Category: Government News>Himachal Govt

  • डॉ. धनी राम शांडिल की अगुवाई में HPMFDC ने 54वीं बैठक की

    डॉ. धनी राम शांडिल की अगुवाई में HPMFDC ने 54वीं बैठक की

    शिमला: स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल की अध्यक्षता में आज यहां हिमाचल प्रदेश अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम की 54वीं बैठक आयोजित की गई। बैठक में निदेशक मंडल ने हिमाचल प्रदेश में अल्पसंख्यक समुदायों के कल्याण के लिए प्रदेश सरकार द्वारा क्रियान्वित की जा रही विभिन्न पहल, योजनाओं और कार्यक्रमों की समीक्षा की।

    स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि निगम द्वारा अल्पसंख्यक समुदाय तथा दिवयांगजन को पर्यटन, कृषि, पारम्परिक व्यवसाय, तकनीकी और छोटे व्यवसाय सहित अन्य व्यवसायों की स्थापना अथवा विस्तारीकरण के लिए 30 लाख रुपये तक का टर्न लोन और विभिन्न प्रकार की सुविधाएं दी जाती हैं। इसी प्रकार 20 लाख रुपये तक का शिक्षा ऋण तथा स्वयं सहायता समूहों को उपकरण खरीद सहित अन्य जरूरतों के लिए भी ऋण सुविधा प्रदान की जाती है।

    डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम द्वारा अल्पसंख्यक वर्ग के उत्थान और लाभार्थ संचालित सभी योजनाओं को संभावित लाभार्थियों तक पहुंचाने के प्रयासों के तहत प्रदेश भर में जागरुकता अभियान चलाए जाते हैं। इनके माध्यम से उन्हें योजनाओं के प्रति सूचित और शिक्षित किया जाता है। इस वर्ष कांगड़ा, लाहौल-स्पीति, किन्नौर, चम्बा तथा शिमला जिला के विभिन्न स्थानों में समय-समय पर जागरुकता शिविर आयोजित किए गए हैं जिनमें हजारों लोगों ने हिस्सा लिया तथा इन शिविरों की ओर रुझान और प्रतिक्रिया उत्साहजनक रही। उन्होंने कहा कि आगामी समय में कांगड़ा, कुल्लू, सिरमौर, शिमला, ऊना और मंडी ज़िला में भी जागरुकता शिविर प्रस्तावित हैं।

    स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि अधिकतम लोगों तक निगम की पहलों का लाभ सुनिश्चित करने के लिए गहरा सामुदायिक जुड़ाव आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार अल्पसंख्यक वर्गों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है तथा सरकार के प्रयासों से अल्पसंख्यक संगठनों को सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि गत तीन वर्षों में लगभग 1000 से अधिक अल्पसंख्यक लाभार्थियों को लगभग 70 करोड़ रुपये के ऋण वितरित किए गए हैं। वर्तमान सरकार के गठन के समय ऋण की रिकवरी दर 80 प्रतिशत थी जो अब बढ़कर लगभग 100 प्रतिशत तक पहुंच गई है।

    बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता को निगम के निदेशक के रूप में नियुक्त करने और ऑडिटिड बैलेंस शीट को स्वीकृति देने जैसे विभिन्न एजेंडों पर चर्चा कर उन्हें मंजूरी दी गई। इस अवसर पर निगम के प्रबन्ध निदेशक मनोज कुमार, निदेशक ईसोमसा सुमित खिमटा, विशेष सचिव वित्त विजय वर्धन, निदेशक मंडल के अन्य सदस्य तथा वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

  • CM Sukhu का कदम: औषधीय भांग से हिमाचल का आर्थिक विकास

    CM Sukhu का कदम: औषधीय भांग से हिमाचल का आर्थिक विकास

    शिमला: हिमाचल प्रदेश को वर्ष 2027 तक आत्मनिर्भर बनाने के संकल्प को धरातल पर उतारते हुए, मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने एक ऐतिहासिक ‘ग्रीन टू गोल्ड’ पहल की शुरुआत की है। राज्य सरकार का यह साहसिक आर्थिक प्रयोग औद्योगिक भांग की खेती को वैध और विनियमित कर हिमाचल की अर्थव्यवस्था को वैश्विक बायो-इकॉनोमी में अग्रणी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

