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  • दीपक राठौर के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री से मिला

    दीपक राठौर के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री से मिला

    शिमला: हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष दीपक राठौर के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने आज यहां मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू से भेंट कर उन्हें उपाध्यक्ष नियुक्त करने के लिए आभार व्यक्त किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि दीपक राठौर काफी लम्बे समय से संगठन के साथ जुड़े हैं और विभिन्न पदों पर कार्य किया है। उन्होंने कहा कि हाईकमान के निर्देश पर उन्हें उपाध्यक्ष बनाया गया है और एक महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी दी गई है। वह कांग्रेस विचारधारा से जुड़े हैं और आम परिवार से निकलर आए हैं। उन्होंने दीपक राठौर को उनके सफल कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं दीं।

    वहीं दीपक राठौर ने कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने संगठन के प्रति समर्पित भाव से काम किया है इसीलिए वे आज प्रदेश के मुख्यमंत्री के पद पर पहुंचे हैं। मुख्यमंत्री ने प्राकृतिक और राजनीतिक आपदाओं का सफलतापूर्वक सामना किया और वर्ष 2027 में भी वह एक बार फिर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनेंगे। उन्होंने कहा कि डॉ. वाई.एस. परमार के बाद वह प्रदेश के दूसरे मुख्यमंत्री होंगे जो मिशन रिपीट करने में कामयाब होंगे। इस अवसर पर विधायक सुदर्शन बबलू और सुरेश कुमार, हिमाचल प्रदेश वन विकास निगम के उपाध्यक्ष केहर सिंह खाची भी उपस्थित थे।

     

     

  • कांग्रेस का राम मंदिर चंदा चोरी के विरुद्ध हल्ला बोल, मुख्यमंत्री के नेतृत्व में किया प्रदर्शन

    कांग्रेस का राम मंदिर चंदा चोरी के विरुद्ध हल्ला बोल, मुख्यमंत्री के नेतृत्व में किया प्रदर्शन

    शिमला: अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी के मामले में आज प्रदेश कांग्रेस ने सांकेतिक प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इंदिरा गांधी खेल परिसर से राम बाजार राम मंदिर तक प्रदर्शन किया और नारेबाजी की। कांग्रेस कार्यकर्ताओं के जय श्रीराम के नारों से पूरा शिमला गूंज उठा।

    इसके बाद मुख्यमंत्री, मंत्रियों, विधायकों ने राम मंदिर में पूजा-अर्चना और हवन भी किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा ने राम मंदिर का राजनीतिकरण किया है। करोड़ों लोगों ने राम मंदिर के निर्माण के लिए अपनी श्रद्धानुसार दान दिया। उन्होंने कहा कि हम हिन्दू हैं तथा हमारी भगवान राम में अथाह आस्था है। जब मंदिर का निर्माण हो रहा था, तब उनके पास भी मंदिर निर्माण के लिए चंदा एकत्रित करने के लिए राम भक्त आए थे तथा मैंने अपनी श्रद्वानुसार इसके लिए चंदा दान किया। उन्होंने कहा कि जब अयोध्या में राम मंदिर का उद्घाटन हो रहा था, तब पूरे देश में आधे दिन की छुट्टी दी गई थी। परन्तु हिमाचल प्रदेश सरकार ने पूरे दिन का अवकाश प्रदान किया क्योंकि भगवान राम हमारे अराध्य हैं तथा भगवान राम के आदर्शों पर हम चलते हैं। उन्होंने कहा कि हमें जो भी उनसे प्ररेणा लेनी है उसे अपनाने की हमने कोशिश की।

    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राम के असली भक्त, उनके नाम पर राजनीति नहीं करते। भगवान राम का मुख्य उद्देश्य इंसानियत की सेवा करना है। हिन्दू संस्कृति सिखाती है कि सभी का सम्मान करो। उन्होंने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन के बाद करोड़ों लोगों ने अपनी क्षमतानुसार जेवर तथा पैसे के रूप में चंदा दान किया। भगवान राम द्वारा जो रास्ता दिखाया है उसको अपनाएं। लेकिन राम मंदिर में जो चंदा चोर बैठे हैं, इन चोरों ने चंदे की चोरी ही नहीं की है, बल्कि रामभक्तों की आस्था की चोरी की है। जहां आस्था की चोरी होती है, वहां भारत के सभी नागरिक इसके विरुद्ध खड़े हो जाते हैं। यह एक भावनात्मक मुद्दा है तथा मंत्रिमंडल के सभी सदस्यों ने राम मंदिर में पूजा-अर्चना कर भाजपा के जिन कार्यकर्त्ताओं ने राम मंदिर के चंदे की चोरी की है, उन्हें सद्बुद्धि देने की प्रार्थना की है। ऐसे लोग जो राम और धर्म के नाम पर राजनीति करते हैं तथा चंदा इकट्ठा करते हैं, ऐसे लोगों को सद्बुद्धि मिलनी चाहिए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राम मंदिर का श्रेय सबसे पहले पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी को जाना चाहिए जिन्होंने राम मंदिर का ताला खोला था। उन्होंने कहा कि हम सबमें भगवान राम के प्रति आस्था है, परन्तु हम भावना के नाम पर राजनीति नहीं करना चाहते। हम हिन्दू संस्कृति में विश्वास रखते हैं तथा सभी धर्र्माे का सम्मान करते हैं, जबकि भाजपा केवल राम के नाम पर राजनीति करती है तथा हम भगवान राम के ईमानदार आदर्शों पर चलने वाले हैं।

