Category: Health
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ज्यादा दुबलापन भी सेहत के लिए खतरा, Researchers ने किया चौंकाने वाला खुलासा
सेहत: काफी लोगों को ऐसा लगता है कि दुबला-पतला शरीर ही सबसे हेल्दी होता है। जो लोग पतले होते हैं उन्हें कोई बीमारी नहीं होती परंतु अब हाल ही में डेनमार्क में हुई रिसर्च आपको हैरान कर सकती है। इस शोध में यह पाया गया है कि बहुत कम बीएमआई होना ओवरवेट होने से कहीं ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है। 85000 लोगों पर की गई रिसर्च में इस बात का पता लगा कि जिन लोगों का बीएमआई 18.5 से कम था। उनकी जल्दी मौत होने की संभावना करीबन तीन गुणा ज्यादा थी। इसके अलावा जिन लोगों का बीएमआई 22.5 से 24.9 के बीच में था उनकी सेहत अच्छी रही। खास बात यह है कि जो लोग सामान्य हेल्दी रेंज से थोड़ा ऊपर यानी 25 से 35 के बीएमआई में थे। ऐसे लोगों में मौत का खतरा ज्यादा नहीं था यानी ओवरवेट हमेशा नुकसानदायक साबित नहीं हो सकता। -

अब Skin Diseases मानी जाएगी गंभीर बीमारी, WHO ने उठाया बड़ा कदम
नई दिल्ली: आज के समय में खराब लाइफस्टाइल और बदलते मौसम के चलते कई लोग किसी न किसी तरह की स्किन संबंधी दिक्कतों से जूझ रहे हैं। मुंहासे, एलर्जी, रफ स्किन या फिर ड्राईनेस यह समस्याएं आम हो गई है। पहले इन्हें आम समस्याएं माना जाता था परंतु अब विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इन सभी को स्किन की बीमारियों की गंभीर लिस्ट में शामिल कर दिया है। ऐसे में यह फैसला उन लोगों के लिए राहत भरा होगा जो स्किन संबंधी दिक्कतों से जूज रहे हैं। WHO ने हाल ही में एक बड़ा कदम उठाया है। सनस्क्रीन और मॉइश्चराइजर अब जरुरी दवाईयों की लिस्ट में शामिल हो गए हैं। अब ये सिर्फ कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स ही नहीं बल्कि इलाज का हिस्सा भी माने जाएंगे। ‘बीमारियों में काम आएगी सनस्क्रीन मॉइश्चराइजर
विश्व स्वास्थ्य सगंठन ने कहा कि सनस्क्रीन और मॉइश्चराइजर सिर्फ स्किन को निखारने ही नहीं बल्कि कई गंभीर स्किन बीमारियों से बचाने और उनका इलाज करने में भी मदद करेगी। खासतौर पर जिन लोगों को एल्बिनिज्म या एटोपिक डर्मेटाइटिस है उनके लिए यह जरुरी दवाईयों के तौर पर शामिल होगी। अब इन प्रोडक्ट्स को सरकार और स्वास्थ्य संगठन दवाईयों की तरह इस्तेमाल करेंगे और मरीजों को कम कीमत पर यह मिल पाएंगी।स्किन की गंभीर बीमारियां बनेगी खतरा
