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  • राम मंदिर ट्रस्ट की आज अहम बैठक, नए CEO से लेकर 3 ट्रस्टियों की नियुक्ति तक कई बड़े फैसले संभव

    राम मंदिर ट्रस्ट की आज अहम बैठक, नए CEO से लेकर 3 ट्रस्टियों की नियुक्ति तक कई बड़े फैसले संभव

    अयोध्या: राम मंदिर ट्रस्ट की बुधवार को होने वाली दो अहम बैठकों पर सभी की नजरें टिकी हैं। इन बैठकों में मंदिर के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति, तीन नए ट्रस्टियों के चयन, ट्रस्ट की प्रमुख समितियों के पुनर्गठन और चढ़ावा चोरी मामले की जांच जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर फैसला लिया जा सकता है। माना जा रहा है कि इन निर्णयों का असर मंदिर के प्रशासन और भविष्य की कार्यप्रणाली पर दिखाई देगा। ट्रस्ट की पहली कार्यकारिणी बैठक दोपहर 3 बजे राम जन्मभूमि परिसर में आयोजित होगी। इसके बाद दूसरी बैठक मणिराम दास छावनी स्थित ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के आवास पर होगी। दोनों बैठकों में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा होने की संभावना है। बैठक का सबसे बड़ा एजेंडा राम मंदिर के पहले CEO की नियुक्ति माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, तीन सदस्यीय सर्च कमेटी ने तीन उम्मीदवारों के नाम अंतिम सूची में शामिल कर लिए हैं। अब ट्रस्ट इन तीनों में से एक उम्मीदवार का चयन करेगा। मंदिर के CEO की जिम्मेदारी केवल प्रशासन तक सीमित नहीं होगी। उन्हें मंदिर की वित्तीय व्यवस्था, कर्मचारियों के समन्वय, श्रद्धालुओं को मिलने वाली सुविधाओं और दैनिक संचालन की निगरानी भी करनी होगी। यही वजह है कि इस पद को ट्रस्ट के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस पद के लिए सेवानिवृत्त नौकरशाहों, कॉरपोरेट क्षेत्र के अनुभवी लोगों और राम भक्तों ने आवेदन किए थे। चयन प्रक्रिया के लिए गठित सर्च कमेटी में रिटायर्ड जस्टिस प्रमोद कोहली, रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी और पूर्व NIT रायपुर के निदेशक सुरेश हावरे शामिल हैं।

    समितियों के पुनर्गठन और ट्रस्टियों की नियुक्ति पर भी होगा फैसला

    बैठक में ट्रस्ट की पांच प्रमुख समितियों के पुनर्गठन पर भी चर्चा होगी। खास तौर पर वित्त एवं ऑडिट समिति में बदलाव की संभावना जताई जा रही है। हाल ही में सामने आए चढ़ावा चोरी विवाद के बाद ट्रस्ट प्रशासनिक और वित्तीय निगरानी को पहले से अधिक मजबूत बनाने की तैयारी में है। वर्तमान में वित्त एवं ऑडिट समिति की जिम्मेदारी स्वामी गोविंद देव गिरि के पास है। वहीं निर्माण समिति की अध्यक्षता नृपेंद्र मिश्रा, प्रशासनिक समिति की जिम्मेदारी कृष्ण मोहन और धर्म एवं न्यास समिति का नेतृत्व महंत नृत्य गोपाल दास कर रहे हैं। अब इन समितियों की कार्यप्रणाली और संरचना में बदलाव पर विचार किया जाएगा। इसके अलावा ट्रस्ट में खाली पड़े तीन ट्रस्टी पदों को भरने पर भी फैसला लिया जा सकता है। पूर्व महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद दो पद रिक्त हुए थे, जबकि ट्रस्टी विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्रा के निधन के बाद तीसरा पद खाली हुआ। चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे 6 जुलाई को हुई ट्रस्ट बैठक में स्वीकार कर लिए गए थे। अब इन रिक्त पदों पर नए सदस्यों की नियुक्ति की संभावना है।

