सुबह 6.15 बजे यात्रा को बहाल कर दिया गया। खराब मौसम तथा बीच-बीच में हो रही बारिश के बावजूद मां वैष्णो देवी की यात्रा इस समय सुचारू रूप से जारी है। प्रशासन के साथ श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड मां वैष्णो देवी की यात्रा पर करीबी निगाह रखे हुए हैं। अधिकारिक सूत्रों ने बताया कि मौसम विभाग द्वारा जारी की गई चेतावनी के बाद ही श्रद्धालुओं की सुरक्षा को यकीनी बनाने के लिए रात को यात्रा स्थगित की गई थी। यात्रा मार्ग पर किसी तरह की कोई परेशानी नहीं है। बैटरी कार सेवा व भवन से भैरो घाटी के बीच केबल कार सेवा सुचारू रूप से जारी है। हां, आसमान में बादल छाए रहने व खराब मौसम की वजह से हेलीकॉप्टर सेवा बाधित रही है। वहीं रात को यात्रा स्थगित कर दिए जाने की वजह से श्रद्धालु परेशान हुए परंतु सुबह यात्रा आरंभ होते ही उन्होंने राहत की सांस ली।श्री वैष्णो देवी मार्ग पर भ यानक हादसा, 5 लोगों की मौ त https://t.co/I8zUvSZIQY#SanjuSamson #GanpatiBappaMorya #mannukyakareggatrailer pic.twitter.com/MmifaGzdCq
— Encounter India (@Encounter_India) August 26, 2025
Category: Jammu and Kashmir
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श्री वैष्णो देवी मार्ग पर भयानक हादसा, 5 लोगों की मौत, देखें वीडियो
14 घायल, यात्रा पर लगी रोक जम्मू-कश्मीर: भारी बारिश के बीच माता-वैष्णो देवी यात्रा मार्ग पर अचानक भूस्खलन हुआ है। यह हादसा अर्धकुंवारी के पास हुआ जहां से रोज हजारों श्रद्धालु मां वैष्णो देवी के दर्शनों के लिए जाते हैं। इस भूस्खलन के चलते 5 लोगों की मौत हो गई है और 14 लोग घायल हो गए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो अर्द्धकुंवारी स्थित इंद्रप्रस्थ भोजनालय के पास में बचावकार्य जारी है। घटना दोपहर 3 बजे के पास हुई। खास बात यहां यह है कि यात्रा को सुबह ही रोक दिया गया था परंतु पुराने मार्ग पर दोपहर 1:30 मिनट तक यह जारी थी हालांकि बाद में इस पर भी खराब मौसम के चलते अस्थाई तौर पर रोक लगा दी गई थी। गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर में लगातार भारी बारिश हो रही है और वहीं यात्रा भी अगले आदेश तक रोक दी गई है। इसके अलावा भारतीय मौसम विभाग ने रेड अलर्ट जारी किया है। -

मां वैष्णो देवी जाने वाले श्रद्धालु दें ध्यान, प्रशासन ने किया अहम ऐलान
जम्मू-कश्मीर: शहर में लगातार बारिश हो रही है। ऐसे में माता वैष्णो देवी यात्रा पर भी अस्थायी तौर पर रोक लगा दी गई है। श्राइन बोर्ड ने एहतियात के तौर पर यह फैसला लिया है कि फिलहाल श्रद्धालुओं को कटरा में ही रोका जा रहा है। अगले कुछ घंटों तक यात्रा फिर से शुरु होने का अभी कोई समय तय नहीं हुआ है। यात्रा पर रोक लगाने के साथ-साथ पर्ची काउंटर भी बंद कर दिया है ताकि नए यात्रियों को यात्रा के लिए एंट्री न मिल पाए।
प्रशासन की मानें तो भारी बारिश के कारण रास्तों पर फिसलन और भूस्खलन की आशंका बनी हुई है। इससे यात्रियों की सुरक्षा को खतरा होगा। मौसम विभाग ने आने वाले समय में भी तेज बारिश की चेतावनी दे डाली है।
गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर के कई इलाकों में लगातार बारिश होती जा रही है। ऐसे में इसके चलते काफी नुकसान भी हुआ है। कई लोगों की जान चली गई है। सड़कें जलमग्न हो गई है और कुछ जगहों पर बिजली आपूर्ति भी बाधित हुई है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वो सुरक्षित स्थानों पर रहें और मौसम संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करें।
यात्रियों की सुरक्षा देखते हुए प्रशासन ने कटरा बाजार में घूमने तक भी मनाही कर दी है। अधिकारियों का यह कहना है कि तेज बारिश औऱ भूस्खलन के खतरे को देखते हुए यात्रियों को खुले में निकलने देना बहुत बड़ा जोखिम भरा काम है। इसके अलावा जो श्रद्धालु पहले से ही यात्रा पर निकल गए हैं उन्हें भी जल्द से जल्द कटरा में वापिस लौटने की अपील की जा रही है। इसके लिए लगातार लाउडस्पीकरों पर भी अनाउंसमेंट की जा रही है ताकि किसी भी तरह की अनहोनी न हो।
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किश्तवाड़ त्रासदी में 69 लापता, 46 लोगों की गई जान
जम्मू-कश्मीर: किश्तवाड़ में बादल फटने के बाद मौत अब तक 46 लोगों की जान जाने की पुष्टि हो गई है। गुरुवार दोपहर करीब 12:25 बजे हुए इस प्राकृतिक त्रासदी ने कई लोगों के घर बर्बाद किए। जिन लोगों की मौत हुई उसमें दो CISF के जवान भी शामिल हैं। इसके अलावा 69 लोग अभी तक लापता बताए जा रहे हैं। इनको लेकर उनके परिजनों और बच्चों में किसी अनहोनी को लेकर बैचेनी भी है। इस घटना को जिन्होंने देखा उन्होंने बताया है कि – 10 लाशें हमने खुद निकाली जो भाग गए वो बच गए जो नया घर बनाया था वो नाले के साथ बह गया। बच्चे बेघर हो गए आंखों से बहता आंसू और मलबों में अपनों और सपनों को ढूंढते हुए ये वो लोग हैं जिन्होंने जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में बादल फटने के बाद मौत के मंजर को अपनी नजरों के सामने देखा है। लोगों का कहना है कि जो उन्होंने देखा वो जानकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे। एक महिला ने बताया कि – मैं घर पर थी मैं दौड़कर भागी जो भाग गए वो बच गए मेरी जेठानी ने मुझे किचन से बाहर निकाला उसे बहुत चोट लगी है हमारा पुराना घर सुरक्षित है लेकिन जो नया बनाया था वो नाले के साथ ही बह गया है। एक पीड़िता ने कहा कि – हम कुछ खा रहे थे तभी अचानक कुछ लोग चिल्लाए भागो भागो फिर समझ नहीं आया कि किस ओर भागें नाले की तरफ या किस और हम पूरे परिवार के साथ गए थे मेरे साथ बहन, भाभी और उनका परिवार भी था वो सुरक्षित है। मेरा बेटा थोड़ा नीचे चल गया और फिर कूड़े में फंस गया। उसे बाहर निकलने में आधा घंटा लग गया। बादल जब फटा उस समय वहां सैंकड़ों लोग थे दुकानें थी लोग अभी भी मलबे में फंसे हुए हैं मेरा बच्चा अब ठीक है उसे मदद के लिए लाया गया है। एक ने कहा कि – 12:30 के समय बादल थोड़ा-थोड़ा बढ़ रहा था उसी समय बहुत जोर से आवाज आई और मलबा मिट्टी, पेड़ बहकर आए हम जिस ब्रिज पर स्लैब डालने के लिए आए थे उसे तोड़ते हुए मलबा गांव की ओऱ चला गया। एक अन्य ने बताया कि – मंदिर के पास में लंगर लगा हुआ था वहां काफी भीड़ थी कई दुकानें थी उन सबको मलबा अपने साथ में बहाकर ले गया। कई यात्री भी थे वो सब मलबे की चपेट में आ गए जो टूटा हुआ मकान दिख रहा है उसके नीचे से 10 डेड बॉडी हमने निकाली और अभी भी कई मलबे के नीचे दबे हुए हैं। नाले के पास करीब 100-150 आदमी थे सब सैलाब में बह गए। हमने लोगों को आवाज लगाई लेकिन उन्हें सुनाई नहीं दिया।बादल फटने से मची थी तबाही