बहुत से लोग स्किन की बीमारियों को नॉर्मल ही मानते हैं परंतु कुछ बीमारियां इतनी खतरनाक होती है कि व आपको पूरी जिंदगी परेशान कर सकती हैं। यह बीमारियां आपके लिए जानलेवा भी बन सकती हैं। स्किन की आम बीमारियों में मुंहासें, खुजली और रैशेज, एग्जिमा, एलर्जी और एलोपेसिया एरीटा शामिल है। वहीं स्किन की गंभीर बीमारियों में सोरायसिस, रोसैसिया, विटिलिगो और मेलेनोमा होती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का यह मानना है कि इन बीमारियों को यदि शुरुआत में पहचान लिया जाए और इनका इलाज मिल पाए तो स्थिति संभाली जा सकती है।Global Action Plan लॉन्च करेगा विश्व स्वास्थ्य संगठन
विश्व स्वास्थ्य संगठन अब इस दिशा में एक अहम कदम उठाने वाला है। अगले साल wHO एक Global Action Plan लॉन्च करने वाला है। इस प्लान का मकसद दुनियाभर में स्किन की बीमारियों को लेकर जागरुकता फैलना, इलाज आसान बनाना और सस्ती दवाईयां देना है। इसकी जानकारी ग्लोबल स्किन नाम की संस्था की सीईओ जेनिफर ऑस्टिन ने दी। उन्होंने कहा कि WHO के इस कदम से इलाज की लागत कम हो जाएगी और स्किन संबंधी बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को राहत मिलेगी। डब्ल्यूएचओ के इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अब स्किन की बीमारियों से जूझ रहे गरीब और मिडिल क्लास लोग अब कम -

Public Places पर लगे Hand Dryer बढ़ा रहे बीमारियों का खतरा, Experts ने दी चेतावनी
सेहत: सभी का यही मानना है कि हाथ धोने से कई तरह की बीमारियों से बचाव होता है। यही कारण है कि घर से लेकर स्कूल, ऑफिस, अस्पताल, एयरपोर्ट और रेस्त्रां तक हाथ धोने की खास सुविधा मिलती है परंतु असली दिक्कत वहां आ सकती है जब हाथ धोने के बाद उनको सुखाना पड़ता है। आमतौर पर लोग हाथ साफ करने के लिए पेपर टॉवल, रुमाल या टिश्यू इस्तेमाल करते हैं परंतु आजकल सभी जगहों पर पेपर टॉवल की जगह हैंड ड्रायर लगे होते हैं। ऐसे में लोगों का लगता है कि यह मॉर्डन, आसान और इको फ्रेंडली तरीका है परंतु रिसर्च में आए नतीजे आपको चौका सकते हैं। रिसर्च में यह सामने आया है कि पब्लिक जगहों पर लगे हुए हैंड ड्रायर उतने सेफ नहीं होते हैं जितना आप उन्हें समझते हैं। एक्सपर्ट्स ने हाल ही में पब्लिक प्लेस पर लगे हुए हैंड ड्रायर को लेकर चेतावनी दी है। उनका कहना है कि वॉशरुम पहले से ही बैक्टीरिया और वायरस के साथ भरा होता है। ऐसे में जब आप लोग हैंड ड्रायर का इस्तेमाल करते हैं तो टॉयलेट से निकलने वाले फ्लश एरोसोल यानी की माइक्रोऑर्गनिज्म खिंच लेते हैं। यह सीधे हमारे साफ हाथों में आ जाते हैं और हाथ धोने का पूरा फायदा ही बेकार हो जाता है। सिर्फ एक्सपर्ट्स ही नहीं बल्कि कई सांइटिफिक रिसर्च में यह साफ बताया गया है कि हैंड ड्रायर सिर्फ हाथों को ही नहीं बल्कि बाथरुम भी गंदा कर देता है।स्टडी में हुआ साबित