    दशकों से कुल्लू, मंडी और चंबा जैसी घाटियों में जंगली रूप से उगने वाली भांग को अब तक केवल नशे और अवैध व्यापार से जोड़कर देखा जाता था, लेकिन वर्तमान प्रदेश सरकार ने औषधीय गुणों से युक्त इस प्राकृतिक संपदा को एक बहुमूल्य औद्योगिक संसाधन के रूप में पहचाना है। इसका उपयोग पर्यावरण के अनुकूल कपड़ा उद्योग, पेपर एवं पैकंजिग, कॉसमैटिक, बॉयो फ्यूल, एनर्जी इंडस्ट्री में करने के साथ इससे बायो-प्लास्टिक जैसे अत्याधुनिक उत्पाद भी तैयार किए जा सकेंगे। पहाड़ी राज्य हिमाचल सही मानको तथा पॉलिसी के साथ पर्यावरण हितैषी औद्योेगिक विकास का मुख्य केन्द्र बनकर उभरेगा।

    इस नीति का एक सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि औद्योगिक उपयोग के लिए उगाई जाने वाली भांग में टेट्राहाइड्रोकैनाबिनोल (टी.एच.सी.) की मात्रा 0.3 प्रतिशत से कम रखी जाएगी। इसके तहत वैज्ञानिक मानक सुनिश्चित करते हुए पौधे में नशे रहित रखा जाएगा ताकि इसका दुरुपयोग न हो सके। इसके अतिरिक्त इस पौधे की उच्च गुणवत्ता युक्त फाइबर और बीज उत्पादन क्षमता बनी रहेगी। इस दृष्टिकोण के माध्यम से मुख्यमंत्री ने सामाजिक सरोकारों और आर्थिक प्रगति के बीच एक आदर्श संतुलन स्थापित किया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि 24 जनवरी, 2025 को आयोजित राज्य प्रदेश मंत्रिमंडल ने भांग की नियंत्रित खेती के पायलट अध्ययन प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य भांग की नशीली छवि को बदलकर इसे एक आर्थिक संसाधन के रूप में स्थापित करना है। सरकारी अनुमानों के अनुसार, पूरी तरह से लागू होने पर इस विनियमित खेती से राज्य के खजाने में सालाना 500 से 2000 करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हो सकता है। राज्य सरकार एक ठोस कानूनी और वैज्ञानिक ढांचा तैयार कर, उस बाजार पर अधिकार करना चाहती है जिस पर वर्तमान में अवैध व्यापार या अंतरराष्ट्रीय आयातों का कब्जा है।

    राजस्व वृद्धि के अलावा, यह पहल हिमाचल के किसान समुदाय के लिए भी एक वरदान साबित होगी। भांग एक जलवायु-अनुकूल फसल है जिसे कपास जैसी पारंपरिक फसलों की तुलना में 50 प्रतिशत कम पानी की आवश्यकता होती है। जलवायु परिवर्तन के इस दौर में, भांग की खेती किसानों के लिए एक बेहतर विकल्प बनकर उभरेगी। भांग की फसल को जंगली जानवरों का कोई खतरा नहीं होता है।

    इस पहल को सफल बनाने के लिए चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, पालमपुर और डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी को उच्च उपज वाले और कम टी.एच.सी. वाले बीजों को विकसित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की गई। इस कमेटी ने उत्तराखंड के डोईवाला तथा मध्यप्रदेश में की जा रही भांग की खेती का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी है।

    मुख्यमंत्री का लक्ष्य हिमाचल प्रदेश को पर्यावरण के अनुकूल निर्माण सामग्री, विशेष वस्त्रों और आयुर्वेदिक दवाओं के निर्माण केंद्र के रूप में विकसित करना है। इससे न केवल वर्ष 2032 तक हिमाचल को देश का सबसे समृद्ध राज्य बनाने का मार्ग प्रशस्त होगा, बल्कि युवाओं के लिए नए स्टार्टअप और रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि सरकार नशे को नहीं, बल्कि उद्योग को बढ़ावा दे रही है ताकि राज्य की प्राकृतिक संपदा का लाभ नशा माफिया के बजाय सीधे किसानों और सरकारी खजाने को मिले।