    इसके उपरांत, मुख्यमंत्री ने जाखू मंदिर जाकर पूजा-अर्चना की और हनुमान चालीसा का पाठ भी किया। इस अवसर पर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष विनय कुमार, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल, उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह, लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह, नगर नियोजन मंत्री राजेश धर्माणी, उप-मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया, विधायक हरीश जनारथा, विनोद सुल्तानपुरी एवं सुदर्शन बबलू, प्रदेश कांग्रेस महासचिव विनोद जिंटा, महापौर सुरेंद्र चौहान, उप-महापौर उमा कौशल, बोर्डों एवं निगमों के चेयरमैन और उपाध्यक्ष, कांग्रेस के विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी और वरिष्ठ कार्यकर्ता उपस्थित थे।

  • मुख्यमंत्री ने धर्मशाला में राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के नए कार्यालय का शुभारम्भ किया

    मुख्यमंत्री ने धर्मशाला में राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के नए कार्यालय का शुभारम्भ किया

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज प्रदेश सचिवालय से वर्चुअल माध्यम से धर्मशाला में राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष के नए कार्यालय का शुभारम्भ किया। यह कार्यालय कुछ समय पहले ही शिमला से धर्मशाला स्थानांतरित किया गया है।
    मुख्यमंत्री ने कांगड़ा जिले के लोगों को इस नई सुविधा के लिए बधाई देते हुए कहा कि कांगड़ा तथा आसपास के जिलों में अन्य पिछड़ा वर्ग की बड़ी आबादी निवास करती है। आयोग का कार्यालय धर्मशाला स्थानांतरित होने से लोगों को अब अपने कार्य के लिए शिमला नहीं आना पड़ेगा, जिससे उनके समय और धन दोनों की बचत होगी तथा आयोग की सेवाएं शीघ्रता और सरलतापूर्वक मिलेगी।
    मुख्यमंत्री ने उपायुक्त कांगड़ा को धर्मशाला में हिमाचल प्रदेश रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (रेरा) का कार्यालय भी शीघ्र खोलने के लिए आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

    उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने कांगड़ा जिले को प्रदेश की पर्यटन राजधानी घोषित किया है और इसी दिशा में कई सरकारी कार्यालयों को कांगड़ा स्थानांतरित किया जा रहा है। आने वाले समय में भी अन्य सरकारी कार्यालयों को कांगड़ा जिले में स्थानांतरित करने की योजना है। राज्य सरकार शिमला जिले के डोडरा क्वार क्षेत्र को अन्य पिछड़ा वर्ग का दर्जा तथा कांगड़ा जिले के बड़ा भंगाल क्षेत्र को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिलवाने के लिए गंभीर प्रयास कर रही है।

    इससे पूर्व, राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष प्रभात चौधरी ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया और आयोग का कार्यालय धर्मशाला स्थानांतरित करने के लिए उनका आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से कांगड़ा तथा आसपास के जिलों के ओबीसी समुदाय के लोगों को आयोग की सेवाओं तक पहुंच आसान होगी और क्षेत्र के लोग लाभान्वित होंगे। इस अवसर पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष विनय कुमार, विधायक सुरेश कुमार, विनोद सुल्तानपुरी एवं सुदर्शन बबलू तथा पूर्व विधायक सतपाल रायजादा शिमला में मुख्यमंत्री के साथ उपस्थित थे, जबकि आयोग के सदस्य राकेश चौधरी, अधिवक्ता कश्मीर सिंह भारती एवं राजीव राणा तथा उपायुक्त हेमराज बैरवा धर्मशाला से वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम में शामिल हुए।

  • मुख्यमंत्री ने सुजानपुर विधानसभा क्षेत्र में 33/11 केवी विद्युत उप-केन्द्र का शुभारम्भ किया

    मुख्यमंत्री ने सुजानपुर विधानसभा क्षेत्र में 33/11 केवी विद्युत उप-केन्द्र का शुभारम्भ किया

