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  • Earthquake : मलबे में दबे पूर्व फुटबॉलर को जिंदा निकाला बाहर

    Earthquake : मलबे में दबे पूर्व फुटबॉलर को जिंदा निकाला बाहर

    नई दिल्ली: तुर्की में आए विनाशकारी जलजले में सबकुछ बिखर गया।  कई जिंदगियां फना हो गईं। अभी भी सैकड़ों लोग मलबे में दबे हैं। लेकिन कुछ खुशकिस्मत हैं, जिन्हें दोबारा जिंदगी नसीब हुई। ऐसे ही एक किस्मतवाले हैं घाना के पूर्व इंटरनेशनल फुटबॉल खिलाड़ी क्रिश्चियन अत्सु। घाना का ये विंगर उस वक्त तुर्की में ही था, जब रिक्टर स्केल पर 7 से अधिक तीव्रता का भूकंप आया। वो एक इमारत के 9वें फ्लोर पर था. भूकंप के झटके से इमारत ताशों के पत्तों की तरह गिर गई और वो मलबे में दब गया था।

    राहत और बचाव दल ने मलबे से कोई लोगों को निकाल लिया था। लेकिन, अत्सु की कोई खोज खबर नहीं मिल पा रही थी। हालांकि, अब यह खबर आई है कि अत्सु को भी मलबे से जिंदा निकाल लिया गया है। कई घंटों तक मलबे के नीचे दबे होने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और आखिरकार बचाव दल ने उन्हें खोज निकाला और जिंदा बाहर निकाल लिया। वो आखिरी बार 2019 में घाना की तरफ से खेलने के लिए चुने गए थे. लेकिन, अब तक आधिकारिक तौर पर इंटरनेशनल फुटबॉल से संन्यास नहीं लिया है। 

  • इस गांव के घर-घर में है हवाई जहाज, प्लेन पर उड़कर जाते हैं ऑफिस!

    इस गांव के घर-घर में है हवाई जहाज, प्लेन पर उड़कर जाते हैं ऑफिस!

    कैलिफोर्नियाः आजकल हर किसी के घर में या तो गाड़ी या फिर बाइक होती है। कहीं भी जाना हो, वे गाड़ी निकालकर चल पड़ते हैं। आज हम आपको जिस गांव के बारे में बताने वाले हैं, वहां लोगों के पास गाड़ी नहीं, सीधा हवाई जहाज रहता है। उनके लिए ये उतना ही सामान्य है, जितना हमारे लिए गाड़ियां। दफ्तर जाने से लेकर परिवार के साथ खाना खाने जाने के लिए भी ये लोग हवाई जहाज का ही इस्तेमाल करते हैं। आपको सुनने में अजीब लग रहा होगा लेकिन अमेरिका के कैलिफोर्निया में ऐसा गांव मौजूद है, जहां पर हर किसी के घर के सामने एक एयरक्राफ्ट खड़ा रहता है। इन्हें कहीं भी जाना हो, गाड़ी की तरह सीधा प्लेन निकल पड़ता है। ये गांव चर्चा में तब आया, जब इससे जुड़े हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे। यहां की लड़कों की चौड़ाई देखकर आपको रनवे जैसी फीलिंग आएगी।

    कैलिफोर्निया में कैमरन एयर पार्क नाम की ये जगह, आम गावों से अलग है। यहां चौड़ी-चौड़ी सड़कें बनी हैं, ताकि इनका इस्तेमाल रनवे की तरह हवाई अड्डे तक पहुंचने के लिए किया जा सके। इस गांव के हर घर के बाहर गैराजी तरह ही हैंगर बने हुए हैं, जहां वे अपने एयरक्राफ्ट को खड़ा करते हैं। लोगों को कहीं भी जाना होता है, वे हवाई जहाज से ही जाते हैं। दिलचस्प बात ये भी है कि यहां रहने वाले ज्यादातर लोग पायलट हैं और अपने एयरक्राफ्ट को वे खुद ही उड़ाते हैं।

