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  • चिड़चिड़ापन, तनाव या Mood Swing की शिकायत Body में इन कमी के हो सकते है संकेत

    चिड़चिड़ापन, तनाव या Mood Swing की शिकायत Body में इन कमी के हो सकते है संकेत

    हेल्थः अगर आप में भी अक्सर चिड़चिड़ापन, तनाव या मूड स्विंग्स की शिकायत से जूझ रहे है तो सतर्क करने की जरूरत है। ये लक्षण केवल मानसिक नहीं होते, बल्कि आपके शरीर में किसी महत्वपूर्ण पोषक तत्व की कमी का संकेत भी हो सकते हैं। इनमें सबसे अहम पोषक तत्व विटामिन बी12 है। इस विटामिन की कमी केवल मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित नहीं करती, बल्कि आपके शारीरिक स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव डाल सकती है।

    हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर आपके शरीर में विटामिन बी12 की मात्रा पर्याप्त नहीं है, तो आपको सामान्य से ज्यादा चिंता, चिड़चिड़ापन या मूड स्विंग्स का सामना करना पड़ सकता है। समय रहते इस कमी को पूरा न करने पर मानसिक बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है, जैसे स्ट्रेस, एंग्जायटी और डिप्रेशन। इसलिए इस तरह के लक्षणों को हल्के में लेना सही नहीं है।

    विटामिन बी12 की कमी से केवल मानसिक स्वास्थ्य पर असर नहीं पड़ता, बल्कि शरीर में भी कई लक्षण दिखाई देने लगते हैं। सबसे आम लक्षण हैं- भूलने की समस्या जिसमें याददाश्त कमजोर होना या छोटी-छोटी चीजें भूल जाना।
    मांसपेशियों में दर्द और ऐंठन रहना, हाथ-पैर में झुनझुनी या सनसनी- यह न्यूरोलॉजिकल समस्या का संकेत हो सकता है। सामान्य मूड स्विंग्स और चिड़चिड़ापन यानी छोटी-छोटी बातों पर जल्दी गुस्सा या चिंता। ये सभी लक्षण विटामिन बी12 की कमी का स्पष्ट संकेत हैं। यदि इन्हें समय पर पहचान लिया जाए और सही उपाय किए जाएं, तो मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान से बचाया जा सकता है।

    विटामिन बी12 की कमी को दूर करने के लिए कुछ फूड्स और जीवनशैली बदलाव बेहद मददगार हो सकते हैं। इनमें शामिल हैं- डेयरी प्रोडक्ट्स जैसे दूध, दही, पनीर आदि। फर्मेंटेड और अंकुरित फूड्स जैसे अंकुरित मूंग, दही या किम्ची। फलों का सेवन करें जैसे संतरा, केला, सेब, ब्लूबेरी, कीवी, एवोकाडो और अनार।

  • गर्दन, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द हो सकते है Thyroid के लक्षण, जान लें इसकी वजह

    गर्दन, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द हो सकते है Thyroid के लक्षण, जान लें इसकी वजह

    हेल्थः थायरॉइड की समस्या सिर्फ वजन, मूड या थकान से जुड़ी नहीं होती, बल्कि यह शरीर में दर्द का भी कारण बन सकती है। बहुत से लोग थायरॉइड असंतुलन के चलते मांसपेशियों में दर्द, जोड़ों में अकड़न या लगातार गर्दन में दर्द महसूस करते हैं, लेकिन अक्सर इसे नजरअंदाज कर देते हैं। जब शरीर में हार्मोन का स्तर गड़बड़ा जाता है, तो सूजन और दर्द जैसी समस्याएं धीरे-धीरे सामने आने लगती हैं।

    थायरॉइड शरीर के मेटाबॉलिज्म, हार्मोन और कई जरूरी कार्यों को नियंत्रित करती है। जब यह ग्रंथि जरूरत से ज्यादा या कम हार्मोन बनाने लगती है, तो शरीर के अलग-अलग हिस्सों में दर्द, कमजोरी और सूजन जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं। थायरॉइड से जुड़ा दर्द कई बार धीरे-धीरे बढ़ता है। कुछ मामलों में ग्रंथि में सूजन आ जाती है, जिससे गर्दन या गले में कोमलता और दर्द महसूस होता है। यह दर्द जबड़े या कान तक भी फैल सकता है। थायरॉइडाइटिस जैसी स्थिति या गले में गॉइटर भी असहजता बढ़ा सकते हैं।

