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  • बदलते मौसम के कारण हो रहें हैं बीमार तो यह फल जरूर खाएं

    नई दिल्ली :  बदलता मौसम हमारे शरीर को काफी प्रभावित करता है। मौसमी बदलाव के साथ ही कई तरह के संक्रमण फैलने लगते है। बदलते मौसम में हमारी प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है जिससे हम आसानी से बीमार पड़ जाते है। नवंबर महीने में मौसम में काफी उतार-चढ़ाव आने लगता है कभी सर्द तो गर्म महसूस होता है जो हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। ऐसे में हमें अपने खान-पान में कुछ ऐसी चीजें शामिल करनी चाहिए जो हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाएं और हमें स्वस्थ रखें। फल ऐसा ही एक आहार है जो हमारे शरीर को सही पोषक तत्व देता है और हमें बीमारियों से दूर रखता है। कुछ ऐसे ही फल हैं जो मौसमी बीमारियों से लड़ने में मदद करते हैं आइए जानते हैं इसके बारे में.

     संतरा

    संतरा मौसमी बीमारियों से लड़ने में बहुत ही फायदेमंद साबित होता है। इसमें पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट फ्री रेडिकल्स को रोकते हैं जो कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते है। संतरे में विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट्स जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं जो हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने में मदद करते है।

    अमरूद

    अमरूद में विटामिन C, एंटीऑक्सीडेंट्स, पोलीफेनोल्स और फ्लेवोनॉएड्स जैसे पोषक तत्व पाए जाते है। विटामिन C हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है और एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर की कोशिकाओं को नुकसान से बचाते है। अमरूद के गुण इन्फ्लेमेशन को कम करने में भी मदद करते है।

    सेब

    सेब में विटामिन C, एंटीऑक्सिडेंट्स और फाइबर की अच्छी मात्रा होती है. विटामिन C हमारी इम्यूनिटी को बूस्ट करता है और एंटीऑक्सिडेंट्स शरीर को फ्री रेडिकल्स के नुकसान से बचाते है। सेब के छिलके में क्वर्सेटिन नामक एंटीऑक्सिडेंट पाया जाता है जो वायरस और बैक्टीरिया से लड़ने में मदद करता है। इसको खाने से शरीर में प्रीबायोटिक्स की मात्रा बढ़ती है जो पाचन तंत्र को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करते है। इसे खाने से एनर्जी लेवल भी बना रहता है और थकान दूर होती है।

    अना

    अनार मौसमी बीमारियों से लड़ने में एक बेहतरीन फल है। अनार में कई ऐसे पोषक तत्व पाए जाते हैं जो हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करते हैं और बीमारियों से लड़ने की क्षमता को बढ़ाते है। अनार में विटामिन सी, एंटीऑक्सिडेंट्स और फाइबर होता है जो आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।

  • October और November के महीने में क्यों होते है ज्यादा बीमार? जानें वजह

    Health Tips: जैसे ही शरद ऋतु के पत्ते गिरते हैं और हवा में ठंड लगती है, कई लोग अक्टूबर और नवंबर में मौसमी बीमारियों से जूझते हुए पाते हैं। मौसम में बदलाव को अक्सर बीमारी में इजाफे के लिए जिम्मेदार ठहराया जाता है, इन महीनों के दौरान लोगों को बीमारियों के प्रति अधिक संवेदनशील होने के पीछे के कई कारण हैं और सिर्फ तापमान में गिरावट ही वजह नहीं हैं।

    1. अक्टूबर और नवंबर में दिन छोटा होने लगता है जिससे हम धूप के संपर्क में कम आते है, इससे विटामिन डी के उत्पादन में कमी आ जाती है, जो इम्यूनिटी बूस्ट करने के लिए बेहद जरूरी है। यही वजह है कि इस दौरान हमें ज्यादा वायरल इंफेक्शन का सामना करना पड़ता।

    2. इन दोनों महीनों में लोग बाहर से ज्यादा इंडोर में वक्त गुजारते हैं क्योंकि सर्द हवाएं त्वचा को चुभने लगती है। क्योंकि कई लोग एक साथ संपर्क में आते हैं इसलिए वायरस को फैलने के लिए आइडियल कंडीशन बन जाता है।