    ये एक तरह की फ्लाई इन कम्युनिटी है, जहां शनिवार की सुबह इकट्ठा होकर लोग साथ में लोकल एयरपोर्ट तक जाते हैं। एक अनुमान के मुताबिक अमेरिका में ऐसे 610 एयर पार्क हैं, जहां घर-घर में प्लेन मौजूद है। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जो एयरफील्ड बने थे, उन्हें बदला नहीं गया और उन्हें रेसिडेंशियल एयर पार्क बना दिया गया। यहां रिटायर्ड मिलिट्री पायलट रहते हैं। 1946 के दौरान अमेरिका में कुल 4 लाख पायलट थे, जिन्होंने इन एयर पार्क्स में रहना शुरू किया। कैमरन पार्क साल 1963 में बना था और यहां कुल 124 घर हैं। यहां सड़कों के नाम भी एयरक्राफ्ट्स के नाम पर ही रखे गए हैं और स्ट्रीट साइन भी एयरक्राफ्ट फ्रेंडली बनाए गए हैं।

  • नशे के खिलाफ पुलिस को मिली बड़ी सफलता, करोड़ों रुपए की कोकीन बरामद

    नशे के खिलाफ पुलिस को मिली बड़ी सफलता, करोड़ों रुपए की कोकीन बरामद

    न्यूज़ीलैंडः पुलिस को नशे के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल हुई है। पुलिस ने समुद्र में तैरता हुआ 3.2 टन कोकीन बरामद किया, जिसकी कीमत 30 करोड़ डॉलर है। पुलिस ने कहा कि उन्होंने कोकीन के करीब 19 बंडल जब्त किए हैं। पुलिस ने कहा कि उसने न्यूजीलैंड सीमा शुल्क सेवा और न्यूजीलैंड रक्षा बल के साथ एक संयुक्त अभियान में प्रशांत महासागर से ड्रग्स एकत्र किया। पुलिस ने बरामद कोकीन की तस्वीरें भी साझा कीं।

    फिलहाल पुलिस ने इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं की है। रोडनी और वेस्ट ऑकलैंड पुलिस नॉर्थ कोस्ट डिटेक्टिव इंस्पेक्टर कॉलिन परमेंटर ने एक बयान में कहा कि पुलिस ने लगभग 19 बंडल देखे और जांच करने पर उन्होंने कोकीन की मौजूदगी की पुष्टि की।

    पुलिस आयुक्त एंड्रयू कोस्टर ने एक बयान में कहा कि यह इस देश में अधिकारियों द्वारा जब्त की गई अवैध दवाओं की सबसे बड़ी खेप थी। न्यूज़ीलैंड सीमा शुल्क सेवा के कार्यवाहक नियंत्रक बिल पेरी के अनुसार, ज़ब्त कोकीन का मूल्य 500 मिलियन न्यूज़ीलैंड डॉलर ($320 मिलियन) है। पुलिस यह पता लगाने के लिए समुद्र तट और उसके आसपास के इलाकों में हेलीकॉप्टरों और गश्ती नौकाओं की मदद से तलाशी ले रही है ताकि पता लगाए जा सके कि यह बंडल कहां से आए।

  • फ्लाइट में मामूली विवाद को लेकर यात्रियों में झड़प, देखें वीडियो 

    फ्लाइट में मामूली विवाद को लेकर यात्रियों में झड़प, देखें वीडियो 

    नई दिल्लीः इन दिनों फ्लाइट में मारपीट की घटनाओं की कई वीडियो सामने आई , जिसके बाद आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई भी हुई है। इसी कड़ी में एक नया वीडियो सामने आया है, जिसमें विडों सीट के लिए एक महिला और एक यात्री के बीच पहले झगड़े हुआ फिर, गाली गलौज और आखिर में मामला मारपीट तक पहुंच गया। लेकिन इस बार यह वीडियो भारत का नहीं बल्कि ब्राजील में यात्रियों के बीच हुई मारपीट का है। महिला और पुरुष यात्रियों के बीच भी इस दौरान जमकर लात घूंसे चले, जिसका वीडियो अब तेजी से वायरल हो रहा है। 

    फ्लाइट में पहुंचकर महिला ने मांगी थी विंडो सीट

    फ्लाइट में मारपीट का वीडियो सामने आने के बाद कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की है , जिसके अनुसार , यह घटना 2 फरवरी की है। फ्लाइट संख्या जी3-1659 के टेकऑफ के पहले ही हंगामा मच जब फ्लाइट एक जगह से दूसरी जगह जा रही थी। असल में एक महिला विंडो सीट के लिए अड़ गई और दूसरे यात्री की सीट पर बैठने की हठ कर बैठी।  वह अपने बच्चे के साथ वहां पहुंची थी। ऐसे में महिला ने पुरुष यात्री से विंडो सीट पर बैठने का अनुरोध किया, जिसपर शख्स ने साफ मना कर दिया। 

