Category: Tech
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Google Earth में आया कमाल का फीचर, अब इस तरह देख पाएंगे लोग धरती
टेक्नोलॉजी: गूगल लगातार अपने मैप और नेविगेशन प्लेटफॉर्म को बेहतर बनाने में जुटा है। इसी कड़ी में कंपनी ने Google Earth का ऐसा फीचर वेब ब्राउजर पर उपलब्ध करा दिया है। दुनिया को देखने का आपका नजरिया बदल सकता है। खास बात यह है कि इसके लिए किसी भी एक्स्ट्रा सॉफ्टवेयर या पेमेंट की जरुरत नहीं है। अब यूजर्स सीधे अपने कंप्यूटर के ब्राउजर से दुनिया के ऊपर वर्चुअल उड़ान भर सकते हैं। -

Telegram के CEO ने लगाए गंभीर आरोप, Reliance Industries के खिलाफ किया Tweet
नई दिल्ली: भारत सरकार हफ्ते भर के लिए टेलीग्राम को बैन करने का ऐलान किया है। NEET पेपर लीक के बाद दुबारा परीक्षा होगी। इसी कारण से इस ऐप को बैन किया गया है हालांकि कंपनी के सीईओ ने कहा है कि पेपर लीक के कारण टेलीग्राम नहीं था। ऐप बैन करना कोई ऑप्शन नहीं है क्योंकि लीक्ड पेपर शेयरिंग किसी भी ऐप पर किया जा सकता है।टेलीग्राम ऐप के फाउंडर ने लगाया आरोप
इतना ही नहीं टेलीग्राम ऐप के फाउंडर और सीईओ पावेल ड्यूरोव ने आरोप लगाया है कि भारत की टेलीकॉम कंपनी रिलांयस इंडस्ट्रीज टेलीग्राम की इंटरनेट कनेक्टिविटी में दखल दे रही है। उनका दावा है कि दखल सिर्फ भारत तक ही सीमित नहीं है बल्कि भारत के बाहर भी कई देशों में यूजर्स को इसका असर झेलना पड़ रहा है। ड्यूरोव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि रिलायंस एक तकनीक का इस्तेमाल कर रही है जिसे BGP हाईजैकिंग कहते हैं। यह इंटरनेट की एक बेसिक रुटिंग तकनीक है जिसके जरिए डेटा एक नेटवर्क से दूसरे नेटवर्क का पहुंचता है। अगर इसमें छेड़छाड़ हो जाए। इंटरनेट ट्रैफिक को गलत रास्ते पर भेजा जा सकता है। ड्यूरोव का आरोप है कि इसी तरीके से टेलीग्राम की पहुंच को प्रभावित किया जा रहा है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि यह समस्या सिर्फ भारत में नहीं बल्कि यूएई जैसे देशों में भी देखी गई है जहां यूजर्स को टेलीग्राम इस्तेमाल करने में दिक्कत आई है। ड्यूरोव ने इसे जानबूझकर की गई साजिश बताया और कहा कि रिलांयस ने इस मामले में कई रिपोर्ट्स को नजरअंदाज किया है।Indian telecom Reliance is sabotaging access to Telegram for millions of users OUTSIDE India (including the UAE) via a rogue method called BGP hijacking. The sabotage seems intentional, as Reliance has ignored multiple reports. This may be part of a competitive war, as…
— Pavel Durov (@durov) June 16, 2026रिलांयस का मेटा से है कारोबारी संबंध
