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  • Africa में बढ़ते Ebola केसों के बीच भारत की हुई Entry, वैक्सीन बनाने में जुटा भारत का Serum Institute

    Africa में बढ़ते Ebola केसों के बीच भारत की हुई Entry, वैक्सीन बनाने में जुटा भारत का Serum Institute

    नई दिल्ली: अफ्रीका एक बार फिर इबोला वायरस के बड़े खतरे का सामना कर रहा है। इस बार चिंता की कारण इबोला का बुंडीबुग्यो स्ट्रेन है जिसके लिए अभी तक कोई मंजूर वैक्सीन मौजूद नहीं है। कांगों लोकतांत्रिक गणराज्य और युगांडा में तेजी से बढ़ते मामलों ने दुनिया भर की स्वास्थ्य एजेंसियों को अलर्ट कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, सैंकड़ों संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं और कई लोगों की मौत भी हुई है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि यह वायरस अब घनी आबादी वाले इलाकों तक पहुंच रहा है जिससे दूसरे देशों में फैलने का खतरा भी बढ़ गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और अफ्रीका सीडीसी ने इस स्थिति को गंभीर स्वास्थ्य आपातकाल माना है। अभी तक इबोला के जिस जेरे स्ट्रेन के लिए वैक्सीन मौजूद है। वह बुंडीबुग्यो स्ट्रेन पर कितना असर करेगी। यह साफ नहीं है। इसी कारण दुनिया अब नई वैक्सीन तैयारी करने में दौड़ में जुट गई है।

    वैक्सीन बनाएगा भारत

    इस मुश्किल समय में भारत की बड़ी वैक्सीन कंपनी Serum Institute Of India अहम भूमिका निभाने जा रही है। पुणे स्थित यह कंपनी ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और CEPI के साथ मिलकर नई वैक्सीन बनाने की तैयारी कर रही है। यह वैक्सीन ChAdOx प्लेटफॉर्म पर आधारित होगी जिसका इस्तेमाल कोविड-19 के समय कोविडशील्ड वैक्सीन में भी किया गया था। सीरम इंस्टीट्यूट का कहना है कि उसके पास पहले से ऐसी तकनीक और मशीनें मौजूद हैं। इनकी मदद से बहुत कम समय में वैक्सीन की खुराक तैयारी की जा सकती है। कोविड महामारी के दौरान भारत ने जिस तरह दुनिया के बड़ी मात्रा में वैक्सीन दी थी। उसी तरह अब इबोला संकट में भी भारत एक भरोसेमंद साथी बनकर सामने आ सकता है। साथ ही यह भारत की मेडिकल और बायोटेक ताकत को भी दिखाता है।

    वैज्ञानिकों के सामने समय और सुरक्षी की चुनौती

    फिलहाल वैज्ञानिकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती समय की है। बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के लिए दो वैक्सीन उम्मीदवारों पर काम हो रहा है। पहला Rvsv तकनीक पर आधारित है जो पहले से मौजूद Ervebo वैक्सीन जैसी तकनीक का इस्तेमाल करता है लेकिन इसकी समस्या यह है कि इसकी खुराक अभी उपलब्ध नहीं है और इसे तैयार करने में कई महीने में लग सकते हैं। दूसरी ओर ChAdOx प्लेटफॉर्म की खासियत इसकी तेज उत्पादन क्षमता है क्योंकि कोविड के समय इसका बड़े स्तर पर इस्तेमाल हो चुका है इसलिए इसकी फैक्ट्री व्यवस्था पहले से तैयार है हालांकि इसकी भी एक कमजोरी है। अभी तक इस वैक्सीन का जानवरों या इंसानों पर बुंडीबुग्यो वायरस के खिलाफ पूरा परीक्षण नहीं हुआ है। ऐसे में स्वास्थ्य एजेंसियों को यह फैसला बहुत सोच-समझकर लेना होगा कि तेजी को प्राथमिकता दी जाए या लंबे परीक्षण का इंतजार किया जाए। यह फैसला आने वाले समय में लाखों लोगों की सुरक्षा तय कर सकता है।

    दुनिया की उम्मीद बना भारत

    अफ्रीका में फैल रहा यह इबोला संकट पूरी दुनिया के लिए चेतावनी है कि महामारी कभी भी वापिस आ सकती है। इसके साथ ही संघर्ष और गरीबी से जूझ रहे इलाकों में बीमारी को रोकना और भी मुश्किल हो जाता है। ऐसे समय में भारत की एंट्री उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आई है। अगर सीरम इंस्टीट्यूट और उसके सहयोगी जल्दी सुरक्षित और असरदार वैक्सीन तैयार करने में सफल होते हैं। इससे हजारों लोगों की जान बचाई जा सकती है। साथ ही यह साबित होगा कि सिर्फ अपने लिए नहीं बल्कि पूरी दुनिया के स्वास्थ्य संकट में मदद करने की क्षमता रखता है। आने वाले कुछ महीने बहुत अहम होंगे क्योंकि यह तय करेंगे कि दुनिया इस नए इबोला खतरे को कितनी तेजी से रोक पाती हैं।    
  • बिना खाना छोड़े भी फिट रह सकते हैं आप, Doctor ने बताई खास ट्रिक