    दोनों के बीच हुई कहासुनी

    पुरुष यात्री द्वारा महिला को विंडो सीट देने से मना करने पर महिला यात्री गुस्सा हो गई। ऐसे में दोनों के बीच कहासुनी हो गई। पहले दोनों झगड़े फिर दोनों ने एक दूसरे को अपशब्द कहें और फिर आलम यह आ गया कि दोनों हाथापाई पर उतर आए। असल में दोनों यात्रियों के परिजन भी इस फ्लाइट में थे, जो इस लड़ाई को खत्म करने के बजाए इस लड़ाई में शामिल हो गए। इसके बाद दोनों तरफ से लोग आपस में लात घूसे चलाने लगे। 

    दो घंटे तक हंगामा

    इस पूरे हंगामे ने थमने का नाम नहीं लिया और एयरलाइंस का स्टाफ दोनों पक्ष के लोगों को शांत कराने में जुटा रहा। इस पूरे हंगामे के चलते फ्लाइट दो घंटे लेट हुई। अंत में फ्लाइट के कैप्टन ने पूरे मामले को शांत करवाया। इस घटना को लेकर एयरलाइंस ने भी एक बयान जारी किया और फ्लाइट के लेट होने के साथ ही घटना की जानकारी दी।

  • कार से भयानक टक्कर के बाद खाई में गिरी बस, 30 की मौत, देखें तस्वीरें

    कार से भयानक टक्कर के बाद खाई में गिरी बस, 30 की मौत, देखें तस्वीरें

    पेशावरः उत्तर-पश्चिमी पाकिस्तान के पेशावर में एक भीषण सड़क हादसे की खबर है। देर रात को एक बस और कार की टक्कर हो गई। इसके बाद बस के गहरी खाई में गिर जाने से कम से कम 30 लोगों की मौत हो गई है। वहीं इस भयंकर सड़क दुर्घटना में 15 लोग घायल हुए हैं। यह एक सप्ताह से भी कम समय में इस तरह की दूसरी घातक दुर्घटना है।

    न्यूज एजेंसी के अनुसार दुर्घटना गिलगित बाल्टिस्तान इलाके के दिआमीर क्षेत्र में शतियाल चौक के पास हुई। स्थानीय पुलिस के अनुसार बस गिलगित से रावलपिंडी की ओर जा रही थी। तभी शतियाल इलाके से विपरीत दिशा से आ रही कार से उसकी आमने-सामने टक्कर हो गई। इसके बाद दोनों वाहन गहरी खाई में गिर गई। सूचना मिलने के बाद पुलिस और बचाव अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे और घायलों और शवों को आरएचसी अस्पताल पहुंचाया गया।

    पुलिस अधिकारियों ने बताया कि बचावकर्मियों को अंधेरे के कारण राहत एवं बचाव कार्य में दिक्कत का सामना करना पड़ा। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस दुर्घटना में लोगों की मौत पर शोक जताया है। सरकारी ‘रेडियो पाकिस्तान’ के अनुसार, प्रधानमंत्री शरीफ ने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जताई है और मृतकों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की है। उन्होंने अधिकारियों को घायल का उचित इलाज सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने भी दुर्घटना में लोगों की मौत पर शोक जताया है।

  • भीषण तबाही के बीच फिर लगे भूकंप के झटके, 4300 से अधिक लोगों की हो चुकी मौत

    भीषण तबाही के बीच फिर लगे भूकंप के झटके, 4300 से अधिक लोगों की हो चुकी मौत

    तुर्कीः भीषण तबाही के बीच एक बार फिर भूकंप के झटके महसूस किए गए। मंगलवार सुबह आए झटकों की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 5.5 मापी गई। यूएस जियोलॉजिकल सर्वे की वेबसाइट के मुताबिक मंगलवार को भी भूकंप का बड़ा झटका तुर्की में महसूस किया गया है। वेबसाइट के अनुसार, यह झटका सुबह करीब पौने नौ बजे दर्ज किया गया, जिसकी रिक्टर स्केल पर तीव्रता 5.5 रही। भूकंप में मरने वाले लोगों का कुल आंकड़ा बढ़कर 4300 के पार पहुंच गया है। वहीं सीरिया में भूकंप से हुई तबाही से अभी तक 1444 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। भूगर्भ वैज्ञानिकों का कहना है कि बड़े भूकंप के झटकों के बाद भी तुर्की और सीरिया के सीमाई इलाके में करीब 100 भूकंप के झटके महसूस किए गए। 