इस पूरे मामले को उन्होंने बिजनेस प्रतिस्पर्धा से भी जोड़ा है। ड्यूरोव का कहना है कि रिलायंस का मेटा से कारोबारी संबंध है और मेटा ही व्हाट्सऐप, फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसी बड़ी सर्विसेज की मालिक है। ऐसे में उन्होंने इशारा किया कि टेलीग्राम के खिलाफ यह कदम प्रतिस्पर्धा का हिस्सा हो सकता है हालांकि उन्होंने अपने इन आरोपों के समर्थन में कोई ठोस सबूत पर पेश नहीं किया है। गौरतलब है कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए के अनुसार, NEET 2026 री-एग्जाम से पहले टेलीग्राम ग्रुप्स के जरिए गलत गतिविधियों की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद सरकार ने आईटी कानूनों के अंतर्गत कार्रवाई करते हुए प्लेटफॉर्म पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया है। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम आखिरी ऑप्शन के तौर पर उठाया गया है ताकि परीक्षा से पहले किसी भी तरह की गड़बड़ी रोकी जा सके। हालांकि ड्यूरोव की ओर से सरकार के इस फैसले की भी आलोचना हुई है। उनका कहना है कि इस तरह के कदम आम यूजर्स को सजा देते हैं जबकि असली दोषी दूसरे प्लेटफॉर्म्स पर चले जाते हैं। उन्होंने कहा कि भारत में 15 करोड़ से ज्यादा टेलीग्राम यूजर्स हैं और ऐसे फैसले सीधे तौर पर उन्हें प्रभावित करते है। ड्यूरोव ने यह भी कहा कि यदि इस तरह की पाबंदियां लगती रही है तो इंटरनेट की ओपननेस और यूजर्स की फ्रीडम पर असर पड़ेगा। फिलहाल इस पूरे मामले पर रिलायंस की ओऱ से रिएक्शन नहीं आया है। -

America ने Artificial Intelligence को किया बैन, भारत और दुनिया के लिए ऐसा होगा नुकसान
टेक्नोनलॉजी: अमेरिका ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है। गैर अमेरिकियों के लिए पावरफुल एआई मॉडल के एक्सेस को बैन कर दिया है। यह नियम एंथ्रोपिक के सबसे एडवांस्ड एआई मॉडल्स Claude Fable 5 और Mythos 5 पर लागू होगा। अमेरिका ने एंथ्रोपिक के लिए एक्सपोर्ट कंट्रोल के निर्देश दिए हैं जो इन मॉडल्स पर लागू होंगे। दरअसल अमेरिकी सरकार के एक विभाग ने पावरफुल एआई मॉडल्स Claude Fable और Mythos 5 के ग्लोबल एक्सेस पर तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी है। इसकी जानकारी शनिवार को मिली है। यह बैन अमेरिका के बाहर के सभी यूजर्स जिसमें एंथ्रोपिक के विदेशी कर्मचारी भी शामिल है। अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ कॉमर्स के अनुसार, इन मॉडल्स में कुछ ऐसी खामियां है जिनका इस्तेमाल करके हैकर्स सॉफ्टवेयर में मौजूद कमजोरियों का पता लगा सकते हैं। बड़े साइबर हमलों से बच सकते हैं। हैकर्स के हाथ में यह तकनीक पहुंचती है तो बड़ा नुकसान हो सकता है। अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ कॉमर्स के अनुसार, इन मॉडल्स में कुछ ऐसी खामियां है जिनका इस्तेमाल करके हैकर्स सॉफ्टवेयर में मौजूद कमजोरियों का पता लगता है। बड़े साइबर हमलों से बच सकते हैं। हैकर्स के हाथ में यह तकनीक पहुंचती है तो बड़ा नुकसान हो सकता है।भारत और दुनिया के लिए होगा नुकसान