कनेक्टिकट यूनिवर्सिटी और क्विनिपियाक यूनिवर्सिटी की स्टडी से यह पता चला है कि जब ड्रायर चालू किया गया और पेट्री डिश को बाथरुम की हवा के पास रखा तो उसमें 254 बैक्टीरिया की कॉलोनियां बन गई परंतु जब ड्रायर बंद था तो करीबन सारे बैक्टीरिया नहीं पनपे। ये ज्यादातर बैक्टीरिया टॉयलेट से निकलने वाले छोटे-छोटे एरोसोल आए थे। तेज हवा वाले जेट ड्रायर इसका खतरा और बढ़ाते हैं क्योंकि ये दूषित कणों को हाथों, कपड़ों और आस-पास की चीजों पर फैला सकते हैं। इससे जो इंसान ड्रायर इस्तेमाल करता है उसके पास जर्म्स आ सकते हैं। 2018 में अमेरिकन सोसाइटी फॉर माइक्रोबायोलॉजी में यह पाया गया कि गर्म हवा वाला ड्रायर हवा के साथ जर्म्स को बाहर फेंकता है। ऐसे में ड्रायर की हवा साफ नहीं होती और उसमें गंदे कण मिल जाते हैं। ये पाया गया कि HEPA फिल्टर लगने के बाद भी ड्रायर हवा में बैक्टीरिया छोड़ते हैं। इसका अर्थ है कि ये फिल्टर पूरी तरह से जोखिम खत्म नहीं करते। एक रिसर्च में यह बताया गया है कि जेट ड्रायर, तौलिए जैसे ट्रैडिशनल सुखाने के तरीकों की तुलना में जर्म्स ज्यादा दूर तक फैलते हैं। इसमें से निकलने वाली बूंदे कई मीटर तक उड़ती हैं और लंबे समय तक हवा में बनी रहती है।पेपर टॉवल ज्यादा सेफ
. विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि हाथ सुखाने के लिए पेपर टॉवल सबसे सुरक्षित ऑप्शन होता है ऐसा इसलिए क्योंकि ये जल्दी हाथों की नमी सोख लेता है। . यह जर्म्स के एक जगह से दूसरी जगह जाने की संभावना कम करता है। . एयर ड्रायर से होने वाली पॉल्यूशन और हवा में जर्म्स फैलने की समस्या से भी बचाते है। . खासतौर पर एयरपोर्ट, स्कूलों और अस्पताल जैसे भीड़भाड़ वाली जगहों पर जेट एयर ड्रायर की जगह पेपर टॉवल इस्तेमाल करना ज्यादा सही है। इससे इंफेक्शन का खतरा कम होगा। -

सोशल मीडिया पर वायरल हुई Matcha Tea, फायदे जानकर बना लेंगे Diet का हिस्सा
सेहत: इन दिनों भारत में माचा टी काफी फेमस हो रही है। सोशल मीडिया भी इसका एक बड़ा कारण है। सेलिब्रिटीज से लेकर इंफ्लुएंसर्स तक इस माचा टी के दीवान हो गए हैं। ऐसे में अब काफी लोगों के मन में एक सवाल आ रहा है कि आखिर इस टी में ऐसा क्या है जिसके कारण सब इसका सेवन कर रहे हैं। आइए जानते हैं।ग्रीन टी के मुकाबले ज्यादा पोषक तत्व
माचा टी एक तरह की ग्रीन टी है। यह सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद होती है। जापान में यह बहुत ही लोकप्रिय मानी जाती है और इसकी जड़े चीन से भी जुडी हुई है। माचा के लिए ग्रीन टी की पत्तियों को पीसकर बारीक पाउडर बनाया जाता है परंतु इसमें ग्रीन टी के मुकाबले ज्यादा पोषक तत्व मौजूद होते हैं।फायदे
दिमाग रहेगा शांत