    बिना खाना छोड़े भी फिट रह सकते हैं आप, Doctor ने बताई खास ट्रिक

    सेहत: आजकल फिट रहने और वजन कम करने के लिए लोग सबसे पहले अपनी पसंदीदा चीजें खाना छोड़ने लगते हैं। कई लोग अचानक सख्त डाइट शुरु कर देते हैं लेकिन लंबे समय तक उसे फॉलो करना आसान नहीं होता है। ऐसे में कई एक्सपर्ट्स कुछ आसान तरीके बताते हैं जिन्हें वे फाइबर डिस्प्लेसमेंट नाम दिया है। खास बात यह है कि इसमें आपको अपनी पूरी डाइट बदलने की जरुरत नहीं पड़ती।

    रोज खाए जाने वाले खाने में ही कुछ बदलाव करके फाइबर बढ़ाया जा सकता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, हेेल्दी रहने के लिए हर बार नई और अलग हेल्दी डाइट अपनाना जरुरी नहीं है। अगर लोग अपने रोजाना के खाने में थोड़ी-थोड़ी मात्रा में फाइबर वाली चीज शामिल करें तो इससे शरीर को काफी फायदा मिल सकता है।

    उनका कहना है कि फाइबर डिस्प्लेसमेंट का मतलब है कि आप वहीं खाना जाए जो पहले से खाते आ रहे हैं लेकिन उसमें फाइबर बढ़ाने वाले छोटे बदलाव कर लें। डॉक्टरों के अनुसार, यदि आप सुबह स्मूदी पीते हैं तो उसमें थोड़ी पालक मिलाई जा सकती है। इससे स्वाद में ज्यादा फर्क नहीं पड़ता लेकिन शरीर को एक्स्ट्रा फाइबर और माइक्रोन्यूट्रिएंट्स मिल जाते हैं।

    इसी तरह सफेद बींस या मसूर को पकाकर पास्ता, करी या सूप में मिलाया जा सकता है। इससे खाने की टेक्सचर भी बनी रहती है। फाइबर की मात्रा बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि सिर्फ एक चौथाई सफेद बींस करीबन 4 ग्राम फाइबर बढ़ा सकती है। वहीं दही और उसमें दो चम्मच पिसा हुआ अलसी का बीज मिलाने से 4-6 ग्राम तक एक्स्ट्रा फाइबर मिल सकता है।

    इस तरह बिना अलग डाइट अपने दिन के पहले हिस्से में ही शरीर को लगभग 10 ग्राम फाइबर मिल सकता है। एक्सपर्ट्स बताते हैं कि ज्यादा फाइबर खाना ही काफी नहीं है बल्कि अलग-अलग तरह के फाइबर लेना भी जरुरी है।

    पानक, बींस और अलसी जैसे खाद्य पदार्थ शरीर में अलग-अलग तरह के बैक्टीरिया को सपोर्ट करते हैं। इससे आंतों की सेहत बेहतर रहती है। पाचन तंत्र मजबूत होता है। इसे लेकर कुछ स्टडी भी बताती है कि फाइबर की विविधता और आंतों में मौजूद माइक्रोबायोम को बेहतर बनाने में मदद करती है। यही कारण है कि सिर्फ एक तय संख्या में फाइबर लेने पर ध्यान देने की बजाय अलग-अलग स्त्रोत से फाइबर लेना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है।

    डॉक्टरों के अनुसार, रोजर्मरा के खाने में बदलाव किए जा सकते हैं जैसे स्क्रैंबल एग्स में फ्रोजन मटर मिलाना, खाना में मैश किया हुआ एवाकोडा जोड़ना या सफेद चावल की मात्रा कम करके उसमें ब्राउन राइस मिलना। यह बदलाव देखने में छोटे लग सकते हैं लेकिन लंबे समय में शरीर की सेहत पर अच्छा असर डाल सकते हैं।

     

  • Health Tips: गर्मी में बार-बार ORS पीना सही है या नुकसानदायक, जानें एक्सपर्ट की राय

    Health Tips: गर्मी में बार-बार ORS पीना सही है या नुकसानदायक, जानें एक्सपर्ट की राय