    थायरॉइड असंतुलन से मांसपेशियों और जोड़ों में भी दर्द हो सकता है। जब हार्मोन का स्तर कम हो जाता है, तो मांसपेशियां कमजोर, अकड़ी हुई और दर्दभरी महसूस होती हैं, खासतौर पर कंधों में। वहीं, हाइपरथायरॉइडिज्म में ऊपरी बाजुओं और पैरों में क्रैम्प या थकान महसूस हो सकती है।

    कई बार थायरॉइड की समस्या के कारण जोड़ों में अकड़न और सूजन भी होती है।हाइपोथायरॉइडिज्म में यह दर्द गठिया जैसे लक्षण पैदा कर सकता है, जिसमें जोड़ों में जकड़न और कोमलता महसूस होती है। ये लक्षण अक्सर किसी और बीमारी के रूप में समझ लिए जाते हैं, जिससे इलाज में देरी हो जाती है।

    अगर आपको लगता है कि शरीर का दर्द थायरॉइड से जुड़ा हो सकता है, तो अपने लक्षणों का रिकॉर्ड रखें। कब और कहां दर्द होता है, किन परिस्थितियों में बढ़ता या घटता है। इन सबका ध्यान रखें। इसके साथ ही वजन, मूड, भूख और गर्दन की सूजन जैसे लक्षणों पर भी नजर रखें। खून की जांच TSH, T3, T4 से थायरॉइड की स्थिति का पता लगाया जा सकता है।

  • रोज पिएं ये हरे रंग की Drink, मोटापे से मिलेगा छुटकारा

    रोज पिएं ये हरे रंग की Drink, मोटापे से मिलेगा छुटकारा

    हेल्थः अगर आप मोटापे से छुटकारा पाना चाहते हैं, तो आपको हरे रंग के मसाले का पानी पीना शुरू कर देना चाहिए। बता दें कि हम सौंफ के पानी की बात कर रहे हैं। सौंफ के पानी में पाए जाने वाले तमाम पोषक तत्व आपके शरीर में जमा जिद्दी चर्बी को पिघलाने में कारगर साबित हो सकते हैं।

    सौंफ का पानी बनाना बहुत ही आसान है। आपको रात में 1 गिलास पानी में एक चम्मच सौंफ को भिगोकर रख देना है। अब आपको अगली सुबह इस पानी को छान लेना है। आपका सौंफ का पानी बन चुका है। आप हर रोज खाली पेट सौंफ का पानी पीना शुरू कर सकते हैं। महज कुछ ही हफ्तों के अंदर आपको खुद-ब-खुद पॉजिटिव असर दिखाई देने लगेगा। आसान बनाए वेट लॉस जर्नी- जल्दी वजन कम करने के लिए आप सौंफ का पानी पीना शुरू कर सकते हैं। सौंफ के पानी में मौजूद तमाम पोषक तत्व न केवल आपके शरीर में जमा जिद्दी चर्बी को पिघलाने में कारगर साबित हो सकते हैं बल्कि आपकी गट हेल्थ को सुधारने में भी मददगार साबित हो सकते हैं। पेट से जुड़ी समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए भी सौंफ के पानी को डेली डाइट प्लान में शामिल किया जा सकता है।

    बूस्ट करे इम्यूनिटीः हर रोज नियम से सुबह-सुबह खाली पेट सौंफ का पानी पिएं। सौंफ का पानी बॉडी को डिटॉक्स करने में भी कारगर साबित हो सकता है। लिवर और किडनी से जुड़ी बीमारियों के खतरे को कम करने के लिए भी सौंफ के पानी को कंज्यूम किया जा सकता है। कुल मिलाकर सही मात्रा में और सही तरीके से सौंफ का पानी पीना आपकी सेहत के लिए वरदान साबित हो सकता है।