यह चाय आपके दिमाग के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगी। इसमें कैफीन और एल-थीनिन नाम का एक एमीनो एसिड मौजूद होता है। कैफीन आपको इंस्टैंट एनर्जी देगा और एक्टिव बनाएगा। वहीं एल थीनिन होने के कारण आपका दिमाग शांत रहेगा और फोकस भी बढ़ेगा।स्किन दिखेगी यंग
यह टी कई सारे एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर मानी जाती है। इसमें कैटेचिन काफी अच्छी मत्रा में मौजूद होता है। इस चाय में मौजूद कंपाउंस एक नैचुरल एंटीऑक्सीडेंट के तौर पर काम करता है। इसे पीने से शरीर में फ्री रेडिकल्स से लड़ने में मदद मिलेगी। इसको पीने से आपकी कोशिकाओं को नुकसान नहीं होगा और कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा भी कम होगा। फ्री रेडिकल्स आपकी एजिंग को तेज करेंगे। इसको पीने आपकी स्किन लंबे समय तक यंग नजर आएगी।मेटाबॉल्जिम होगा तेज
यह आपके शरीर के मेटाबॉल्जिम को भी तेज बनाएगी। इसमें एपिगैलोकैटेचिन गैलेट नाम का एक कंपाउंड होता है। यह कंपाउंड आपके मेटाबॉल्जिम को मजबूत बनाने के साथ-साथ आपके शरीर में मौजूद एक्स्ट्रा फैट जलाने में भी मदद करेगा।दिल रहेगा स्वस्थ
कई शोधों से यह पता चलता है कि एंटीऑक्सीडेंट्स और एंटीइंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर होने के कारण इस टी को पीने से दिल संबंधी रोगों का खतरा भी कम होगा।लिवर रहेगा हेल्दी
यह टी आपके लिवर के लिए भी बेहद फायदेमंद रहेगी। इसमें क्लोरोफिल पाया जाता है जो शरीर में मौजूद टॉक्सिन्स पदार्थ को बाहर निकालने में मदद करेंगे। इससे आपका लिवर हेल्दी रहेगा। -

60 रोटियां खाने के बाद भी नहीं मिटती भूख, इस गंभीर बीमारी से जूझ रही महिला
सेहत: क्या आपने कभी यह सोचा है कि कोई रोज 60 रोटियां खाए और फिर भी कहे कि उसको भूख लग रही है। अगर नहीं सुना तो इस महिला की कहानी सुनकर आप शायद हैरान हो सकते हैं। सुनने में यह आपको अजीब लगेगा और आप इस किस्से को सुनकर चौंक भी सकते हैं परंतु मध्यप्रदेश के राजगढ़ की रहने वाली मंजु नाम की महिला के साथ ऐसा ही हो रहा है। मंजु को इतनी भूख लगती है कि वह सारा दिन खाती रहती है और फिर भी उनके चेहरे और शरीर पर कमजोरी साफ दिखती है। मंजु के परिवार वाले परेशान हो गए हैं वह इलाज पर भी लाखों रुपये लगा चुके हैं परंतु बीमारी का असर कम नहीं हो रहा है। दूसरी ओर डॉक्टरों का कहना है कि यह कोई आम समस्या नहीं बल्कि Psychiatric Disorder है यानी की दिमाग की बीमारी। इसमें सारा कुछ खाने के बाद भी यही लगता है कि कुछ नहीं खाया।60 रोटियों खाने के बाद भी नहीं मिटती भूख
रोज 60 रोटियां किसी के लिए भी खाना आसान नहीं होता परंतु मंजु बिना रुके इतनी रोटियां खा लेती हैं। इतना खाने के बाद भी उन्हें भूख लगी रहती है। परिवार वालों के अनुसार, मंजु का वजन लगातार कम होता जा रहा है औऱ वह कमजोर हो गई है।आखिर क्या होती है यह बीमारी?