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज प्रदेश सचिवालय से 7.54 करोड़ रुपये की लागत से हमीरपुर जिले के सुजानपुर विधानसभा क्षेत्र में निर्मित 33/11 के.वी. विद्युत उप-केन्द्र पटलांदर (अंसला) का वर्चुअल माध्यम से शुभारम्भ किया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि इस परियोजना के तहत चबुतरा से अंसला तक लगभग 7.2 किलोमीटर लंबी 33 के.वी. एच.टी.एस.सी. लाइन बिछाई गई है, जिससे उप-केन्द्र को सुदृढ़ एवं निरंतर विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित होगी। इससे सुजानपुर क्षेत्र की 16 ग्राम पंचायतों-पटलांदर, रंगर, चौरी, अंसला, भगोल, चमियाना, दुहाक, सौद, भटेरा, पनोह, धैल, जियार कसीरी, पीपल, टिक्करु, सपाहल तथा आसपास के क्षेत्रों के लगभग 14,000 लोगों को गुणवत्तापूर्ण एवं निरंतर विद्युत आपूर्ति का लाभ प्राप्त होगा।

    उन्होंने कहा कि इस विद्युत उप-केन्द्र से 11 के.वी. कोट चौरी, सुजानपुर, पटलांदर तथा पलाई फीडरों को विद्युत आपूर्ति प्रदान की जाएगी। वैकल्पिक विद्युत आपूर्ति की व्यवस्था के लिए इस उप-केन्द्र को 33 के.वी. विद्युत उप-केन्द्र टौणी देवी तथा 33 के.वी. विद्युत उप-केन्द्र सुजानपुर से जोड़ा गया है, जिससे किसी भी आपात स्थिति में निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी। सुक्खू ने कहा कि इससे क्षेत्र में भविष्य में बढ़ने वाली विद्युत मांग को पूरा करने में सहायता मिलेगी तथा लाइन की लंबाई कम होने तथा फीडर के आपस में जुड़े होने के कारण विद्युत हानि में भी कमी आएगी। उन्होंने कहा कि इससे क्षेत्र में लंबे समय से चली आ रही कम वोल्टेज की समस्या का भी प्रभावी समाधान होगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि विधायक रणजीत सिंह राणा समय-समय पर क्षेत्र की समस्याओं को लेकर मेरे पास आते थे और राज्य सरकार ने इस कार्य को पूर्ण करने के लिए पर्याप्त बजट का प्रावधान किया। उन्होंने कहा कि वह व्यक्तिगत तौर पर सुजानपुर जाकर इस परियोजना का शुभारम्भ करना चाहते थे लेकिन बरसात के कारण यह संभव नहीं हो पाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य के एक समान विकास को सुनिश्चित कर रही है।

    सुजानपुर में उपस्थित विधायक रणजीत सिंह राणा ने इस परियोजना के शुभारम्भ के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि क्षेत्र की 16 पंचायतें इससे लाभान्वित होंगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने सुजानपुर विधानसभा क्षेत्र के विकास के लिए कोई कमी नहीं छोड़ी है। उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह, अध्यक्ष राज्य कांग्रेस कमेटी विनय कुमार, उप-मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया, विधायक विनोद सुल्तानपुरी, सुरेश कुमार एवं सुदर्शन बबलू, पूर्व मंत्री राम लाल ठाकुर, प्रबन्ध निदेशक, हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड आदित्य नेगी शिमला में उपस्थित थे जबकि उपायुक्त हमीरपुर गंधर्वा राठौड़ तथा पुलिस अधीक्षक बलबीर सिंह वर्चुअल माध्यम से सुजानपुर, हमीरपुर से इस कार्यक्रम में शामिल हुए।