  • ये Drinks फेटी Liver को बनाएंगी तंदुरुस्त, जानें Expert’s की राय

    ये Drinks फेटी Liver को बनाएंगी तंदुरुस्त, जानें Expert’s की राय

    हेल्थः लिवर शरीर के लिए एक या दो नहीं बल्कि ढेरों काम करता है। पूरे शरीर को ठीक से चलाने की जिम्मेदारी इसी की होती है। ऐसे में हमारी जिम्मेदारी है कि हम अपने लिवर को स्वस्थ रखे। इसके लिए हमें अपने खानपान पर ध्यान देने की जरूरत है। एक्सपर्ट के मुताबिक ‘ब्लैक कॉफी लिवर के लिए फायदेमंद है। ये आपके लिवर से फैट को निकालती है।कॉफी की ये खासियत है कि ये लिवर के फैट को साफ करती है। लिवर में कैंसर नहीं होने देती, लिवर का सिरोसिस कम करती है पर इसका मतलब ये नहीं है कि आप कॉफी भी पी लें और शराब भी पी लें।

    रिपोर्ट के अनुसार फैटी लिवर और सिरोसिस जैसी बीमारियों में कॉफी बहुत फायदेमंद है क्योंकि इसमें मौजूद एंटीऑक्सिडेंट्स सूजन को कम करते हैं, फैट को जमने से रोकते हैं, जमे फैट को पिघलाकर बाहर निकालते हैं और लिवर को डिटॉक्स करने में भी मदद करते हैं। कॉफी और लिवर की हेल्थ पर कई अध्ययनों में पाया गया है कि यह आपके लिवर के लिए फायदेमंद हो सकती है। यहां तक कि इस बात के भी कई सबूत मिले हैं कि ब्लैक कॉफी पीने से हेपेटोसेलुलर कार्सिनोमा (एचसीसी) नामक एक प्रकार के लिवर के कैंसर का खतरा कम हो सकता है।

    लिवर के लिए कॉफी कैसे और कितनी फायदेमंद
    – कॉफी में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट्स जैसे क्लोरोजेनिक एसिड (सीजीए) नामक एंटीऑक्सीडेंट ग्लूकोज को तोड़कर आपके लिवर में फैट के निर्माण को रोकता है।
    – कॉफी में पाए जाने वाले एंटीऑक्सिडेंट्स लिवर की सूजन को कम करने में मदद करते हैं।
    – कॉफी कैफीन के जरिए ग्लूटाथियोन जैसे शक्तिशाली एंटीऑक्सिडेंट के उत्पादन को उत्तेजित करती है जो लिवर को टॉक्सिंस को नष्ट करने में मदद करता है।
    – सीमित मात्रा में कॉफी का सेवन करने से लिवर की कई बीमारियों जैसे फैटी लिवर और सिरोसिस के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।

  • Dry Nose की समस्यां से हो रहे है परेशान, ये आसान तरीके दिलाएंगे राहत

    Dry Nose की समस्यां से हो रहे है परेशान, ये आसान तरीके दिलाएंगे राहत

    हेल्थः सर्दियां आते ही लोगों को स्वास्थ्य से जुड़ी तमाम तरह की समस्याएं होने लगती है। इस मौसम में कुछ लोग ड्राई नोज की समस्या से काफी ज्यादा परेशान रहते हैं। कई बार तो नाक से खून भी आने लगता है। ड्राई नोज की वजह से नाक के आसपास की त्वचा शुष्क हो जाती है और स्किन पर लालिमा बढ़ने लगती है। अगर आप भी ड्राई नोज की समस्या से परेशान हैं और नाक के आसपास की त्वचा को हाइड्रेटेड रखना चाहते हैं तो कुछ आसान उपाय कर सकते हैं।

    डॉक्टर्स के अनुसार सर्दियों के मौसम में जैसे-जैसे ठंड बढ़ती है, वैसे-वैसे हवा में नमी कम हो जाती है। इस सूखी हवा का सबसे ज्यादा असर हमारे शरीर के नाजुक हिस्सों पर पड़ता है खासकर नाक के अंदर की झिल्ली पर। नतीजा होता है नाक का सूखना, जलन, खुजली, पपड़ी बनना और कई बार खून निकलना। हमारी नाक केवल सांस लेने का रास्ता नहीं है, बल्कि यह हवा को साफ और नम बनाकर फेफड़ों तक पहुंचाती है। जब नाक सूख जाती है, तो उसकी सुरक्षा परत कमजोर हो जाती है और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