गुरुवार को बादल फटने के कारण 16 रिहायशी मकान, सरकारी इमारतें, तीन मंदिर, चार पानी की चक्कियां और करीबन 30 मीटर लंबा पुल बहकर खत्म हो गया। दर्जनभर से ज्यादा वाहन बाढ़ की तेज धार में बहकर मलबे में बदल गए। पानी की रफ्तार के कारण एक अस्थायी बाजार, लंगर स्थल और सुरक्षा चौकी को भी पूरी तरह तबाह कर दिया। सूत्रों की मानें तो अब तक रेस्क्यू टीम ने 167 घायलों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में यह देखा जा सकता है कि इस त्रासदी की भयावह तस्वीर दिखा रहे हैं। मलबे और गाद से पूरे गांव को समतल कर दिया है। मकान पत्तों की तरह ढह गए हैं और सड़कें बड़े-बड़े पत्थरों के कारण बंद हो गई है। -

Kulgam Encounter: 9 दिनों से चल रही भीषण मुठभेड़ में 2 जवान शहीद
जम्मू-कश्मीर: कुलगाम के अखाल इलाके में आतंकियों के साथ हुई मुठभेड़ का आज 9वां दिन है। बीती रात भर इलाके में जोरदार धमाकों और गोलीबारी की आवाजें आती रही है। इस दौरान सेना के दो जवान भी शहीद हो गए वहीं पिछली रात की गोलीबारी में दो अन्य जवान भी घायल हुए हैं। अब तक इस मुठभेड़ में एक आतंकी का शव भी बरामद हुआ है। वहीं कुल मिलाकर दो जवान शहीद और दस जवान घायल हो गए हैं। सूत्रों के अनुसार, घने जंगल और प्राकृतिक गुफा जैसे ठिकानों का फायदा उठाकर कम से कम तीन या फिर उससे ज्यादा आतंकी अब भी छिपेे हुए हैं। यह मुठभेड़ पिछले कई दशकों में सबसे लंबी चल रही आतंकी विरोधी अभियान बन चुकी है।1 अगस्त को शुरु हुआ था ऑपरेशन
गौरतलब है कि भारतीय सुरक्षाबलों ने 1 अगस्त को जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में आंतकियों की तलाश करने के लिए ऑपरेशन अखल शुरु किया था। यह कार्रवाई इलाके में आंतकियों के छिपे होने की खुफिया जानकारी मिलने के बाद शुरु की गई थी। ऐसा माना जा रहा है कि यहां 2 से 3 आतंकी छिपे हो सकते हैं। भारतीय सेना की चिनार कॉर्प्स के अनुसार, सेना जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ की संयुक्त टीम ने दक्षिण कश्मीर के जंगल क्षेत्र में आतंकियों की मौजूदगी के इनपुट आधार पर घेराबंदी और तलाशी अभियान शुरु हुआ है। -

CRPF जवानों की बंकर गाड़ी 200 Feet गहरी खाई में गिरी, 3 की मौत, 15 घायल, देखें वीडियो
उधमपुरः जिले के कदवा क्षेत्र के बसंतगढ़ इलाके में बड़ा हादसा हो गया। आज सुबह 10:30 बजे CRPF जवानों की बंकर गाड़ी 200 फीट गहरी खाई में गिर गई। हादसे में 3 जवानों की मौत हो गई, जबकि 15 अन्य घायल हो गए। प्रशासन के मुताबिक, 5 जवानों की हालत गंभीर है।