    चढ़ावा चोरी मामले की जांच और सुरक्षा व्यवस्था पर भी रहेगी नजर

    राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले की जांच भी बैठक का अहम मुद्दा होगी। उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था। जांच पूरी करने के लिए पहले 15 जुलाई तक का समय दिया गया था, लेकिन बाद में इसकी समय-सीमा बढ़ा दी गई। सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट की बैठक में SIT की प्रगति रिपोर्ट पर चर्चा की जा सकती है। साथ ही मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए नए सुझावों पर भी विचार होने की संभावना है। प्रशासनिक पारदर्शिता और वित्तीय निगरानी को बेहतर बनाने के उपाय भी बैठक के एजेंडे में शामिल हैं। बैठक से पहले ट्रस्ट के कई वरिष्ठ सदस्य अयोध्या पहुंच चुके हैं। इनमें कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि, विश्व तीर्थ प्रसन्नाचार्य वासुदेवानंद सरस्वती और अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन शामिल हैं। इस बीच निर्मोही अखाड़े से जुड़े विवाद को लेकर महंत दिनेंद्र दास ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने उन्हें पद से हटाए जाने की खबरों को पूरी तरह गलत बताया। उनका कहना है कि अखाड़े के कुल 19 पंचों में से 13 पंच आज भी उनके समर्थन में हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग उनके खिलाफ साजिश कर रहे हैं और जानबूझकर भ्रम फैलाया जा रहा है। अब सभी की नजर राम मंदिर ट्रस्ट की इन बैठकों पर है। नए CEO की नियुक्ति, ट्रस्टियों के चयन, समितियों के पुनर्गठन और चढ़ावा चोरी मामले को लेकर लिए जाने वाले फैसले आने वाले समय में मंदिर के प्रशासनिक ढांचे और व्यवस्थाओं को नई दिशा दे सकते हैं।
  • न्यायाधिकरणों में रिक्त पदों पर केंद्र का बड़ा अपडेट, संसद के मानसून सत्र में आ सकता है नया ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक

    न्यायाधिकरणों में रिक्त पदों पर केंद्र का बड़ा अपडेट, संसद के मानसून सत्र में आ सकता है नया ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक

    नई दिल्ली: देश भर के विभिन्न न्यायाधिकरणों (ट्रिब्यूनल) में लंबे समय से खाली पड़े पदों और उनके कामकाज को लेकर चल रहे मामले में केंद्र सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट को महत्वपूर्ण जानकारी दी। केंद्र ने अदालत को बताया कि नया ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक (Tribunal Reforms Bill) तैयार करने का काम अंतिम चरण में पहुंच चुका है। सरकार ने संकेत दिए हैं कि इस विधेयक को संसद के मौजूदा मानसून सत्र में पेश करने की कोशिश की जाएगी। मामले की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ कर रही थी। सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने अदालत को बताया कि सरकार इस दिशा में तेजी से काम कर रही है और नया विधेयक लगभग तैयार है।

    सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

    सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि देश के न्यायाधिकरणों को निष्क्रिय या कमजोर नहीं होने दिया जा सकता। अदालत ने कहा कि इन संस्थाओं का प्रभावी ढंग से काम करना न्याय व्यवस्था के लिए बेहद जरूरी है। कोर्ट ने पहले भी केंद्र सरकार से कहा था कि पूरे देश के सभी ट्रिब्यूनलों के संचालन, नियुक्तियों और प्रशासन के लिए एक समान व्यवस्था तैयार की जाए। अदालत का मानना है कि अलग-अलग नियमों के कारण कई जगह कामकाज प्रभावित हो रहा है और इससे न्याय मिलने में देरी होती है।

    मानसून सत्र में बिल लाने की कोशिश

    सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि प्रस्तावित ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक फिलहाल संसद के मानसून सत्र के एजेंडा में शामिल नहीं दिख रहा है। इस पर अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने अदालत को जवाब देते हुए कहा, “हम कोशिश करेंगे।” इससे संकेत मिला कि सरकार इस विधेयक को जल्द से जल्द संसद में पेश करने का प्रयास करेगी।