  • राजेश धर्माणी ने हिमुडा को अपनी परियोजनाओं में तेजी लाने के निर्देश दिए

    राजेश धर्माणी ने हिमुडा को अपनी परियोजनाओं में तेजी लाने के निर्देश दिए

    शिमला : आवास, नगर एवं ग्राम नियोजन मंत्री राजेश धर्माणी ने आज हिमाचल प्रदेश आवास एवं शहरी विकास प्राधिकरण (हिमुडा) को प्रदेश में कार्यान्वित की जा रही तथा प्रस्तावित सभी विकास परियोजनाओं के कार्यान्वयन में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने परियोजना कार्य में पूर्ण  पारदर्शिता, दक्षता और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। धर्माणी आज यहां हिमुडा निदेशक मंडल की 59वीं बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने प्रदेश में हिमुडा द्वारा संचालित विभिन्न आवास एवं आधारभूत ढांचा परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी परियोजनाओं को समयबद्ध पूरा किया जाए ताकि लोगों को गुणवत्तापूर्ण आवास और बेहतर शहरी सुविधाओं का लाभ जल्द सुनिश्चित किया जा सके। मंत्री ने अधिकारियों को प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर हिमुडा की आवासीय एवं व्यावसायिक संपत्तियों की नीलामी प्रक्रिया का पारदर्शी निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण को कारोबार में सुगमता बढ़ावा देने के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाने, नागरिक हितैषी व्यवस्था अपनाने तथा लोगों की आकांक्षाओं के अनुरूप किफायती आवास विकसित करने पर विशेष ध्यान देना चाहिए। बैठक में 251 करोड़ रुपये की वार्षिक कार्य योजना एवं बजट अनुमान को मंजूरी दी गई। इसमें भविष्य की आवास एवं शहरी विकास परियोजनाओं के लिए भूमि खरीद के लिए 52 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। मंत्री ने कहा कि सुनियोजित भूमि अधिग्रहण से आने वाले वर्षों में हिमुडा की योजनाबद्ध विकास परियोजनाओं को और मजबूती मिलेगी। निदेशक मंडल ने ऊना जिले के रक्कड़ फेज-4 स्थित हिमुडा कॉलोनी के लिए एकमुश्त समाधान (वन टाइम सेटलमेंट) नीति को भी मंजूरी प्रदान की। इससे पात्र आवंटियों को राहत मिलेगी तथा लंबे समय से लंबित मामलों के समाधान का मार्ग प्रशस्त होगा। बैठक में अवगत करवाया गया कि वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 117 करोड़ रुपये के बजट अनुमान के मुकाबले हिमुडा ने 200 करोड़ रुपये का कारोबार किया है, जो प्राधिकरण की बेहतर वित्तीय स्थिति और कार्य कुशलता को दर्शाता है। संस्थान की कार्यक्षमता को और मजबूत बनाने के लिए निदेशक मंडल ने हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग के नियमों के अनुरूप ठेकेदार पंजीकरण नियमों में संशोधन को मंजूरी दी। इसके अलावा, शिमला में निगम विहार स्थित हिमुडा मुख्यालय को आधुनिक कॉर्पोरेट स्वरूप प्रदान करने के प्रस्ताव को भी स्वीकृति दी गई, जिससे कार्यालय का कार्य वातावरण बेहतर होगा और आम लोगों को सेवाएं अधिक प्रभावी एवं सुगमता से उपलब्ध करवाई जा सकेगी। हिमुडा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुरेन्द्र वशिष्ठ ने बैठक में प्राधिकरण की उपलब्धियों, विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति तथा भविष्य की विकास योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। सचिव आवास अमरजीत सिंह, उपाध्यक्ष हिमुडा यशवंत छाजटा, विशेष सचिव (वित्त) विजयवर्धन तथा निदेशक मंडल के सरकारी एवं गैर-सरकारी सदस्य जितेन्द्र चंदेल, प्रदीप सूर्य और अभियंता राजेश बनियाल भी बैठक में उपस्थित थे।

  • मुख्यमंत्री ने कुल्लू, मंडी और चंडीगढ़ को जोड़ने वाली हवाई सेवाओं का शुभारंभ किया

    मुख्यमंत्री ने कुल्लू, मंडी और चंडीगढ़ को जोड़ने वाली हवाई सेवाओं का शुभारंभ किया

    शिमला : मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने आज अपने आधिकारिक आवास ‘ओकओवर’ से मंडी-चंडीगढ़ तथा कुल्लू-मंडी-चंडीगढ़ के बीच रोज़ाना चलने वाली हेलीकॉप्टर सेवाओं का वर्चुअल शुभारंभ किया। भारत सरकार की क्षेत्रीय संपर्क योजना के तहत मंडी-चंडीगढ़ हेलीकॉप्टर सेवा संचालित की जाएगी, जबकि गैर-आरसीएस (बाजार आधारित) मॉडल के तहत कुल्लू-मंडी-चंडीगढ़ के लिए हेरिटेज एविएशन प्राइवेट लिमिटेड द्वारा इस सेवा का संचालन किया जाएगा। कुल्लू से हेलीकॉप्टर की उड़ान प्रातः 9.00 बजे संचालित होगी और 9.10 पर मंडी पहुंचेगी। इसके बाद मंडी से 9.15 पर रवाना होकर हेलीकॉप्टर 9.45 पर चंडीगढ़ पहुंचेगा। वापसी की उड़ान चंडीगढ़ से सुबह 10.00 बजे होगी व 10.30 पर हेलीकॉप्टर मंडी पहुंचेगा तथा मंडी से 10.35 बजे प्रस्थान कर 10.45 बजे कुल्लू पहुंचेगा। ये सेवाएं नव निर्मित कांगनीधार (मंडी) हेलीपोर्ट से संचालित होंगी। आरसीएस-उड़ान योजना के तहत मंडी-चंडीगढ़ सेक्टर के लिए किराया 3,500 रुपये निर्धारित किया गया है, जबकि कुल्लू-मंडी-चंडीगढ़ सेक्टर के लिए किराया 8,500 रुपये तय किया गया है. आधुनिक यात्री सुविधाओं और आवश्यक अवसंरचना से सुसज्जित कांगनीधार हेलीपोर्ट हवाई सेवाओं के महत्त्वपूर्ण केन्द्र के रूप में स्थापित होगा।

