Category: Health

  • अब Rabies का इलाज होगा और भी आसान, AIIMS ने निकाली नई खोज

    अब Rabies का इलाज होगा और भी आसान, AIIMS ने निकाली नई खोज

    सेहत: रेबीज एक ऐसी जानलेवा बीमारी है जो संक्रमित जानवर के काटने से फैलती है। यदि इस बीमारी में व्यक्ति को समय रहते इलाज न मिले तो मौत लगभग तय होती है। सालों से इसका उपचार बाहरी एंटीबॉडी और जटिल इंजेक्शनों पर निर्भर रहा है परंतु अब डॉक्टरों ने एक ऐसा ही रास्ता ढूंढ लिया है जिससे शरीर खुद अपनी एंटीबॉडी बनाने लग जाएगा। इस खोज से न सिर्फ इलाज आसान बनेगा बल्कि गरीब और दूर दराज वाले इलाकों में मरीजों की जान बचाने की उम्मीद भी बढ़ जाएगी।

    ऐसा रहा सफर

    यह एक वायरल बीमारी है जो संक्रमित कुत्ते, बिल्ली, बंदर या बाकी जानवर के काटने या खरोंचने से फैलती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, हर साल दुनिया में करीबन 59 हजार लोग इसकी चपेट में आकर अपनी जान गंवा देते हैं पर इनमें से ज्यादातर लोग एशिया और अफ्रीका के ग्रामीण क्षेत्रों में से ही होते हैं। भारत में भी यह बीमारी बड़ी स्वास्थ्य चुनौती के तौर पर साबित हुई है। इलाज के लिए अब तक बाहरी एंटीबॉडी इंजेक्शन के तौर पर दी जाती थी जो महंगी सीमित मात्रा में उपलब्ध और कई बार इसके साइड इफेक्ट्स भी होते थे। एम्स गोरखपुर के फार्मोलॉजी विभाग के अध्यक्ष प्रो. हीरा भल्ला ने देश के कई नामी एक्सपर्ट्स के साथ मिलकर एक अनोखा अध्ययन किया है। इस शोध में ऐसी तकनीक विकसित हो गई है जिससे मरीज के शरीर में ही एंटीबॉडी बनने लगेगी। ऐसे में अब मरीज को बाहर से एंटीबॉडी इंजेक्शन की जरुरत नहीं पड़ेगी। यह तकनीक शरीर का इम्यून सिस्टम ऐसे ही एक्टिव करेगी। यह रेबीज वायरस के खिलाफ तुरंत प्रतिक्रिया देने और इंफेक्शन को फैलने से रोकेगी। अभी तक रेबीज के गंभीर मामलों में मरीज को रेबीज इम्यूनग्लोब्युलिन दिया जाता था। यह अधिकतर घोड़े के खून से बनता था। इसकी तैयारी महंगी और जटिल होती थी। इसके साथ ही उपलब्धता भी इससे सीमित रहती थी। नई तकनीक के आने से अब इस प्रक्रिया की जरुरत खत्म होगी। इससे इलाज की लागत कम होगी और ग्रामीण व गरीब मरीजों को जल्द और सुलभ इलाज मिल पाएगा। यदि यह तकनीक बड़े पैमाने पर सफल होगी तो रेबीज के इलाज में यह कोशिश एक नया मोड़ साबित होगी। इससे न सिर्फ मरीज की जान बचने की संभावना बढ़ेगी बल्कि समय और संसाधनों की बचत भी होगी। इसके अलावा वैक्सीन की डिलीवरी और भंडारण की दिक्कतें भी कम होगी।
  • पिघलने लगेगी शरीर की चर्बी, रोजाना पिएं पानी का ये गोल

    पिघलने लगेगी शरीर की चर्बी, रोजाना पिएं पानी का ये गोल

    हेल्थः खाने-पीने के स्वाद को बढ़ाने के लिए अक्सर अजवाइन का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन क्या आपने कभी पोषक तत्वों से भरपूर अजवाइन के पानी को पीकर देखा है? बता दें कि अजवाइन के पानी में पाए जाने वाले तत्व आपकी वेट लॉस जर्नी को आसान बनाने में कारगर साबित हो सकते हैं।