    पहले भी रद्द हो चुके हैं नियम

    यह मामला नया नहीं है। नवंबर 2025 में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई और जस्टिस विनोद चंद्रन की पीठ ने ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स एक्ट, 2021 के तहत ट्रिब्यूनल सदस्यों की नियुक्ति और कार्यकाल से जुड़े कुछ नियमों को रद्द कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ये प्रावधान अदालत के पहले दिए गए फैसलों के अनुरूप नहीं थे। कोर्ट का मानना था कि जिन नियमों को पहले असंवैधानिक या अनुचित माना जा चुका था, उन्हें मामूली बदलाव के साथ दोबारा लागू किया गया।

    राष्ट्रीय ट्रिब्यूनल आयोग बनाने का दिया था निर्देश

    अपने पिछले फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को चार महीने के भीतर राष्ट्रीय ट्रिब्यूनल आयोग (National Tribunal Commission) बनाने का निर्देश भी दिया था। अदालत ने कहा था कि ऐसा आयोग ट्रिब्यूनलों में नियुक्तियों, प्रशासन और उनके कामकाज को अधिक स्वतंत्र, पारदर्शी और एक समान बनाने में अहम भूमिका निभाएगा। इससे विभिन्न ट्रिब्यूनलों में मौजूद प्रशासनिक समस्याओं को दूर करने में भी मदद मिलेगी।

    क्यों जरूरी है नया सुधार?

    देश में कई ट्रिब्यूनलों में लंबे समय से न्यायाधीशों और सदस्यों के पद खाली पड़े हैं। इसके कारण हजारों मामलों की सुनवाई प्रभावित होती है और लोगों को समय पर न्याय नहीं मिल पाता। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नया ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक लागू होता है तो नियुक्ति प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित हो सकती है। साथ ही ट्रिब्यूनलों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद है।

    सुप्रीम कोर्ट ने सुधारों पर दिया जोर

    सुप्रीम कोर्ट ने अपने पहले के फैसलों में यह भी कहा था कि केवल छोटे-छोटे बदलावों से वर्षों से चली आ रही व्यवस्थागत समस्याओं का समाधान संभव नहीं है। अदालत के अनुसार, ट्रिब्यूनलों को मजबूत बनाने के लिए व्यापक और स्थायी सुधार आवश्यक हैं। कोर्ट ने माना कि एक स्वतंत्र और प्रभावी राष्ट्रीय ट्रिब्यूनल आयोग भविष्य में नियुक्तियों, प्रशासन और संस्थागत स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

    अब आगे क्या होगा?

    अब सभी की नजर केंद्र सरकार पर है कि वह प्रस्तावित ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक को संसद के मानसून सत्र में पेश करती है या नहीं। यदि यह विधेयक संसद में आता है और पारित हो जाता है, तो देश के न्यायाधिकरणों की नियुक्ति प्रक्रिया, प्रशासनिक व्यवस्था और कार्यप्रणाली में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि न्यायाधिकरणों को प्रभावी ढंग से चलाना न्याय व्यवस्था के लिए आवश्यक है और इस दिशा में केंद्र सरकार से ठोस कदम उठाने की अपेक्षा की जा रही है।
  • PM आवास के बाहर धरना-प्रदर्शन कर रहे राहुल व प्रियंका गांधी को पुलिस ने लिया हिरासत में

    PM आवास के बाहर धरना-प्रदर्शन कर रहे राहुल व प्रियंका गांधी को पुलिस ने लिया हिरासत में