  • राज्यपाल ने पेश किया लोक भवन का नया कैलेंडर 2026

    राज्यपाल ने पेश किया लोक भवन का नया कैलेंडर 2026

    शिमला: राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने आज लोक भवन में आयोजित गरिमापूर्ण कार्यक्रम में लोक भवन सचिवालय द्वारा प्रकाशित वर्ष 2026 का कैलेंडर जारी किया। इस कैलेंडर में वर्ष 2025 में राज्यपाल की विभिन्न जनसरोकारों से जुड़ी गतिविधियों को प्रदर्शित किया गया है। नशा मुक्त हिमाचल और आपदा राहत को केन्द्र में रखकर इस कैलेंडर को तैयार किया गया है। नशामुक्त हिमाचल अभियान में युवाओं को नशे के दुषप्रभावों के बारे में जागरूक किया जा रहा है। हिमाचल में आयी प्राकृतिक आपदा में राज्यपाल द्वारा संचालित की गई राहत गतिविधियों को दर्शाया गया है। इसमें संकट की घड़ी में राज्यपाल द्वारा जमीनी स्तर पर किए गए कार्यो को प्रदर्शित किया गया है।

    इस अवसर पर राज्यपाल ने लोकभवन सचिवालय के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि महत्वपूर्ण तिथियों और आयोजनों के संकलन के साथ-साथ यह कैलेंडर एक स्वस्थ, सुरक्षित और सशक्त हिमाचल प्रदेश के निर्माण के लिए हमारे सामूहिक संकल्प को प्रतिबिंबित कर रहा है। राज्यपाल के सचिव सी.पी. वर्मा और लोक भवन के वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

  • केंद्र का फैसला प्रदेश के बागवानों के लिए घातक साबित होगा: रोहित ठाकुर

    केंद्र का फैसला प्रदेश के बागवानों के लिए घातक साबित होगा: रोहित ठाकुर

    शिमला: शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने केंद्र सरकार की सेब आयात नीतियों की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि न्यूजीलैंड से सेब आयात पर शुल्क 50 प्रतिशत से घटाकर 25 प्रतिशत किया जाना प्रदेश के बागवानों के साथ खुला विश्वासघात है। उन्होंने कहा कि ऐसे निर्णय किसान और बागवान विरोधी मानसिकता को दर्शाते हैं और इससे हिमाचल प्रदेश के सेब उत्पादक गंभीर आर्थिक अनिश्चितता में फंस जाएंगे। सेब बागवानी प्रदेश की पहाड़ी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और इस तरह की नीतियां लाखों बागवान परिवारों की आजीविका पर सीधा हमला हैं।

    उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने पूर्व में बागवानों के हितों की रक्षा का आश्वासन दिया था, लेकिन मंडी मध्यस्थता योजना को वर्ष 2023 से लगभग समाप्त कर देना इस वादे की पोल खोलता है। जहां वर्ष 2022-23 में इस योजना के लिए करीब 4 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान था, वहीं 2023-24 में इसे घटाकर मात्र एक लाख रुपये कर दिया गया, जिससे बागवानों का सुरक्षा कवच समाप्त हो गया। रोहित ठाकुर ने कहा कि प्रदेश सरकार सीमित संसाधनों के बावजूद पिछले तीन वर्षों में 160 करोड़ रुपये की सेब खरीद कर बागवानों के साथ मजबूती से खड़ी है।

    शिक्षा मंत्री ने चेतावनी दी कि मुक्त व्यापार समझौतों के चलते यदि आयातित सेब सस्ती दरों पर भारतीय बाजार में डम्प किए गए तो हिमाचल प्रदेश की लगभग 5 हजार करोड़ रुपये की सेब अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान होगा। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि सेब आयात पर शुल्क कटौती को तत्काल वापस लिया जाए, उच्च आयात शुल्क बहाल किया जाए और मंडी मध्यस्थता योजना में केंद्र का वित्तीय योगदान पुनः शुरू किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदेश सरकार बागवानों के हितों के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं होने देगी और इस अन्याय के खिलाफ हर मंच पर आवाज उठाई जाएगी।

  • मुख्यमंत्री ने पर्यटक सूचना केन्द्र का निरीक्षण कर की व्यवस्था सुधार की सिफारिश