    मंडी और कुल्लू जिलों के लोगों को हेलीकॉप्टर सेवाओं के शुभारंभ पर बधाई देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के दूर दराज और पहाड़ी क्षेत्रों में हवाई संपर्क को सुदृढ़ बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि इन हेलीकॉप्टर सेवाओं की शुरुआत के साथ हवाई संपर्क के क्षेत्र में एक और महत्त्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। इन सेवाओं से यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, आपातकालीन सेवाओं की क्षमता मजबूत होगी तथा स्थानीय निवासियों और पर्यटकों को बेहतर सुविधा प्राप्त होगी। ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार हेलीपोर्ट के विकास, क्षेत्रीय हवाई संपर्क के विस्तार तथा भारत सरकार एवं अन्य हितधारकों के सहयोग से आरसीएस-उड़ान योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से विमानन अधोसंरचना को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है।

    पर्यटन को बढ़ावा देने की राज्य सरकार की पहल को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक जिला मुख्यालय के साथ-साथ प्रमुख पर्यटन स्थलों पर भी हेलीपोर्ट का निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमीरपुर जिले के जसकोट, कांगड़ा जिले के रक्कड़ और पालमपुर तथा चंबा के हेलीपोर्ट का निर्माण कार्य अंतिम चरण पर है। इन हेलीपोर्ट के बनने से उच्च श्रेणी के पर्यटकों का हिमाचल प्रदेश में आगमन बढ़ेगा, जिससे स्थानीय लोगों के लिए आय और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। उन्होंने कहा कि ऊना में हेलीपोर्ट निर्माण के लिए राज्य सरकार ने धनराशि का प्रावधान किया है तथा नाहन और सोलन में भी हेलीपोर्ट बनाने पर विचार किया जा रहा है। इसके अलावा लाहौल-स्पीति जिले के रंगरीक में सेना के सहयोग से एक हेलीपोर्ट का निर्माण भी किया जा रहा है।

  • मुख्यमंत्री ने परमपावन दलाई लामा को जन्म दिवस पर दी शुभकामनाएं

    मुख्यमंत्री ने परमपावन दलाई लामा को जन्म दिवस पर दी शुभकामनाएं

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने तिब्बतियन सर्वोच्च आध्यात्मिक गुरू परमपावन दलाई लामा को उनके 91वें जन्म दिवस पर बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि दलाई लामा करुणा, अहिंसा, शांति और मानवीय मूल्यों के प्रतीक हैं तथा उनका पूरा जीवन, मानवता को प्रेम के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि दलाई लामा की उपस्थिति ने हिमाचल प्रदेश को विश्व के आध्यात्मिक मानचित्र पर विशेष पहचान दिलाई है। मुख्यमंत्री ने ईश्वर से उनके उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु की मंगलकामना की ताकि उनके विचार और शिक्षाएं आने वाली पीढ़ियों को मार्गदर्शन प्रदान करती रहें।

  • राज्यपाल ने विकसित भारत-2047 के निर्माण के लिए बौद्ध मूल्यों और आधुनिक विज्ञान पर दिया बल

    राज्यपाल ने विकसित भारत-2047 के निर्माण के लिए बौद्ध मूल्यों और आधुनिक विज्ञान पर दिया बल

    युवाओं से नालंदा परंपरा के मूल्यों का अनुसरण करने का आह्वान किया

    शिमलाः राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने कहा कि वर्तमान में पूरा विश्व हिंसा, असहिष्णुता, युद्ध, पर्यावरण संकट तथा नैतिक मूल्यों में कमी जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है, ऐसे समय में भगवान बुद्ध की करुणा, मध्यम मार्ग, अहिंसा और आत्म ज्ञान पर आधारित शिक्षाएं पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गई हैं। उन्होंने धम्मपद के शाश्वत संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि घृणा का अंत कभी घृणा से नहीं किया जा सकता, बल्कि केवल प्रेम और करुणा से इसे समाप्त किया जा सकता है और यही शाश्वत सत्य है। राज्यपाल ने आज बैजनाथ के ताशीजोंग में ‘फ्रॉम नालंदा टू हिमालयास्-दि अन ब्रोकन लिगेसी ऑफ द बुद्धिस्ट नॉलेज ट्रेडिशन’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि भाग लिया।