    Health Tips: गर्मियों का मौसम आते ही शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है। तेज धूप, पसीना और गर्म हवाओं की वजह से लोग खुद को हाइड्रेट रखने के लिए ORS पीना शुरू कर देते हैं। कई लोग इसे पानी की बोतल में मिलाकर दिनभर पीते रहते हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या हर किसी को रोज ORS पीना चाहिए? और इसे कितनी मात्रा में लेना सही होता है? आइए आसान भाषा में समझते हैं। ORS  क्या होता है? ORS यानी ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन। इसमें नमक, शुगर, सोडियम, पोटैशियम और ग्लूकोज जैसी चीजें होती हैं, जो शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी को पूरा करने में मदद करती हैं। गर्मियों में ORS पीने के फायदे डॉक्टरों के मुताबिक गर्मियों में ORS पीना शरीर के लिए काफी फायदेमंद हो सकता है। खासकर तब, जब शरीर में पानी की कमी हो रही हो। ORS के मुख्य फायदे
    • शरीर में पानी की कमी पूरी करता है
    • इलेक्ट्रोलाइट्स को बैलेंस रखने में मदद करता है
    • कमजोरी और थकान कम करता है
    • ज्यादा पसीना आने पर शरीर को जल्दी रिकवर करता है
    • डिहाइड्रेशन से बचाने में मदद करता है
    किन लोगों को ORS जरूर पीना चाहिए? कुछ लोगों के लिए ORS बहुत जरूरी हो सकता है, खासकर गर्मियों में। इन लोगों को फायदा मिलता है
    • जो लोग लंबे समय तक धूप में काम करते हैं
    • मजदूरी या फील्ड वर्क करने वाले लोग
    • बच्चों और बुजुर्गों में डिहाइड्रेशन होने पर
    • लूज मोशन या उल्टी-दस्त होने पर
    • ज्यादा पसीना आने की स्थिति में
    क्या हर किसी को रोज ORS पीना चाहिए? डॉक्टरों का कहना है कि अगर कोई व्यक्ति बिल्कुल ठीक है, भरपूर पानी पी रहा है और उसे डिहाइड्रेशन नहीं है, तो बार-बार ORS पीने की जरूरत नहीं होती। ORS में शुगर और नमक दोनों मौजूद होते हैं। जरूरत से ज्यादा ORS पीने से शरीर को नुकसान भी हो सकता है। ज्यादा ORS पीने के नुकसान
    1. शुगर लेवल बढ़ सकता है
    ORS में ग्लूकोज यानी शुगर होती है। ज्यादा मात्रा में लेने से ब्लड शुगर बढ़ सकती है।
    1. हाई बीपी की समस्या बढ़ सकती है
    इसमें नमक भी होता है, जो हाई बीपी के मरीजों के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
    1. किडनी पर असर पड़ सकता है
    जरूरत से ज्यादा ORS पीने से शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बिगड़ सकता है, जिससे किडनी पर असर पड़ता है। किन लोगों को डॉक्टर की सलाह के बिना ORS नहीं पीना चाहिए? कुछ बीमारियों में ORS लेने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूरी होती है। इन मरीजों को सावधानी रखनी चाहिए
    • किडनी की पुरानी बीमारी वाले मरीज
    • हाई बीपी के मरीज
    • हार्ट के मरीज
    • डायबिटीज के मरीज
    ORS पीने की सही सलाह
    • सिर्फ जरूरत होने पर ही ORS पिएं
    • सामान्य स्थिति में सादा पानी, नींबू पानी और नारियल पानी बेहतर विकल्प हैं
    • बच्चों और बुजुर्गों को डिहाइड्रेशन होने पर तुरंत ORS दें
    • अगर कमजोरी, चक्कर या ज्यादा पसीना आए तो डॉक्टर की सलाह लें
     
  • WHO ने Ebola Virus के चलते किया लोगों को अलर्ट, ऐसे हैं इसके लक्षण

    WHO ने Ebola Virus के चलते किया लोगों को अलर्ट, ऐसे हैं इसके लक्षण

    सेहत: विश्व स्वास्थ्य संगठन ने हाल ही में डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो और युंगाडा में फैले हुए वायरस इंटरनेशनल इमरजेंसी ऑफ कंसर्न यानी सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति की अंतरराष्ट्रीय चिंता की घोषित कर दी हैं। यह बीमारी बुंडीबुग्यो वायरस के कारण हो रही हैं। यह इबोला वायरस का ही एक घातक स्ट्रेन हैं। यह स्ट्रेन पहले की ज्यादातर महामारियों ने फैलने वाले जैरे स्ट्रेन से अलग हैं। बुंडीबुग्यो स्ट्रेन की खोज 2007-2008 में युंगाड़ा के बुंडीबुग्यो जिले में हुई थी जहां पहली बार सामने आया। तब इसने 116 से ज्यादा लोगों की संक्रमित किया था और करीब 34-40 प्रतिशत मौतें हुई थी। अब डीआरसी के इटुरी प्रांत में यह 17वीं बार ईबोला का प्रकोप हैं लेकिन इस बार वायरस का प्रकार अलग है। इस स्ट्रेन के लिए स्पेशन वैक्सीन या खास दवा नहीं है जो इसे और भी चुनौतीपूर्ण बनाता है। ईबोला वायरस कई तरह के प्रकार का होता है लेकिन इंसानों में बड़े प्रकोप मुख्य रुप से तीन स्ट्रेन से होते हैं। जैरे, सूडान और बुंडीबुग्यो। जैरे स्ट्रेन सबसे घातक माना जाता है। 60-90 प्रतिशत तक मौतें हो सकती है। बुंडीबुग्यो स्ट्रेन में कम खतरनाक है। पिछली घटनाओं में इसकी मृत्यु दर औसतन 32-40 प्रतिशत रही है हालांकि कुछ रिपोर्ट्स में इसे 50 प्रतिशत तक बताया गया है। यह दर इलाज की उपलब्धता, मरीज की उम्र, स्वास्थ्य स्थिति और संक्रमण की गंभीरता पर निर्भर करती है। फिर भी यह वायरस बहुत खतरनाक है क्योंकि यह तेजी से फैल सकता है। बिना उचित देखभाल के कई लोगों की जान ले सकता है। डीआरसी के घने उष्णकटिबंधीय जंगलों में यह वायरस प्राकृतिक रुप से मौजूद रहता है।

    बुंडीबुग्यो ईबोला के लक्षण क्या हैं?