    सर्दियों में नाक की नमी बनाए रखने के आसान उपाय
    – भाप लें : दिन में एक-दो बार हल्की भाप लेने से नाक की नमी वापस आ सकती है और सूखापन घट सकता है।
    – तेल या घी का हल्का इस्तेमाल: नथुने के अंदर हल्का सा नारियल तेल, तिल का तेल या देसी घी लगाने से प्राकृतिक नमी बनी रहती है।
    – सेलाइन नेजल स्प्रे का इस्तेमाल करें: बाजार में मिलने वाले साल्ट वॉटर स्प्रे नाक को बिना किसी साइड इफेक्ट के नम रखते हैं।
    – घर की नमी बनाए रखें: कमरे में humidifier रखें या हीटर के पास पानी का बर्तन रखें ताकि हवा में नमी बनी रहे।
    – पर्याप्त पानी पिएं: ठंड के मौसम में लोग पानी कम पीते हैं, जिससे शरीर के अंदर भी ड्राईनेस बढ़ती है। दिनभर में कम से कम 3–3.5 लीटर पानी जरूर लें।

     

  • घुटनों से आवाज आए तो हो जाए Alert, इस बीमारी का हो सकते है शिकार

    घुटनों से आवाज आए तो हो जाए Alert, इस बीमारी का हो सकते है शिकार

    हेल्थः सीढ़ियां चढ़ते या बैठते समय अगर आपके घुटनों से आवाज आ रही है तो इस भूलकर भी नजरअंदाज न करें, यह एक बीमारी का संकेत हो सकता है। एक्सपर्ट के मुताबिक यह आवाज घुटनों में किसी गंभीर समस्या की शुरुआत है। एक मामला भी ऐसा सामने आया है कि एक 27 साल के शख्स ने सीढ़ियां चढ़ते वक्त आने वाली हल्की ‘क्लिक’ की आवाज को अनदेखा किया, लेकिन कुछ समय बाद वही आवाज दर्दनाक घर्षण में बदल गई।

    जब उसने जांच कराई तो पता चला कि वो कॉनड्रोमलेशिया पटेला स्थिति में पहुंच गई है जिसमें घुटने की हड्डी के नीचे का कार्टिलेज घिसने लगता है। इस तरह की स्थितियों के मामले युवाओं में बढ़ रहे हैं। ये केस उन लोगों में अधिक कॉमन हैं जो लंबे समय तक 8-10 घंटे एक ही कुर्सी पर बैठकर काम करते हैं और यदि शरीर उन्हें कुछ संकेत देता है तो वे उसे अनदेखा कर देते हैं।

    यह समस्या तब बढ़ती है जब घुटनों पर बार-बार दबाव तो पड़ता है लेकिन मसल्स को मजबूती देने वाली एक्सरसाइज नहीं की जातीं और उन्हें आराम नहीं दिया जाता। खराब पॉश्चर, कम मूवमेंट और बिना तैयारी के हाई-इंपैक्ट एक्सरसाइज भी कार्टिलेज को नुकसान पहुंचा सकती हैं जिसे मॉडर्न लाइफस्टाइल वाले लोग नजरअंदाज कर देते हैं।
    एक्सपर्ट बताते है कि जरूरी नहीं कि जब घुटने में दर्द हो तभी आपको अलर्ट होना है। हमारी बॉडी पहले हमें चेतावनी देती है कि कुछ गलत हो रहा है और यदि उसे अनदेखा किया जाए तो वो एक्शन में आती है। अगर आपके घुटने सीढ़ियां चढ़ते, बैठते या लंबे वक्त तक बैठने के बाद आवाज करते हैं तो इसे हल्के में न लें।

    घुटनों का दर्द आमतौर पर देर से सामने आता है। असल में शुरुआती चेतावनी घुटने से आने वाली आवाज ही होती है, जिसे समझकर समय रहते बचाव किया जा सकता है। इसके लिए जरूरी है कि लोग नियमित स्ट्रेचिंग करें, पैरों के मसल्स मजबूत करें, पॉश्चर सही रखें और लगातार बैठे रहने से बचें।

  • क्या सुबह का नाश्ता दिमाग को Healthy रखने के लिए जरुरी है? Researchers ने किया खुलासा

    क्या सुबह का नाश्ता दिमाग को Healthy रखने के लिए जरुरी है? Researchers ने किया खुलासा

    सेहत: पिछले कुछ सालों में आपने यह बात कई बार सुनी होगी कि सुबह नाश्ता करना बेहद जरुरी है। अगर सुबह आप ब्रेकफास्ट नहीं करते तो शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो सकती है। अब इस मामले में एक नई रिसर्च ने धारणा को गलत साबित कर दिया है। हाल ही में हुई एक स्टडी के अनुसार, नाश्ता छोड़ने से दिमाग पर कोई भी असर नहीं होता है। खासतौर पर बड़े लोगों को इसका बिल्कुल असर नहीं होता।