    इस अवसर पर गुप्ता ने कहा कि प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं था, बल्कि सम्पूर्ण विश्व के लिए ज्ञान का एक प्रकाश-स्तंभ था, जहां दर्शन, तर्कशास्त्र, चिकित्सा, व्याकरण, गणित और खगोल विज्ञान जैसे विषयों पर उच्च स्तरीय शोध कार्य किए जाते थे। उन्होंने कहा कि समय के साथ नालंदा का भौतिक स्वरूप भले ही नष्ट हो गया हो, लेकिन हिमालय में स्थित मठों, विहारों तथा बौद्ध संस्थानों ने भारतीय भाषाओं, संस्कृति, कला और अमूल्य पांडुलिपियों का संरक्षण कर इस महान विरासत को सदियों से जीवंत बनाए रखा है। भारतीय हिमालय वास्तव में नालंदा की जीवंत विरासत के वास्तविक संरक्षक हैं।


    राज्यपाल ने परिषद द्वारा मठों में राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान के पाठ्यक्रम को लागू करने की अनुपम पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह कदम पारंपरिक मठ शिक्षा और आधुनिक शिक्षा पद्धति के बीच एक सार्थक सेतु का कार्य करेगा, जिससे युवा भिक्षु एवं भिक्षुणियां अपनी आध्यात्मिक साधना को बनाए रखते हुए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त शैक्षणिक योग्यताएं अर्जित कर सकेंगे।

    परम पावन धर्मगुरू दलाई लामा के मार्गदर्शन में स्थापित परिषद के पदाधिकारियों के प्रयासों की सराहना करते हुए राज्यपाल ने देश के युवाओं से नालंदा परम्परा के मूल आदर्शों जिज्ञासा, तार्किक चिंतन, अनुशासन, करुणा और मानव सेवा से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को साकार करने के लिए आधुनिक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के साथ-साथ भारतीय ज्ञान परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और नैतिक मूल्यों को भी समान महत्व देना आवश्यक है।

    इस राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन इंडियन हिमालयन नालंदा बुद्धिस्ट ट्रेडिशन काउंसिल द्वारा खाम्पागर मठ, ताशीजोंग के सहयोग से किया गया है। संगोष्ठी में मठ शिक्षा के आधुनिकीकरण तथा वैश्विक चुनौतियों के समाधान में बौद्ध दर्शन की प्रासंगिकता पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।

    इस अवसर पर धर्म एवं संस्कृति मंत्री, सीटीए, धर्मशाला त्सेग्याल चुक्या द्रान्यी, खाम्पागर मठ के आध्यात्मिक प्रमुख खामत्रुल रिनपोछे, खेनपो छोयिंग लुंदुप, पालपुंग शेराबलिंग मठ से खेनपो पेमा नेगी, बैजनाथ के विधायक किशोरी लाल, एनआईओएस के निदेशक डॉ. राजीव कुमार सिंह, कांगड़ा के उपायुक्त हेमराज बैरवा, पुलिस अधीक्षक कांगड़ा कुलभूषण वर्मा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

  • मुख्यमंत्री ने एवरेस्ट विजेता रुचि ठाकुर को किया सम्मानित

    मुख्यमंत्री ने एवरेस्ट विजेता रुचि ठाकुर को किया सम्मानित

    उल्लेखनीय उपलब्धि पर एक लाख रुपये के पुरस्कार की घोषणा की

    शिमलाः जिला मंडी की तहसील करसोग की निवासी रुचि ठाकुर ने मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू से आज ओक ओवर में शिष्टाचार भेंट की। रुचि ठाकुर ने 21 मई, 2026 को माउंट एवरेस्ट पर फतेह हासिल की थी।  मुख्यमंत्री ने इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर रुचि ठाकुर को बधाई देते हुए कहा कि उनकी सफलता युवा पीढ़ी को दृढ़ संकल्प और साहस के साथ उत्कृष्टता हासिल करने के लिए प्रेरित करेगी।

    उन्होंने रुचि ठाकुर को सम्मानित किया तथा उनकी इस शानदार उपलब्धि के लिए एक लाख रुपये की नकद पुरस्कार राशि प्रदान करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की बेटियां विभिन्न क्षेत्रों में अपनी असाधारण प्रतिभा का लोहा मनवा रही है। उनकी उपलब्धियों से प्रदेश का नाम रोशन हो रहा है और वे समाज के लिए प्रेरणास्त्रोत है।

  • सुख-आश्रय के संरक्षण में जीवन के सबसे सुखद पलों का अनुभव कर रहे ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’