    BREAKING NEWS: पीएम आवास के बाहर धरने पर बैठे राहुल गांधी, प्रियंका गांधी को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। इससे पहले पुलिस ने धरना स्थल पर पहुंचे समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव को हिरासत में ले लिया। साथ ही राहुल गांधी कांग्रेस के सीनियर नेताओं के साथ पीएम आवास के बाहर धरने पर बैठ गए थे। उनके साथ मल्लिकार्जुन खरगे, डीके शिवकुमार, केसी वेणुगोपाल समेत कांग्रेस के सीनियर ने्ता मौजूद थे। राहुल और प्रियंका के सुरक्षाकर्मियों को भी हिरासत में लिया गया है।   राहुल गांधी की जनता से अपील राहुल गांधी ने एक्स पर किए पोस्ट में लिखा, छात्रों पर हमला हर भारतीय परिवार पर हमला है. प्रधानमंत्री मोदी को लगता है कि वो बिना जवाब दिए, बिना किसी नतीजे का सामना किए बच निकलेंगे– नहीं कर पाएंगे, इस बार तो बिल्कुल नहीं। मैं हर उस देशभक्त भारतीय से अपील करता हूं जो मानता है कि हमारे छात्रों को न्याय मिलना चाहिए – प्रधानमंत्री आवास के सामने हमारे धरने में शामिल हों. भारत के छात्रों की आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. इस दौरान राहुल गांधी ने कहा कि देश के युवाओं के लिए कोई अवसर नहीं हैं और उनके लिए सभी रास्ते बंद हो गए हैं. एक समय प्रतियोगी परीक्षाओं का रास्ता खुला था, लेकिन वह व्यवस्था भी बर्बाद हो चुकी है. उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों की शिकायतें सिर्फ शिक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनके भविष्य से भी जुड़ी हैं।    
  • PM आवास के पास कांग्रेस का प्रदर्शन, चन्नी सहित हिरासत में लिए कई नेता, देखें वीडियो

    PM आवास के पास कांग्रेस का प्रदर्शन, चन्नी सहित हिरासत में लिए कई नेता, देखें वीडियो

    नई दिल्लीः दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुए लाठी चार्ज को लेकर मामला गरमा गया है। इस मामले को लेकर विपक्ष के नेताओं द्वारा लगातार भाजपा के खिलाफ प्रदर्शन किया जा रहा है। वहीं इस मामले को लेकर कांग्रेस द्वारा आज पीएम आवास के बाहर प्रदर्शन किया गया। दरअसल, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और सांसद प्रियंका गांधी कांग्रेस सांसदों के साथ धरने पर बैठे कांग्रेस सांसदों का प्रदर्शन जारी है। राहुल गांधी ने छात्रों पर हुए लाठी चार्ज के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को जिम्मेदार ठहराया है।

    कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा विपक्ष के नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, केसी वेणुगोपाल, पवन खेड़ा, सासंद चरणजीत सिंह चन्नी, सासंद गुरजीत औजला, पंजाब प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वडिंग सहित अन्य नेता मौजूद रहे। उन्होंने युवा छात्रों पर हुए कथित अत्याचारों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। वहीं, पुलिस ने नारेबाजी कर रहे कांग्रेस सासंद चरणजीत सिंह चन्नी सहित कई नेताओं को हिरासत में लिया गया। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि सरकार छात्रों की समस्याओं पर कोई जवाबदेही नहीं ले रही है और संसद में चर्चा से बच रही है। इस प्रदर्शन के जरिए विपक्ष ने केंद्र सरकार पर युवाओं के भविष्य को लेकर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है।

    पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने पर कांग्रेस सांसद के. सुरेश ने कहा, “वे हमें बेरहमी से हिरासत में ले रहे हैं। हम प्रधानमंत्री आवास के सामने विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं क्योंकि कल दिल्ली पुलिस ने हमारे छात्रों पर बेरहमी से हमला किया था। प्रधानमंत्री कुछ नहीं कह रहे हैं, गृह मंत्री कोई बयान नहीं दे रहे हैं। प्रधानमंत्री कुछ बोल ही नहीं रहे हैं।” बताया जा रहा है कि पीएम आवास के बाहर कांग्रेस के इस धरने की मुख्य वजह लोकसभा में स्पीकर द्वारा छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के मुद्दा को नहीं उठाने देना है। माना जाता है कि संसद में गतिरोध के बाद राहुल गांधी ने अपनी पार्टी के सांसदों से कहा कि चलो, इस मुद्दे पर अब प्रधानमंत्री को जगाते हैं। धरना स्थल पर कांग्रेस के तमाम बड़े नेताओं के साथ वहां दो मुख्यमंत्रियों की मौजूदगी भी देखी गई। इनमें एक केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन हैं और दूसरे कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार हैं। हालांकि कहा जा रहा है कि ये दोनों नेता वहां राहुल से मुलाकात करने के बाद चले गए।

  • CJP के विरोध-प्रदर्शन में कई छात्र घायल, हाल जानने पहुंचे राहुल गांधी और प्रियंका गांधी, देखें वीडियो