    ईबोला के सभी स्ट्रेन के लक्षण लगभग एक जैसे होते हैं लेकिन वे धीरे-धीरे बढ़ते हैं। शुरुआती लक्षण फ्लू जैसे दिखते हैं। अचानक तेज बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, थकान और कमजोरी। कुछ दिनों बाद उल्टी, दस्त, पेट दर्द और गले में खराश जैसी समस्याएं शुरु हो जाती हैं। संक्रमण के 2 से 21 दिनों के अंदर लक्षण दिख सकते हैं। वायरस शरीर के तरल पदार्थों (खून, उल्टी, दस्त, लार आदि) के सीधे संपर्क से फैलता है। मृत व्यक्ति के शरीर को छूने या दफनाने जैसी रस्मों के दौरान भी खतरा बहुत ज्यादा होता है। यह हवा, मृत व्यक्ति के शरीर को छूने या दफनाने जैसी रस्मों के दौरान भी खतरा बहुत ज्यादा होता है। यह हवा, पानी या कीटों से नहीं फैलता है। बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के लिए कोई खास एंटीवायरल दवा या वैक्सीन अभी नहीं है। जबकि जैरे स्ट्रेन के लिए वैक्सीन और इलाज मौजूद हैं। इलाज मुख्य रुप से देखभाल पर निर्भर करता है। इसमें शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी पूरी करना, बुखार और दर्द की दवाएं देना। संक्रमण से बचाव के लिए एंटीबॉयोटिक्स यदि जरुरी हो और गंभीर मामलों में ऑक्सीजन या ब्लड ट्रांसफ्यूज शामिल है। जितनी जल्दी मरीज को अस्पताल में अलग-थलग करके इलाज शुरु किया जाए। उसके बचने की संभावना उतनी बढ़ जाती है। शुरुआती दिनों में सही देखभाल से कई मरीज बच जाते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन और स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारी संपर्क ट्रेसिंग, संदिग्ध मरीजों को आइसोलेट करने और सुरक्षित दफनाने पर जोर दे रहे हैं। बीमारी को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर पाबंदी नहीं लगानी चाहिए बल्कि स्क्रीनिंग, जागरुकता और सीमा पर निगरानी बढ़ानी चाहिए। लोगों को सलाह दी जाती है कि संक्रमित क्षेत्र से आने वाले संपर्क में आए और लेकिन अच्छी सावर्जनिक स्वास्थ्य व्यवस्था से इसे काबू में लाया जा सकता है। यह बीमारी इसलिए चिंताजनक है क्योंकि DRC और युगांडा की सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा चुनौतियां हैं जो जांच और नियंत्रण को मुश्किल बनाती हैं। किंसासा और कंपाला में भी कुछ मामले सामने आए हैं। WHO ने सभी पड़ोसी देशों को अलर्ट रहने को कहा है हालांकि यह महामारी स्तर का नहीं है, लेकिन सतर्कता जरूरी है।      
  • क्या Breast Milk और Sperm से भी फैलेगा Hanta Virus,जानें कितना रहेगा खतरनाक

    क्या Breast Milk और Sperm से भी फैलेगा Hanta Virus,जानें कितना रहेगा खतरनाक

    सेहत: हंता वायरस को लेकर इन दिनों एक नई चिंता सामने आ रही हैं। सोशल मीडिया और कई रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि ये खतरनाक वायरस ब्रेस्ट मिल्क और स्पर्म के जरिए भी फैल सकता है। इसके बाद लोगों के मन में डर बढ़ गया है। खासकर उन परिवारों में जहां छोटे बच्चे या प्रेग्नेंट महिलाएं हैं हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऐसे मामले बेहद रेयर हैं और बिना पूरी जानकारी के घबराने की जरुरत नहीं है।

    ऐसे हुई थी शुरुआत

    इस चर्चा की शुरुआत 2023 में जर्नल वायरसेस में पब्लिश एक स्टडी के अनुसार, रिकवरी के कई साल बाद तक मौजूद रह सकता है। स्विट्जरलैंड के स्पीएज लैबोरेटरी के साइंटिस्ट्स ने अपनी रिसर्च में बताया कि एंडीज वायरस मेल रिप्रोडक्टिव ट्रैक्ट में लंबे समय तक टिक सकता है। ठीक वैसे ही जैसे इबोला और जीका जैसे कुछ दूसरे वायरस। रिसर्च में कहा गया कि एंडीज वायरस में सेक्शुअल ट्रांसमिशन की संभावना हो सकती है लेकिन अब तक ऐसा कोई कंफर्म केस सामने नहीं आया है।

    रिकवरी के बाद भी होगा इंफेक्शन

    इंडियन मेडिकल एसोसिएशन रिसर्च के अनुसार, रिकवरी के बाद स्पर्म में वायरस का आरएनए मिलना कोई नई बात नहीं है। उनके अनुसार, कम से कम 27 अलग-अलग वायरस में ऐसा देखा जा चुका है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, जो इम्यून सिस्टम से काफी हद तक सुरक्षित रहता है। इसी कारण से कुछ वायरस वहां लंबे समय तक बने रह सकते हैं हालांकि उन्होंने साफ किया है कि रिसर्च में सिर्फ वायरस आरएनए मिला था। जिंदा वायरस नहीं यानी अभी तक इस बात का सबूत नहीं है। रिकवरी के बाद भी वायरस इंसान को इंफेक्टेड कर सकता है।