    सुख-आश्रय के संरक्षण में जीवन के सबसे सुखद पलों का अनुभव कर रहे ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’

    शिमला : जीवन में ऐसे अनेक अवसर आते हैं, जब व्यक्ति को केवल आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि अपनत्व, सुरक्षा और मार्गदर्शन की भी आवश्यकता होती है। अधिकांश लोगों के लिए यह सम्बल उनके माता-पिता देते हैं, लेकिन जिन बच्चों के सिर से बचपन में ही माता-पिता का साया उठ जाता है, उनके लिए जीवन की राह असमय ही कठिन हो जाती है। अपनापन, सुरक्षा और भविष्य के प्रति विश्वास जैसी मूलभूत भावनाएं भी उनके जीवन से दूर होती चली जाती हैं। हिमाचल प्रदेश में भी लगभग 6,000 ऐसे निराश्रित बच्चे थे, जिनके जीवन में माता-पिता का सहारा नहीं था और भविष्य को लेकर अनेक अनिश्चितताएं थीं। सीमित संसाधनों और असुरक्षित परिस्थितियों के कारण उनके लिए उच्च शिक्षा, सम्मानजनक जीवन और आत्मनिर्भर भविष्य के सपने देखना भी संभव नहीं था। इन बच्चों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने वर्तमान को सुरक्षित बनाना था, जबकि भविष्य की संभावनाएं उन्हें बहुत दूर दिखाई देती थीं।

    ऐसे बच्चों के जीवन में उस समय एक नई आशा का संचार हुआ, जब हिमाचल प्रदेश सरकार ने उनके संरक्षण और समग्र विकास का दायित्व अपने हाथों में लेने का निर्णय लिया। 11 दिसम्बर, 2022 को मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने प्रदेश की बागडोर सम्भालते ही यह संकल्प लिया कि समाज के सबसे संवेदनशील और वंचित वर्गों, विशेषकर निराश्रित बच्चों और महिलाओं, को सुरक्षा, सम्मान और अवसर प्रदान किए जाएंगे। यह संकल्प आगे चलकर एक ऐसी मानवीय पहल के रूप में चरितार्थ हुआ, जिसने हज़ारों बच्चों के जीवन की दिशा ही बदल दी। मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण करने के तुरन्त बाद शिमला में टूटीकंडी स्थित बालिका आश्रम पहुंचना केवल एक औपचारिक दौरा नहीं था, बल्कि यह साफ संदेश था कि प्रदेश सरकार निराश्रित बच्चों और बालिकाओं के साथ एक अभिभावक की तरह खड़ी है। आश्रम की बेटियों से संवाद कर मुख्यमंत्री ने उन्हें हर संभव सहयोग का भरोसा दिया, जिससे उनके मन में विश्वास और भविष्य के प्रति नई उम्मीद जागी।

    आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी करने के उपरान्त 28 फरवरी, 2023 को प्रदेश में मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना लागू की गई। यह योजना हज़ारों अनाथ और निराश्रित बच्चों के जीवन में सुरक्षा, सम्मान और आत्मविश्वास का आधार बनी। योजना के अन्तर्गत 27 वर्ष तक के लगभग 6,000 बच्चों को सरकार ने एक अभिभावक की तरह चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट के रूप में अपनाकर उनके पालन-पोषण, शिक्षा, कौशल विकास और आत्मनिर्भर भविष्य की जिम्मेदारी अपने ऊपर ली। सुख-आश्रय योजना ने इन बच्चों को केवल संरक्षण ही नहीं दिया, बल्कि उन्हें यह विश्वास भी दिया कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, उनके सपनों की उड़ान अब सीमित नहीं रहेगी। आज यह योजना हज़ारों बच्चों के लिए उस सुरक्षित कवच का पर्याय बन चुकी है, जहां उन्हें अपनापन, आगे बढ़ने के अपार अवसर और अपने सपनों को साकार करने का आत्मविश्वास एक साथ मिल रहा है।

    चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट के रूप में अपनाए गए प्रत्येक बच्चे की शिक्षा का सम्पूर्ण खर्च प्रदेश सरकार वहन कर रही है। परिवार में माता-पिता जिस प्रकार अपने बच्चों की आवश्यकताओं और छोटे-छोटे सपनों का ध्यान रखते हैं, उसी भावना के साथ सरकार उन्हें प्रतिमाह 4,000 रुपये जेब खर्च के रूप में भी प्रदान कर रही है। बाल एवं बालिका संस्थानों में रह रहे 14 वर्ष तक की आयु के बच्चों के खातों में प्रतिमाह 1,000 रुपये तथा 15 से 18 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के खातों में 2,500 रुपये प्रतिमाह जमा किए जा रहे हैं। बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी यह योजना विशेष रूप से कार्य कर रही है। अपना स्टार्ट-अप स्थापित करने के लिए उन्हें दो लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता का प्रावधान किया गया है। उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे ऐसे विद्यार्थी, जिन्हें छात्रावास की सुविधा उपलब्ध नहीं है, उन्हें आवास किराये के लिए प्रतिमाह 3,000 रुपये दिए जा रहे हैं। अपना घर बसाने के लिए तीन लाख रुपये की वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाई जा रही है तथा जिनके पास भूमि नहीं है, उन्हें सरकार द्वारा गृह निर्माण के लिए भूमि भी प्रदान की जा रही है।