    स्टडी में हुआ खुलासा

    सुबह के नाश्ते को लेकर अब हाल ही में एक स्टडी हुई है। इस स्टडी में 63 अलग-अलग स्टडीज और 3400 से ज्यादा लोगों पर किए गए एक्सपेरिमेंट और मेमोरी टेस्ट का विश्लेषण किया है। रिजल्ट में यह पाया गया है कि जिन लोगों में नाश्ता किया था और जिन्होंने नही किया उनके दिमाग में एक्टिविटी में लगभग कोई फर्क नहीं था। आंकड़ों के अनुसार, जिन्होंने सुबह खाना नहीं खाया था उन्होंने बाकी लोगों के मुकाबले सिर्फ 0.2 यूनिट ही ज्यादा अच्छा परफॉर्म किया। इसमें फर्क न के बराबर ही था।

    दिमाग को ऐसे मिलती है एनर्जी

    इस रिसर्च को लेकर अब वैज्ञानिकों का यह कहना है कि इंसान का दिमाग ग्लूकोज और शरीर में मौजूद फैट से एनर्जी लेता है। जब कोई व्यक्ति घंटों तक कुछ भी नहीं खाता तो ब्लड शुगर लेवल कम हो जाता है लेकिन शरीर केटोन्स नाम के तत्व से एनर्जी बनाकर दिमाग को सही ढंग से चलाता रहता है। इसके अलावा रिसर्चर्स ने कई सालों के डेटा का भी विश्लेषण किया है। इसमें यह पाया गया कि 8,12 या 16 घंटे तक फास्ट करने से व्यक्ति की मेमोरी, ध्यान केंद्रित करने की क्षमता और फैसले लेने की क्षमता पर कोई असर नहीं होता। स्टडी में यह साफ किया गया है कि शॉर्ट टर्म फास्टिंग यानी की थोड़े समय तक खाना न खाना शरीर और दिमाग दोनों के लिए ही सुरक्षित है।

    बच्चों को करना चाहिए नाश्ता

    रिसर्च में सामने आए नतीजों के अनुसार, सुबह का नाश्ता न करने से बड़े लोगों पर कोई भी असर नहीं होता हालांकि इस रिसर्च में बच्चों के लिए ब्रेकफास्ट छोड़ देना सही नही माना गया है। रिसर्च के अनुसार, बच्चे विकास की अवस्था में होते हैं इसलिए उन्हें नियमित तौर पर पौष्टिक खाना खाना चाहिए ताकि उनके शरीर और दिमाग को अच्छे से पोषण मिल पाए। वहीं व्यस्कों के लिए यदि कभी-कभी ब्रेकफास्ट छूट जाए तो कोई चिंता की बात नहीं होती। उनका दिमाग और शरीर दोनों इस बदलाव को आसानी के साथ संभाल सकते हैं।
  • क्यों नहीं खाना चाहिए खाली पेट अमरूद, सेहत के लिए कब है फायदेमंद

    क्यों नहीं खाना चाहिए खाली पेट अमरूद, सेहत के लिए कब है फायदेमंद

    हेल्थः हेल्दी रहने के लिए सुबह खाली पेट फल खाने की सलाह दी जाती है। कुछ लोग खाली पेट फल खाते हैं तो कुछ जूस पीना पसंद करते हैं। लेकिन सभी फल सुबह खाली पेट खाना फायदेमंद नहीं होता है। अमरूद को लेकर भी लोग काफी कंफ्यूज रहते हैं कि इसे किस वक्त खाना सेहत के लिए गुणकारी होता है। क्या सुबह अमरूद खाना सही है या खाली पेट अमरूद खाने से सेहत को कुछ नुकसान हो सकते हैं।

    दरअसल सर्दियों में अमरूद का सीजन होता है। ऐसे में आपको दिनभर में 1-2 अमरूद जरूर खाने चाहिए। अमरूद के पोषक तत्वों पर नजर डालें तो इसमें सेब से भी ज्यादा गुण पाए जाते हैं। कहते हैं सीजनल अमरूद सेब से भी ज्यादा पौष्टिक होता है।