डॉक्टर्स की मानें तो यह एक Psychiatric Disorder होता है इसमें व्यक्ति का दिमाग गलत सिग्नल देता है। दिमाग को ऐसा लगता है कि पेट खाली है और उसको लगातार खाने की जरुरत है। यही कारण है कि मरीज की कभी भूख ही नहीं मिटती। यह बीमारी बहुत ही रेयर होती है हर कोई इसका शिकार नहीं होता परंतु इसमें मरीज की मानसिक स्थिति पर काफी असर पड़ता है।इलाज करवाने के बाद भी नहीं पड़ा फर्क
मंजु के परिवार वालों का कहना है कि उनकी बीमारी का इलाज करवाने के लिए वह करीबन 7 लाख रुपये खर्च कर दिए हैं। कई अस्पतालों में इलाज भी करवाया है पर अभी कोई ठोस सुधार नहीं हुआ। यह स्थिति परिवार के लिए चिंता और तनाव का कारण बन गई है।लक्षण
यदि बात बीमारी के लक्षणों की करें तो लगातार भूख लगते रहना, बहुत ज्यादा खाना खाने के बाद भी कमजोरी लगना, वजन बहुत ज्यादा बढ़ना या कम होना, मानसिक तनाव और चिड़चिड़ापन रहना, बार-बार खाना मांगना। ऐसे में यदि आपको भी किसी में इस तरह के लक्षण नजर आएं तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। -

बालों को मजबूत बनाने के लिए ये चीजें डाइट में करें शामिल, तेजी से होगी Growth
हेल्थः खूबसूरत और सुंदर बाल हर किसी को प्यारे होते है, लेकिन आजकल प्रदूषण, पोषक की कमी की वजह से लोगों को बालों के झड़ने की समस्या का सामना करना पड़ता है। ऐसी समस्या से निजात पाने के लिए कुछ ऐसे ड्राई फ्रूट्स है आपके बालों के झड़ने की समस्या को दूर कर सकते है। जिन्हें अगर आप हेल्दी डाइट और लाइफस्टाइल के साथ सेवन करते हैं तो इससे आपके बालों को पोषण मिलेगा।
अखरोट आपकी बॉडी, दिमाग, स्किन और बालों के लिए भी सुपरफूड है। इसमें प्रोटीन, फैट, फाइबर, मैंगनीज, कॉपर, सेलेनियम, विटामिन ई, ओमेगा-3 फैटी एसिड और बायोटिन होता है जो बालों को घना, मजबूत बनाने में मदद करते हैं। साथ ही स्कैल्प को भी स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।
किशमिश व्यंजनों को सजाने और स्वाद बढ़ाने के साथ ही स्किन और बालों के लिए भी बहुत अच्छी होती है। इसमें ढेरों एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं और आयरन होता है जो ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है। इससे सिर की त्वचा में ऑक्सिजन पहुंचता है और बाल मजबूत होते हैं। इसमें विटामिन सी भी होता है जो आयरन अवशोषण और कोलेजन के उत्पादन में मदद करता है।
बादाम बायोटिन और विटामिन ई से भरपूर होते हैं। ये आपकी सिर की त्वचा में ब्लड सर्कुलेशन को सुधारते हैं और बालों की जड़ों को मजबूत बनाते हैं। ये बालों के टूटने की प्रक्रिया को भी कम करते हैं।
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इन लोगों के लिए जहर है सेंधा नमक, खाने से पहले हो जाएं Alert
सेहत: सादे नमक से ज्यादा हेल्दी सेंधा नमक माना जाता है। ऐसे में लोग इसका खाने में ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। व्रत में भी इसको ही खाया जाता है और ऐसा माना जाता है कि यह पाचन के लिए भी बेहद फायदेमंद होता है परंतु क्या आप यह जानते हैं कि हर कोई इस नमक को नहीं खा सकता। कुछ लोगों के लिए यह जहर भी साबित हो सकता है।दिल के मरीज