    CJP के विरोध-प्रदर्शन में कई छात्र घायल, हाल जानने पहुंचे राहुल गांधी और प्रियंका गांधी, देखें वीडियो

    नई दिल्लीः दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी के मार्च के दौरान पुलिस और सुरक्षा कर्मियों के साथ जमकर झड़प हुईं। इस दौरान कई प्रदर्शनकारी घायल हो गए, जबकि बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों के घायल होने की भी जानकारी सामने आ रही है। वहीं आज प्रियंका गांधी और राहुल गांधी आरएमएल अस्पताल में घायल छात्रों से मिलने पहुंचे। इससे पहले केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और आप संयोजक अरविंद केजरीवाल भी अस्पताल पहुंचे थे। अस्पताल में पहुंचने से पहले राहुल गांधी ने सदन के बाहर कहा कि देश का छात्र कह रहा है – “हमारा कोई भविष्य नहीं।”

    वहीं भाजपा सरकार के मंत्री कह रहे हैं – “हमारी कुर्सी नहीं जाएगी।” उन्होंने कहा कि जिस देश में छात्र भविष्य खो दे और मंत्री कुर्सी ना खोए – वहां न्याय है ही नहीं। राहुल गांधी ने कहा कि ये जो युवा हैं, ये एजुकेशन सिस्टम के बारे में जानते हैं। पूरा देश जानता है कि एजुकेशन सिस्टम टूट चुका है। ये वही कह रहे हैं कि जो नहीं संभाल पा रहे है वह इस्तीफा दे। प्रधानमंत्री चुप क्यों हैं। उन्हें माफी मांगनी चाहिए और यह सब रोकना चाहिए। उन्होंने कहा, आरएसएस के प्रचारकों को विश्वविद्यालय का कुलपति बनाया जा रहा है। यह युवाओं के भविष्य का सवाल है। यह बहुत बड़ा मामला है।

    भारत में शिक्षा का कोई भविष्य नहीं बचा है। धर्मेंद्र प्रधान को लेकर उन्होंने कहा, वह तो केवल बिचौलिए हैं। गृह मंत्री और प्रधानमंत्री को इस्तीफा देना चाहिए। इससे पहले आप संयोजक अरविंद केजरीवाल ने आरएमएल अस्पताल जाकर घायल छात्रों से मुलाकात की है। बताया जा रहा है कि यहां लाठीचार्ज में घायल हुए 7 छात्रों के ऐडमिट करवाया गया है। इनमें से एक लड़की की हालत गंभीर है और उसे आईसीयू में रखा गया है। केजरीवाल ने कहा कि निहत्थे बच्चों पर बर्बरता से हमला करवाया गया। कई बच्चे घायल हुए और कई पुलिसवाले घायल हुए। यह बहुत ही गलत है। बताया गया है कि एक बच्ची को छोड़कर बाकी को डिसचार्ज किया जा रहा है।

     

  • Highcourt ने Sonam Wangchuk को लेकर दिया अहम आदेश, इस अस्पताल में शिफ्ट होंगे Social Activist

    Highcourt ने Sonam Wangchuk को लेकर दिया अहम आदेश, इस अस्पताल में शिफ्ट होंगे Social Activist

    नई दिल्ली: सोनम वांगचुक की हेल्थ को लेकर चल रहे मामले में हाईकोर्ट ने अहम आदेश दे दिया है। कोर्ट ने यह कहा है कि वांगचुक को अब मेदांता अस्पताल में शिफ्ट किया जाए। कोर्ट ने मेदांता को यह निर्देश दे दिया है कि वह डॉक्टरों का एक पैनल बनाए जो कि उनका इलाज करेगा। उनकी सभी मेडिकल रिपोर्ट इस पैनल को सौंप दी जाएगी। इस मामले की सुनवाई हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस तेजस कारिया की पीठ ने की है। कोर्ट ने यह साफ कह दिया है कि इस मामले में पूरा और विस्तृत आदेश लंच के बाद सुनाया जाएगा।