एंथ्रोपिक के एआई मॉडल्स पर बैन लगाने के बाद दुनिया के कई देशों को कुछ नुकसान और कई फायदे भी हो सकते हैं। एंथ्रोपिक का Claude Fable 5 एक पावरफुल एआई मॉडल है। इसका इस्तेमाल कोडिंग, ऑटोनॉमस रिसर्च और कई बड़े-बड़े लॉजिकल टास्क को कंप्लीट किया जाता है। बैन होने की कारण से बहुत सी कंपनियों और स्टार्टअप आदि को नुकसान होगा। अमेरिका का यह कदम बताता है कि वह अब एडवांस्ड एआई मॉडल्स को सिर्फ एक कमर्शियल प्रोडक्ट नहीं है बल्कि एक राष्ट्रीय संपत्ति के रुप मानने लगा है। इसकी कारण से विकसित देशों और ग्लोबल साउथ के बीच तकनीकी खाई और गहरी हो सकती है। एआई मॉडल पर बैन होने के बाद दुनिया के कई देशों में एक मजबूत एआई इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग तेज होगी। भारत इस दिशा में लंबे समय से काम कर रहा है और अन्य देशों को भी इस दिशा में काम करना शुरु करना पड़ेगा। अमेरिका खुद एंथ्रोपिक के इन दोनों मॉडल्स को साइबर हमलों के लिए खतरा मानता है क्योंकि ये जरुरी सॉफ्टवेयर की खामियों का पता लगाते हैं। यूं तो कंपनी का दावा है कि इससे खामियां दूर होंगी लेकिन साइबर स्कैमर्स इन खामियों की मदद से बड़े साइबर अटैक को अंजाम दे सकते हैं। -

जल्द Launch होंगे Iphone 18 और 18 Pro, कीमत से लेकर फीचर्स तक आए सामने, जानें Details
टेक्नोलॉजी: अमेरिकी टेक कंपनी ऐपल हर साल की तरह ही इस साल भी सितंबर में अपनी फ्लैगशिप सीरिज को अनवील करेगी। इस साल कंपनी आईफोन 18 और 18 प्रो सीरीज को अनवील करेगी। न्यू सीरीज में कई नए फीचर्स, बेहतर कैमरा सेंसर और ज्यादा एफिसिएंट बैटरी मैनेजमेंट मिलेगा। लॉन्चिंग में अभी भी तीन महीने बाकी हैं। उसके बाद अभी तक कई फीचर्स सामने आ चुके हैं। फीक्स के अनुसार, इस साल कंपनी होल्ड हैंडसेट को भी अनवील कर सकती है। अभी तक कंपनी ने अपना फोल्ड हैंडसेट लॉन्च किया है।आईफोन 18 और 18 प्रो सीरीज में कई
आईफोन 18 और 18 प्रो सीरीज में कई अपग्रेड्स नजर आएंगे. परफॉर्मेंस, डिस्प्ले और बैटरी आदि में कई बड़े-बड़े अपग्रेड्स दिखाई देंगे. हालांकि डिजाइन में इस साल बहुत ज्यादा बड़ा बदलाव नहीं दिखाई देगा. वह पुराने डिजाइन को ही बरकरार रखेगा.स्मार्टफोन की वजह से दुनिया भर में कम पैदा हो रहे हैं बच्चे
डिस्प्ले में दिखाई देगा सबसे बड़ा बदलाव फ्रंट पर देखने को मिलेगा। कंपनी डाइनेमिक आईलैंड के साइज को छोटा करेगा। इसमें कैमरा, सेंसर और कई कंट्रोल्स भी मिलते हैं। टिप्स्टर आईस यूनिवर्स के अनुसार, Iphone 18 Pro में मिलने वाला डाइनेमिक आईलैंड मौजूदा मॉडल्स की तुलना में 35 परसेंट तक पतला होगा। इससे यूजर्स को बेहतर स्क्रीन एक्सपीरियंस मिलेगा। इससे पहले कई रिपोर्ट्स भी सामने आई थी। इसमें बताया गया था कि ऐपल फेस आईडी के कुछ कॉम्पोनेंट्स को डिस्प्ले के नीचे शिफ्ट करेगा लेकिन अभी तक ये टेक्नोलॉजी तैयार नहीं हो पाई है। अपकमिंग आईफोन 18 प्रो मैक्स में बड़ा बैटरी पैक का इस्तेमाल किया जा सकेगा। इसमें 5,100 mAh से 5,200mAh तक की बैटरी हो सकती है। इससे यूजर्स को बेहतर बैटरी बैकअप और देर तक मूवी या गेम्स आदि मोबाइल पर ही देख सकेंगे।कैमरा होगा अपग्रेड्स
आईफोन 18 और 18 प्रो के कैमरा को लेकर कई बड़े अपग्रेड्स देखने को मिलेंगे। प्राइमरी कैमरे में वेरिएबल अपर्चर सिस्टम और सैमसंग का तैयार किया गया। थ्री लेयर स्टेक्ड इमेज सेंसर दिया जाएगा। इस बार कंपनी अच्छे जूम भी देगी।न्यू प्रोफेसर और दमदार परफॉर्मेंस
आईफोन 18 प्रो सीरीज में नया चिपसेट का इस्तेमाल किया जाएगा। इसका नाम 420 होगा। इसको TSMC की 2nm प्रोसेस तकनीक पर तैयार किया जा सकता है। लीक्स रिपोर्ट् के अनुसार, इसमें करीबन 15 परसेंट बेहतर परफॉर्मेंस मिलेगी। -