    हो सकती है दिक्कत

    ब्रेस्ट मिल्क को लेकर भी एक स्टडी ने चिंता बढ़ाई थी। सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के जर्नल इमर्जिंग इन्फेक्शियस डिजीज रिसर्च में चिली की एक इंफेक्टेड मां के ब्रेस्ट मिल्क में एंडीज वायरस के जीनोम और प्रोटीन मिलने की बात कही गई थी। रिसर्चस का मानना था कि इससे मां से बच्चे में वायरस पहुंचने की संभावना हो सकती है।

    नहीं है किसी को डरने की जरुरत

    एक्सपर्ट के अनुसार, कि इस तरह के मामले बहुत कम है। उन्होंने बताया कि ब्रेस्ट मिल्क के जरिए हंता वायरस फैलने के केस बहुत रेयर हैं। आम लोगों को जरुरत से ज्यादा डरने की डरने नहीं है। बीमारी की शुरुआत तेज बुखार वाले फेज में कुछ समय के लिए ब्रेस्टफीडिंग रोक सकती है क्योंकि उस दौरान वायरल लोड ज्यादा होता है लेकिन सिर्फ डर के कारण से हमेशा के लिए ब्रेस्टफीडिंग बंद करना नहीं सही माना जाता है।    
  • रोज 10-15 मिनट से ज्यादा समय टॉयलेट में बिताना बढ़ाएगा कई स्वास्थ्य समस्याएं

    रोज 10-15 मिनट से ज्यादा समय टॉयलेट में बिताना बढ़ाएगा कई स्वास्थ्य समस्याएं

    सेहत: आजकल ज्यादातर लोग वॉशरुम में मोबाइल फोन लेकर जाते हैं। ऐसे में सोशल मीडिया स्क्रोल करते-करते या वीडियो देखते हुए कई बार लोग जरुरत से ज्यादा समय टॉयलेट सीट पर बिताने लगते हैं। देखने में भले ही यह आदत भले ही नॉर्मल लगे लेकिन डॉक्टरों के अनुसार, इसका सीधा असर पाचन तंत्र और रेक्टल हेल्थ पर पड़ सकता है। एक्सपर्ट्स का यह कहना है कि रोज 10-15 मिनट से ज्यादा समय टॉयलेट में बिताना कई स्वास्थ्य समस्याओं को बढ़ा सकता हैं।

    इस वजह से खतरनाक है यह आदत

    गैस्ट्रो और जीआई सर्जनों के अनुसार, लंबे समय तक टॉयलेट सीट पर बैठे रहने से रेक्टम और एनस के आस-पास के नसों पर सबसे ज्यादा दबाव पड़ता है। ऐसे में लगातार ऐसा होने पर नसों में सूजन आ सकती है। इससे बवासीर यानी पाइल्स की समस्या शुरु हो सकती है। इसके कारण दर्द, खुजली और मल त्याग के दौरान ब्लीडिंग जैसी परेशानी भी हो सकती है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, वेस्टर्न स्टाइल कमोड पर बैठने की पोजिशन भी कई बार समस्या बढ़ा सकती है। सामान्य स्कवाटिंग पोजीशन की तुलना में कमोड पर बैठने से रेक्टल एरिया पर ज्यादा प्रभाव दबाव पड़ सकता है। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति फोन इस्तेमाल करते हुए ज्यादा देर तक बैठा रहे तो स्थिति गंभीर हो सकती है।

    बढ़ेगी कब्ज की दिक्कत

    कई लोग कब्ज होने पर लंबे समय तक टॉयलेट में बैठे रहते हैं क्योंकि उनको लगता है कि इससे पेट पूरी तरह से साफ हो जाएगा परंतु डॉक्टरों के अनुसार, यह आदत कब्ज को और बढ़ा देगी। ज्यादा तेर तक जोर लगाने से पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियां पर असर पड़ता है और बॉवेल मूवमेंट भी प्रभावित होती है। इससे एनल फिशर और रेक्टल प्रोलैप्स जैसे समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है।

    ऐसे करें बचाव

    एक्सपर्ट्स का कहना है कि टॉयलेट में मोबाइल फोन का इस्तेमाल कम करना बहुत सबसे जरुरी है। इसके अलावा खाने में फाइबर की मात्रा बढ़ाएं, पानी पिएं और नियमित एक्सरसाइज करें। इससे भी पाचन तंत्र बेहतर होगा और मल त्याग में ज्यादा समय नहीं लगेगा। यदि किसी व्यक्ति को रोज 10 मिनट से ज्यादा समय टॉयलेट में लग रहा है। मल त्याग के दौरान दर्द हो रहा है या ब्लीडिंग हो रही है तो इसको नजरअंदाज न करें। डॉक्टर के अनुसार, ऐसे लक्षण किसी गंभीर समस्या का संकेत होंगे और इनकी समय रहते जांच करना जरुरी है।  
  • HantaVirus को लेकर WHO ने दिया बड़ा Update, बताया कब तक करेगा इंसानों को परेशान

