Category: Government News|Himachal

  • मुख्यमंत्री ने राहत केंद्रित से प्रतिरोध केंद्रित प्रशासन अपनाने पर दिया बल

    मुख्यमंत्री ने राहत केंद्रित से प्रतिरोध केंद्रित प्रशासन अपनाने पर दिया बल

    शिमला : प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती घटनाओं और इनसे उत्पन्न गंभीर खतरों को ध्यान में रखते हुए जन सुरक्षा एवं प्रभावी आपदा प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार सक्षम व प्रतिरोधी अधोसरंचना के निर्माण की दिशा में कार्य कर रही है। इस क्रम में सरकार ने 2,688 करोड़ रुपये की ‘‘हिमाचल प्रदेश रेजिलिएंट एक्शन फॉर डेवलपमेंट एंड डिजास्टर रिकवरी’’ (एचपी-रेडी) परियोजना शुरू की है, इसका उद्देश्य प्रदेशभर में आपदा-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाना है। यह परियोजना जनवरी 2026 से नवंबर 2030 तक लागू की जाएगी और इसमें आपदा से निपटने की तैयारी, आपदा न्यूनीकरण तथा पुनर्वास तंत्र को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। ग्लोबल वार्मिंग के कारण उत्पन्न परिस्थितियों से पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश सर्वाधिक प्रभावित है और प्रदेश प्राकृतिक आपदाओं के प्रति अत्यंत संवेदनशील है। पिछले तीन वर्षों में राज्य में 66 से अधिक बादल फटने की घटनाएं, 234 भूस्खलन और 121 फ्लैश फ्लड की घटनाएं दर्ज की गई हैं। इन आपदाओं से बड़ी संख्या में जन हानि हुई है तथा सार्वजनिक अवसंरचना और निजी संपत्ति को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है। इसके अतिरिक्त आपदा के कारण सामान्य जनजीवन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

    एचपी-रेडी परियोजना के तहत आपदा प्रभावित सार्वजनिक अधोसंरचना जैसे परिवहन नेटवर्क, पेयजल योजनाएं, स्वच्छता प्रणालियां तथा विद्युत अवसंरचना इत्यादि को पुनर्स्थापित और सुदृढ़ किया जाएगा। परियोजना का उद्देश्य आजीविका और रोजगार के अवसरों को सृजित करना तथा आपदा जोखिम वित्तपोषण और इंश्योरेंस के लिए एक व्यापक प्रणाली विकसित करना है। इसके अतिरिक्त, आपदा प्रबंधन के दृष्टिगत संस्थागत क्षमता निर्माण और मजबूत वित्तीय तंत्र को विकसित करने पर भी बल दिया जाएगा। परियोजना के अंतर्गत प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों को मजबूत करने, आपदा-रोधी अवसंरचना के निर्माण एवं प्रोत्साहन, वैज्ञानिक भू-उपयोग योजना अपनाने तथा तकनीक, पारंपरिक ज्ञान और विभिन्न विभागों के समन्वय के माध्यम से सामुदायिक तैयारी को बेहतर बनाने पर विशेष बल दिया जाएगा।

    सरकार पंचायती राज संस्थाओं, महिला मंडलों, युवक मंडलों तथा स्कूली बच्चों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम भी शुरू करेगी ताकि जमीनी स्तर पर आपदा तैयारी की संस्कृति विकसित की जा सके। यह पहल न केवल इन कार्यों में सामुदायिक भागीदारी सुनिश्चित करेगी, बल्कि प्राकृतिक आपदाओं के दौरान होने वाले नुकसान को भी कम करने में मदद करेगी। परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एक समर्पित परियोजना प्रबंधन इकाई गठित की जाएगी तथा नियमित निगरानी और मूल्यांकन की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश पारिस्थितिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील राज्य है। पिछले तीन वर्षों में आई प्राकृतिक आपदाओं ने हमें राहत केंद्रित शासन से प्रतिरोधी केंद्रित प्रशासन की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया है। जन सुरक्षा, आजीविका और विकास संबंधी परिसंपत्तियों की सुरक्षा के लिए एचपी-रेडी एक विस्तृत कार्य योजना है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना इंगित कर रही है कि प्रतिरोधी कार्य योजना से सतत् विकास के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस पहल के तहत संवेदनशील जिलों और समुदायों को प्राथमिकता दी जाएगी तथा जमीनी स्तर पर आपदा प्रबंधन क्षमता को मजबूत किया जाएगा ताकि हिमाचल प्रदेश की विकास यात्रा जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों से सुरक्षित रह सके।