CRPF के अफसरों के अनुसार, ‘गाड़ी जवानों के एक दल को ले जा रहा था, जो सड़क से फिसलकर खड़ी ढलान से नीचे खाई में जा गिरा। तुरंत रेस्क्यू आप्रेशन चलाया गया जहां 3 शव घटनास्थल से बरामद किए जा चुके हैं, जबकि कई घायल जवानों को गंभीर हालत में पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया है।’ वहीं दूसरी ओर वाहन के गिरने के बाद आसपास के लोग तुरंत बचाव के लिए दौड़े। उन्होंने जवानों को रेस्क्यू करना शुरू किया। कुछ ही देर में सेना का जवान, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी पहुंच गए थे।
बताया जा रहा है कि जम्मू-कश्मीर के इलाके में लगातार हो रही बारिश के कारण सड़कों पर मिट्टी के चलते फिसलन हो गई है। सीआरपीएफ जवानों का वाहन फिसलकर ही गहरी खाई में जा गिरा। घटना को लेकर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने दुख जताया है।
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मुठभेड़ में लश्कर का आतंकी ढेर, AK-47 राइफल, मैगजीन और ग्रेनेड बरामद
जम्मू-कश्मीरः कुलगाम के अखल जंगल में सुरक्षाबलों ने शनिवार को लश्कर-ए-तैयबा के एक आतंकवादी को मार गिराया है। उसका शव भी बरामद हुआ है। आतंकी की पहचान पुलवामा के हारिस नजीर डार के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि हारिस उन 14 लोकल आतंकियों की लिस्ट में था, जिनके नाम सरकार ने पहलगाम हमले के बाद जारी किए थे। हारिस सी-कैटेगरी का आतंकी था। उसके पास से AK-47 राइफल, मैगजीन और ग्रेनेड और गोला-बारूद बरामद हुआ है।

जानकारी देते एक अधिकारी ने बताया कि इलाके में आतंकी गतिविधि की गुप्त सूचना मिलने के बाद शनिवार को सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया था। इस दौरान आतंकियों ने सुरक्षाबलों पर फायरिंग शुरू कर दी, जिसके बाद मुठभेड़ शुरू हो गई। जंगल में कुल कितने आतंकी छिपे हैं, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए इलाके में और सिक्योरिटी फोर्सेज को भेजा गया है। स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप, जम्मू-कश्मीर पुलिस, सेना और CRPF ‘ऑपरेशन अखल’ को अंजाम दे रहे हैं। अभी और आतंकियों के छिपे होने की आशंका जताई जा रही है।
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Operation Mahadev: श्रीनगर में पुलिस और आतंकियों में मुठभेड़, 3 आतंकी ढेर
जम्मू-कश्मीर: श्रीनगर के लिडवास इलाके में सोमवार को सुरक्षा बलों ने ऑपरेशन महादेव के अंतर्गत बड़ी कार्रवाई की है। उन्होंने आतंकी हमले में शामिल टीआरफ (The Resistance Front TRF) के तीन आतंकी मार गिराए हैं। आपको बता दें कि इस ऑपरेशन को सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस की संयुक्त टीम ने अंजाम दिया है। सुरक्षाबल इलाके में पहले ही सर्च ऑपरेशन चला रहे थे। इस दौरान उन्हें इन आतंकियों के बारे में पता चला तो उन्होंने मुठभेड़ में तीन आतंकियों को मार गिराया। आपको बता दें कि लिडवास श्रीनगर का बाहरी और घना जंगलों वाला क्षेत्र है। यह त्राल से पहाड़ी रास्ते के जरिए जुड़ता है। इस इलाके में पहले भी टीआरएफ की आंतकी गतिविधियों की खबरे सामने आती रहती है। इस ऑपरेशन को सेना की चिनार कॉर्प्स लीड कर रही है उन्होंने ही तीन आंतकियों के मारे जाने की पुष्टि की है। आपको बता दें कि इसी दौरान सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस का एक संयुक्त ऑपरेशन दाछीगाम फॉरेस्ट के ऊपरी हिस्सों में अभी भी चल रहा है। यह वही क्षेत्र है जहां पर जनवरी में भी टीआरएफ का एक ठिकाना ध्वस्त किया गया था। बताया जा रहा है कि दो दिनों पहले ही संदिग्ध गतिविधियों का पता चला था।जंगलों में अभी भी छिपे हो सकते हैं आंतकी