    अमरूद खाने का सही समय है नाश्ते के बाद और लंच से पहले होता है। अगर आप कई तरह के फल सुबह खाते हैं तो उसमें थोड़ी मात्रा में अमरूद भी शामिल कर सकते हैं। हालांकि कुछ लोगों को सुबह खाली पेट अमरूद खाने से पेट में दर्द की समस्या हो सकती है क्योंकि अमरूद के बीजों पचने में काफी समय लगता है। अगर आपको सर्दी जुकाम है तो सुबह खाली पेट अमरूद खाने से बचें। अमरूद का सेवन रात में नहीं करना चाहिए। ठंडे फल रात में खाने से सर्दी जुकाम की समस्या हो सकती है।

    क्या है इसके फायदे
    वजन घटाएः अमरूद में फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है, इसलिए डाइट में अमरूद शामिल करने से वजन कम करने में मदद मिलती है। अमरूद खाने से पेट लंबे समय तक भरा रहता है और भूख कम लगती है। इससे आप अनहेल्दी खाने से बचते हैं।

    कब्ज में आरामः आजकल की लाइफस्टाइल और खानपान की वजह से लोगों को कब्ज की समस्या काफी परेशान करने लगी है। इसके लिए सबसे अच्छा फल अमरूद को माना गया है। अमरूद खाने से कब्ज दूर होती है। इसमें फाइबर भरपूर होने के कारण पेट साफ रहता है।

    पाचन क्रिया को बनाए मजबूतः खाने की गलत आदतें पाचन तंत्र को सबसे ज्यादा प्रभावित करने लगी हैं। जिसकी वजह से पाचन कमजोर होने जाता है और कई समस्याएं होने लगती हैं। लेकिन अमरूद खाने से पाचन क्रिया में सुधार आता है और पाचन तंत्र मजबूत बनाता है।

    पेट की जलन दूर करेः अमरूद को ठंडी तासीर का फल कहा जाता है। इसे खाने से पेट में बढ़ रही गर्मी कम होती है। पेट की जलन को शांत करने में भी अमरूद मदद करता है। जिन लोगों को पित्त की समस्या रहती है उन्हें अमरूद जरूर खाना चाहिए।

  • चुपचाप हड्डियों को कमजोर करते है ये Foods, बनाकर रखे दूरी

    चुपचाप हड्डियों को कमजोर करते है ये Foods, बनाकर रखे दूरी

    हेल्थः अगर हड्डियां मजबूत न हो, तो व्यक्ति का उठना-बैठना भी मुश्किल हो जाता है। इसलिए हड्डियों की मजबूती पर ध्यान देना जरूरी है, खासकर अगर आप 30 की उम्र पार कर चुके हैं। हड्डियों की मजबूती के लिए शरीर में सही मात्रा में कैल्शियम का होना बहुत जरूरी है। हालांकि, हम अनजाने में कई ऐसे फूड्स खाते हैं, जो हमारे शरीर से कैल्शियम चूस लेते हैं। कुछ फूड्स ऐसे भी होते हैं, जो शरीर में कैल्शियम की मात्रा को कम कर देते हैं। ऐसे में हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए इन फूड्स से परहेज करना बेहद जरूरी है।

    ज्यादा नमकः जब आप ज्यादा नमक का सेवन करते हैं, तो शरीर यूरीन के जरिए एक्स्ट्रा सोडियम को बाहर निकालता है। इस प्रक्रिया में, सोडियम के साथ-साथ शरीर का कैल्शियम भी बाहर निकल जाता है। इसलिए ज्यादा नमक खाने से व्यक्ति की हड्डियों का कैल्शियम कम होने लगता है। प्रोसेस्ड फूड, चिप्स, पैक्ड सूप, अचार और फास्ट फूड में नमक की मात्रा बहुत ज्यादा होती है।

    सॉफ्ट ड्रिंक्स और कार्बोनेटेड ड्रिंक्सः कोल्ड ड्रिंक और अन्य कार्बोनेटेड ड्रिंक्स फॉस्फोरिक एसिड से भरपूर होते हैं। ज्यादा फॉस्फोरस शरीर में कैल्शियम के बैलेंस को बिगाड़ देता है। ब्लड में कैल्शियम और फॉस्फोरस की सही मात्रा होनी चाहिए। लेकिन जब फॉस्फोरस का स्तर बहुत बढ़ जाता है, तो शरीर हड्डियों से कैल्शियम खींचकर ब्लड में छोड़ता है। लगातार ऐसा होने से हड्डियों की डेंसिटी कम होने लगती है।