जो लोग दिल संबंधी दिक्कतों से जूझ रहे हो उनके लिए सेंधा नमक खतरनाक साबित होगा क्योंकि ऐसे लोगों को ज्यादा मात्रा में सोडियम खाने से मना किया जाता है। इसको खाने से ब्लड प्रेशर और फ्लूइड रिटेंशन बढ़ता है जिससे दिल पर दबाव पड़ता है।डायबिटीज के मरीज
जो लोग डायबिटीज से जूझ रहे हो उनके लिए भी सेंधा नमक खतरनाक साबित हो सकता है। इसे खाने से ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल पर असर होता है।बुजुर्ग लोग
बुजुर्गों को अक्सर हाई बीपी, डायबिटीज और हार्ट संबंधी दिक्कतें होती है। ऐसे में उन्हें भी सेंधा नमक नहीं खाना चाहिए। इसको खाने से उनकी ओवरऑल हेल्थ पर बुरा असर हो सकता है।ब्लड प्रेशर के मरीज
सेंधा नमक में सोडियम की मात्रा ज्यादा होती है ऐसे में इसको खाने से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। हाई बीपी के मरीजों को भी सेंधा नमक का सेवन कम मात्रा में या फिर बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए।थायराइड के मरीज
इन मरीजों को आयोडीन की जरुरत होती है परंतु सेंधा नमक में आयोडीन नहीं होता। ऐसे में इसका सेवन करने से थायराइड के मरीजों को थायराइड इंबैलेंस और बढ़ सकता है इसलिए उन्हें सेंधा नमक नहीं खाना चाहिए।किडनी के मरीज
यदि आपकी किडनी अच्छे से काम नहीं कर रही है तो भी सेंधा नमक नहीं खाना चाहिए। क्योंकि इसके कारण शरीर से सोडियम सही मात्रा में नहीं निकल पाता ऐसे में सेंधा नमक खाने से किडनी की स्थिति और भी खराब हो सकती है।प्रेग्नेंट महिलाएं
प्रेग्नेंसी में भी महिलाओं को सोडियम और आयोडिन का संतुलन बनाकर रखना पड़ता है। ऐसे में यदि आप सेंधा नमक खाते हैं तो यह आपकी सेहत और बच्चे दोनों पर बुरा असर डालेगा। -

10 साल के बच्चे की Heart Attack से गई जान, Experts से जानें बच्चों में क्यों बढ़ रहे ऐसे मामले?
सेहत: महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले में महज दस साल के बच्चे की हार्ट अटैक के कारण मौत हो गई है। बताया जा रहा है कि बच्चा अपने घर के पास एक गणपति मंडाल में खेल रहा था। खेलते-खेलते उसको कुछ बैचेनी सी महसूस हुई। इसके बाद वह घर में जाकर अपनी मां की गोद में लेट गया। कुछ ही पलों में उसने मां की गोद में दम तोड़ दिया। सूत्रों की मानें तो बच्चे की हार्ट अटैक के कारण जान गई है। पहले यहां हार्ट अटैक बुजुर्गों को आता था अब पिछले कुछ समय से युवा और बच्चे इससे जूझ रहे हैं। बच्चों में दिल संबंधी दिक्कतें बढ़ रही हैं और उन्हें इस बारे में पता भी नहीं चलता पर बच्चों को हार्ट अटैक आने का कारण क्या है आपको इस बारे में बताते हैं।इसलिए आता है बच्चों को हार्ट अटैक
बड़ों को हार्ट अटैक धमनियां बंद करने के कारण होता है वहीं बच्चों को कई वजह से यह दिक्कतें हो सकती हैं।दिल की धमनियों में दिक्कत
जब धमनियां बहुत टाइट और गलत जगह पर हो इसके कारण दिल तक खून पहुंचना मुश्किल हो जाता है जिसके कारण हार्ट अटैक आ सकता है।दवाईयों का रिएक्शन
कई बार कुछ दवाई यदि बच्चे लेते हैं तो भी दिल की समस्याओं का कारण बन सकती है।जन्मजात दिल संबंधी रोग
बच्चे को जन्म के समय यदि दिल की बीमारी है तो इसके कारण भी ब्लो फ्लो पर असर होगा।खून के थक्के जमना