    सोमवार को आए भूकंप के झटकों से तुर्की और सीरिया में करीब चार हजार से ज्यादा इमारतें ध्वस्त हो गई हैं। जिनमें दबकर बड़ी संख्या में लोगों की मौत की मौत हुई है। डब्लूएचओ के वरिष्ठ अधिकारियों का अनुमान है कि इस भूकंप में 20 हजार से ज्यादा लोगों की जान गई है। राहत और बचाव कार्य जारी हैं और भारत समेत दुनिया के कई देशों ने तुर्की की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है। भारत ने एनडीआरएफ की दो टीमें डॉग स्कवाडय के साथ तुर्की रवाना की हैं। इसके अलावा मेडिकल सप्लाई भी भेजी गई है। 

    तुर्की में आए भूकंप के बाद नीदरलैंड के एक वैज्ञानिक का ट्वीट सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। दरअसल इस ट्वीट में वैज्ञानिक ने तुर्की में बड़ा भूकंप आने की चेतावनी दी थी, जो कि सच साबित हुई। डच वैज्ञानिक फ्रैंक हूजरबीट्स, सोलस सिस्टम जियोमैट्री सर्वे नामक इंस्टीट्यूट में रिसर्चर हैं। उन्होंने शुक्रवार को ट्वीट कर लिखा था कि जल्दी या देर से, केंद्रीय तुर्की और जॉर्डन सीरिया के इलाके में 7.5 मैग्नीट्यूड का भूकंप आ सकता है। 

  • 10 घंटे में तीसरी बार भूकंप के लगे तेज झटके, 100 सालों की सबसे बड़ी आपदा!

    10 घंटे में तीसरी बार भूकंप के लगे तेज झटके, 100 सालों की सबसे बड़ी आपदा!

    तुर्की में सोमवार को तीसरी बार भूंकप के झटके महसूस किए गए। इस बार भूकंप की रिक्टर पैमाने  पर तीव्रता 6 मापी गई है। ये झटके पांच बजकर 32 मिनट पर महसूस किए गए इससे पहले भारतीय समयानुसार तीन बजकर 54 मिनट पर भी भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए थे। जिसकी रिक्टर पैमाने पर तीव्रता 7.5 मापी गई। तुर्की और सीरिया में अब तक भूकंप से 1500 से अधिक लोगों की मौत हो गई है। उसका केंद्र अंकारा से 427 किलोमीटर दूर जमीन से 10 किमी. अंदर था। प्रारंभिक भूकंप के बाद 50 से अधिक आफ्टरशॉक्स आए, जिसमें 7.5-तीव्रता का झटका भी शामिल है। 

    वहीं, तुर्की की एक समाचार एजेंसी ने देश की आपदा एजेंसी का हवाला देते हुए रिपोर्ट दी कि दक्षिणी तुर्की में कहारनमारास प्रांत के एलबिस्तान जिले में 7.6 तीव्रता का एक और ताजा भूकंप आया है। इसका असर सीरिया के दमिश्क, लताकिया अन्य सीरियाई प्रांतों में भी महसूस किया गया। 

    1960 में इतिहास में सबसे बड़े भूकंपों में चिली में किया गया था दर्ज 

    साल 1952 में रूस में कामचटका प्रायद्वीप के पास 9.0 तीव्रता का भूकंप आया था। इसमें 2,000 से अधिक लोग मारे गए थे। यह भूंकप एक बड़ी सुनामी का कारण बना. इसकी लहरें पेरू, चिली और न्यूजीलैंड तक पहुंच गई थी। लेकिन सबसे ज्यादा नुकसान हवाई द्वीपों में हुआ। हाल के इतिहास में सबसे बड़े भूकंपों में से एक मई 1960 में बायो-बायो, चिली में दर्ज किया गया था। 9.4 और 9.6 की तीव्रता वाले इस भूकंप ने लगभग 10 मिनट तक जमीन को हिलाया था। इस भूकंप ने लगभग 6000 लोगों की जान ली थी। इसे अब तक दर्ज किया गया सबसे अधिक तीव्रता वाला भूकंप माना जाता है।