    सबसे पहले एक पैन में एक गिलास पानी निकाल लीजिए। अब इस पानी में एक स्पून अजवाइन डालिए और फिर इसे अच्छी तरह से बॉइल कर लीजिए। जब ये पानी उबलकर लगभग आधा रह जाए, तब आप गैस बंद कर सकते हैं। जब अजवाइन का पानी ठंडा हो जाए, तब इसे एक गिलास में छान लीजिए। आपकी वेट लॉस ड्रिंक पीने के लिए तैयार है।

    बूस्ट करे बॉडी का मेटाबॉलिज्म
    अजवाइन के पानी में मौजूद तत्व आपके शरीर के मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करने में कारगर साबित हो सकते हैं। अगर आप हर रोज नियम से अजवाइन का पानी पिएंगे, तो आपके शरीर में जमा जिद्दी चर्बी पिघलने लग जाएगी। बेहतर परिणाम हासिल करने के लिए आपको लगभग 30 दिनों तक सुबह-सुबह खाली पेट इस ड्रिंक को पीकर देखना चाहिए।

    सेहत के लिए फायदेमंद ड्रिंक
    फैट बर्न करने के अलावा अजवाइन का पानी गट हेल्थ को सुधारने में भी मददगार साबित हो सकता है। पेट से जुड़ी समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए इस ड्रिंक को कंज्यूम किया जा सकता है। अजवाइन का पानी गठिया के दर्द से भी राहत दिला सकता है। इम्यूनिटी को बूस्ट करने के लिए भी पोषक तत्वों से भरपूर अजवाइन के पानी को डाइट प्लान का हिस्सा बनाया जा सकता है।

  • ये लक्षण दिखे तो हो जाए सावधान! हो सकते है vitamin-D की कमी के संकेत

    ये लक्षण दिखे तो हो जाए सावधान! हो सकते है vitamin-D की कमी के संकेत

    हेल्थः शरीर में किसी भी जरूरी पोषक तत्व की कमी, सेहत से जुड़ी कई समस्याओं का कारण बन सकती है। यही वजह है कि डॉक्टर्स हेल्दी और बैलेंस्ड डाइट प्लान को फॉलो करने की सलाह देते हैं। विटामिन डी की कमी न केवल आपकी फिजिकल हेल्थ पर बल्कि आपकी मेंटल हेल्थ पर भी नेगेटिव असर डाल सकती है। इस विटामिन की कमी की वजह से शरीर के किस अंग पर सबसे ज्यादा बुरा प्रभाव पड़ सकता है।

    विटामिन डी की कमी को अक्सर बोन हेल्थ के साथ जोड़कर देखा जाता है। अगर आपके शरीर में विटामिन डी की कमी रहने लगेगी, तो आपकी हड्डियां कमजोर और नाजुक होने लगेंगी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस विटामिन की कमी के कारण हड्डियों में दर्द और फ्रैक्चर का खतरा भी कई गुना बढ़ सकता है। विटामिन डी की कमी से बोन हेल्थ पर सबसे ज्यादा असर पड़ता है।

    डैमेज हो सकती है मांसपेशियों की सेहत
    विटामिन डी की कमी हड्डियों के साथ-साथ मांसपेशियों की सेहत को भी डैमेज कर सकती है। लंबे समय तक शरीर में विटामिन डी की कमी रहने से मांसपेशियों में दर्द, कमजोरी और ऐंठन की समस्या पैदा हो सकती है। अगर आप इस तरह की समस्याओं को पैदा होने से रोकना चाहते हैं, तो आपको विटामिन डी की कमी को जल्द से जल्द दूर कर लेना चाहिए।

    विटामिन डी की कमी के दौरान हड्डियों और मांसपेशियों में दिखाई देने वाले इन लक्षणों के अलावा भी कुछ कॉमन लक्षणों के बारे में जानकारी हासिल करते हैं। थकान और कमजोरी की समस्या विटामिन डी की कमी का संकेत साबित हो सकती है। इसके अलावा इस विटामिन की कमी की वजह से हेयर फॉल और मूड स्विंग्स की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