    मुख्यमंत्री ने पर्यटक सूचना केन्द्र का निरीक्षण कर की व्यवस्था सुधार की सिफारिश

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज मालरोड स्थित पर्यटक सूचना केन्द्र का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों से बातचीत की और दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि देवभूमि में पधारने वाले पर्यटकों को कोई भी असुविधा नहीं होनी चाहिए। पर्यटन राज्य की अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार है। इस क्षेत्र को सुदृढ़ करने से आर्थिकी को सम्बल मिलेगा।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने राज्य में प्रतिवर्ष पांच करोड़ पर्यटकों को आकर्षित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए बुनियादी ढांचे के विकास के साथ-साथ नई पहलें और बहुआयामी प्रयास किए जा जा रहे हैं।

    मुख्यमंत्री ने रिज और मालरोड पर पर्यटकों से बातचीत भी की। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि आईजीएमसी शिमला में हुई घटना की पूर्ण जांच के उपरान्त कार्रवाई की गई है। प्रदेश सरकार ने चिकित्सकों, विशेष रूप से सीनियर रेजिडेंट चिकित्सकों के हित में विभिन्न कदम उठाए हैं। आईजीएमसी में चिकित्सकों की सुविधा के दृष्टिगत भी जरूरी उपाय करने के लिए अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए गए हैं।

  • राज्यपाल ने पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी को जयंती पर किया नमन

    राज्यपाल ने पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी को जयंती पर किया नमन

    शिमला: राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने आज शिमला के ऐतिहासिक रिज पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। राज्यपाल ने कहा कि वाजपेयी एक ऐसे नेता थे जो हर एक के दिल में बसते थे। वह सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को साथ लेकर चले और यह साबित कर दिखाया कि राजनीति में प्रतिस्पर्धा हो सकती है लेकिन शत्रुता नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी का सामाजिक और राजनीतिक जीवन गरिमा, आनंद और सम्मान से परिपूर्ण था और उनका आचरण आज की राजनीति के लिए एक मार्गदर्शक उदाहरण होना चाहिए।

    राज्यपाल ने वाजपेयी को एक महान राजनेता, सच्चे राष्ट्रवादी और भारतीय राजनीति के सबसे बड़े नेताओं में से एक बताया, जो हमेशा देश हित के लिए मजबूती से खड़े रहे। हिमाचल प्रदेश के साथ अपने खास रिश्ते को स्मरण करते हुए राज्यपाल ने कहा कि वाजपेयी जी हिमाचल प्रदेश को अपना दूसरा घर मानते थे और राष्ट्र के लिए उनके अमूल्य योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा।

    इस मौके पर पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर, विधायक चौपाल बलबीर सिंह वर्मा, महापौर नगर निगम शिमला सुरेंद्र चौहान, पूर्व मंत्री व भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल, उप-महापौर उमा कौशल, पार्षदगण, उपायुक्त अनुपम कश्यप, वरिष्ठ अधिकारी और अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

  • मुख्यमंत्री सुक्खू का ऐलान, हिमाचल को खेलों का ग्लोबल हब बनाने की दिशा में काम जारी

    मुख्यमंत्री सुक्खू का ऐलान, हिमाचल को खेलों का ग्लोबल हब बनाने की दिशा में काम जारी

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज कहा कि खेलों को बढ़ावा देना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के लिए सरकार आधुनिक सुविधाएं, पुरस्कार राशि, बेहतर डाइट मनी और रोजगार के अवसर सृजित कर रही है ताकि युवा खेलों की ओर प्रोत्साहित हों।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं की ऊर्जा का सकारात्मक दिशा में उपयोग किया जा रहा है ताकि वह सामाजिक बुराइयों से दूर रहें। बेहतर पुरस्कार राशि और रोजगार के अवसर जैसे प्रोत्साहनों से युवा खेलों की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

    वर्तमान सरकार खेल गतिविधियों को विस्तृत स्तर पर बढ़ावा दे रही है जबकि पूर्व सरकार ने इस क्षेत्र की अनदेखी की थी। उन्होंने कहा कि उत्कृष्ट खिलाड़ियों के लिए रोजगार में तीन प्रतिशत खेल कोटा निर्धारित किया गया है, जिसके तहत वर्ष, 2024 से अब तक 99 खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी दी गई है।