     

  • मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से जनगणना कार्य में बढ़-चढ़ कर भाग लेने का किया आग्रह

    मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से जनगणना कार्य में बढ़-चढ़ कर भाग लेने का किया आग्रह

    शिमला : मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने निदेशालय जनगणना द्वारा दिए गए ‘स्वगणना’ विकल्प का अधिक से अधिक उपयोग करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि आम नागरिक 1 जून से 15 जून, 2026 तक स्वगणना पोर्टल se.census.gov.in पर जाकर अपनी जानकारी दर्ज करवा सकते हैं। उन्होंने कहा कि जनगणना हमारे लोकतंत्र और विकास की रीढ़ है तथा यह एक ऐसा महत्वपूर्ण माध्यम है, जिसके द्वारा हमें जनसंख्या, परिवारों की स्थिति, आवास, संसाधनों और नागरिकों को उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी प्राप्त होती है।

    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में जनगणना दो चरणों में की जाएगी, जिसमें प्रथम चरण में 16 जून से 15 जुलाई के बीच मकान सूचीकरण एवं मकान गणना तथा द्वितीय चरण में जनसंख्या की गणना की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस बार जनगणना डिजिटल मोड में की जाएगी, जिसमें प्रगणक और पर्यवेक्षक अपने मोबाइल का उपयोग कर मकानों एवं परिवारों की जानकारी को एकत्रित करेंगे। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के हिमाच्छादित क्षेत्रों में द्वितीय चरण का कार्य 11 सितम्बर से 30 सितम्बर, 2026 के मध्य तथा शेष क्षेत्रों में 9 फरवरी, 2027 से 28 फरवरी, 2027 तक किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से आग्रह किया कि वे इस राष्ट्रीय महत्व के कार्य में बढ़-चढ़कर भाग लें तथा प्रगणक, पर्यवेक्षक और जनगणना से जुड़े कर्मचारियों को सही एवं पूरी जानकारी दें। उन्होंने कहा कि यह आंकड़े सरकार को भविष्य की योजनाओं एवं नीतियों को बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

  • उत्तराखंड और पूर्वाेत्तर राज्यों में बादल फटने की घटनाएं बढ़ने की संभावना

    उत्तराखंड और पूर्वाेत्तर राज्यों में बादल फटने की घटनाएं बढ़ने की संभावना

    शिमला : मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने मंगलवार सायं शिमला के गेयटी थियेटर में नगर निगम शिमला के पूर्व उप-महापौर टिकेंद्र पंवर द्वारा संपादित पुस्तक ‘सिटी लिमिट्स-द क्राइसिज़ ऑफ अर्बनाइजेशन’ का विमोचन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रकृति ने हिमाचल प्रदेश को स्वच्छ आबोहवा और पानी का उपहार दिया है और इन संसाधनों का संरक्षण प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि राज्य की राजधानी और सबसे बड़े शहर के रूप में शिमला ने पिछले कुछ वर्षों में अनेक बदलाव देखें है। उन्होंने कहा कि वह बचपन से लेकर अब तक शिमला शहर में हो रहे बदलावों को देख रहे हैं। जहां पहले जंगल हुआ करते थे, वहां अब इमारतें बन गई हैं। हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए यहां सुनियोजित निर्माण आवश्यक है| मुख्यमंत्री ने कहा कि शिमला शहर को तारों के जाल से निजात दिलवाने के लिए 145 करोड़ रुपये की लागत से भूमिगत डक्ट परियोजना क्रियान्वित की जा रही है। वर्तमान में सब्जी मंडी क्षेत्र में 600 करोड़ रुपये की लागत से एक आधुनिक परिसर विकसित किया जा रहा है। लिफ्ट के पास भी एक अंडरपास प्रस्तावित है।