  • क्या आप चाहते हैं न हो Acidity तो 15 दिन छोड़ें चाय, शरीर में होंगे ये बदलाव

    क्या आप चाहते हैं न हो Acidity तो 15 दिन छोड़ें चाय, शरीर में होंगे ये बदलाव

    सेहत: सुबह की शुरुआत लोग एक कप चाय के साथ करते हैं। कुछ लोग दिन में 4 कप चाय पीते हैं परंतु आपने शायद कभी यह न सोचा होगा कि यदि आप सिर्फ 15 दिनोें के लिए चाय छोड़ दें तो आपके शरीर पर कैसा असर होगा? यह आपको सुनने में थोड़ा मुश्किल लगे पर आपको बता दें कि यदि आप इसके फायदे जानकर इस चैलेंज को अपनाएंगे तो कई फायदे आपको शरीर में दिखेंगे। एक्सपर्ट्स के अनुसार, चाय छोड़ना शरीर के लिए एक तरह का डिटॉक्स होता है इससे आपको शरीर में कई तरह के पॉजिटिव बदलाव देखने को मिलेंगे।

    डिहाइड्रेशन होगी दूर

    कैफीन एक डाईयूरेटिक होता है। ऐसे में यह शरीर में से पानी को तेजी से बाहर निकालता है। यदि आप ज्यादा मात्रा में चाय पिएंगे तो आपके शरीर में डिहाइड्रेशन होगी। इससे आपको थकान और स्किन पर ड्राईनेस हो सकती है। वहीं यदि आप चाय छोड़ देंगे तो शरीर में पानी का संतुलन बना रहेगा और त्वचा भी ग्लोइंग नजर आएगी।

    एनर्जी लेवल रहेगा ठीक

    चाय में पाया जाने वाला कैफिन से मिलने वाली एनर्जी अस्थायी होती है। इसके बाद थकान और सुस्ती महसूस होती है परंतु 15 दिन तक यदि आप चाय छोड़ देंगे तो शरीर आपका बिना कैफीन के भी पूरी एनर्जी पैदा कर पाएगा। इससे शरीर दिनभर एक्टिव रहेगा।

    नींद की क्वालिटी होगी अच्छी

    चाय में कैफीन पाया जाता है। यह कैफीन आपकी नींद क्वालिटी पर असर डालता है। यदि आप लगातार चाय पिएंगे तो नींद देर से आएगी। नींद गहरी नहीं होती परंतु यदि आप 15 दिनों तक चाय छोड़ देंगे तो कैफीन का असर कम होगा और नींद अच्छी आने लगेगी।

    स्किन और बालों में भी आएगा ग्लो

    चाय में टैनिन और कैफीन पाया जाता है। यह शरीर में से मिनरल्स और विटामिन्स को कम करेंगे। इससे आपकी स्किन डल और बाल कमजोर होंगे परंतु यदि आप चाय छोड़ देंगे तो शरीर को पोषण अच्छे से मिलेगा और स्किन नैचुरली ग्लो बनेगी।

    पाचन बनेगा मजबूत

    ज्यादा चाय पीने से एसिडिटी, गैस और पेट फूलना जैसी दिक्कतें होती है परंतु वहीं यदि आप चाय छोड़ देंगे तो आपके पेट का pH बैलेंस सुधरेगा और पाचन बेहतर होगा। इससे आपको खाना भी आसानी से पचेगा।

    ऐसे छोड़ें चाय की आदत

    . अगर आप चाय छोड़ना चाहते हैं तो सुबह की चाय की जगह कोई हर्बल टी, नींबू पानी या फिर ग्रीन स्मूदी पी सकते हैं। . मीठा और प्रोसेस्ड फूड कम खाएं ताकि शरीर जल्दी डिटॉक्स हो । . कैफीन की कमी के कारण होने वाला सिरदर्द दूर करने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।      
  • Teenagers को हार्ट अटैक आने से पहले दिखते हैं ऐसे Symptoms, न करें Ignore

    Teenagers को हार्ट अटैक आने से पहले दिखते हैं ऐसे Symptoms, न करें Ignore

    सेहत: हार्ट अटैक यहां पहले ज्यादातर 60 वर्ष के बाद होता था अब वहीं यह बीमारी टीनएजर्स में युवकों को जकड़ने लगी है। खराब डाइट, कम एक्सरसाइज, स्मोकिंग, ड्रग्स और ज्यादा स्ट्रेस जैसी दिक्कतें दिल को नुकसान पहुंचा सकती है इससे कम उम्र में भी दिल संबंधी दिक्कतें हो सकती हैं। एक्सपर्ट्स की मानें तो टीनएजर्स में हार्ट की बीमारियों का जोखिम काफी हद तक बढ़ा है जैसे कि इस उम्र में दिल संबंधी दिक्कतों की उम्मीद ही कम हो जाती है ऐसे में शुरुआती लक्षणों को अक्सर सभी नजरअंदाज कर देते हैं। इसको अनदेखा करना इलाज में देरी का कारण भी बन सकता है इससे शुरुआती में स्थिति गंभीर हो सकती है। इस जोखिम को कम करने के लिए जागरुकता और स्वस्थ आदतों को अपनाएं। टीनएजर्स अक्सर ऐसे लक्षण इग्नोर कर देते हैं जिससे बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए आपको बताते हैं कि टीनएजर्स में अटैक के लक्षण कौन से दिखते हैं।