    खेलों में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए 68 खण्डों में युवा स्वयं सेवी नियुक्त करने के साथ-साथ प्रत्येक जिला मुख्यालय में भी एक स्वयं सेवक तैनात किया गया है। वर्ष, 2024 में खेल गतिविधियों पर 3.2 करोड़ रुपये खर्च किए गए जबकि वर्तमान वित्त वर्ष में 4 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। राज्य में खेल के मैदान और आधुनिक खेल सुविधाओं के निर्माण और रख रखाव पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

    नादौन में लगभग 9,735 वर्ग मीटर क्षेत्र में 112.49 करोड़ रुपये की लागत से इंडोर बहुद्देशीय खेल परिसर निर्मित किया जा रहा हैै। इस परिसर में शूटिंग रेंज, स्विमिंग पूल, जिम, कुश्ती, बॉक्सिंग, कबड्डी, योग हॉल, टेबल टेनिस सुविधाएं, चार बैडमिंटन कोर्ट, वॉलीबाल और टेनिस कोर्ट सहित कैफेटेरिया, प्रतीक्षालय और ऑफिस स्पेस जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों की पुरस्कार राशि में वृद्धि की गई है। ओलंपिक, विंटर ओलंपिक और पैरालंपिक में स्वर्ण पदक विजेता को अब 5 करोड़ रुपये, रजत को 3 करोड़ और कांस्य को 2 करोड़ रुपये मिलेंगे। एशियाई खेलों और पैरा एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक विजेताओं की पुरस्कार राशि को 50 लाख रुपये से बढ़ाकर 4 करोड़, रजत पदक विजेताओं की राशि को 30 लाख रुपये से बढ़ाकर 2.50 करोड़ और कांस्य पदक विजेताओं की राशि को 20 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.50 करोड़ रुपये किया गया है। राष्ट्र मंडल खेलों और पैरा राष्ट्र मंडल खेलों में स्वर्ण पदक विजेताओं की पुरस्कार राशि को 50 लाख रुपये से बढ़ाकर 3 करोड़, रजत पदक विजेताओं की पुरस्कार राशि को 30 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 करोड़ और कांस्य पदक विजेताओं की पुरस्कार राशि को 20 लाख रुपये से बढ़ाकर एक करोड़ रुपये किया गया है।

    खिलाड़ियों के डाइट मनी में भी बढ़ोतरी की गई है। राज्य के बाहर प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले खिलाड़ियों को अब 500 रुपये प्रतिदिन डाइट मनी दी जा रही है। अंडर-17 और अंडर-19 खिलाड़ियों को क्रमशः 150 रुपये से बढ़ाकर 400 रुपये और 250 रुपये से बढ़ाकर 500 रुपये प्रतिदिन दिया जा रहा है। खेल छात्रावास में रहने वाले खिलाड़ियों की डाइट मनी को 150 रुपये से बढ़ाकर 400 रुपये प्रतिदिन किया गया है।

    हिमाचल प्रदेश की बेटियां हर क्षेत्र में सफलता के नए आयाम स्थापित कर रही हैं। सभी बाधाओं को पार करते हुए अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतिस्पर्धाओं में बेटियों ने शानदार प्रदर्शन कर राज्य व देश का नाम रोशन किया है। उन्होंने कहा कि महिला टी-20 विश्वकप में रेणुका ठाकुर ने पांच विकेट लेकर हिमाचल को खिताब जिताकर इतिहास रचा है।

    मुख्यमंत्री ने ढाका में आयोजित महिला विश्व कप कबड्डी-2025 में खिताब विजेता भारतीय टीम का उल्लेख करते हुए कहा कि हिमाचल की खिलाड़ियों कप्तान रितु नेगी, उप-कप्तान पुष्पा राणा, साक्षी शर्मा, भावना और चंपा की भूमिका पूरी प्रतियोगिता में सराहनीय रही।

    उन्होंने चंबा जिला के रेटा गांव की सीमा की भी सराहना की। उन्होंने राष्ट्रीय एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 25,000 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक जीतने वाली प्रदेश की पहली महिला बनीं। इसी तरह शिमला जिला के रोहड़ू की ज्योतिका दत्ता ने फेंसिंग की राष्ट्रीय प्रतियोगिता में रजत पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह उदाहरण साबित करते हैं कि हिमाचल की बेटियां खेल जगत में भी सफलतापूर्वक अपनी उपस्थिति दर्ज कर रही हैं।