    3. बरसात के बाद मौसम बदलने लगता है और जगह-जगह पानी जमा होने लगते हैं, जो डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया के मच्छरों के लिए परफेक्ट ब्रीडिंग ग्राउंड तैयार कराता है। अक्टूबर-नवंबर आते आते इन मच्छरों की संख्या काफी ज्यादा हो जाती है, जिससे बीमारी फैलती है।

    4. मौसम न ही ज्यादा गर्म और न ही ज्यादा ठंडा होता है, ऐसे में लोग घटते और बढ़ते तापमान में लापरवाही कर बैठते हैं, जैसे देर रात के वक्त ठंडे कपड़े न पहनना, लो टेम्प्रेचर के दौरान नहाना। ऐसी गलतियां कई लोगों को भारी पड़ जाती है।

  • भूलकर भी न खिलाएं बच्चों को ये 5 तरह के Foods

    भूलकर भी न खिलाएं बच्चों को ये 5 तरह के Foods

    नई दिल्लीः आपके बच्चों की सेहत और विकास कैसे होगा ये काफी हद तक इस बात पर डिपेंड करता है कि आप अपने लाडले और लाडलियों को कैसे फूड्स खाने को दे रहे हैं। बच्चों को आप कितनी भी हेल्दी डाइट खिलाने की कोशिश क्यों न करें उन्हें कई तरह के जंक और फास्ट फूड्स पसंद आते हैं। भले ही आप उनसे कितना भी प्यार क्यों न करते हैं, लेकिन उनकी जिद के आगे बिलकुल भी न झुकें वरना सेहत को नुकसान हो सकता है। आइए जानते हैं कि हमें अपने छोटे बच्चों को क्या-क्या नहीं खिलाना चाहिए।

    1. कोल्ड ड्रिंक्स को देखकर बच्चों का मन काफी ज्यादा मचलता है। अक्सर वो बड़ों को देख ऐसे पेय पदार्थ पीने की जिद करते हैं। इसमें चीनी की मात्रा काफी ज्यादा होती है जिससे वजन का बढ़ना। कोलेस्ट्रॉल में इजाफा होना, दांत सड़ना और कई अन्य परेशानियां हो सकती हैं।

    2. अपने बच्चों के लिए फास्ट फूड को या तो सीमित कर लें इनका सेवन पूरी तरह बंद करा दें क्योंकि इनमें हद से ज्यादा अनहेल्दी फैट्स, सोडियम और शुगर की मात्रा होती है जो किड्स की सेहत को बुरी तरह नुकसान पहुंचाती है।

    3. चिप्स, बिस्किट और कई तरह के स्नैक्स का स्वाद बच्चों को काफी ज्यादा आकर्षित करता है, लेकिन इन चीजों को अपने बच्चों की पहुंच से दूर रखें क्योंकि इसमें फैट, सोडियम और आर्टिफीशियल इंग्रेडिएंट्स का इस्तेमाल काफी ज्यादा होता है जो बच्चों की सेहत के लिए बिलकुल भी अच्छा नहीं है।

    4. रोजाना नाश्ते में यूज होने वाला व्हाइट ब्रेड या इससे बनी सैंडविच बच्चों को काफी ज्यादा पसंद आती है, लेकिन इसको देर तक ताजा रखने के लिए नमक मिलाया जाता है। हाई सोडियम डाइट बच्चों के लिए अच्छे नहीं होते। इसके जगह होल ग्रेन की रोटी खाएं।

    5. मीठी कैंडी बच्चों की कमजोरी होती है, लेकिन मां-बाप को इस आदत पर लगाम लगानी चाहिए क्योंकि इससे बच्चों में मोटापा बढ़ जाता है और कई तरह के हेल्थ इश्यूज होते हैं। साथ ही ये दांतों की सड़न के लिए जिम्मेदार है।