    आम लक्षण

    . हार्ट अटैक के लक्षण एडल्ट्स में थोड़े अलग-अलग हो सकती हैं क्योंकि इन लक्षणों को पहचानना बहुत जरुरी है। . बिना किसी वजह के यदि आप सांस फूल रही है या आपको लग रहा है कि सांस पूरी नहीं आ रही तो यह अचानक हो सकता है। यह दिक्कत समय के साथ-साथ और भी बिगड़ सकती है। . बिना किसी वजह के बहुत ज्यादा थकान और कमजोरी भी आपके लिए दिक्कत खड़ी कर सकती है। यह लक्षण डेली एक्टिविटीज में भी बाधा डालेगा ऐसे में आपको इसको गंभीरता से लें। .कुछ टीनजर्स को हार्ट अटैक के समय अचानक उल्टी या ठंडा पसीना आने लगता है इसको अक्सर सभी फ्लू समझ लेते हैं। ऐसे में टीनएजर्स को इन लक्षणों को पहचानना चाहिए। . यदि आपको अचानक चक्कर आएं या बेहोशी जैसा महसूस हो या इसके साथ तेज या अनियमित दिल की धड़कन हो तो यह भी हार्ट अटैक का ही लक्षण हो सकता है। . यह सबसे आम लक्षण है। सीने के बीच में प्रेशर, टाइट फीलिंग या भारीपन महसूस होना भी टीनएजर्स में हार्ट अटैक का कॉमन लक्षण है। यह कुछ मिनटों तक रहता है। ऐसे में इसको नजरअंदाज न करें भले ही यह हल्का या रुक-रुक कर आ रहा हो। . चेस्ट पेन वैसे तो बाएं हाथ, पीठ, गर्दन और जबड़े तक फैलता है और लोग इसको मसल पेन या इनडाइजेशन समझ लेते हैं। . कुछ टीनएजर्स को हार्ट अटैक के समय अचानक उल्टी या ठंडा पसीना भी आता है जिसको लोग अक्सर फ्लू मान लेते हैं।

    ये बात भी समझें

    टीनएजर्स और उनके पैरेंट्स अक्सर कुछ लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं। चिंता, मांसपेशियों में खिंचाव जैसी दिक्कतों को कम गंभीर लेते हैं। ऐसे शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज यदि आप करते हैं तो इलाज में देरी होगी और गंभीर हार्ट डैमेज या अचानक कार्डियक अरेस्ट का खतरा बढ़ जाएगा। यदि इनमें से कोई भी लक्षण दिखे खासतौर पर सीने में दर्द या सांस लेने में दिक्कत तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। सही समय पर इलाज मिलने से दिक्कत कम हो सकती है।
  • ये Foods बढ़ रहे Weight को करेंगे कम, आज ही Diet में शामिल करें

    ये Foods बढ़ रहे Weight को करेंगे कम, आज ही Diet में शामिल करें

    हेल्थः मोटापा कई बीमारियों का कारण बनता जा रहा है। ऐसे में हेल्दी और खुशहाल जीवन के लिए वजन कम करना बेहद जरूरी हो जाता है। वजन कम करने में सबसे बड़ा रोल आपकी डाइट और लाइफस्टाइल का होता है। ऐसे में अगर आप भी अपने बढ़े हुए वजन को कम करना चाहते हैं तो आपको अपनी डाइट में ऐसी चीजें शामिल करनी चाहिए जो न सिर्फ हेल्दी हों, बल्कि पेट को भी लंबे समय तक भरा हुआ रखें।

    अवोकाडोः कैलोरी ज्यादा होने के बावजूद, अवोकाडो में हेल्दी फैट और फाइबर भरपूर मात्रा में होते हैं। ये हेल्दी फैट लंबे समय तक पेट को भरा रखते हैं जिससे अनहेल्दी चीजें खाने का मन नहीं करता।