Whatsapp का नया धमाका, अब View Once मैसेज खुद हो जाएंगे गायब, यूजर्स के लिए शुरु हुई Secret Testing
टेक्नोलॉजी: व्हाट्सऐप अपने यूजर्स के लिए एक नया प्राइवेसी फीचर टेस्ट कर रहा है जो मैसेज सुरक्षा को पहले से ज्यादा एडवांस बना सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी ऐसा फीचर ला रही है जिसमें डिसअपीयरिंग मैसेज सिर्फ तय समय के बाद नहीं बल्कि पढ़े जाने के बाद खुद-ब-खुद डिलीट हो जाएंगे। यह फीचर पहले Android बीटा वर्जन में देखा गया था और अब आईफोन यूजर्स के लिए भी इसकी टेस्टिंग शुरु हो गई है।आईफोन बीटा यूजर्स को मिला नया ऑप्शन
रिपोर्ट के अनुसार, यह फीचर फिलहाल कुछ आईफोन बीटा टेस्टर्स को मिल रहा है जो एप्पल के TestFlight प्रोग्राम के जरिए व्हाट्सऐप का बीटा वर्जन इस्तेमाल कर रहे हैं। कुछ सामान्य App Store यूजर्स को भी यह फीचर सीमित रुप से दिखाई दे सकता है। नई सेटिंग After Reading नाम से डिसअपीरियरिंग मैसेज सेक्शन में दिखाई दे रहे हैं। मैसेज का टाइमर मैसेज भेजते ही शुरु हो जाता था परंतु नए फीचर में टाइमर तभी एक्टिव होगा जब रिसीवर मैसेज पढ़ लेगा। यूजर्स 5 मिनट 1 घंटा या 12 घंटे का टाइमर चुन सकेंगे। अगर सामने वाला व्यक्ति 24 घंटे तक मैसेज नहीं खोलता है तो व्हाट्सऐप उसे अपने-आप हटा देगा यानी मैसेज बिना पढ़े भी ज्यादा समय तक चैट में नहीं रहेगा।पुराने डिसअपीयरिंग फीचर के साथ करेगा काम
यह नया फीचर WhatsApp के मौजूदा disappearing messages सिस्टम के साथ ही काम करेगा। अभी प्लेटफॉर्म 24 घंटे, 7 दिन और 90 दिन वाले टाइमर ऑप्शन देता है। यूजर इन्हें किसी एक चैट पर या सभी नई चैट्स के लिए डिफॉल्ट रुप में लागू कर सकते हैं हालांकि नया After Reading फीचर पूरी तरह ऑप्शनल बताया जा रहा है। यानी यह अपने-आप चालू नहीं होगा और यूजर को इसको मैनुअली ऑन करना पड़ेगा जिन चैट्स में यह फीचर एक्टिव नहीं होगा। वहां पुरानी सेटिंग्स पहले की तरह काम करती रहेगी।भेजने और पढ़ने वाले के लिए अलग-अलग टाइमिंग
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि मैसेज भेजने वाले की कॉपी चुने गए टाइमर के हिसाब से हट सकती है जबकि रिसीवर की ओर से टाइमर मैसेज पढ़ने के बाद शुरु होगा। इससे दोनों यूजर्स के लिए मैसेज एक्सपायर होने का समय अलग हो सकता है फिलहाल व्हाट्सएप्प ने यह साफ नहीं किया है कि यह फीचर सभी यूजर्स के लिए कब तक जारी किया जाएगा लेकिन आने वाले हफ्तों में इसे ज्यादा बीटा टेस्टर्स तक पहुंचाया जा सकता है। -

क्या AI से सोचने की ताकत होगी कमजोर, नई स्टडी में सामने आई सच्चाई
टेक्नोलॉजी: आज के समय में आर्टिफिशियल इंटेलिंजेस यानी की एआई हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गया है। अब चाहे ईमेल लिखना हो, किसी प्रोजेक्ट के लिए आईडिया चाहिए हो या फिर होमवर्क में मदद लेनी हो लोग तुरंत एआई चैटबॉट्स का सहारा लेने लगे हैं। ChatGPT, Claude और Gemini जैसे टूल्स कुछ ही सैकेंड में जवाब दे देते हैं जिससे समय और मेहनत दोनों बचते हैं लेकिन एक नई रिसर्च ने इस सुविधा के पीछे छिपे एक बड़े खतरे की ओर इशारा किया है। स्टडी के अनुसार, सिर्फ एक मिनट तक एआई पर निर्भर रहने से इंसान की खुद सोचने और समस्याएं हल करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।रिसर्च में आया सामने