    उन्होंने कहा कि शिमला शहर में 24 घंटे पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 800 करोड़ रुपये की जलापूर्ति योजना क्रियान्वित की जा रही है। इसके अलावा, सर्कुलर रोड को चौड़ा करने के लिए भूमि अधिग्रहण का कार्य जारी है और शहर की सुंदरता बनाए रखने के लिए अधिसूचित हरित क्षेत्रों को बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। प्रदेश सरकार के सतत विकास को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण संतुलन को केंद्र में रख कर शिमला शहर के सौंदर्यीकरण के लिए कई परियोजनाएं चलाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि हिम-चंडीगढ़, हिम-पंचकूला और कांगड़ा में एयरो सिटी जैसी नई शहरीकरण की परियोजनाएं तैयार की जा रही हैं। इसके अतिरिक्त पर्यटन से संबंधित अधोसंरचना को भी मजबूत किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में हिमाचल प्रदेश ने दो बड़ी प्राकृतिक आपदाओं को झेला है, जिससे राज्य को भारी नुकसान हुआ था। उन्होंने कहा कि अब बादल फटने की घटनाओं का वैज्ञानिक अध्ययन किया जा रहा है, क्योंकि ऐसी घटनाएं अब केवल ऊंचाई वाले क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहीं बल्कि निचले क्षेत्रों में भी घटित हो रही हैं। उन्होंने सिराज विधानसभा क्षेत्र के कुछ हिस्सों में हुई घटनाओं का भी उल्लेख किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि गृह मंत्री के साथ आयोजित बैठक के दौरान उन्होंने केंद्रीय मंत्री को अवगत करवाया था कि भविष्य में बादल फटने की घटनाएं केवल हिमाचल प्रदेश तक सीमित नहीं रहेंगी। ऐसी घटनाएं उत्तराखंड और पूर्वाेत्तर राज्यों में भी बढ़ सकती हैं। पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार हिमाचल प्रदेश को विकास के पथ पर अग्रसर करने के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। इस अवसर पर झारखण्ड उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान ने कहा कि लोगों को अपने आचरण में सुधार करने की आवश्यकता है। पर्यटन से संबंधित चिंताओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पर्यटकों के लिए जारी दिशा निर्देशों की अनुपालना सुनिश्चित करने के साथ-साथ लोगों को अपनी सामूहिक जिम्मेदारी को समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि कई लोग पार्किंग सुविधा न होने के बावजूद कई वाहन खरीद रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्कूल के समय में ट्रैफिक जाम का मुख्य कारण पर्यटकों के वाहन नहीं बल्कि मुख्य रूप से हिमाचल में पंजीकृत वाहन होते हैं। उन्होंने कहा कि हम सभी को आत्म अवलोकन करने की आवश्यकता है।

    उन्होंने कहा कि राज्य में पूर्ण संस्थागत जवाबदेही की आवश्यकता है। शहरीकरण केवल डैमोग्राफिक बदलाव नहीं बल्कि समाज के पुनर्गठन की प्रक्रिया है। लाखों लोग साझा संसाधनों का उपयोग कर रहे हैं और शहरी निकायों तथा योजना व्यवस्था पर निर्भर हैं। लेकिन हमारी संस्थाएं इस बदलाव के साथ कदमताल नहीं कर पा रही हैं। उन्होंने कहा कि संस्थागत क्षेत्रों में रहने वाली कमी से कमजोर लोग सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। इस अवसर पर शिमला के महापौर सुरेन्द्र चौहान, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार मीडिया नरेश चौहान, शिक्षा सचिव राकेश कंवर, डीजी होमगार्ड्स सतवंत अटवाल, ट्रिब्यून ब्यूरो प्रमुख प्रतिभा चौहान और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

  • देव भूमि हिमाचल में धार्मिक पर्यटन सर्किट विकसित करने की आवश्यकता

    देव भूमि हिमाचल में धार्मिक पर्यटन सर्किट विकसित करने की आवश्यकता

    शिमला : राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने आज ‘देव भूमि’ हिमाचल प्रदेश में एक समर्पित धार्मिक पर्यटन सर्किट विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इस सर्किट के माध्यम से प्रदेश के प्रसिद्ध मंदिरों, शक्तिपीठों, मठों और धार्मिक स्थलों को बेहतर सड़क, आधुनिक सुविधाओं और मजबूत संपर्क व्यवस्था से जोड़ा जाना चाहिए। इससे न केवल प्रदेश की धार्मिक पहचान मजबूत होगी, बल्कि रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा और प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक एवं धार्मिक विरासत का संरक्षण भी होगा।