  • कम उम्र में परेशान कर रही कमर दर्द? तो फाॅलो करें ये 5 आसान उपाय…

    कम उम्र में परेशान कर रही कमर दर्द? तो फाॅलो करें ये 5 आसान उपाय…

    Health Tips: अनियमित दिनचर्या और गलत खानपान कई बीमारियों की वजह बन सकता है। इसमें कमर दर्द टॉप पर है। इसको आम भाषा में बैक पेन भी कहा जाता है। महिला हो या फिर पुरुष, आज कल कमर दर्द एक आम समस्‍या बन गई है। इस परेशानी से आज के समय में आधी से ज्यादा आबादी परेशान है। बेशक, कमर दर्द के कई कारण माने जाते हैं, लेकिन लंबे समय तक एक ही पॉश्चर में बैठकर काम करना या शरीर में कैल्शियम और विटामिन की कमी होना इसके मूल कारणों में से एक हैं। सामान्यता ये दिक्कत 30 की उम्र के बाद शुरू होती है, लेकिन वर्तमान में यह बीमारी युवाओं को भी आगोश में ले रही है। यह दर्द लोगों का उठने-बैठने तक में भी तबाह कर देता है। हालांकि कुछ उपायों को अपनाने से आप इस दर्द को हमेशा के लिए दूर कर सकते हैं।

    एक्सपर्ट के अनुसार, खुद को फिट और हेल्दी रखने के लिए नियमित तौर पर व्यायाम बेहद जरूरी है। ऐसा करने से न केवल कमर का दर्द ठीक होता है, बल्कि शरीर की फिटनेस भी बनी रहती है। साथ ही वॉकिंग और स्विमिंग भी अच्छे विकल्पों में से एक हैं। वहीं, रोजाना कम से कम 20 मिनट पैदल चलें। ऐसा करने से रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है।

    यदि आप किसी तरह का वजन उठा रहे हैं तो ध्यान रहे कि आप इसे आराम से उठाएं। क्योंकि अचानक या गलत तरीके से वजन उठाने से आपकी कमर में दर्द हो सकता है। कोशिश करें कि झटके से उठने, बैठने या सोने से भी बचें, ताकि कमर पर अचानक प्रेशर न पड़े। इसके अलावा, पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और हरी सब्जियों और फलों का सेवन करें।

    अनियमित दिनचर्या और गलत खानपान लगातार शरीर का मोटापा बढ़ा रहे हैं। ये शरीर के साथ कमर दर्द में भी तकलीफ देता है। इसको कंट्रोल करने के लिए नियमित एक्सरसाइज के साथ अच्छे खानपान पर ध्यान दें। ऐसा करने से कमर में होने वाला दर्द भी दूर हो सकता है।

    घंटों एक ही पोजीशन में बैठे रहना भी कमर दर्द का एक बड़ा कारण है। बेहतर होगा कि बैठने की मुद्रा को हर 15-20 मिनट में बदलते रहें, ताकि आपकी मांसपेशियां अच्छे से काम कर सकें। ऐसा करने से आप कमर दर्द से बचे रहेंगे।

    देर तक काम करते वक्त आपको कुछ सावधानियां बरतना बेहद जरूरी है। यदि आप लैपटॉप और डेस्कटॉप पर काम कर रहे हैं तो ध्यान रखें कि कंप्यूटर का माउस 90 डिग्री के कोण पर हो। वहीं, मोबाइल इस्तेमाल करते हुए गर्दन न झुकाएं बल्कि सिर्फ नजर नीची करें।

  • सुबह उठने के बाद रहती है थकान? तो देखें ये वीडियो  

    सुबह उठने के बाद रहती है थकान? तो देखें ये वीडियो  

    Ayurvedic Tips : क्या आप भी सुबह उठने का बाद बहुत थकान महसूस करते हैं? जैसे-जैसे हम वसंत श्रतु और गर्मियों के मौसम में प्रवेश करते हैं, लोगों के साथ सुबह उठने का बाद थकान की समस्या देखने को मिलती है। भले ही, उन्होंने रात में 7-8 घंटे की अच्छी नींद क्यों न ली हो, इसके बावजूद उन्हें सुबह बहुत नींद आती है। 

    आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. वरालक्ष्मी यनामंद्र (BAMS, Ayurveda) के अनुसार, वसंत और गर्मियों की शुरुआत के दौरान शरीर में कफ का प्रभाव अधिक होता है। साथ ही सुबह 6-8 बजे के समय कफ अधिक प्रभावी है। यही कारण है, कि इस दौरान आप अधिक थकान और आलस्य महसूस करते हैं। लेकिन लोगों को इसके कारण काफी असजता होती है। इसकी वजह से उनके कई काम भी देर से होते हैं। ऐसे में सुबह की थकान से छुटकारा पाने लिए तरह-तरह के उपाय ढूंढन में लगे रहते हैं। डॉ. वरालक्ष्मी ने अपनी एक इंस्टाग्राम पोस्ट में सुबह की थकान को दूर करने के लिए 3 आयुर्वेदिक उपाय शेयर किये हैं। इस लेख में हम आपको इनके बारे में विस्तार से बता रहे हैं।

    सुबह की थकान दूर करने के आयुर्वेदिक उपाय-

    सुबह उठने के बाद तरोताजा महसूस करने के लिए दैनिक व्यायाम से बेहतर कुछ भी नहीं हो सकता है। कुछ सरल एक्सरसाइज, स्ट्रेचिंग या मॉर्निंग वॉक करने से थकान दूर होती है और हल्का महसूस करते हैं। इससे आपको पूरा दिन एनर्जेटिक और स्वस्थ रहने में भी मदद मिलेगी।

    शरीर की गर्मी बढ़ाने वाले फूड्स खाएं

    तीखे, कड़वे और कसैले स्वाद वाले हल्के भोजन खाने से आपके भीतर की गर्मी बढ़ाने में मदद मिल सकती है। यह पाचन को बनाए रखते हैं और आपको एनर्जी प्रदान करते हैं। यह आपके शारीरिक स्वास्थ्य को बनाए रखने में भी मदद करते हैं।

  • कई बीमारियों के बचाता है बेबी कॉर्न,  जानें कैसे

    कई बीमारियों के बचाता है बेबी कॉर्न, जानें कैसे

    Baby Corn Benefits : बेबी कॉर्न एक ऐसी सुपरफूड है जिसे हमें अपने रोजाना आपको अपने भोजन में शामिल करना चाहिए। बेबी कॉर्न में कई पोषक तत्व पाए जाते हैं । जो हमारे शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं. बेबी कॉर्न में विटामिन, मिनरल्स, एंटीऑक्सीडेंट्स और फाइबर होते हैं जो हमें कैंसर, दिल की बीमारियों, मोटापा और डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों से बचाते हैं। यह हमारी इम्यूनिटी को मजबूत करता है और त्वचा, बालों और आँखों के लिए भी बहुत लाभदायक होता है।बेबी कॉर्न को हम सलाद, सब्जी, सूप के रूप में आसानी से अपने भाजोन में शामिल कर सकते हैं। इसे खाने से हमारा पाचन तंत्र भी ठीक रहता है।आइए जानते हैं इसके और फायदे।

    कैंसर में मदद

    बेबी कॉर्न में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो कैंसर कोशिकाओं के विकास को रोकते हैं।दूसरे फलों और सब्जियों के साथ पकाने से बेबी कॉर्न के एंटीऑक्सीडेंट और भी बढ़ जाते हैं. इसमें फेरुलिक एसिड भी होता है जो कैंसर से लड़ने में मदद करता है. यह स्तन कैंसर और लिवर कैंसर जैसे कैंसर से बचाव करता है. बेबी कॉर्न का सेवन करने से हम कैंसर जैसी बीमारियों से बच सकते हैं. 

    एनीमिया मरीजों के लिए फायदेमंद

    बेबी कॉर्न एनीमिया (कम रक्ताल्पता) से लड़ने में मदद करता है। बेबी कॉर्न में लोहे की उच्च मात्रा होती है, जो हीमोग्लोबिन बनाने में मदद करता है। हीमोग्लोबिन लाल रक्त कोशिकाओं में ऑक्सीजन ले जाने का काम करता है. इसलिए, बेबी कॉर्न का सेवन एनीमिया यानी खून की कमी से पीड़ित लोगों को फायदा पहुंचा सकता है। यह उनके रक्त में हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ाकर एनीमिया को दूर करने में मदद करता है।

    डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद 

    बेबी कॉर्न में ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है जो इसे डायबिटीज वाले लोगों के लिए बहुत फायदेमंद बनाता है। यह धीरे-धीरे पचता है और ब्लड शुगर को स्थिर रखने में मदद करता है। बेबी कॉर्न में मौजूद फाइबर भी ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में सहायक है। इसलिए डायबिटीज़ के मरीज बेबी कॉर्न का सेवन अपने आहार में शामिल कर सकते हैं। यह उनके ब्लड ग्लूकोज को संतुलित रखने में मदद करेगा। 

    त्वचा के लिए फायदेमंद

    बेबी कॉर्न में एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन E की भरपूर मात्रा होती है जो त्वचा संबंधी समस्याओं में लाभदायक है।एंटीऑक्सीडेंट त्वचा को फ्री रेडिकल्स के नुकसान से बचाते हैं और इसे चमकदार बनाए रखने में मदद करते हैं। विटामिन E त्वचा को हाइड्रेट रखता है। इसलिए बेबी कॉर्न का सेवन मुंहासे, झुर्रियों, सूजन जैसी त्वचा समस्याओं से निजात दिला सकता है और त्वचा की चमक बढ़ाने में मददगार है।

  • इम्यूनिटी मजबूत करने के लिए अपनाएं ये आयुर्वेदिक टिप्स

    इम्यूनिटी मजबूत करने के लिए अपनाएं ये आयुर्वेदिक टिप्स

    Ayurvedic Tips: बदलता मौसम साथ में संक्रमण और कई बीमारियां लेकर आता है, इससे बचने के लिए इम्यूनिटी को मजबूत करना बेहद जरूरी हो जाता है। इसीलिए अपनी डाइट में कुछ हेल्दी चीजों को शामिल करना अच्छा रहता है। साथ ही इस मौसम में अक्सर लोग बीमार पड़ जाते हैं।आयुर्वेद का मानना ​​है कि, हमें पाचन को मजबूत बनाए रखना चाहिए। ऐसा इसलिए है ताकि हम जो खाना खाते हैं ,वह आसानी से पच जाए. बहुत अधिक या बहुत कम खाने से हमारा पाचन खराब हो सकता है।आज इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि इम्यूनिटी को बूस्ट करने के लिए किन आयुर्वेदिक टिप्स को आज़माना चाहिए।

    आयुर्वेदिक सुपरफूड्स

    – आंवला 

    – खजूर 

    – शुद्ध मक्खन या घी

    – गुड़

    – तुलसी के पत्ते

    – हल्दी

    – अदरक

    काढ़ा या हर्बल चाय

    मुलेठी, तुलसी, दालचीनी, अदरक, लौंग, हल्दी, गिलोय और काली मिर्च से बना काढ़ा या हर्बल चाय में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले गुण होते हैं।एंटीऑक्सिडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर, काढ़ा या हर्बल काढ़ा न केवल प्रतिरक्षा को बढ़ावा देता है, बल्कि शरीर को डिटॉक्सिफाई करता है। पाचन स्वास्थ्य में सहायता करता है, और श्वसन वायरस से भी लड़ता है।यह सूजन को कम करता है, बढ़ती उम्र को धीमा करता है, और वजन घटाने में भी मदद करता है।

    ऑयल पुलिंग थेरेपी

    आपका मुंह सैकड़ों जीवाणुओं का मेजबान है।जहां आपके मुंह में कुछ बैक्टीरिया फायदेमंद होते हैं, वहीं कुछ ऐसे भी होते हैं। जो आपके स्वास्थ्य को खतरे में डाल सकते हैं। आयुर्वेद के अनुसार ऑयल पुलिंग थेरेपी आपको इन बैक्टीरिया से छुटकारा दिलाने में मदद कर सकती है।ऑयल पुलिंग बैक्टीरिया को दूर करने के लिए अपने मुंह में तेल डालकर की जाने वाली एक प्राचीन प्रथा है। यह मौखिक स्वच्छता को बढ़ावा देता है, और बीमारियों और संक्रमणों को दूर रखता है।आप नारियल के तेल, तिल के तेल या अरिमेदी थैलम के साथ ऑयल पुलिंग का अभ्यास कर सकते हैं।

