ़ने का प्रोसेस रुकेगा
कंपनी लॉनवी बायोसाइंसेज इस दवा पर रिसर्च कर रही है। दवा का मेन इंग्रीडिएंट प्रोस्यानिडिन सी1 (PCC1) है, जो अंगूर के बीज के अर्क में मिलता है। कंपनी ने कहा कि यह दवा शरीर के कमजोर टिश्यू को चुनिंदा तरीके से खत्म करेगी, जबकि हैल्थी टिश्यू को प्रोटेक्ट करेगी। इससे उम्र बढ़ने का प्रोसेस रुकेगा और लाइफ लंबी हो जाएगी।
चूहों पर किया गया सफल टेस्टिंग
यह दावा 2021 में नेचर मेटाबॉलिज्म जर्नल में छपी एक स्टडी पर आधारित है। चूहों पर किए गए टेस्ट में PCC1 ने कमाल दिखाया। इसमें पुराने टिश्यू को चुनिंदा तरीके से खत्म किया। हैल्थी टिश्यू को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। दवा लेने वाले चूहों की जिंदगी औसतन 9% ज्यादा लंबी हुई। इलाज शुरू होने के बाद की उम्र गिनें तो 64.2% ज्यादा हुई। कंपनी अब इसी तकनीक को इंसानों के लिए गोली के रूप में तैयार कर रही है।
वैज्ञानिकों ने दी ये चेतावनी
विशेषज्ञ ने चेतावनी देते हुए कहा कि चूहों पर टेस्टिंग का रिजल्ट सही आया है, लेकिन इंसानों पर इसे अप्लाई करना अभी सही नहीं होगा। दवा की सुरक्षा और इफेक्टिवनेस साबित करने के लिए बड़े क्लिनिकल ट्रायल जरूरी है।
रिसर्च को मिली राष्ट्रीय प्राथमिकता
सरकार और निजी कंपनियां लंबी उम्र की रिसर्च में भारी निवेश कर रही हैं। दुनिया भर में एंटी-एजिंग स्टडीज बढ़ रही हैं, रिसर्चों ने बताया कि अभी इस रिसर्च को सफलता मिलने में सालों लगेंगे।



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For years, there’s been something about Zomato that made me uneasy. We made eating out and ordering in easier than ever, but we never really helped people truly eat better. Yes, you could find a salad or a smoothie bowl, but the truth is, if you wanted to eat genuinely… pic.twitter.com/zBmnI1c0th
— Deepinder Goyal (@deepigoyal) September 29, 2025