दाछीगाम में सोमवार को सर्च ऑपरेशन के दौरान अचानक गोलीबारी हुई थी। इसके कारण इलाके में तनाव फैल गया। इसके बाद सुरक्षा बलों के द्वारा पूरे इलाके को ही घेर लिया गया और ऑपरेशन तेज कर दिया। सुरक्षा एजेंसियों को यह शक है कि जंगलों में अभी भी टीआरएफ के और आतंकी छिपे हो सकते हैं। आपको बता दें कि दाछीगाम जंगल पहले से ही टीआरएफ का मुख्य हाइलाइट माना जाता है। इसी ग्रूप के द्वारा हाल ही में LoC के पास लैंड माइन ब्लास्ट की जिम्मेदारी ली गई थी। इसमें एक जवान शहीद हुआ था और तीन घायल हुए थे।पहलगाम में 26 लोगों की हुई थी हत्या
इसी साल 2025 में पहलगाम में 22 अप्रैल को आतंकियों ने देश को हिला देनी वाली घटना को अंजाम दिया था। इस हमले को पांच आतंकियों ने मिलकर अंजाम दिया था जो कि लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ी प्रॉक्सी संगठन टीआरफ के सदस्य ही बताए गए थे। आतंकियों ने वहां पर मौजूद टूरिस्टों पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी थी जिसमें 26 लोगों को मौत हो गई थी। इसमें से ज्यादा हिंदू समुदाय के ही लोग थे जिनको नाम पूछकर आंतकियों ने गोली मार दी थी।ऑपरेशन सिंदूर किया था लॉन्च
भारत सरकार की ओर से इस हमले का जवाब देने के लिए ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया था। इसके अंतर्गत पाकिस्तान में स्थित 9 आतंकियों ठिकानों पर स्टीक एयर स्ट्राइक हुई थी। ये ठिकाने बहावलपुर और मुरिदके जैसे इलाकों में स्थित थे जो कि लश्कर जैसे आतंकी संगठनों का गढ़ माने जाते हैं। इस हमले में कई हाई-वैल्यू टारगेट्स मार गिराया गया और आतंक फैलाने वाले इनफ्रास्ट्रक्चर को तबाह किया गया था। -

श्री वैष्णो देवी जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए अहम खबर, भारी बारिश के बाद खुला यह मार्ग
जम्मू-कश्मीर: कटरा में 2 दिन पहले भारी भूस्खलन हुआ है। इसके बाद पुराना पारंपरिक मार्ग बंद कर दिया गया था पंरतु कल दोपहर में इस मार्ग को फिर से खोल दिया गया है। ऐसे में अभी यात्रा को दोबारा से शुरु कर दिया गया है। अभी भी कटरा में धीमी-धीमी बारिश हो रही है ऐसे में इसके कारण हैलीकॉप्टर सेवा स्थगित कर दी गई है।
आपको बता दें कि जम्मू-कश्मीर क्षेत्र में लगातार भारी बारिश के चलते सुरक्षा को देखते हुए श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने तीर्थ यात्रा के लिए इस्तेमाल होने वाला नया हिमकोटि मार्ग एहतियात तौर पर अस्थायी रुप से बंद कर दिया था परंतु हालातों को देखते हुए 1 घंटे के बाद ही फिर से मार्ग खोल दिया गया है।
जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश के चलते सोमवार की सुबह भूस्खलन हुआ था। इस हादसे में 5 तीर्थयात्रियों के साथ-साथ 10 लोग घायल हो गए थे। अधिकारियों ने इस घटना की जानकारी देते हुए बताया कि यह घटना सुबह लगभग 8:50 बजे बाणगंगा के पास गुलशन में हुआ। यह जगह यात्रा का शुरुआती बिंदु है।