कुछ जेनेटिक्स कंडीशन के चलते शरीर में खून के थक्के जमने लगते हैं। इसके कारण भी ब्लड फ्लो रुक जाता है।कावासाकी रोग
यह एक दुर्लभ बीमारी होती है जिसके कारण रक्त वाहिकाओं में सूजन पैदा होती है और दिल को नुकसान पहुंचता है।मायोकार्डिटिस
इस वायरल संक्रमण के कारण दिल की मांसपेशियां कमजोर होती हैं।मोटापा और हाई कोलेस्ट्रॉल
अनहेल्दी खान-पान और फिजिकल एक्टिविटी कम होने के कारण भी दिल पर दबाव पड़ता है।लक्षण
बच्चों को हार्ट अटैक आने पर बड़ो जैसे लक्षण नहीं दिखते। ऐसे में माता-पिता को मेडिकल हेल्प लेने के लिए बच्चों में दिखने वाले चेतावनी संकेतों पर गौर करना चाहिए। शुरुआत में लक्षण कुछ ऐसे दिखते हैं जैसे कि – . सांस लेने में दिक्कत . थकान और कमजोरी . सीने में दर्द . त्वचा पीली या नीली पड़ जाना . धड़कन तेज या अनियमित होना . ठंडा पसीना और मतली आनाऐसे करें बचाव
दिल संबंधी कुछ दिक्कतें बच्चों में जेनेटिकिली होती है परंतु अपने लाइफस्टाइल में बदलाव करके दिल संबंधी समस्याएं कम की जा सकती हैं। . जंक फूड कम दें। चीनी, नमक या बाहर का फूड भी न दें। . यदि बच्चे को फ्लू, संक्रमण का है तो उसका इलाज करवाएं। . धूम्रपान के संपर्क में बच्चे को न आने दें। इससे उनके दिल को नुकसान पहुंचेगा। . बच्चे का कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर चेक करते रहें। . बच्चों की डाइट में ताजे फल, सब्जियां और साबुत अनाज शामिल करें। .उन्हें रोज एक्सरसाइज करवाएं।इस तरह के लक्षण न करें इग्नोर
. अगर बच्चे के होंठों या नाखूनों पर पीलापन आए। . दिल की धड़कन बहुत तेज या अनियमित हो तो भी नजरअंदाज न करें। . सीने में बहुत ज्यादा दर्द, बैचेनी की शिकायत। . बिना काम करे थकान या चक्कर यदि बच्चे को आए तो भी इग्नोर न करें। .सांस लेने में तकलीफ या फिर यदि बच्चा बेहोश हो जाए तो भी इग्नोर न करें।हार्ट अटैक आने पर करें ये काम
. यदि बच्चे को हार्ट अटैक आया है तो तुरंत आपातकालीन सेवा पर कॉल करें। . बच्चा यदि बेहोश हो गया है तो उसे सीपीआर दें। . बच्चे को शांत रखें और बिल्कुल भी न घबराएं। . डॉक्टर की सलाह के बिना बच्चे को कोई भी दवाई न दें। -

इन दो चीजों को खाकर Katrina Kaif ने घटाया अपना वजन, आप भी जानें एक्ट्रेस का Diet Secret
सेहत: विक्की कौशल और करीना कपूर खान ने हाल ही एक साथ इंटरव्यू दिया है। इस दौरान कटरीना ने एक अहम खुलासा किया है। कटरीना ने बताया कि फिल्म ‘धूम-3’ की शूटिंग के दौरान सिर्फ फिश और सब्जियां खाती थी। एक इंटरव्यू में कटरीना ने विक्की से कहा कि – ‘मुझमें पंजाबियों वाले जीन्स है’ मेरा मतलब है कि आप और आपकी पत्नी सिर्फ मछली खाते हैं। मुझे लगता है कि उन्होंने आपको ऐसा बनाया क्योंकि एक समय ऐसा भी था जब कैट सिर्फ सैल्मन खाती थी’। यह सुनकर विक्की ने कहा – ‘हां मुझे लगता है कि वो उनका धूम वाला दौर था मैंने सुना था कि आमिर और कैटरीना दोनों सिर्फ सैल्मन और सब्जियां खाते थे’।