यह रिसर्च 1,222 लोगों पर किए गए तीन बड़े एक्सपेरिमेंट्स पर आधारित थी। इसमें प्रतिभागियों का मैथ्स और रीडिंग कॉम्प्रिहेंशन से जुड़े सवाल किए गए हैं। कुछ लोगों को एआई की मदद लेने की अनुमति थी जबकि बाकी प्रतिभागियों को बिना किसी एआई सपोर्ट के सवाल हल करने थे। जिन लोगों ने एआई का इस्तेमाल किया। उन्होंने शुरुआत में बेहतर प्रदर्शन किया है। उनके जवाब तेजी से आए और स्कोर भी ज्यादा रहे लेकिन असली फर्क तब दिखा जब रिसर्चर्स ने एआई एक्सेस हटा दिया। एआई की मदद लेने वाली प्रतिभागियों का प्रदर्शन अचानक कमजोर पड़ गया। मैथ्स टेस्ट में बिना एआई वाले लोगों ने लगभग 73 प्रतिशत सवाल सही हल किए जबकि एआई पर निर्भर रहने वाले लोग सिर्फ 57 प्रतिशत तक ही पहुंच पाए। पढ़ने समझने वाले टेस्ट में भी यही पैटर्न देखने को मिला है।सोचने की आदत पर पड़ा असर
रिसर्चर्स के अनुसार, असली चिंता सिर्फ कम स्कोर नहीं है। एआई इस्तेमाल करने वाले लोग कठिन सवालों को जल्दी छोड़ने लगे यानी उनकी Persistence यानी लगातार कोशिश करने की क्षमता कमजोर होने लगी है। स्टडी में कहा गया कि सिर्फ लगभग 10 मिनट तक एआई से मदद लेने के बाद लोग बिना एआई के ज्यादा जल्दी हार मानने लगे। रिसर्चर्स ने इसे Boiling Frog Effect जैसा बताया मतलब शुरुआत में असर छोटा लगता है लेकिन धीरे-धीरे इंसान की गहराई से सोचने और खुद मेहनत करने की आदत कम हो सकती है।हर तरह का AI इस्तेमाल नुकसानदायक नहीं
रिसर्च में एक दिलचस्प बात भी सामने आई है। इन लोगों ने एआई से सीधे जवाब मांगे। उनमें सबसे ज्यादा गिरावट देखी गई परंतु उन्होंने एआई इस्तेमाल सिर्फ हिंट, गाइडेंस या समझाने के लिए किया गया है। उन पर नेगेटिव असर कम था। ऐसे में यदि एआई को टीचर की तरह इस्तेमाल किया जाए तो वह सीखने में मदद कर सकता है परंतु यदि हर काम का सीधा जवाब एआई से लिया जाए तो दिमाग धीरे-धीरे शॉर्टकट्स का आदी बन सकता है।हमारी आदत है
इस स्टडी का सबसे बड़ा संदेश यही है कि एआई खुद दुश्मन नहीं है। खतरा तब शुरु होता है जब इंसान हर छोटी के लिए उस पर पूरी तरह निर्भर होने लगता है। एआई समय बचा सकता है, काम आसान बना सकता है और नई चीजें सिखा सकता है परंतु यदि हम खुद सोचने और संघर्ष करने की आदत छोड़ देंगे तो लंबे समय में इसका असर हमारी मानसिक क्षमता पर असर पड़ेगा। -

सस्ता हुआ Jio का 123 रुपये वाला रिचार्ज, मिलेगी कॉलिंग जैसी काफी सुविधाएं
टेक्नोलॉजी: Jio का सबसे सस्ता रिचार्ज पैक है और यह पूरे 28 दिनों तक चलता है। जानिए इस रिचार्ज पैक के बारे में पूरी जानकारी। इस रिचार्ज पैक के साथ 0.5GB 4G हाई स्पीड डेटा प्रतिदिन मिलता है जो हल्की ब्राउजिंग के लिए काफी बेहतर है। इस रिचार्ज पैक के साथ 0.5GB 4G हाई स्पीड डेटा प्रतिदिन मिलता है जो हल्की ब्राउजिंग के लिए काफी बेहतर है।