    कैफीन: चाय और कॉफी जैसे कैफीन वाली ड्रिंक्स भी कैल्शियम के अब्जॉर्प्शन को प्रभावित करते हैं। कैफीन की ज्यादा मात्रा किडनी के जरिए कैल्शियम को बाहर निकालने लगती है। साथ ही, यह आंतों में कैल्शियम के अब्जॉर्प्शन को भी कम कर सकता है। इसलिए सीमित मात्रा में कॉफी पीना काफी जरूरी है।

  • दिल को Healthy रखेगी ये 5 Herbal Tea, बनाएं अपनी डाइट का हिस्सा

    दिल को Healthy रखेगी ये 5 Herbal Tea, बनाएं अपनी डाइट का हिस्सा

    सेहत: खराब लाइफस्टाइल, गलत खान-पान के कारण दिल संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ता जा रहा है। छोटी उम्र में ही युवाओं की हार्ट अटैक के कारण मौत हो रही है। ऐसे में अपने खान-पान का ध्यान रखना बहुत जरुरी है। डेली डाइट में आप क्या खाते हैं इससे आपकी सेहत पर गहरा असर पड़ता है। कुछ नैचुरल उपाय अपनाकर भी आप अपना दिल स्वस्थ रख सकते हैं। नैचुरल उपाय के तौर पर हर्बल टी आपके लिए फायदेमंद रहेगी। इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स, एंटीइंफ्लेमेटरी गुण और कुछ जरुरी पोषक तत्व पाए जाते हैं। यह टी न सिर्फ आपके शरीर को आराम देगी बल्कि दिल और ब्लड प्रेशर के लिए भी फायदेमंद साबित होगी।

    ग्रीन टी

    इसमें मौजूद कैटेचिन जैसा एंटीऑक्सीडेंट शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल कम करेगा। रिसर्च की मानें तो दिन में यदि आप 2-3 बार ग्रीन टी पीते हैं तो आपका दिल भी हेल्दी रहेगा और सूजन भी कम होगी। इसके अलावा यह वजन घटाने में भी मदद करेगी।

    कैमोमाइल टी

    यह चाय आमतौर पर रिलेक्सेशन और नींद में फायदेमंद मानी जाती है परंतु यह दिल की हेल्थ के लिए भी फायदेमंद साबित होगी। इसमें पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट्स जैसे कि अपीजेनिन, ल्यूटिन और क्वेरसेटिन सूजन कम करेंगे। ब्लड प्रेशर कम करेंगे और कोलेस्ट्रॉल की मात्रा शरीर में बढ़ने से रोकेंगे। इससे आपके दिल के काम करने का तरीका बेहतर होगा।

    हिबिस्कस टी

    यह भी आपके दिल के लिए फायदेमंद साबित होगी। एक क्लिनिकल ट्रायल में हाई ब्लड प्रेशर वाले 65 लोगों को 6 हफ्ते तक रोज तीन कप हिबिस्कस टी पीने के लिए कहा गया। इसके बाद जब परिणाम देखे गए तो यह पता चला कि सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर काफी हद तक कम हुआ है। इसमें पाया जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर दोनों को नियंत्रित करने में मदद करेगा।

    अदरक टी

    अदरक हर्बल टी में भी कई ऐसे कंपाउंड पाए जाते हैं जो आपके दिल के लिए फायदेमंद साबित होंगे। इसमें जिंजरॉल और शोओगॉल जैसा कंपाउंड पाया जाता है जो शरीर में सूजन को कम करेगा। इसके साथ ही ब्लड फ्लो भी बेहतर बनेगा। यह हर्बल टी ब्लड प्रेशर को कंट्रोल रखेगी और खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में भी मदद करेगी।

    रेड बुश टी

    रेड बुश टी जिसको रुईबोस टी कहते हैं। यह कैफीन फ्री होती है और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर मानी जाती है। इसमें एस्पालथिन और नोटोफैगिन जैसे कंपाउंड्स पाए जाते हैं। यह आपका ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस कम करेंगे। इसके साथ ही यह कोलेस्ट्रॉल को कम करने में भी मदद करेगी। एक रिसर्च में यह साबित हुआ है कि रोज 200 से 1200 मिलीलीटर रेड बुश टी पीते हैं तो शरीर के लिपिड प्रोफाइल और ब्लड शुगर लेवल में सुधार होगा।