    सरकार ने रखी शर्त

    सुनवाई के दौरान सरकार और वांगचुक के पक्ष के बीच में इस बात पर भी चर्चा हुई है कि उनकी निगरानी कहां और कैसे होनी चाहिए। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने हाई कोर्ट को यह बताया है कि सरकार को वांगचुक के मेदांता अस्पताल जाने पर कोई भी आपत्ति नहीं है परंतु सरकार की ओर से एक शर्त रखी गई कि उन्हें डॉक्टरों की सलाह के खिलाफ अस्पताल से डिस्चार्ज नहीं होना चाहिए।

    सरकार नहीं लेगी रिस्क

    सॉलिसिटर जनरल ने यह कहा है कि वांगचुक के आस-पास मौजूद कुछ लोग उनको अस्पताल से बाहर निकालने की कोशिश में है और इसका असर अब बाहर भी पड़ सकता है। सॉलिसिटर जनरल का यह भी कहना है कि वांगचुक अपनी पसंद का अस्पताल और डॉक्टर भी चुन सकते हैं लेकिन उन्हें मेडिकल सलाह के खिलाफ डिस्चार्ज नहीं होना चाहिए। कोर्ट से सवाल किया है कि यदि वांगचुक वापिस प्रदर्शन स्थल पर चले गए तो क्या होगा। यदि उन्हें कुछ हो गया तो इसका जिम्मेदार कौन होगा। उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले में कोई रिस्क नहीं ले सकती क्योंकि यह सीधे तौर पर वांगचुक की सुरक्षा से जुड़ा सवाल है। हाई कोर्ट ने कहा है कि मेडिकल रिपोर्ट पढ़ने और डॉक्टरों से बातचीत करने के बाद यह बात सामने आई है कि सभी डॉक्टर इस बात पर सहमत है कि वांगचुक की सेहत पर लगातार निगरानी जरुरी है।

    डॉक्टरों की राय एक जैसी नहीं थी

    डॉक्टरों के अनुसार, उनकी निगरानी कहीं भी की जा सकती है हालांकि इस पर सभी डॉक्टरों की राय एक जैसी नहीं थी। डॉक्टर टंडन के अनुसार वांगचुक की निगरानी अस्पताल में होनी चाहिए ताकि किसी भी जरुरत पर तुरंत इलाज मिल पाए। इन सभी बातों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने यह कहा है कि वांगचुक को मेदांता अस्पताल में शिफ्ट किया जाए क्योंकि वो अस्पताल उनकी अपनी पसंद का है हालांकि सॉलिस्टिर जनरल ने इस पर आपत्ति जता दी है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार के साथ भी इस मामले में पहले से बातचीत हुई थी।
  • घर में आग लगने से जिंदा जली मां और 2 बेटियां

    घर में आग लगने से जिंदा जली मां और 2 बेटियां

    नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के लोधी रोड स्थित बीके दत्त कॉलोनी में भीषण हादसा हो गया। दरअसल, बी-ब्लॉक में चावला स्वीट्स के सामने स्थित रिहायशी मकान की तीसरी मंजिल पर अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग ने घर को चपेट में ले लिया। इस हादसे में घर के अंदर फंसी एक महिला और उसकी 2 मासूम बेटियों की झुलसने और दम घुटने से मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। मरने वालों में 45 साल की एक महिला और उसकी 2 बेटियां शामिल हैं, जिनकी उम्र करीब 7 साल और 13 साल बताई जा रही है। इस हादसे के बाद पूरे इलाके में मातम का माहौल है।

    मिली जानकारी के मुताबिक, घटना की शुरुआत उस समय हुई जब पुलिस कंट्रोल रूम पर एक महिला का घबराया हुआ फोन आया। महिला ने कांपती आवाज में कहा कि घर में आग लगी है, हम अंदर फंस गए हैं, जल्दी मदद के लिए कर्मी भेजिए। इसके कुछ ही पल बाद उसकी आवाज धीमी पड़ गई और फोन कट गया। इस कॉल के बाद पुलिस और दमकल विभाग तुरंत हरकत में आ गया। दमकल विभाग की गाड़ियों ने मौके पर पहुंचकर कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। फिलहाल पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। फायर अधिकारियों के मुताबिक, दिल्ली फायर सर्विस को सुबह करीब 10:21 बजे आग लगने की सूचना मिली। सूचना मिलते ही एक वाटर टेंडर, एक वाटर बाउज़र और एक ब्रीदिंग फायर टेंडर और 3 एंबुलेंस को मौके पर भेजा गया।