    HantaVirus को लेकर WHO ने दिया बड़ा Update, बताया कब तक करेगा इंसानों को परेशान

    सेहत: दुनियाभर में खौफ फैलाने वाले एंडीज हंतावायरस के बारे में वैज्ञानिकों को अब भी काफी हद तक कम जानकारी है। खासकर यह वायरस इंसान के शरीर में कितने समय तक रह सकता है। कितने समय तक दूसरों में फैल सकता है। यह अभी भी एक रहस्य बना हुआ है। MV Hondius क्रूज जहाज पर फैले इस वायरस ने 11 लोगों को बीमार किया और 3 लोगों की जान ले ली। अब विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) इस वायरस की गहराई से जांच कर रहा है। एंडीज हंतावायरस सिर्फ हवा या चूहों से नहीं बल्कि इंसान के कई तरह के शरीर के तरल पदार्थों से भी फैल सकता है। इसमें लार, मां का दूध और स्पर्म शामिल हैं। क्रूज जहाज पर हुई इस घटना के बाद वैज्ञानिक चिंतित हैं क्योंकि यह वायरस यौन संबंध या निकट संपर्क से भी फैल सकता है परंतु सबसे बड़ी समस्या यह है कि संक्रमण के बाद व्यक्ति कितने समय तक दूसरों को संक्रमित कर सकता है। इसकी सही जानकारी नहीं है।

    WHO ने की स्टडी की शुरुआत

    विश्व स्वास्थ्य संगठन की उभरती बीमारियों और जूनोसिस यूनिट की प्रमुख मारिया वान केरखोवे ने बताया कि एंडीज हंतावायरस पर कई अध्ययन चल रहे हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण है नेचुरल हिस्ट्री स्टडी। यह स्टडी वायरस के इंसान के शरीर में जीवन चक्र को समझने की कोशिश करेगी। मारिया वान केरखोवे ने कहा कि यह स्टडी उन लोगों के नियमित सैंपल लेकर करेगी जो क्वारंटाइन में है। इससे पता चलेगा कि वे संक्रमित है या नहीं। क्या वे दूसरों को संक्रमित कर सकते हैं या नहीं। यह जानकारी इस वजह से भी जरुरी है कि क्योंकि अभी तक हंतावायरस के लिए कोई खास उपलब्ध नहीं है।

    क्रूज जहाज पर फैल रहा खतरा

    अप्रैल महीने में MV Hondius क्रूज जहाज पर यह वायरस तेजी से फैल गया। जहाज पर सवार यात्री और कर्मचारी दोनों प्रभावित हुए। इस घटना के बाद पूरी दुनिया में इस वायरस को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। कई देशों में क्रूज यात्रियों की निगरानी बढ़ा दी गई है। हंतावायरस के प्रकारों के बारे में कुछ जानकारी है लेकिन एंडीज स्ट्रेन नया और खतरनाक है।

    Andes hantavirus WHO

    वैज्ञानिक नहीं जानते हैं कि संक्रमण के बाद वायरस शरीर में कितने दिन हफ्ते या फिर महीने तक एक्टिव रहेगा। यदि यह वायरस लंबे समय तक शरीर में छिपा रह सकता है तो ठीक हो चुके व्यक्ति भी दूसरों को संक्रमित कर सकता है। यही कारण है कि WHO क्वारंटाइन में रह रहे लोगों पर लगातार नजर रख रहा है। उनके सैंपल की जांच कर रहा है। फिलहाल हंतावायरस का कोई स्पेसिफिक इलाज नहीं है। डॉक्टर सिर्फ सपोर्टिव केयर दे सकते हैं। जैसे ऑक्सीजन दर्द, निवारक दवाएं और फेफड़ों की देखभाल। यदि वायरस लंबे समय तक संक्रामक रहता है तो क्वारंटाइन की अवधि बढ़ाई जा सकती है। यही कारण है कि WHO इस स्टडी को बहुत महत्व दे रहा है।

    इन बातों का रखें ध्यान

    वैज्ञानिकों का यह मानना है कि आने वाले हफ्तों और महीनों में स्टडी के नतीजे सामने आएंगे। इससे यह पता चलेगा कि संक्रमित व्यक्ति को कितने समय तक अलग-थलग रखना चाहिए। किन-किन सावधानियों का पालन करना चाहिए। खासकर पुरुषों को यौन संबंध बनाने, स्तनपान कराने वाली महिलाओं को सावधानी बरतने और निकट संपर्क से बचने के लिए सलाह दी जा सकती है। एंडीज हंतावायरस अभी भी कई राज छिपाए हुए हैं। WHO की यह नई स्टडी वायरस को बेहतर समझने में मदद करेगी। फिलहाल थोड़ी सतर्कता और साफ-सफाई ही सबसे बड़ा बचाव है। वैज्ञानिक लगातार काम कर रहे हैं ताकि भविष्य में ऐसी बीमारियों को रोका जा सके और प्रभावित लोगों को सही इलाज किया जा सके।    
  • Office में इस वजह से बैठ-बैठकर मोटे होते जा रहे हैं लोग, Health Expert ने किया यह काम

    Office में इस वजह से बैठ-बैठकर मोटे होते जा रहे हैं लोग, Health Expert ने किया यह काम