    राज्य में बेहतर खेल अधोसंरचना के निर्माण, पुरस्कार राशि में वृद्धि जैसे प्रयासों से हिमाचल में नई पीढ़ी के चैंपियन तैयार हो रहे हैं। हिमाचल के खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं और हिमाचल खेल क्षेत्र में ‘ग्राउंड लेवल से ग्लोबल’ स्तर तक पहुंच रहा है।

  • आईजीएमसी प्रकरण पर मुख्यमंत्री का सख्त रुख, दोषियों पर कार्रवाई तय

    आईजीएमसी प्रकरण पर मुख्यमंत्री का सख्त रुख, दोषियों पर कार्रवाई तय

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज यहां स्वास्थ्य विभाग, इंदिरा गांधी चिकित्सा महाविद्यालय, शिमला और निदेशालय चिकित्सा शिक्षा के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा से जुड़े विभिन्न विषयों और आई.जी.एम.सी. शिमला में 22 दिसम्बर को हुई घटना पर विस्तृत चर्चा की गई।

    मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग, आई.जी.एम.सी और निदेशालय चिकित्सा शिक्षा के अधिकारियों से इस घटना से जुड़े सभी तथ्यों के संबंध में विस्तृत जानकारी ली। सुक्खू ने कहा कि इस घटना की जांच 24 दिसम्बर, 2025 तक पूर्ण कर अतिशीघ्र उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि हर संस्थान में पेशेवरों का व्यवहार सौम्य और शांत होना चाहिए। इससे व्यक्तित्व के साथ-साथ संस्थान की छवि भी झलकती है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि आई.जी.एम.सी. से पढ़ाई करने के उपरान्त चिकित्सकों ने राज्य का नाम देश और विदेश में रौशन किया है। आई.जी.एम.सी. में हुई घटना निंदनीय है। किसी भी संस्थान में अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सुक्खू ने निदेशालय चिकित्सा शिक्षा को सीनियर रेजिडेंसी करने के लिए चिकित्सा महाविद्यालय में आने वाले चिकित्सकों को इंडक्शन ट्रेनिंग प्रदान करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने सीनियर रेजिडेंसी प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी ली और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने विगत तीन वर्षों के दौरान चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में अनेक महत्त्वाकांक्षी पहल की हैं। चिकित्सकों और पैरा मेडिकल स्टाफ को संस्थान और अस्पताल में बेहतर वातावरण प्रदान करने के लिए विश्व-स्तरीय मानकों को अपनाया जा रहा है।

    सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र को न केवल सुदृढ़ कर रही है बल्कि इस क्षेत्र में आदर्श राज्य बनने के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने प्रदेश में आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और स्वास्थ्य अधोसंरचना के विकास और विस्तार पर तीन हजार करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि खर्च करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा स्वास्थ्य संस्थानों में दो दशकों से इस्तेमाल हो रहे पुराने चिकित्सा उपकरणों को नए और अत्याधुनिक उपकरणों से बदला जा रहा है।

    बैठक में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल ने चिकित्सा शिक्षा से सम्बन्धित विभिन्न सुझाव दिए।
    मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर, सचिव स्वास्थ्य संदीप कदम, निदेशक, चिकित्सा शिक्षा डॉ. राकेश शर्मा, निदेशक स्वास्थ्य डॉ. गोपाल बेरी, एम.एस. आई.जी.एम.सी डॉ.राहुल राव, अतिरिक्त निदेशक नीरज कुमार गुप्ता और वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

     

  • मुख्यमंत्री सुक्खू की पहल: लघु दुकानदार कल्याण योजना का विस्तार शहरी क्षेत्रों तक

    मुख्यमंत्री सुक्खू की पहल: लघु दुकानदार कल्याण योजना का विस्तार शहरी क्षेत्रों तक