कटरीना कैफ ने धूम 3 के लिए काफी वजन घटाया था परंतु क्या आप जानते हैं कि वेट लॉस के लिए लंबे समय तक सिर्फ सैल्मन और सब्जियां या कोई भी रिस्ट्रिक्टिव डाइट के शरीर पर क्या असर होता है। इस मामले पर एक्सपर्ट्स का कहना है कि सिर्फ सैल्मन और सब्जियां खाने से कुछ समय के लिए फायदा हो सकता है खासतौर पर वजन कम करने और दिल की सेहत के लिए यह फायदेमंद रहेगा। यह सैल्मन प्रोटीन, ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर होती है। वहीं सब्जियां, फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट्स और जरुरी विटामिन्स देती है।
इस कॉम्बिनेशन से थोड़े समय में ही आपकी सूजन कम होगी और पाचन में भी सुधार होगा हालांकि यदि आप लंबे समय में रिस्ट्रिक्टिव डाइट लेते हैं तो सेहत के लिए खतरा बन सकती है। सैल्मन जैसी मछलियों का ज्यादा मात्रा में सेवन करने से पारा या बाकी हैवी मेटल्स के संपर्क में आने का खतरा भी बढ़ सकता है। बिना साबुत अनाज, डेयरी प्रोडक्ट्स, फल और फलियों वाली डाइट सेहत के लिए खतरनाक साबित होगी सिर्फ सैल्मन और सब्जी आपकी बाकी चीजों से मिलने वाला जरुरी पोषण नहीं दे सकती।
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शरीर में ये लक्षण दिखाई दे तो न करे अनदेखा, हो सकती है यह बीमारी
हेल्थः आयरन की कमी से होने वाले एनीमिया की दिक्कत काफी कॉमन है लेकिन शरीर के लिए खतरनाक हो सकती है। एक रिपोर्ट के अनुसार, जो लोग फोर्टिफाइड अनाज से परहेज करते हैं या उनका सीमित मात्रा में सेवन करते हैं, उन्हें भी आयरन की कमी हो सकती है, क्योंकि ये खाद्य पदार्थ आपको लगभग आयरन की जरूरत को पूरा करने में मदद करते हैं।
एनीमिया मुख्य रूप से आयरन की कमी, विटामिन (फोलेट और विटामिन बी12) की कमी, क्रॉनिक डिसीस, थैलेसीमिया और जेनेटिक्स रेड ब्लड सेल्स डिसॉर्डर के कारण होता है। इसके अलावा संक्रमण, ऑटो-इम्यून डिसीस रोग, कुछ दवाएं और गर्भावस्था जैसे कारण भी इसमें शामिल होते हैं।
हर समय की थकानः थकान आयरन की कमी के सबसे आम लक्षणों में से एक है और आयरन की मामूली कमी से भी यह लक्षण आपके शरीर में दिखाई दे सकता है। अगर आप थके हुए हैं तो यह डायग्नॉस करना कि आपको आयरन की ही कमी है, यह करना मुश्किल है, क्योंकि थकान के पीछे और कई वजहों भी सकती हैं। लगातार थकान के सबसे आम कारण डिप्रेशन, बहुत ज्यादा तनाव, नींद की दिक्कत और नींद से जुड़ी सांस की परेशानी शामिल हैं। फिर भी अगर आपको लगातार थकावट हो रही है तो आपके आयरन का स्तर कम हो सकता है और आपको जरूर जांच करवानी चाहिए।
हर वक्त ठंड लगनाः अगर आपको लगता है कि आपके हाथ और पैर लगातार ठंडे रहते हैं तो हो सकता है कि आप आयरन की कमी से जूझ रहे हों। 2022 के एक अध्ययन के अनुसार, आपके थायरॉइड के ठीक से काम करने के लिए आयरन जरूरी है। आयरन की कमी से थायरॉइड के कामकाज में रुकावट आ सकती है। थायरॉइड हार्मोन आपके शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में मदद करता है। इसलिए इस कंडीशन में भी आपको डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए।
सांसें फूलनाः अगर लगातार एक्सरसाइज करने पर आपको सांस लेने में दिक्कत होने लगे तो हो सकता है कि आपके शरीर में आयरन की कमी हो। न्यूट्रिएंट्स में प्रकाशित 2023 की एक रिव्यू के अनुसार, आयरन आपके पूरे शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाने में मदद करता है, और पर्याप्त आयरन के बिना आपके शरीर के लिए कार्डियो रूटीन को बनाए रखना मुश्किल हो जाता है।