  • सेहत के लिए लाभकारी है गुड़ की चाय

    सेहत के लिए लाभकारी है गुड़ की चाय

    Benefits Of Jaggery Tea : आमतौर पर हम चाय में चीनी मिलाकर पीते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि चीनी की जगह अगर गुड़ का प्रयोग किया  
    जाए तो कैसा रहेगा? चीनी की तुलना में गुड़ में कई पोषक तत्व पाए जाते हैं,  जो स्वास्थ्य के लिए बहुत ही फायदेमंद साबित हो सकते हैं।  गुड़ की चाय पीने से आपका वजन कंट्रोल में रहता है। पाचन तंत्र मजबूत होता है। ऊर्जा लेवल बढ़ता है, और रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बेहतर होती है।  नियमित रूप से गुड़ की चाय पीने से सेहत के कई लाभ मिलते हैं. आइए जानते हैं गुड की चाय के कुछ अन्य फायदे। 

    पाचन तंत्र मजबूत 

    गुड़ की चाय पाचन क्रिया को मजबूत करने में लाभदायक होती है। इसके नियमित सेवन से पाचन संबंधी कई समस्याएं दूर हो जाती हैं।  गुड़ में पाए जाने वाले फ्रुक्टोज और फाइबर आसानी से पच जाते हैं, और पेट को हल्का रखते हैं। यह एसिडिटी को कम करके पेट संबंधी जलन और अल्सर जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है।  गुड़ में पाए जाने वाले प्रोबायोटिक गुण आंतों में स्वस्थ बैक्टीरिया का विकास करते हैं। यह पाचन एंजाइम्स के उत्पादन को भी बढ़ाता है। इस प्रकार गुड़ की चाय पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में एक प्राकृतिक और असरदार उपाय है। 

    एनीमिया से राहत 

    एनीमिया एक ऐसी स्थिति है जहां शरीर में रक्त की कमी हो जाती है। गुड़ में आयरन, मैग्नीशियम, मैंगनीज और जिंक जैसे खनिज पाए जाते हैं।  ये खनिज एनीमिया में कम होने वाले रक्त के घटकों की कमी को पूरा करने में मदद करते हैं। गुड़ रक्त में हीमोग्लोबिन स्तर को बढ़ाने में भी सक्षम होता है। इसके अलावा गुड़ की चाय एनीमिया के कारण होने वाली कमजोरी और थकान को दूर करने में मदद कर सकती है।  

    वजन कम करनें मदद करता है 

    चीनी की जगह गुड़ की चाय पीने से वजन कम हो सकता है।  गुड़ में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स और मिनरल्स जैसे कि कैल्शियम, मैग्नीशियम, आयरन आदि मेटाबॉलिज्म को बढ़ाकर वजन घटाने में मदद करते हैं। गुड़ की चाय का सेवन करने से पेट भरा रहता है, और भूख कम लगती है।  जिससे कैलोरी इनटेक कम होता है। यह पाचन तंत्र को भी दुरुस्त रखती है जो वजन नियंत्रण के लिए बहुत जरूरी है।  गुड़ में मौजूद फाइबर पेट को भरा रखकर भूख कम करता है। 

  • फ्रिज का ठंडा पानी रोक सकता है दिल की धड़कन

    फ्रिज का ठंडा पानी रोक सकता है दिल की धड़कन

    Health Tips:गर्मियों के मौसम में ठंडा पानी किसी अमृत से कम नहीं लगता. चिलचिलाती धूप से घर लौटने के बाद ठंडा पानी पीते ही काफी रिलैक्स महसूस होता है. हालांकि अक्सर हमें सीधे फ्रिज या फ्रीजर से ठंडा पानी पीने के खिलाफ चेतावनी दी जाती है. हमें बताया जाता है कि ठंडा पानी पीने से कई सारे नुकसान हो सकते हैं. इसका दिल पर काफी बुरा असर पड़ सकता है. गले खराब होना या फिर बुखार आना ये सब बात तो ठीक है लेकिन क्या सच में ठंडा पानी पीने से दिल पर बुरा असर होता है. चलिए जानते हैं कि आखिर इस बात में कितनी सच्चाई है.