लैंडस्लाइड के तुरंत बाद बचाव कार्य शुरु किया गया। सभी चार फंसे हुए तीर्थयात्रियों को पास के एक अस्पताल में भी पहुंचाया गया था। यहां अधिकारियों ने बताया कि बचाव कार्य अभी भी जारी है।
अब ऐसे में यात्रा दोबारा शुरु हो गई है। 1 घंटे के बाद ही फिर से मार्ग खोल दिया है।
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19 दिन में इतने श्रद्धालुओं ने किए बाबा बर्फानी के दर्शन, बारिश के बाद भी नहीं थम रही यात्रा
जम्मू-कश्मीर: 3 जुलाई से शुरु हुई अमरनाथ यात्रा को 19 दिन हो चुके हैं। 19 दिनों में करीबन 3. 21 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने बाबा बर्फानी के दर्शन किए हैं। मंगलवार को 3,536 तीर्थयात्रियों का एक और जत्था जम्मू से घाटी के लिए रवाना हुआ है। अधिकारियों के अनुसार, यात्रा सुचारु और शांतिपूर्ण तरीके से चल रही है। पिछले 19 दिनों में 3.21 लाख से ज्यादा तीर्थयात्री पवित्र गुफा के दर्शन कर चुके हैं।
देशभर से हजारों श्रद्धालु रोज आधार शिविरों पर पहुंचते हैं जिससे वहां पर भारी भीड़ होती है। अधिकारियों ने बताया कि – 3536 यात्रियों का एक नया जत्था जम्मू के भगवती नगर यात्री निवास से दो सुरक्षा काफिलों के साथ घाटी के लिए रवाना हुआ है। 1,250 यात्रियों को लेकर 48 वाहनों का पहला काफिला सुबह 3:33 बजे बालटाल आधार शिविर के लिए रवाना हुआ है।
वहीं 2,2286 यात्रियों को लेकर 84 वाहनों का दूसरा काफिला सुबह 04:06 बजे पहलगाम आधार शिविर के लिए रवाना हुआ है। यात्रा पर जाने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से हजारों तीर्थयात्री रोज दोनों आधार शिविरों में जाते हैं जिससे यात्रियों की भारी भीड़ रहती है। आपको बता दें कि अधिकारियों के द्वारा इस साल की अमरनाथ यात्रा के व्यापक बहु-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था की गई है क्योंकि यह यात्रा 22 अप्रैल के कायराना हमले के बाद हो रही है।
जिस हमले में पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों ने पहलगाम की बैसरन घाटी में आस्था के आधार पर 26 नागरिकों को अलग-थलग करके उनकी हत्या कर दी थी। सेना, बीएसएफ, सीआरपीएफ, एसएसबी और स्थानीय पुलिस की मौजूद संख्या बढ़ाने के लिए सीएपीएफ की 180 अतिरिक्त कंपनियां भी तैनात की गई है।
इस साल तीर्थयात्रियों की सुरक्षा के लिए सेना ने 8,000 से ज्यादा विशेष कमांडो भी तैनात किए हैं। यह यात्रा 3 जुलाई को शुरु हुई और 38 दिनों के बाद श्रावण पूर्णिमा पर 9 अगस्त को खत्म होगी। यात्रा कश्मीर हिमालय से समुद्र तल से 3888 मीटर ऊपर स्थित पवित्र गुफा मंदिर तक या ता पारंपरिक पहलगाम मार्ग से या छोटे बालटाल मार्ग के जरिए पहुंचते हैं। पहलगाम मार्ग का इस्तेमाल करने वाले लोग चंदनवाड़ी, शेषनाग और पंचतरणी से होकर गुफा मंदिर तक पहुंचते हैं और 46 किलोमीटर की पैदल दूरी तय करते हैं।