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज यहां कहा कि प्रदेश सरकार ने शहरी क्षेत्रों में छोटे स्तर पर कारोबार करने वाले दुकानदारों को राहत प्रदान करने के उद्देश्य से राज्य में मुख्यमंत्री लघु दुकानदार कल्याण योजना को विस्तारित किया है। इसके तहत प्रदेश के सभी शहरी स्थानीय निकायों में मुख्यमंत्री लघु दुकानदार कल्याण योजना शहरी को शुरू करने की अधिसूचना जारी कर दी गई है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों के दुकानदारों को लाभान्वित करने के उद्देश्य से यह योजना वर्ष 2023 में शुरू की गई थी। वर्ष 2025-26 की बजट घोषणा के अनुरूप अब इस योजना को शहरी क्षेत्रों में विस्तारित किया गया है।

    उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्रों में अपने कारोबार को विस्तार प्रदान करने के लिए छोटे दुकानदारों को वित्तीय सहायता की कमी का सामना करना पड़ता है। बैंक ऋण चुकाने में असमर्थ रहने के कारण कई दुकानदारों के खाते एनपीए में बदल जाते है। छोटे व्यापारियों के समक्ष आने वाली इन चुनौतियों के निवारण के उद्देश्य से राज्य सरकार ने इस योजना का लाभ शहरी क्षेत्र के छोटे व्यापारियों को प्रदान करने का निर्णय लिया है। योजना के तहत शहरी क्षेत्रों में छोटे दुकानदारों जिनका वार्षिक कारोबार 10 लाख रुपये से कम है और जिन्होंने बैंकों से व्यवसायिक ऋण लिए है तथा जिनके खाते एनपीए घोषित किए जा चुके हैं उनको वन टाइम सेटलमेंट के तहत सहायता प्रदान की जाएगी। योजना के तहत सरकार द्वारा बैंक के माध्यम से एक लाख रुपये तक की एकमुश्त निपटान सहायता प्रदान की जाएगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन लाभार्थियों पर मूलधन व ब्याज सहित कुल बकाया राशि एक लाख रुपये तक है, उनका पूरा निपटान योजना के अंतर्गत किया जाएगा। जिन मामलों में बकाया राशि एक लाख रुपये से अधिक है। इस स्थिति में लाभार्थी द्वारा शेष राशि स्वयं जमा करवानी होगी और राज्य सरकार द्वारा एक लाख रुपये की वन टाइम सहायता प्रदान की जाएगी। योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक द्वारा लिया गया अधिकतम ऋण 10 लाख रुपये से अधिक नहीं होना चाहिए।

    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि इस योजना को पारदर्शिता और सरल तरीके से तैयार किया गया है। शहरी स्थानीय निकायों, बैंकों, एक नोडल बैंक तथा शहरी विकास विभाग को शामिल करते हुए एक पारदर्शी संस्थागत व्यवस्था तैयार की गई है, ताकि दावों का समयबद्ध निपटान सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा कि मध्यवर्ती अवधि में ब्याज के बोझ को हटाकर तथा किसी भी प्रकार का प्रोसेसिंग या प्रशासनिक शुल्क न लगाकर राज्य सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि योजना का अधिकतम लाभ छोटे दुकानदारों तक पहुंचे।

    उन्होंने कहा कि इस योजना से शहरी क्षेत्रों में काम कर रहे छोटे फल एवं सब्जी विक्रेता, चाय स्टॉल और ढाबा संचालक, नाई, पान विक्रेता, मोची, चाट विक्रेता, गैरेज मालिक, दर्जी, किराना दुकानदार, मोबाइल मरम्मत करने वाले, रेहड़ी-पटरी वाले और अन्य छोटे खुदरा दुकानदार लाभान्वित होंगे।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि यह योजना 1 अप्रैल 2020 से 31 मार्च 2025 के बीच लिए गए बिना जमानत के (कोलेटरल-फ्री) व्यवसायिक ऋणों पर लागू होगी। जानबूझकर ऋण न चुकाने, धोखाधड़ी या कदाचार से जुड़े मामलों को योजना में शामिल नहीं किया जाएगा और ऐसे मामलों की पहचान बैंक करेंगे, ताकि केवल पात्र लाभार्थियों को ही योजना का लाभ मिल सके।

    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के स्थायी निवासी इस योजना का लाभ उठा सकेंगे। इसके अतिरिक्त आवेदक की आयु 18 वर्ष से अधिक होनी चाहिए और परिवार का कोई भी सदस्य नियमित सरकारी सेवा में कार्यरत नहीं होना चाहिए। आवेदन संबंधित शहरी स्थानीय निकाय में जमा किए जाएंगे। सत्यापन के बाद आवेदनों को बैंकों को भेजा जाएगा। बैंक मासिक आधार पर नोडल बैंक के माध्यम से शहरी विकास विभाग को ओटीएस दावे भेजेंगे और आवेदकों से किसी प्रकार का प्रोसेसिंग अथवा प्रशासनिक शुल्क नहीं लिया जाएगा।