    जब तक राहत और बचाव का काम शुरू हुआ, तब तक आग पूरी तरह से घर में फैल चुकी थी। इमारत की सबसे ऊपरी मंजिल से धुएं का गहरा गुबार निकल रहा था और आसपास के लोगों में अफरा-तफरी मच गई। दमकल कर्मियों ने काफी मशक्कत के बाद घर का बंद दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया। अंदर का दृश्य बेहद भयावह था। कमरे के भीतर महिला और उसकी दोनों बेटियां बुरी तरह झुलसी हुई हालत में मिलीं। तीनों की मौके पर ही मौत हो चुकी थी। आग इतनी तेजी से फैली कि उन्हें बाहर निकलने का मौका भी नहीं मिल सका।

    फायर ब्रिगेड ने कुछ देर की मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पा लिया। इसके बाद पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने मौके की जांच शुरू की। घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं और शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। फिलहाल इस घटना की असली वजह साफ नहीं हो पाई है। शुरुआती तौर पर शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई जा रही है, लेकिन पुलिस हर एंगल से जांच कर रही है।

  • IRCTC ने वेटिंग यात्रियों को दी राहत, अब चुटकियों में बुक होगा ट्रेन टिकट

    IRCTC ने वेटिंग यात्रियों को दी राहत, अब चुटकियों में बुक होगा ट्रेन टिकट

    नई दिल्ली: ट्रेन का ऑनलाइन टिकट बुक कराना अब पहले से ज्यादा आसान और तेज हो गया। भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) ने अपनी नई वेबसाइट का बीटा वर्जन यात्रियों के लिए उपलब्ध करा दिया। नई वेबसाइट में टिकट बुकिंग के चरण कम किए गए हैं। अनावश्यक कैप्चा और पॉप-अप हटाए गए हैं और सभी श्रेणियों में सीटों की उपलब्धता एक ही स्क्रीन पर दिखाई देगी। इससे यात्रियों का समय बचेगा और टिकट बुकिंग का अनुभव बेहतर होगा। नई वेबसाइट का बीटा वर्जन https://www.irctc.co.in/eticket/ पर उपलब्ध होगा। इसके अलावा मौजूदा IRCTC वेबसाइट के होमपेज पर भी बीटा वर्जन का लिंक दिया गया है।

    इसी के साथ रेल गाड़ियों में लंबी वेटिंग के कारण यात्रियों को सीट न मिलने की समस्या का सामना करना पड़ता था। वेटिंग टिकट होने पर यात्री जनरल डिब्बे में यात्रा करने के लिए मजबूर होते हैं। क्योंकि वे स्लिपर डिब्बे में नहीं बैठ सकते। इस समस्या के समाधान के लिए रेलवे ने एक नई योजना शुरू की है, जो यात्रियों के लिए सुविधाजनक साबित हो रही है। इस योजना के तहत यदि मूल ट्रेन में आरक्षित सीट उपलब्ध नहीं होती तो यात्रियों को उनकी सहमति से उसी मार्ग की किसी अन्य उपयुक्त ट्रेन या उसी ट्रेन की अन्य तिथि में बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के समायोजित किया जा रहा है।

    यह सुविधा केवल आइआरसीटीसी के माध्यम से आनलाइन बुक किए गए आरक्षित टिकटों पर उपलब्ध है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य ट्रेनों में उपलब्ध खाली सीटों का अधिकतम उपयोग करना, प्रतीक्षा सूची वाले यात्रियों को यात्रा का अवसर प्रदान करना और सीटों की अनावश्यक रिक्तता को कम करना है। इससे न केवल यात्रियों को राहत मिल रही है, बल्कि रेलवे के संसाधनों का भी बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो रहा है। वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक बसंत कुमार ने यात्रियों से अनुरोध किया है कि वे ऑनलाइन टिकट बुक करते समय विकल्प सुविधा का चयन कर इस उपयोगी योजना का लाभ उठाएं। यह सुविधा यात्रियों की यात्रा को अधिक सहज और सुविधाजनक बनाने की दिशा में भारतीय रेल की एक महत्वपूर्ण पहल है।