    सेहत: मोटापा आज के समय में सबसे बड़ी समस्या बन चुका है। इसको कम करने के लिए लोग अलग-अलग तरह के हथकंडे अपनाते हैं। हाल ही में इंस्तांबुल में यूरोपियन कांग्रेस ऑन ओबोसिटी में पब्लिश्ड स्टडी में सामने आया है कि जो लोग ऑफिस में ज्यादा घंटों तक काम करते हैं। उनमेंं मोटापा बढ़ने की संभावना ज्यादा होती है। रिसर्च के अनुसार, अमेरिका और मेक्सिको जैसे देशों में जहां वर्किंग आवर्स ज्यादा हैं। वहां ओबेसिटी रेट भी ज्यादा पाया है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, काम है कि घंटों में थोड़ी सी कमी भी सेहत में बड़ा सुधार ले सकता है। स्टडी की लीड ऑथर डॉ. प्रदीपा कोराले-गेदारा का कहना है कि ज्यादा कम करने से शरीर में तनाव बढ़ता है। इससे कोर्टिसोल हार्मोन का लेवल हाई हो जाता है। यह हार्मोन शरीर में फैट जमा करने का काम करता है। इसके अलावा देर तक काम करने की वजह से लोगों के पास एक्सरसाइज के लिए समय नहीं बचता। थकावट के कारण लोग अक्सर घर पर खाना बनाने के जगह बाहर का प्रोसेस्ड फूड या पैकेट बंद चीजें खाना पसंद करते हैं जो वजन बढ़ने का मुख्य कारण है।

    4-डे वीक से बदलेगी तस्वीर

    इस रिसर्च के बाद ब्रिटेन में 4-डे वर्किंग वीक की मांग फिर से तेज हो गई है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि हफ्ते में सिर्फ चार दिन काम हो तो लोगों को अपनी सेहत, नींद और डाइट पर ध्यान देने का पूरा मौका मिलेगा। इससे न सिर्फ कर्मचारियों का स्ट्रेस कम होगा बल्कि वो ज्यादा एक्टिव और प्रोडक्टिव भी रहेंगे। ब्रिटेन के करीबन 200 कंपनियों ने पहले ही इस मॉडल को अपना लिया है। इसके पॉजिटिव नतीजे भी देखने को मिले हैं।

    सरकार नहीं पक्ष में

    सरकार फिलहाल इसे पूरी तरह अनिवार्य करने के पक्ष में नहीं है। द गार्डियन की रिपोर्ट के अनुसार, के प्रवक्ता ने कहा कि – हम फ्लेक्सिबल वर्किंग को बढ़ावा दे रहे हैं लेकिन 4 दिन के काम के लिए 5 दिन की सैलरी देने का कानून फिलहाल नहीं लाया जाएगा। दूसरी ओर हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि हमें एक स्वस्थ समाज चाहिए तो 100 साल पुराने 9 से 5 और 5 दिन वाले वर्किंग कल्चर को अब बदलने का समय आ गया है।      
  • Health Tips: रोजाना नींबू पानी में एक चम्मच चिया सीड्स डालकर पीने से क्या होता है, जानें एक्सपर्ट की राय

    Health Tips: रोजाना नींबू पानी में एक चम्मच चिया सीड्स डालकर पीने से क्या होता है, जानें एक्सपर्ट की राय

    Health Tips: आजकल हेल्दी रहने के लिए लोग अपनी डाइट में ऐसी चीजें शामिल कर रहे हैं जो शरीर को पोषण देने के साथ-साथ फिट भी रखें। नींबू पानी और चिया सीड्स का मिश्रण भी ऐसी ही एक हेल्दी ड्रिंक है। यह पीने में ताजगी देने वाली होती है और शरीर को कई तरह के फायदे पहुंचाती है। अगर आप रोज सुबह एक गिलास नींबू पानी में एक चम्मच चिया सीड्स मिलाकर पीते हैं, तो यह आपकी सेहत को बेहतर बना सकता है। चिया सीड्स में फाइबर, प्रोटीन, ओमेगा-3 फैटी एसिड और कई जरूरी मिनरल्स पाए जाते हैं, जबकि नींबू विटामिन-C का अच्छा स्रोत है। दोनों का मिश्रण शरीर के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है। आइए

    1. वजन कम करने में मददगार
    अगर आप वजन घटाना चाहते हैं, तो नींबू पानी और चिया सीड्स आपके लिए अच्छा विकल्प हो सकता है। चिया सीड्स में भरपूर मात्रा में फाइबर होता है, जो पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराता है। इससे बार-बार भूख नहीं लगती और ज्यादा खाने से बचाव होता है।
    जब चिया सीड्स पानी में भिगोए जाते हैं, तो वे फूलकर जेल जैसी बनावट में बदल जाते हैं। इसे पीने से पेट भरा रहता है और वजन कंट्रोल में रखने में मदद मिलती है। वहीं नींबू शरीर के मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाता है, जिससे फैट तेजी से बर्न होता है।

    2. पाचन तंत्र को रखे मजबूत
    आज के समय में कब्ज, गैस और अपच जैसी समस्याएं आम हो गई हैं। चिया सीड्स में मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को सही रखने में मदद करता है। यह आंतों की सफाई करता है और मल त्याग को आसान बनाता है। नींबू पानी पाचन एंजाइम्स को बढ़ावा देता है, जिससे खाना आसानी से पचता है। रोजाना इसका सेवन करने से पेट हल्का महसूस होता है और कब्ज की समस्या में राहत मिल सकती है।

    3. शरीर की सफाई में सहायक
    नींबू में मौजूद विटामिन-C और एंटीऑक्सीडेंट शरीर से गंदगी और हानिकारक तत्वों को बाहर निकालने में मदद करते हैं। यह लीवर को बेहतर तरीके से काम करने में मदद करता है और शरीर को अंदर से साफ रखने में सहायक होता है। चिया सीड्स के साथ इसका सेवन करने से शरीर को अतिरिक्त पोषण मिलता है और ब्लड सर्कुलेशन भी बेहतर होता है। इसका असर त्वचा पर भी दिखता है और चेहरे पर निखार आ सकता है।