    राज्यपाल ने यह बात आज कांगड़ा जिले स्थित मां ज्वाला देवी जी मंदिर में शीश नवाने के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए कही। इस अवसर पर लेडी गवर्नर बिंदु गुप्ता भी उनके साथ उपस्थित रहीं। राज्यपाल ने मां ज्वाला देवी जी से प्रदेश और देशवासियों की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में मां ज्वाला देवी जी, मां ब्रिजेश्वरी देवी जी, मां चिंतपूर्णी जी, मां नैना देवी जी, मां चामुंडा देवी जी सहित अनेक प्राचीन मंदिर और मठ स्थित हैं, जो विश्वभर में श्रद्धा के केंद्र हैं। इन सभी धार्मिक स्थलों को एक व्यापक धार्मिक पर्यटन सर्किट से जोड़ने की आवश्यकता है, ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

    उन्होंने कहा कि धार्मिक पर्यटन हिमाचल की अर्थव्यवस्था का एक मजबूत आधार बन सकता है। राज्यपाल ने प्रदेश सरकार, पर्यटन और अन्य संबंधित विभागों से मिलकर श्रद्धालुओं के लिए विश्वस्तरीय सुविधाएं विकसित करने का आह्वान किया, साथ ही धार्मिक स्थलों की पवित्रता और आध्यात्मिक वातावरण को बनाए रखने पर भी बल दिया। राज्यपाल ने मंदिर प्रशासन और स्थानीय प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं के लिए की गई व्यवस्थाओं की सराहना भी की।

  • हिमाचल के सरकारी स्कूलों को बनाया जाएगा देश में सर्वश्रेष्ठ

    हिमाचल के सरकारी स्कूलों को बनाया जाएगा देश में सर्वश्रेष्ठ

    शिमला : मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज नव स्तरोन्न्त सीबीएसई राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, छोटा शिमला में विद्यार्थियों के साथ संवाद किया। संवाद के दौरान मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों के प्रश्नों का सहजता से उत्तर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने शिक्षा व्यवस्था में व्यापक स्तर पर बदलाव किए हैं और इनके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे यहां भाषण देने नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के साथ बातचीत करने आए हैं ताकि शिक्षा व्यवस्था की कमियों की पहचान कर उन्हें प्रभावी ढंग से दूर किया जा सके। वर्तमान राज्य सरकार हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों को देश के सर्वश्रेष्ठ स्कूल बनाने की दिशा में कार्य कर रही है ताकि विद्यार्थियों को सरकारी संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। सरकारी स्कूलों के शिक्षक अत्यंत सक्षम, मेहनती होते हैं और उनकी नियुक्ति प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम होती है।

    संवाद के दौरान विद्यार्थियों ने सीबीएसई प्रणाली से लेकर मुख्यमंत्री के निजी अनुभवों से संबंधित अनेक प्रश्न पूछे। छात्र आरव ठाकुर ने उनके स्कूली दिनों के पसंदीदा खेल के बारे में पूछा। मुख्यमंत्री ने बताया कि वे वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में सक्रिय रूप से भाग लेते थे और हॉकी, क्रिकेट तथा हैंडबॉल खेलते थे। उन्होंने कहा कि वे हैंडबॉल टीम के कप्तान भी रहे हैं और उन्हें ट्रैकिंग का भी शौक रहा है। उन्होंने बताया कि उनकी पहली ट्रैकिंग यात्रा टापरी से रिकांगपिओ तक थी। स्कूल के विद्यार्थी ने बताया कि वर्तमान में भौतिकी विज्ञान विषय के शिक्षक नहीं हैं और राजनीति विज्ञान के भी केवल एक ही शिक्षक हैं। विद्यार्थी ने रिक्त पदों को भरने का आग्रह किया। इस प्रश्न का उत्तर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह स्कूल सीबीएसई संस्थान बना है और अब इस वर्ष 30 जून से पहले सभी रिक्त पदों को भर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अब विद्यार्थियों को सीबीएसई पाठयक्रम के तहत अधिक विषयों का विकल्प मिलेगा।