इस रिचार्ज पैक के साथ 28 दिनों के लिए अनलिमिटेड वॉइस कॉलिंग मिलती है जिससे आप लोकल और STD Call आसानी से कर सकते हैं। इस रिचार्ज पैक के साथ 0.5GB 4G हाई स्पीड डेटा प्रतिदिन मिलता है। जो हल्की ब्राउंजिंग के लिए काफी अच्छी है। इस रिचार्ज पैक के साथ 28 दिनों के लिए अनलिमिटेड वॉइस कॉलिंग मिलती है। इससे आप लोकल और STD कॉल आसानी से कर सकते हैं।
125 रुपये का रिचार्ज 28 दिन की वैलिडिटी और 300 sms का कोटा के साथ आता है। यह रिचार्ज पैक Jio Phone और Jio 4G फीचर फोन इस्तेमाल करने वाले यूजर्स के लिए हैं। इस रिचार्ज के साथ Jio Tv, Jio Cinema और गाने सुनने के लिए Jio Saavan का फ्री एक्सेस भी मिलता है। इस फोन में Jio Pay की मदद से आप UPI Payment और ऑनलाइन शॉपिंग भी कर सकते हैं।
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क्या AI छिन लेगा लोगों की नौकरियां, सर्वे में सामने आई Details, Expert ने किया Alert
टेक्नोलॉजी: Anthropic की एक नई स्टडी में यह सामने आया है कि जो लोग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सबसे ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं। वही अपनी नौकरी को लेकर सबसे ज्यादा असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। यह शोध कंपनी के चैटबॉट Claude के करीबन 81,000 यूजर्स के सर्वे पर आधारित है। इसमें यह समझने की कोशिश की गई है कि एआई के बढ़ते प्रभाव से कर्मचारियों की सोच और काम करने का तरीका कैसे बदल रहा है।एआई बढ़ने से होगा नौकरी का डर
रिपोर्ट्स के अनुसार, जिन नौकरियों में एआई का इस्तेमाल ज्यादा हो रहा है। वहां काम करने वाले लोगों में नौकरी जाने का डर भी ज्यादा देखा गया है। खासतौर पर सॉफ्टवेयर से जुड़े पेशों में काम करने वाले लोग टीचिंग जैसे कम एआई-आधारित क्षेत्रों की तुलना में ज्यादा चिंतित दिखे। करियर की शुरुआत कर रहे युवाओं में यह डर और भी गहरा है। लगभग हर पांच में से एक व्यक्ति ने माना कि एआई के कारण से भविष्य में नौकरी पर असर पड़ेगा। जिन लोगों के काम में एआई का दखल सबसे ज्यादा है वो बाकी लोगों के मुकाबले तीन गुना ज्यादा नौकरी खोने की चिंता जताते हैं।एआई में काम बनाया आसान
खास बात यह है कि चिंता के बाद भी कई लोग मानते हैं कि एआई ने उनके काम को पहले से ज्यादा आसान बना दिया है। उत्पादकता के पैमाने पर ज्यादातर यूजर्स ने खुद को बेहतर महसूस किया। कई लोगों ने बताया कि जो काम पहले महीनों में होता था। अब कुछ ही दिनों में पूरा हो रहा है। कुछ का कहना है कि घंटों का काम अब आधे समय में निपट जाता है हालांकि थोड़े यूजर्स ऐसे भी हैं जिन्हें एआई से खास फायदा महसूस नहीं हुआ है।हर वर्ग को मिला फायदा
इस बदलाव का असर सिर्फ एक वर्ग तक ही सीमित नहीं है। ज्यादा सैलरी पाने वाले और कम आय वाले दोनों तरह के कर्मचारियों ने एआई से फायदा मिलने की बात कही है। कस्टमर सर्विस से जुड़े लोग बताते हैं कि एआई की मदद से जवाब देने में समय बच रहा है वहीं फ्रीलांसर और गिग वर्कर्स का कहना है कि इससे उन्हें छोटे-छोटे बिजनेस शुरु करने में मदद मिल रही है जैसे ऑनलाइन स्टोर सा सर्विसेस।क्या AI बनेगा खतरा?