    इसके अतिरिक्त, लाभार्थियों को 500 रुपये उत्सव भत्ता, 10,000 रुपये वस्त्र अनुदान तथा विवाह के लिए दो लाख रुपये का अनुदान भी दिया जा रहा है। उनके सर्वांगीण विकास को ध्यान में रखते हुए निःशुल्क करियर काउंसलिंग, प्रतियोगी एवं व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए कोचिंग की सुविधा भी उपलब्ध करवाई गई है। साथ ही, उन्हें देश के विभिन्न हिस्सों में शैक्षणिक भ्रमण पर भेजा जा रहा है, ताकि वे नए अनुभव प्राप्त कर व्यापक दुनिया से परिचित हो सकें। इसका सारा खर्च भी राज्य सरकार उठा रही है। मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से वर्ष 2023 से सितम्बर 2025 तक इसके अन्तर्गत लाभार्थियों पर लगभग 85.88 करोड़ रुपये व्यय किए गए हैं। राज्य सरकार कांगड़ा ज़िला के लुथान में लगभग 92.38 करोड़ रुपये की लागत से मुख्यमंत्री आदर्श ग्राम सुख-आश्रय परिसर का निर्माण कर रही है। यह आधुनिक आवासीय परिसर लगभग 400 आश्रितों के लिए सुरक्षित और सुविधासम्पन्न वातावरण उपलब्ध करेगा।

    यह योजना निराश्रित बच्चों को कॉन्वेंट और अन्य प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में दाखिला दिलवाने में भी सराहनीय कार्य कर रही है। इसके तहत शिशु सुधार गृह की तीन बेटियों को शिमला स्थित कॉन्वेंट तारा हॉल स्कूल, पांच बच्चों को शिमला स्थित दयानन्द पब्लिक स्कूल, चार बच्चों को सोलन स्थित पाइनग्रोव स्कूल और दो बच्चों को मण्डी स्थित डीएवी स्कूल, सुन्दरनगर में दाखिला दिलवाया गया है। इनकी पढ़ाई का पूरा खर्च प्रदेश सरकार वहन कर रही है। इस योजना ने निराश्रित बच्चों के जीवन से जुड़ी उन चुनौतियों का भी समाधान किया है, जो वर्षों से उनके भविष्य की राह में बाधा बनी हुई थीं। प्रदेश सरकार ने ऐसे अनाथ बच्चों को बोनाफाइड हिमाचली प्रमाण-पत्र प्राप्त करने का अधिकार प्रदान किया है, जो पिछले 15 वर्षों से हिमाचल प्रदेश के विभिन्न बाल देखभाल संस्थानों में रह रहे हैं। पहले प्रचलित दिशा-निर्देशों में इस संबंध में कोई व्यवस्था न होने के कारण ये बच्चे प्रदेश की अनेक कल्याणकारी योजनाओं, शैक्षणिक सुविधाओं और रोज़गार के अवसरों का लाभ नहीं ले पाते थे। इस निर्णय ने न केवल उन्हें उनकी पहचान और अधिकार दिलाए हैं, बल्कि उनके लिए अवसरों के नए द्वार भी खोले हैं।

    निराश्रित बच्चों के उज्ज्वल भविष्य को और अधिक सुदृढ़ आधार प्रदान करने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार ने अपने अंशदान से 101 करोड़ रुपये के मुख्यमंत्री सुख-आश्रय कोष की स्थापना भी की है। इस कोष में आम नागरिक, सामाजिक संस्थाएं, औद्योगिक प्रतिष्ठान और विभिन्न कंपनियां भी स्वेच्छा से योगदान दे रही हैं। इस सामूहिक सहभागिता से प्राप्त धनराशि का उपयोग अनाथ बच्चों की उच्च शिक्षा, कौशल विकास तथा उनके समग्र भविष्य निर्माण के लिए किया जा रहा है। यह कोष केवल आर्थिक सहायता का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और सरकार की साझा संवेदनशीलता तथा इस संकल्प का प्रतीक है कि प्रदेश का कोई भी बच्चा केवल परिस्थितियों के कारण अपने सपनों से वंचित न रह जाए।
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