    इस भूकंप से लगभग 300 करोड़ यूएस डॉलर से लेकर 700 करोड़ यूएस डॉलर का नुकसान हुआ था। इसके बाद भूकंप 1964 में गुड फ्राइडे के दिन आया था। ग्रेट अलास्कन भूकंप की तीव्रता 9.2 थी और यह 5 मिनट से थोड़ा कम समय तक चला और इसे उत्तरी अमेरिका में दर्ज अब तक का सबसे शक्तिशाली भूकंप माना जाता है। झटके से केवल नौ लोगों की मौत हुई, लेकिन दुनिया भर में इसके परिणामस्वरूप आई सुनामी में 100 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। भूकंप से सुनामी की लहरें अंटार्कटिका तक पहुंच गई थीं और पेरू, मेक्सिको, जापान और न्यूजीलैंड के साथ-साथ अन्य तटीय क्षेत्रों में भी देखी गई थी।

    एनडीआरएफ और मेडिकल टीम भेजी जाएंगी तुर्की 

    प्रधानमंत्री मोदी के निर्देश पर तुर्की को तत्काल सहायता देने के मुद्दे पर प्रधानमंत्री के मुख्य सचिव पीके मिश्रा ने अहम बैठक बुलाई। बैठक में तय हुआ है कि सर्च और रेस्क्यू अभियान के लिए एनडीआरएफ और मेडिकल टीम तुर्की भेजी जाएंगी। इसके साथ राहत सामग्री भी जल्द से जल्द टुर्की के लिए रवाना की जाएगी। एनडीआरएफ की दो टीमों में 100 जवान होंगे। इनमें डॉग स्क्वायड भी शामिल हैं। इसके अलावा ये टीमें जरूरी उपकरण भी अपने साथ ले जाएंगी। मेडिकल टीम में डॉक्टर, अन्य स्टाफ और जरूरी दवाएं होंगी।

    तुर्की में 1999 में आए भूकंप में 18000 लोगों की हुई थी मौत

    तुर्की की भौगोलिक स्थिति के चलते यहां अक्सर भूकंप आते रहते हैं। यहां 1999 में आए भूकंप में 18000 लोगों की मौत हो गई थी। अक्टूबर 2011 में आए भूकंप में 600 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। तुर्की में आज आए भूकंप की बराबर तीव्रात का भूकंप इससे पहले 1939 में आया था। उसमें 32,700 से ज्यादा लोग मारे गए थे।

  • 7.8 तीव्रता से लगे भूकंप के झटकों से भारी तबाही, कई लोगों की मौत

    7.8 तीव्रता से लगे भूकंप के झटकों से भारी तबाही, कई लोगों की मौत

    इस्तांबुलः तुर्की और सीरिया में 7.8 तीव्रता के भीषण भूकंप के दो झटकों से बड़ी तबाही आई है। तुर्की और सीरिया में भूकंप से सैकड़ों लोगों की मौत हो गई और कई इमारतें ध्वस्त हो गईं। तुर्की में भूकंप से अब तक 76, तो सीरिया में 86 मौतों की पुष्टि हुई है। बड़े पैमाने पर बचाव एवं राहत कार्य चल रहा है। मौतों का आंकड़ा बढ़ने का अनुमान है। सैकड़ों लोग घायल हुए हैं। दोनों देशों में न जानें कितनी ही इमारतें जमींदोज हो चुकी हैं, जिनके मलबे में लोग फंसे हुए हैं। इधर इटली में सुनामी का अलर्ट जारी हुआ है। भूकंप ने दक्षिण तुर्की के गजिएनटेप शहर को दहला दिया है।

    तुर्की की इमरजेंसी सर्विस ने कहा कि 7.8 तीव्रता के भूकंप से सात प्रांतों में कम से कम 76 लोगों की मौत हुई है और 440 लोग घायल हुए हैं। तुर्की में आए भीषण भूकंप के असर से सीरिया में 86 लोगों क मौत हो गई और 200 लोग घायल हुए हैं। यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे ने सोमवार को कहा कि दक्षिणी तुर्की में 7.8 तीव्रता का भूकंप आया है। यूएसजीएस के मुताबिक भूकंप जमीन से करीब 24.1 किलोमीटर (14.9 मील) की की गहराई पर आया है। इसका केंद्र तुर्की के गाजियांटेप प्रांत के नूरदागी से 23 किलोमीटर (14.2 मील) पूर्व में स्थित है। यूएसजीएस ने कहा कि मध्य तुर्की में इस भूकंप के आने के बाद तगड़े झटके महसूस किए गए हैं। पहले भूकंप के लगभग 11 मिनट बाद 9.9 किलोमीटर की गहराई में 6.7 तीव्रता का एक और भूकंप आने की खबर है।