    बेरीजः ब्लूबेरी, स्ट्रॉबेरी और रास्पबेरी जैसे फलों में नेचुरल शुगर होती है। इनमें कैलोरी बहुत कम होती है और फाइबर ज्यादा होता है। इन्हें खाने के बाद मीठे की क्रेविंग कम होती है और पेट भी लंबे समय तक भरा रहता है, जिससे वजन कम करने में मदद मिलती है।

    ओट्सः ओट्स में सॉल्युबल फाइबर भरपूर होता है जो पानी सोखकर पेट में जेल जैसा बन जाता है। इससे पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है और बार-बार खाने का मन नहीं करता।

    बीन्स और दालेंः बीन्स, दालें और चने प्रोटीन और फाइबर के बेहतरीन सोर्स हैं। ये धीरे-धीरे पचते हैं, जिससे पेट लंबे समय तक भरा रहता है और बार-बार भूख नहीं लगती। साथ ही यह ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में भी मदद करते हैं, जिससे ज्यादा खाने का मन नहीं करता।

    अंडेः अंडे हाई-क्वालिटी प्रोटीन से भरपूर होते हैं, जो लंबे समय तक भूख नहीं लगने देते। अगर आप सुबह नाश्ते में अंडे खाते हैं तो लंबे समय तक पेट भरा रहता है और शरीर में एनर्जी बनी रहती है।

    हरी सब्जियांः पालक, केल और दूसरी हरी पत्तेदार सब्जियों में कैलोरी बहुत कम होती हैं, लेकिन इनमें फाइबर, विटामिन और मिनरल्स भरपूर होते हैं। इन्हें खाने से पेट भी भरा रहता है और शरीर को जरूरी पोषण भी मिलता है।

  • Threading करवाते समय आपकी ये गलती बनेगी गंभीर बीमारी का कारण

    Threading करवाते समय आपकी ये गलती बनेगी गंभीर बीमारी का कारण

    ब्यूटी: आजकल सोशल मीडिया पर कुछ ऐसे वीडियो वायरल हो रहे हैं जिसके बाद महिलाएं थ्रेडिंग करवाने से डर रही हैं। वायरल हुए इस वीडियो में यह बताया गया है कि महिला पार्लर में थ्रेडिंग करवाने के लिए गई और कुछ दिन बाद उसको थकान, मतली और आंखों में पीलापन जैसी दिक्कतें होने लग गई। इसके बाद जांच में सामने आया है कि उस महिला का लिवर फेल हो रहा है। इसका कारण दवा या फिर शराब नहीं बल्कि पार्लर में थ्रेडिंग है। इस वीडियो को देखने के बाद कई लोगों के सवाल उठ रहे हैं कि क्या थ्रेडिंग के कारण लिवर फेल जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।

    धागा बन सकता है दिक्कत

    थ्रेडिंग वैसे तो सुरक्षित और सामान्य प्रक्रिया ही मानी जाती है परंतु यदि इसमें इस्तेमाल किए जाने वाले धागे और बाकी इक्विपमेंट साफ न हो तो इससे स्किन पर छोटे-छोटे कट भी लग सकते हैं। इन्हीं कट के जरिए यदि वायरस शरीर में प्रवेश कर जाए तो यह इंफेक्शन फैल सकता है। खासतौर पर हेपेटाइटिस बी और सी जैसे वायरस संक्रमित खून के जरिए फैल सकता है।

    लिवर तक पहुंचेगा हेपेटाइटिस

    यदि थ्रेडिंग के दौरान हुए इंफेक्शन का इलाज न हो तो यह धीरे-धीरे इसके कारण लिवर को भी नुकसान हो सकता है। लंबे समय तक बिना इलाज के लिए इंफेक्शन सिरोसिस या लिवर फेलियर जैसी स्थिति भी आ सकती है। ऐसे बीमारी और इंफेक्शन से बचने के लिए थ्रेडिंग हमेशा पार्लर में ही करवाएं जहां साफ-सफाई का पूरा ध्यान रख जाता है। उस पार्लर में नया और डिस्पोजेबल धागा भी इस्तेमाल हो। थ्रेडिंग से पहले और बाद में स्किन को अच्छे से पूरी तरह सैनिटाइज करें और इस बात का ध्यान रखें कि ब्यूटी थैरेपिस्ट के हाथ साफ हों। यदि स्किन पर पहले से कोई कट दाने या इंफेक्शन है तो थ्रेडिंग करवाने से बचें।