  • उप-मुख्यमंत्री की बैठक में कर्मचारियों को 31 मार्च तक 3% महंगाई भत्ता देने का फैसला

    उप-मुख्यमंत्री की बैठक में कर्मचारियों को 31 मार्च तक 3% महंगाई भत्ता देने का फैसला

    शिमला: उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने आज शिमला के पीटरहॉफ होटेल में एचआरटीसी के निदेशक मंडल की 162वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि 31 मार्च, 2026 तक एचआरटीसी के कर्मचारियों के 3 प्रतिशत महंगाई भत्ते की बक़ाया राशि का भुगतान चार किश्तों में कर दिया जाएगा। उन्होंने कर्मचारियों के छह माह के लंबित मेडिकल बिलों का भुगतान करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने इस अवसर पर ‘हिम बस पोर्टल’ का शुभारंभ किया, जिसके माध्यम से लोग अब हिम कार्ड ऑनलाइन बनवा सकेंगे, जिन्हें डाक द्वारा उनके गंतव्य तक पहुंचाया जाएगा।

    एचआरटीसी ने वेतन खातों के साथ क्रेडिट स्कोर की सुविधा के लिए एक्सिस बैंक, यूको बैंक और पंजाब नेशनल बैंक के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। टिकट बुकिंग के लिए एक कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) भी स्थापित किया जाएगा। वर्तमान में राज्य में लगभग 6000 सीएससी कार्यरत हैं। इससे पूर्व मुकेश अग्निहोत्री ने हिमाचल प्रदेश सिटी ट्रांसपोर्ट और बस अड्डा प्रबंधन एवं विकास प्राधिकरण (एचपीएससीटीबीएसएमडीए) के निदेशक मंडल (बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स) की 72वीं बैठक की अध्यक्षता की।

    इस अवसर पर उप-मुख्यमंत्री ने बस अड्डा प्रबंधन एवं विकास प्राधिकरण के लिए विकसित ‘एसेट मैनेजमेंट एप्लिकेशन’ का शुभारंभ किया गया, जिससे बस अड्डों के संचालन, रख-रखाव और परिसंपत्तियों की निगरानी को और अधिक पारदर्शी तथा प्रभावी बनाया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश भर के बस अड्डों पर 410 दुकानें किराए पर आवंटित की गई हैं, जिससे हर माह 45 लाख रुपये की आय होती है।

    बैठक में ठियोग बाजार में शॉपिंग कॉम्प्लेक्स एवं पार्किंग कॉम्प्लेक्स, मंडी बस अड्डे में कार पार्किंग तथा मल्टीपरपज़ हॉल के निर्माण का फै़सला लिया गया। उप-मुख्यमंत्री ने थुनाग, दाड़लाघाट, हमीरपुर, बैजनाथ, भोरंज और फतेहपुर, के बस अड्डों के निर्माण कार्यों में तेजी लाने के स्पष्ट निर्देश दिए गए। उन्होंने बिलासपुर के मंडी-भराड़ी, जयसिंहपुर तथा चंबा के पुराने बस अड्डे में कार पार्किंग एवं कमर्शियल कॉम्प्लेक्स, बद्दी में नए बस अड्डों की टेंडर प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने तथा प्रस्तावित परियोजनाओं को समयबद्ध रूप से आगे बढ़ाने के निर्देश जारी किए।

    अतिरिक्त मुख्य सचिव परिवहन आर.डी. नजीम, उपाध्यक्ष एचआरटीसी अजय वर्मा, प्रबंध निदेशक एचआरटीसी डॉ. निपुण जिंदल, निदेशक परिवहन नीरज कुमार, विशेष सचिव (वित्त) विजय वर्धन, विशेष सचिव पर्यटन विजय कुमार, विशेष सचिव (पीडब्ल्यूडी) हरबंस सिंह, निदेशक मंडल के सभी गैर सरकारी सदस्य तथा एचआरटीसी एवं बीएसएमडीए के वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।