    4. दिल को रखे स्वस्थ
    चिया सीड्स ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर होते हैं, जो दिल की सेहत के लिए बहुत फायदेमंद माने जाते हैं। यह खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने और अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में मदद करते हैं। इसके नियमित सेवन से ब्लड प्रेशर को कंट्रोल रखने में मदद मिलती है, जिससे दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम हो सकता है।

    5. दिनभर दे एनर्जी और हाइड्रेशन
    नींबू पानी शरीर को हाइड्रेटेड रखने में मदद करता है और पानी की कमी को पूरा करता है। इसमें मौजूद इलेक्ट्रोलाइट्स शरीर को तरोताजा रखते हैं। वहीं चिया सीड्स धीरे-धीरे ऊर्जा रिलीज करते हैं, जिससे शरीर को लंबे समय तक एनर्जी मिलती रहती है। यही कारण है कि यह ड्रिंक जिम जाने वालों और दिनभर काम करने वाले लोगों के लिए काफी फायदेमंद मानी जाती है।

    कैसे करें सेवन?
    एक गिलास पानी में एक चम्मच चिया सीड्स डालकर 15-20 मिनट के लिए भिगो दें। इसके बाद उसमें आधा नींबू निचोड़कर अच्छी तरह मिलाएं। चाहें तो स्वाद के लिए थोड़ा शहद भी मिला सकते हैं। इसे सुबह खाली पेट या दिन में कभी भी पिया जा सकता है।

    ध्यान रखें
    चिया सीड्स हमेशा भिगोकर ही खाएं या पिएं। सूखे चिया सीड्स खाने से गले में फंसने या पाचन संबंधी परेशानी हो सकती है। साथ ही, अगर आपको किसी तरह की स्वास्थ्य समस्या है, तो डॉक्टर की सलाह लेकर ही इसका सेवन करें।

     

     

  • Health Tips : खाली पेट कढ़ी पत्ता चबाना सेहत के लिए किसी वरदान से कम नहीं

    Health Tips : खाली पेट कढ़ी पत्ता चबाना सेहत के लिए किसी वरदान से कम नहीं

    Health Tips : अक्सर लोग करी पत्ते का इस्तेमाल सिर्फ खाने का स्वाद और खुशबू बढ़ाने के लिए करते हैं। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि छोटा सा दिखने वाला यह पत्ता पोषक तत्वों का खजाना है। करी पत्ते में विटामिन ए, बी, सी और ई के साथ-साथ आयरन, कैल्शियम और एंटीऑक्सीडेंट्स भी पाए जाते हैं, जो शरीर को कई तरह से फायदा पहुंचाते हैं। अगर आप रोज सुबह खाली पेट 4 से 6 ताजे करी पत्ते चबाते हैं, तो कुछ ही समय में इसके अच्छे असर महसूस हो सकते हैं।

    पेट की समस्याओं से दिला सकता है राहत
    करी पत्ता पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में मदद करता है। अगर आपको गैस, कब्ज, अपच या पेट भारी रहने जैसी परेशानी रहती है, तो रोजाना सुबह करी पत्ते चबाना फायदेमंद हो सकता है। यह पेट को साफ रखने में मदद करता है और पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है। इससे गट हेल्थ भी मजबूत होती है।

    इम्यूनिटी बढ़ाने में मददगार
    करी पत्ते में मौजूद विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। रोजाना इसका सेवन करने से शरीर बीमारियों से लड़ने के लिए ज्यादा मजबूत बन सकता है। बदलते मौसम में होने वाली छोटी-मोटी बीमारियों से बचाव में भी यह सहायक हो सकता है।

    दिल को रख सकता है स्वस्थ
    विशेषज्ञों के अनुसार करी पत्ते दिल की सेहत के लिए भी अच्छे माने जाते हैं। यह शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने में मदद कर सकता है, जिससे हार्ट से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम हो सकता है। नियमित और सही मात्रा में इसका सेवन दिल को स्वस्थ रखने में सहायक हो सकता है।

    डायबिटीज मरीजों के लिए भी फायदेमंद
    करी पत्ता ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद कर सकता है। यही वजह है कि इसे डायबिटीज मरीजों के लिए भी लाभकारी माना जाता है। इसके औषधीय गुण शरीर में शुगर के स्तर को संतुलित रखने में मदद कर सकते हैं।

    वजन घटाने में भी कर सकता है मदद
    अगर आप वजन कम करने की कोशिश कर रहे हैं, तो करी पत्ता आपकी मदद कर सकता है। यह शरीर के मेटाबॉलिज्म को तेज करता है, जिससे फैट तेजी से बर्न होने में मदद मिलती है। नियमित सेवन वजन घटाने की प्रक्रिया को आसान बना सकता है।

    सेवन करते समय रखें सावधानी
    हालांकि करी पत्ता फायदेमंद है, लेकिन इसका सेवन सही मात्रा में ही करना चाहिए। किसी भी चीज का ज्यादा सेवन नुकसान पहुंचा सकता है। अगर आपको कोई गंभीर बीमारी है या आप किसी दवा का सेवन कर रहे हैं, तो डॉक्टर की सलाह लेकर ही इसे अपनी दिनचर्या में शामिल करें।