  • सिक्किम में निर्माणाधीन सुरंग ढही, आठ मजदूरों की मौत

    सिक्किम में निर्माणाधीन सुरंग ढही, आठ मजदूरों की मौत

    नामचीः सिक्किम के नामची जिले में निर्माणाधीन सुरंग ढहने का मामला सामने आया है। मलबा गिरने से सुरंग बंद हो गई। सुरंग ढहने से आठ मजदूरों की मौत हो गई और कई मजदूरों के फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सिक्किम पुलिस और अन्य एजेंसियां युद्धस्तर पर मजदूरों सुरक्षित निकालने के लिए राहत एवं बचाव अभियान चला रही हैं।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार हादसा सामरदुंग क्षेत्र में एनएचपीसी की तीस्ता स्टेज-6 जलविद्युत परियोजना की निर्माणाधीन सुरंग में भूस्खलन के बाद हुआ। मलबा गिरने से सुरंग का प्रवेश द्वार बंद हो गया और अंदर काम कर रहे मजदूर फंस गए। अधिकारियों के अनुसार मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता, जबकि सुरंग के भीतर फंसे लोगों का पता लगाने का प्रयास जारी है।

    नामची जिला प्रशासन के नेतृत्व में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सिक्किम पुलिस, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं, स्वास्थ्य विभाग तथा एनएचपीसी की टीमें संयुक्त रूप से बचाव अभियान चला रही है। मलबा हटाने के लिए मशीनों की भी मदद ली जा रही है। प्रशासन का कहना है कि सुरंग के भीतर की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही फंसे लोगों की सही संख्या का पता चल सकेगा। वहीं प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है।

  • आधी रात झगड़ा, बेटों ने मां-बाप को पीट-पीटकर उतारा मौत के घाट

    आधी रात झगड़ा, बेटों ने मां-बाप को पीट-पीटकर उतारा मौत के घाट

    गाजियाबादः शहर में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां घरवालों के समझाने पर बेटों ने लोगों को शर्मसार कर दिया। जानकारी के अनुसार सोमवार देर रात 2 भाई आपस में झगड़ा कर रहे थे। इस दौरान जब मां-बाप बेटों को समझाने लगे तो वह भड़क गए। इस दौरान बेटों ने मां-बाप को पीटना शुरू कर दिया और डंडों से मारकर दोनों अधमरा कर दिया, जिसके बाद

    गाजियाबाद में 2 बेटों ने मां और पिता की पीट-पीटकर हत्या कर दी। सोमवार देर रात दोनों बेटे झगड़ा कर रहे थे। माता-पिता ने उन्हें समझाने की कोशिश की तो भड़क गए। गुस्से में माता-पिता को पहले लात-घूसों से पीटा फिर डंडे से ताबड़तोड़ वार किए। जिस पर किराएदार ने पुलिस बुला ली। मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों बेटों को हिरासत में ले लिया। माता-पिता को अस्पताल ले गई, जहां डॉक्टर्स ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना क्रॉसिंग रिपब्लिक थाना क्षेत्र की है।

    पुलिस के मुताबिक गंगाशरण पत्नी विमलेश दो बेटों दीपक और ललित के साथ वीर नगर मोहल्ले में रहते थे। 2 मंजिला मकान का एक हिस्सा किराए पर दे रखा है। उनके किराएदार ने देर रात डायल 112 पर फोन किया। कहा कि मकान मालिक के बेटों में झगड़ा और मारपीट हो रही है। चीखने-चिल्लाने और रोने की आवाजें आ रही है।

    डायल 112 ने इसकी सूचना थाने को दी। पुलिस मौके पर पहुंच गई। देखा तो गंगाशरण और विमलेश जमीन पर घायल पड़े थे। सिर और हाथ पर चोटें थीं। खून बह रहा था। पुलिस दीपक और ललित पकड़कर थाने ले गई। वारदात की वजह जानने के लिए दोनों से पूछताछ शुरू कर दी। डीएसपी सुरेंद्र नाथ तिवारी ने बताया कि शुरुआती जांच में वारदात की वजह प्रॉपर्टी विवाद लग रही है। दोनों आरोपियों से अलग-अलग पूछताछ की जा रही है।