    विद्यार्थियों को सफलता का मूल मंत्र देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जीवन में सफल होने के लिए अनुशासन, समर्पण और संघर्ष करने की भावना का होना अत्यंत आवश्यक हैं। अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए निरंतर मेहनत करने वाला व्यक्ति ही सफलता हासिल कर सकता है। इस अवसर पर नगर निगम शिमला के महापौर सुरेंद्र चौहान, सचिव शिक्षा राकेश कंवर, स्कूल शिक्षा निदेशक आशीष कोहली, विद्यालय स्टाफ के सदस्य तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।

  • विरासत का संरक्षक बना ज्ञान भारतम मिशन

    विरासत का संरक्षक बना ज्ञान भारतम मिशन

    चंडीगढ़ : हरियाणा ने ज्ञान भारतम मिशन के तहत अब तक कुल 27,587 पांडुलिपियां अपलोड की हैं। यह राज्य की समृद्ध बौद्धिक, सांस्कृतिक और दस्तावेजी विरासत के संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम है। राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण की प्रगति की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी ने कहा कि पांडुलिपियों का संरक्षण केवल अभिलेखीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सदियों पुराने ज्ञान, परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों को भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने का महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की पहल भारत की समृद्ध बौद्धिक विरासत को संरक्षित करने के साथ-साथ शोधकर्ताओं और विद्वानों के लिए इसे अधिक सुलभ बनाएगी।

    समीक्षा बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने विभिन्न जिलों में चल रहे सर्वेक्षण कार्य का आकलन किया और सभी विभागों को जन-जागरूकता और दस्तावेजीकरण के प्रयासों में और तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में उपलब्ध बहुमूल्य पांडुलिपियों का व्यापक दस्तावेजीकरण सुनिश्चित करने के लिए सरकारी विभागों, शिक्षण संस्थानों और जिला प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। बैठक में बताया गया कि राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण के क्रियान्वयन के लिए अभिलेखागार विभाग को राज्य नोडल विभाग नामित किया गया है। इस पहल के प्रभावी कार्यान्वयन और निगरानी के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय स्थायी समिति का गठन किया गया है। इसके अलावा, सर्वेक्षण प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए सभी जिलों में जिला स्तरीय समितियां और नोडल अधिकारी भी नियुक्त किए गए हैं।

    अभिलेखागार विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. साकेत कुमार ने बताया कि सर्वेक्षण की प्रगति सुनिश्चित करने के लिए लगातार निगरानी और जिला स्तर पर समन्वय किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि यह पहल एक व्यापक डिजिटल भंडार तैयार करने में सहायक होगी, जिससे देश की ज्ञान परंपरा को संरक्षित करने और उसे विश्वभर के शोधकर्ताओं, विद्वानों तथा भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। जिलों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए कुरुक्षेत्र ने अब तक ज्ञान भारतम पोर्टल पर 15,818 पांडुलिपियां अपलोड की हैं। इसके लिए मुख्य सचिव ने जिला प्रशासन की सराहना करते हुए अन्य जिलों से भी सर्वेक्षण और दस्तावेजीकरण प्रक्रिया को तेज करने का आह्वान किया। मुख्य सचिव ने अभिलेखागार विभाग द्वारा चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों की भी समीक्षा की। इन अभियानों के तहत प्रिंट और सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को पांडुलिपियों की पहचान और दस्तावेजीकरण के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

    गौरतलब है कि केन्द्रीय संस्कृति मंत्रालय द्वारा शुरू किए गए ज्ञान भारतम मिशन का उद्देश्य देश की पांडुलिपि विरासत का सर्वेक्षण, दस्तावेजीकरण, संरक्षण, डिजिटलीकरण और प्रसार करना है। इसके लिए शैक्षणिक संस्थानों, संग्रहालयों, पुस्तकालयों और निजी संग्रहकर्ताओं का सहयोग लिया जा रहा है। बैठक में अभिलेखागार विभाग की निदेशक डॉ. बलप्रीत सिंह और उप निदेशक श्रीमती मंजू यादव सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।