    बिल्कुल भी न करें लापरवाही

    जो लोग नियमित तौर पर थ्रेडिंग करवाते है उन्हें यह समझना जरुरी है कि थोड़ी सी असावधानी बड़ी बीमारी का कारण बनेगी। ऐसे में साफ सुथरे पार्लर में ही थ्रेडिंग करवाएं। साफ-सफाई का ध्यान रखें ताकि एक सामान्य सी ब्यूटी प्रक्रिया आपकी सेहत पर भारी न पड़े।  
  • गलत Blood Group का खून चढ़ाने से होगी शरीर को ये दिक्कतें, जानें

    गलत Blood Group का खून चढ़ाने से होगी शरीर को ये दिक्कतें, जानें

    सेहत: इंसान का खून उसकी जिंदगी का सबसे जरुरी धड़कन होता है परंतु यदि वही खून किसी ओर का हो और आपके शरीर के साथ मेल भी न खाए तो क्या होगा। अस्पताल में जब किसी को खून की जरुरत होती है तो डॉक्टर उसकी हालत को ठीक करने के लिए ट्रांसफ्यूजन यानी खून चढ़ाने की प्रक्रिया अपनाई जाती है। यह प्रक्रिया सुनने में भले ही सामान्य लगे लेकिन उस दौरान बहुत ही सेंसिटिव होती है जब मरीज को उसका मेल न खाने वाला ब्लड ग्रूप चढ़ा दिया जाए। एक्सपर्ट्स के अनुसार, जब किसी व्यक्ति को ऐसा खून चढ़ जाए जो उसके ब्लड ग्रूप से मेल न खाए तो इसका असर शरीर की इम्यून सिस्टम पर होता है। इस स्थिति को मेडिकल भाषा में Acute Hemolytic Transfusion Reaction कहते हैं। इसमें शरीर उस नए खून को नष्ट करने के लिए एंटी बॉडीज बनाता है इससे खून की कोशिकाएं फटने लग जाती हैं और शरीर के अंगों पर गहरा असर होता है।

    दिखते हैं ये लक्षण

    . तेज बुखार और कंपकंपी . पेशाब का रंग लाल या गहरा होना . ब्लड प्रेशर गिरना . शरीर में सूजन या एलर्जी जैसे लक्षण . सीने या कमर में अचानक दर्द . सांस लेने में दिक्कत इन लक्षणों को यदि समय रहते न पहचाना जाए तो किडनी फेलियर या फिर व्यक्ति की मौत भी हो सकती है।

    इस बात का रखें ध्यान

    वैसे तो अस्पतालों और ब्लड बैंकों में खून चढ़ाने से पहले ब्लड टाइपिंग जैसी प्रक्रियाएं होती है परंतु यदि किसी से लापरवाही हो जाए लेबलिंग में गलती हो या इमरजेंसी में बिना जांच के खून चढ़ा दिया जाए तो यह जानलेवा भी साबित हो सकती है। गलत ब्लड ग्रूप का खून चढ़ाना किसी छोटी लापरवाही का बड़ा परिणाम भी होगा। ऐसी स्थिति कुछ ही मिनटों में शरीर के अंदर दिक्कत पैदा कर सकती है और यदि समय रहते इलाज न मिले तो जान भी जा सकती है। ऐसे में यह जरुरी है कि जब भी आपको खून चढ़ाया जाए तो ऐसी प्रक्रिया को हल्के में न लें।  
  • Gym-Heavy Exercise नहीं ऐसे भी कर सकते हैं वेट लॉस, जानें Secret Diet

    Gym-Heavy Exercise नहीं ऐसे भी कर सकते हैं वेट लॉस, जानें Secret Diet

    सेहत: एक बार अगर वजन बढ़ जाए तो कम करना मुश्किल हो जाता है। खासतौर पर यदि आप ओवरवेट हो तब तो और भी समस्या खड़ी हो सकती है। कभी शरीर साथ नहीं देता तो कभी भूख पर कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है। कुछ ऐसा ही स्निग्धा बथुआ नाम की महिला के साथ हुआ परंतु उन्होंने डिसिप्लिन में रहकर अपना 35 किलो वजन कम कर लिया। स्निग्धा ने कहा है कि उन्होंने अपना वजन कम करने के लिए कई तरीके भी अपनाए और अंत में वही तरीका चुना जो उनके लिए सबसे सही था। तो चलिए आपको आज इस आर्टिकल के जरिए बताते हैं कि स्निग्धा ने आखिर कैसे अपना वजन कम किया।