    दिल को कैसे नुकसान पहुंचाता है ठंडा पानी

    विशेषज्ञ मानते हैं कि गर्मियों में ठंडा पानी पीना हर किसी की जरूरत होती है. लेकिन इससे कई दुष्परिणाम हो सकते हैं. गर्मियों में अचानक से ज्यादा मात्रा में ठंडा पानी पीने से धमनियों को नुकसान पहुंच सकता है.धमनियों में अचानक वैसोस्पास्म पैदा होने के कारण इनमें प्रतिकूल परिणाम हो सकते हैं. ये समस्या ना सिर्फ ठंडा पानी पीने से बल्कि बहुत अधिक ठंडे पानी से नहाने से भी यह दिक्कत हो सकती है. ऐसे में जो पहले से हृदय रोगी हैं, उन्हें इन चीजों को लेकर सावधान रहना चाहिए. उन्हें जरूरत से ज्यादा ठंडा पानी नहीं पीना चाहिए. क्योंकि यह हार्ट को ट्रिगर कर सकता है और वैसोस्पास्म भी पैदा कर सकता है. इससे कभी-कभी दिल का दौरा भी पड़ सकता है.

    वैसोस्पास्म क्या होता है?

    वैसोस्पास्म ऐसी स्थिति है जहां पर ब्लड वेसल्स सिकुड़ जाती है और रक्त के प्रभाव में रुकावट पैदा होने लगती है. यह कई प्रकार के होते हैं जैसे कोरोनरी वैसोस्पास्म, सेरेब्रल वैसोस्पास्म, निप्पल वैसोस्पास्म और हाथ और पैर की उंगलियों में वैसोस्पास्म.

    पानी पीने का सही तरीका क्या है?

    विशेषज्ञों के मुताबिक, रूम टेंपरेचर पर पानी पीना सबसे अच्छा होता है. कई विशेषज्ञों का मानना है कि पाचन को बढ़ावा देने के लिए खाना खाने के बाद गुनगुने पानी का ही सेवन करना चाहिए. इसके साथ ही अगर आप गर्मियों में थोड़ा ठंडा पानी पीना चाहते हैं तो आपको मटके के विकल्प के बारे में भी सोचना चाहिए.

  • मीट-मछली से भी ज्यादा ताकत देती है यह सब्जी

    मीट-मछली से भी ज्यादा ताकत देती है यह सब्जी

    नई दिल्ली : लूंगडू, भारत के हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों में उगने वाली एक अद्भुत प्रकृतिक सब्जी है जिसे वहां के लोग खाने का आनंद लेते है। यह खासतर गर्मियों के मौसम में प्राकृतिक रूप से पैदा होता है और इसका स्वाद बेहद मजेदार होता है। स्वादिष्ट होने के साथ-साथ यह एक बहुत पौष्टिक सब्जी भी है। इसमें विभिन्न लाभकारी गुण होते हैं, जो हमारे शरीर के स्वास्थ्य को सुधारने में मदद करते है। जो लोग वजन कम करना चाहते हैं वह खासकर के लूंगडू का उपयोग कर सकते है। लूंगडू में विटामिन ए, विटामिन बी कॉम्प्लेक्स, पोटाशियम, कॉपर, आयरन, फैटी एसिड, सोडियम, फास्फोरस, मैग्नीशियम, कैरोटिन और मिनरल्स के बहुत अच्छे स्रोत होते हैं. यह आपके स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होता है और आपके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को सुधार ने में मदद करता है।

    1.विटामिन और खनिज लूंगडू में विटामिन

    A, विटामिन B-कॉम्प्लेक्स, पोटाशियम, कॉपर, आयरन, सोडियम, फास्फोरस, और मैग्नीशियम जैसे विटामिन और खनिज होते हैं, जो हमारे शरीर के सही फंक्शन के लिए महत्वपूर्ण होते है।

    2. इम्यूनिटी को बढ़ाता है

    लूंगड़ू में मौजूद विटामिन C और अंटीऑक्सीडेंट्स इम्यूनिटी को बढ़ावा देने में मदद करता हैं और आपको संक्रमणों से भी बचाता है।

    3. पाचन क्रिया

    लूंगड़ू में फाइबर होता है, जो पाचन क्रिया को सुधार सकता है और कब्ज को दूर करने में मदद करता है। 

    4. स्वस्थ त्वचा और बाल

    विटामिन A और कैरोटिन का स्रोत के रूप में, लूंगड़ू स्वस्थ त्वचा और बाल के लिए भी फायदेमंद होता है.