एआई का बढ़ता दायरा एक ओर काम को तेज और आसान बना रहा है। वहीं दूसरी ओर लोगों के मन में असुरक्षा भी पैदा हो रही है। यही कारण है कि अब यह सवाल उठने लगा है कि आने वाले समय में एआई नौकरी के लिए खतरा बनेगा या नए अवसर पैदा करेगा। आखिरकार इसका असर इश बात पर निर्भर करेगा कि लोग और सरकारें इस तकनीक का इस्तेमाल किस तरह करती है। क्योंकि सही दिशा में इस्तेमाल किया जाए तो एआई भविष्य को बेहतर ही बनाएगा। -

सिर्फ एक Click में बंद हो जाएगा Gmail, Experts ने Airtel और Jio के यूजर्स को दी चेतावनी
टेक्नोलॉजी: आजकल जियो और एयरटेल अपने कई रिचार्ज प्लान्स के साथ Google One की फ्री स्टोरेज दे रहे हैं। पहली नजर में यह ऑफर काफी आकर्षक लगता है क्योंकि बिना अतिरिक्त पैसे दिए आपको बड़ी स्टोरेज मिल जाती है लेकिन अगर इसका इस्तेमाल सोच समझकर नहीं किया गया तो आगे चलकर यही सुविधा परेशानी का कारण बन सकती है। इन प्लान्स में कई बार 6 महीने से लेकर 18 महीने तक 1TB या 2TB तक की स्टोरेज मिलती है। अक्सर यूजर्स इस स्पेस को भरने में देर नहीं लगाते। असली समस्या तब आती है जब फ्री अवधि खत्म हो जाती है। यदि आप उसी स्टोरेज को जारी रखना चाहते हैं तो आपको महंगा सब्सक्रिप्शन लेना पड़ता है। यदि भुगतान नहीं किया गया तो आपकी क्लाउड सेवाएं सीमित हो सकती है। इससे कामकाज प्रभावित होने लगता है।डेटा स्टोर किया तो हटाना होगा आसान
G-mail, Google Drive और Google Photos एक ही स्टोरेज सिस्टम पर चलते हैं। सामान्य तौर पर हर यूजर को 15 GB फ्री स्पेस मिलता है। जब यह सीमा पार हो जाती है तो नए ईमेल आना बंद हो सकते हैं। फाइल अपलोड नहीं हो पाती और फोटो बैकअप भी रुक जाता है। यदि अपने पहले से बहुत ज्यादा डेटा स्टोर कर लिया है तो उसे हटाना भी आसान नहीं होता। अक्सर सबसे ज्यादा स्पेस फोटो और वीडियो लेते हैं। यदि गूगल फोटोज में ऑटो बैकेअप चालू है तो आपके फोन का हर मीडिया फाइल अपने आप क्लाउड में सेव होता रहता है। यही कारण है कि स्टोरेज बहुत तेजी से भर जाती है। समझदारी इसी बात में जरुरत न होने पर बैकअप फीचर को बंद कर दिया जाए ताकि बेवजह डेटा जमा न हो।इसलिए होता है फ्री क्लाउड स्पेस का इस्तेमाल
फ्री क्लाउड स्पेस का इस्तेमाल सिर्फ जरुरी चीजों के लिए करना ही बेहतर होता है। महत्वपूर्ण डॉक्युमेंट्स, बैंकिंग फाइल्स या चुनिंदा फोटो वीडियो ही सेव करें। हर छोटी बड़ी फाइल को क्लाउड पर डालना से आगे मुश्किलें बढ़ सकती हैं। यदि जरुरी हो तो आप डेटा को खुद चुनकर अपलोड करें। इससे स्टोरेज कंट्रोल में रहती है। फ्री स्टोरेज एक अच्छी सुविधा है लेकिन बिना प्लानिंग के इसका इस्तेमाल आपको परेशआनी में डाल सकता है। थोड़ी सावधानी और सही मैनेजमेंट से आप न सिर्फ अपनी Gmail ID को सुरक्षित रख सकते हैं बल्कि बेवजह के खर्च से भी बच सकते हैं। -