इस यात्रा में तीर्थयात्रियों को गुफा मंदिर तक पहुंचने के लिए 4 दिन लगते हैं। वहीं छोटे बालटाल मार्ग का इस्तेमाल करने वाले लोगों को गुपा मंदिर तक पहुंचने के लिए 14 किलोमीटर की पैदल यात्रा करनी पड़ती है और दर्शन करने के बाद उसी दिन आधार शिविर आना पड़ता है। सुरक्षा कारणों से इस साल यात्रियों के लिए हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध नहीं है।
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स्थगित हुई अमरनाथ यात्रा, पहलगाम और बालटाल के रास्ते भी बंद, श्रद्धालु इस दिन कर पाएंगे दर्शन
धर्मः मानसून के चलते कई जगहों पर रास्ते बंद हो गए हैं। ऐसे में अब अमरनाथ यात्रा भी बारिश के चलते स्थगित हो गई है। अधिकारियों ने खुद इस बात की जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि पहलगाम घाटी में पिछले 36 घंटे से भारी बारिश के चलते आज अमरनाथ यात्रा स्थगित कर दी गई है। मौसम विभाग ने जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्सों में और भारी बारिश की चेतावनी भी जारी की गई है। यह चेतावनी गांदरबल जिले में यात्रा के बालटाल मार्ग पर हुए भूस्खलन में एक महिला तीर्थयात्री की मौत और तीन लोगों के घायल होने के बाद आई है।17 जुलाई तक हुई यात्रा स्थगित
कश्मीर के संभागीय आयुक्त विजय कुमार भिदुरी ने बताया कि – पहलगाम और बालटाल दोनों आधार शिविरों से श्री अमरनाथ जी यात्रा 17 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दी गई है। पिछले दो दिनों से लगातार हो रही भारी बारिश के चलते दोनों मार्गों पर पटरियों पर मरम्मत कार्य करना जरुरी है। उन्होंने कहा कि हालांकि बीती रात पंजतमी शिविर में रुके हुए यात्रियों को बीआरओ और पर्वतीय बचाव दलों की पर्याप्त तैनाती के साथ बालटाल जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है।कल से फिर शुरु होगी यात्रा
भिदुरी ने बताया कि सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने काम पूरा करने के लिए पटरियों पर भारी संख्या में लोगों और मशीनों की तैनाती की है ताकि बालटाल और पहलगाम दोनों आधार शिविरों से यात्रा फिर से शुरु हो सके। उन्होंने कहा कि पूरी संभावना है कि दिन के मौसम की स्थिति के आधार पर यात्रा कल फिर से शुरु हो जाएगी। वहीं एक अन्य अधिकारी ने बताया कि दो दिन मौसम परामर्श में जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश की चेतावनी दी गई जिसमें कश्मीर के यात्रा मार्ग भी शामिल हैं। आपको बता दें कि इस साल यह पहली बार है जब जम्मू से यात्रा स्थगित की गई है।पिछले साल 5 लाख से ज्यादा तीर्थयात्रियों ने किए थे दर्शन
आपको बता दें कि 3 जुलाई को यात्रा शुरु हुई थी। अब तक 2.47 लाख तीर्थयात्रा 3,880 मीटर ऊंचे इस मंदिर में दर्शन कर चुके हैं। 2 जुलाई को उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के द्वारा पहले जत्थे को हरी झंडी दिखाने के बाद से अब तक कुल 1,01,553 तीर्थयात्रा जम्मू-आधार शिविर से घाटी के लिए रवाना भी हो गए हैं। वहीं अभी तक 4 लाख से ज्यादा लोग तीर्थयात्रा के लिए ऑनलाइन पंजीकरण करवा चुके हैं। पिछले साल 5.10 लाख से ज्यादा तीर्थयात्रियों ने इस गुफा मंदिर में दर्शन किए थे। यहां पर प्राकृतिक तौर पर निर्मित बर्फ का शिवलिंग बना हुआ है।