    एक्सरसाइज

    वजन कम करने के लिए सबसे ज्यादा जरुरी है एक्सरसाइज परंतु कौन सी एक्सरसाइज असर करेगी यह हर व्यक्ति पर अलग-अलग तरह से डिपेंड करता है। स्निग्धा ने बताया कि उन्होंने कई तरह की एक्सरसाइज की उन्होंने एक एक्सरसाइज को 3-4 महीने किया और फिर दूसरी ट्राई की।

    खुद से भी प्यार है जरुरी

    उनका मानना है कि आपका वजन अभी काफी ज्यादा हो सकता है पर इसका मतलब यह नहीं है कि आप अपने शरीर से नफरत करें। खुद को वैसे ही स्वीकार करें जैसे कि आप हैं। जबतक आप खुद से प्यार नहीं करेंगे तब तक आप वजन कम करने के लिए स्ट्रीक्ट रुटीन को फॉलो नहीं कर पाएंगे।

    अच्छी डाइट लें

    वजन कम करने के लिए सबसे जरुरी चीज है सही डाइट। इसके लिए शुरुआत आप सब्जियां, फल, साबुत अनाज और हेल्दी फैट के साथ करें। घर का बना हुआ खाना खाएं स्निग्धा कहती है कि वजन को कम करने के लिए खाने को लेकर थोड़ा स्ट्रिक्ट रहें और रोज का खाना सही समय पर ही खाएं।

    पूरी नींद लें

    वजन घटाने के लिए सबसे जरुरी होती है नींद। ऐसे में आप नींद को नजरअंदाज बिल्कुल न करें। हर दिन 7 से 9 घंटे की नींद जरुरी लें। स्निग्धा का कहना है कि यदि आप समय पर नहीं सोते हैं तो शरीर को आराम नहीं मिलेगा। इससे वजन कम करना मुश्किल हो जाएगा।

    रोज अपने शरीर में हो रहे बदलावों को देखें

    वजन को कम करने के लिए ट्रैक करना बहुत जरुरी है ऐसे में स्निग्धा का कहना है कि उन्होंने रोज फोटो खींचकर अपने शरीर में होने वाले बदलाव को देखा। इससे उनको मोटिवेशन मिला। स्निगधा की तरह आप भी इन टिप्स को फॉलो करके अपना वजन कम कर सकते हैं।
  • ICMR Study: Desk Job करने वालों को Fatty Liver का ज्यादा खतरा

    ICMR Study: Desk Job करने वालों को Fatty Liver का ज्यादा खतरा

    नई दिल्ली: भारत में फैटी लिवर धीरे-धीरे फैल रहा है। चौंकाने वाली बात यहां पर यह है कि सबसे ज्यादा इस बीमारी की चपेट में देश के युवा हैं। ऐसा हम नहीं बल्कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने संसद में हैरान करने वाला खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की एक स्टडी के अनुसार हैदराबाद में आईटी सैक्टर में काम करने वाले 84% से ज्यादा वर्कर्स फैटी लिवर की परेशानी से जूझ रहे हैं। इस खुलासे ने सभी को चौंका दिया हैं क्योंकि आईटी सेक्टर में ज्यादातर 25 से 45 साल की उम्र के लोग ही काम कर रहे हैं। तो चलिए आपको बताते हैं कि फैटी लिवर कितनी गंभीर बीमारी है और आखिर ये डेस्क जॉब या युवाओं को ही आखिर अपनी चपेट में ले रही है।

    आखिर क्या होता है फैटी लिवर?