फेमस कंपनी Apple में बड़ा बदलाव, 15 साल बाद Tim Cook छोड़ रहे अपना पद
अब कंपनी की कमान संभालेंगे जॉन टर्नस
टेकनोलॉजी: दुनिया की सबसे बड़ी और मशहूर कंपनी Apple में बड़ा बदलाव हुआ है। पिछले करीबन 15 साल से कंपनी की जिम्मेदारी संभाल रहे Tim Cook अब पीछे हट रहे हैं और उनकी जगह अब जॉन टर्नस को दी जा रही है। पहली नजर में यह एक नॉर्मल बदलाव लग सकता है परंतु असल में यह फैसला सच में एक बड़े बदलाव की ओर इशारा कर रहा है। बता दें कि यह सिर्फ एक शख्स का पद को छोड़ना नहीं बल्कि उस दौरान का भी अंत है जिसमें एप्पल ने स्टेब्लिटी और प्रॉफिट पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया। अब कंपनी एक ऐसे समय में जा रही है जहां उसे खुद को फिर से साबित करना पड़ेगा।Read In English : https://encounternews.in/world/tim-cook-to-step-down-as-apple-ceo-john-ternus-named-successor/
जब टिम कुक ने 2011 में स्टीव जॉब्स के बाद कंपनी की जिम्मेदारी संभाली थी। तब बहुत लोगों को शक था कि ऐपल आगे बढ़ पाएगा या नहीं लेकिन उन्होंने कंपनी को एक नई ऊंचाई तक पहुंचाया। Iphone को पूरी दुनिया में फैलाना, कंपनी की सप्लाई सिस्टम को मजबूत बनाना और सेवाओं के जरिए कमाई का नया रास्ता बनाना ये सब उनके टेन्योर में हुआ है परंतु इस कामयाबी के बीच एक बदलाव धीरे-धीरे दिखने लगा। कंपनी नए बड़े एक्सपेरिमेंट कम करने लगी और ज्यादा ध्यान इस बात पर गया कि जो पहले से है और बेहतर कैसे बनाया जाए। यही कारण है कि पिछले कुछ सालों में एप्पल के प्रोडक्ट्स बहुत जरुरी हुए हैं। उनमें यह बड़ा बदलाव नहीं दिखा जिसने पहले दुनिया का चौंकाया था।क्या होगा ऐपल का फ्यूचर?
आईफोन आज भी कंपनी का सबसे बड़ा सहारा है परंतु इसकी बढ़त अब पहले जैसी नहीं रही। हर साल छोटे-छोटे बदलाव हो रहे हैं परंतु कोई बड़ा चेंज नहीं दिख रहा है। आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इसको बदल सकता है। फोन सिर्फ कॉल या ऐप चलाने का साधन नहीं रहेगा बल्कि यह यूजर को समझाने वाला एक साथी बन सकता है। दूसरा बड़ा बदलाव Siri में देखने को मिल सकता है। अब ऐपल को सीरी को पूरी तरह से नया बनाना होगा। उसे सिर्फ आवाज पहचानने वाला सिस्टम नहीं बल्कि समझदारी से फैसले लेने वाला सिस्टम बनाना होगा। अगर ऐसा नहीं हुआ तो ऐपल और पीछे रह सकता है।