    अगर आपने फैटी लिवर का नाम पहली बार सुना है तो आपको बता दें कि जब हमारे शरीर में जरुरत से ज्यादा फैटी लिवर जमा हो जाए तो उसको फैटी लिवर कहते हैं। इस बीमारी की सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि शुरुआत में इस बीमारी का कोई लक्षण नहीं नजर आता पर समय के साथ ये धीरे-धीरे आपके लिवर को डैमेज कर देती है और सूजन सिरोसिस जैसी बीमारियों का कारण बनेगी। फैटी लिवर को स्टीटोसिस भी कहते हैं और ये दो तरह का होता है।

    अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (Alcoholic Fatty Liver Disease)

    अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज उन लोगों को ज्यादा होती है जो लिमिट से ज्यादा शराब पीते हैं।

    नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (Non Alcoholic Fatty Liver Disease) (NAFLD)

    ऐसा नहीं होता कि सिर्फ पानी पीने से ही फैटी लिवर हो। मोटापा, डायबिटीज और हाई कोलेस्ट्रॉल के कारण भी फैटी लिवर होता है। इसको नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज कहते हैं। आपको बता दें कि अब शराब पिए बिना लिवर से जुड़ी जो बीमारियां होती हैं वो सब अब एनएएफएलडी (NAFLD) के अंदर आती है।

    आने वाले टाइम में जनरेशन को होगा नुकसान

    केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने संसद में यह बताया है कि सरकार की ओर से मेटाबोलिक डिसफंक्शन से जुड़ी फैटी लिवर डिजीज को लेकर जागरुकता बढ़ाने और हेल्दी लाइफस्टाइल को अपनाने के लिए एक ऑपरेशनल गाइडलाइन भी जारी हुई है। जगत प्रकाश नड्डा की ओर से सभी राज्यों को जांच के निर्देश भी दिए गए हैं। इसके साथ ही उन्होंने एक चेतावनी भी दी है। उन्होंने कहा कि ये एक बड़ा स्वास्थ्य खतरे की ओर इशारा करता है। यदि समय रहते लाइफस्टाइल में बदलाव नहीं हुए तो आने वाले समय में देश के युवा जनरेशन की हेल्थ को बड़ा नुकसान पहुंचेगा।

    फास्ट फूड ने बिगाड़ी आदत

    सिर्फ शराब पीने या डायबिटीज और हाई कोलेस्ट्रॉल ही फैटी लिवर का कारण नहीं है। आईसीएमआर ने भी एक रिसर्च की थी। इसके अनुसार, हफ्ते में फास्ट फूड खाने वाले लोगों में 76.3% लोगों में फैटी मिला है। जयपुर की तीन तहसीलों में हुई रिसर्च में 37.2 फीसदी लोगों में फैटी लिवर पाया गया है और इसमें महिलाओं के मुकाबले में पुरुषों की संख्या ज्यादा पाई गई है।

    इस वजह से आईटी वर्कर्स फैटी लिवर से ग्रस्त

    . ऑफिस के बिजी शैड्यूल में जल्दी-जल्दी फास्ट फूड, पैकेज्ड स्नैक्स और कोल्ड ड्रिंक रोज की डाइट का हिस्सा बन गई है। . वहीं कुछ लोग स्ट्रेस को कम करने के लिए वीकेंड या फिर रोज ही शराब पी लेते हैं और कुछ लोग स्ट्रेस को मीठी चीजें खाकर स्लो करते हैं। इन दोनों के ज्यादा सेवन से लिवर पर असर पड़ता है। . आईटी वर्कर्स डेली 8-10 घंटे कंप्यूटर के सामने बैठे रहते हैं। इससे उनकी फिजिकल एक्टिविटी कम हो जाती है। . काम का दबाव, रात की शिफ्ट और ज्यादा तनाव से भी नींद पर असर पड़ता है जिससे शरीर का मेटाबॉल्जिम बिगड़ जाता है।

    कारण

    एक्सपर्ट्स के अनुसार, शराब न पीने के कारण भी लोग फैटी लिवर का शिकार हो रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण है अनहेल्दी लाइफस्टाइल और मोटापा।

    लक्षण

    वैसे तो फैटी लिवर के लक्षण नजर नहीं आते परंतु जब लक्षण दिखते हैं तो हालत बिगड़ जाते हैं। जैसे कि भूख में कमी, पीलिया होना, डॉर्क कलर का पेशाब आना, पेट और पैरों में सूजन होना ।

    ऐसे करें बचाव

    . अपने लाइफस्टाइल हेल्दी रखें। . नींद पूरी लें। . लिवर फंक्शन टेस्ट करवाएं। . हाइड्रेटेड रहें और स्ट्रेस से दूर रहें। . शराब न पिएं। . एक्सरसाइज जरुर करें।