    तुर्की में ये भूकंप सोमवार (6 फरवरी) को सुबह 6.47 बजे गाजियांटेप के करीब आया। इसका असर साइप्रस, तुर्की, ग्रीस, जॉर्डन, लेबनान, सीरिया, इराक और जॉर्जिया तक महसूस किया गया. सोमवार तड़के आए भूकंप से हुए नुकसान और हताहतों के बारे में अब जानकारी मिलने लगी है। सोशल मीडिया पर शेयर किए गए वीडियो और फोटो से लगता है कि भारी पैमाने पर तबाही और जानमाल के नुकसान की आशंका है। तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोवन ने ट्विटर पर कहा कि भूकंप से असर वाले इलाकों में खोज और बचाव दलों को तुरंत भेज दिया गया। एर्दोवन ने कहा कि खोज और बचाव दल लगातार काम कर रहे हैं। उम्मीद है कि इस आपदा से हम जल्द से जल्द और कम से कम नुकसान के साथ निपट लेंगे।

    तुर्की का दक्षिणी इलाका गजियांटेप एक प्रमुख औद्योगिक और विनिर्माण केंद्रों में से एक है, जिसकी सीमा सीरिया से लगती है। गौरतलब है कि तुर्की दुनिया के सबसे ज्यादा सक्रिय भूकंप के इलाकों में से एक है। तुर्की में 1999 में 7.4 तीव्रता के भूकंप से इस्तांबुल में लगभग 1,000 सहित 17,000 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। एक्सपर्ट लंबे समय से चेतावनी देते आ रहे हैं कि एक बड़ा भूकंप इस्तांबुल को तबाह कर सकता है। क्योंकि वहां सुरक्षा सावधानियों के बिना बड़े पैमाने पर निर्माण की मंजूरी दी गई है।

  • अमेरिकी वीजा के लिए लम्बा इंतजार खत्म, नया नियम लागू

    अमेरिकी वीजा के लिए लम्बा इंतजार खत्म, नया नियम लागू

    नई दिल्लीः अमेरिका का वीजा पाने के लिए भारतीयों को अपॉइंटमेंट प्राप्त करने में 500 से अधिक दिनों का लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। बैकलॉग को कम करने के प्रयासों के बावजूद लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि इस समय को कम करने के लिए अमेरिकी दूतावास अब एक नया तरीका भी लेकर आया है। भारत में अमेरिकी दूतावास ने रविवार को कहा कि जो भारतीय विदेश यात्रा कर रहे हैं, वे उस जगह के अमेरिकी दूतावास या वाणिज्य दूतावास से वीजा अपॉइंटमेंट प्राप्त कर सकते हैं।

    अमेरिकी दूतावास ने थाईलैंड का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां भारतीय यात्री बी1 और बी2 वीजा (यात्रा और कारोबार) के लिए अपॉइंटमेंट हासिल कर सकते हैं। वीजा प्राप्त करने के प्रोसेस में होने वाली देरी को कम करने के लिए अमेरिका ने हाल ही में नई पहल शुरू की, जिसमें पहली बार अमेरिका जाने वाले लोगों के लिए Special Interview आयोजित करना और कांसुलर स्टाफ की संख्या बढ़ाना शामिल है। वीजा बैकलॉग को कम करने के लिए दिल्ली में अमेरिकी दूतावास, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता और हैदराबाद में वाणिज्य दूतावासों ने भी 21 जनवरी को “विशेष शनिवार साक्षात्कार दिवस” ​​​​आयोजित किया था।

    आपको बता दें कि अमेरिकी विदेश विभाग ने पिछले दिनों अमेरिकी वीजा के आवेदकों के लिए कई तरह की छूट का भी प्रावधान किया है। साथ ही भारत में अमेरिकी मिशन ने दो सप्ताह पहले 2,50,000 से अधिक अतिरिक्त बी1/बी2 अपॉइंटमेंट जारी किए। गौरतलब है कि भारत उन कम देशों में से एक था जहां कोरोनोवायरस से संबंधित यात्रा प्रतिबंध हटाए जाने के बाद अमेरिकी वीजा के लिए आवेदनों में बड़ी तेजी देखी गई।

  • पूर्व राष्ट्रपति का हुआ निधन, दुबई के अस्पताल में ली अंतिम सांस

    पूर्व राष्ट्रपति का हुआ निधन, दुबई के अस्पताल में ली अंतिम सांस

    नई दिल्ली। पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ का दुबई में निधन हो गया. परवेज मुशर्रफ गंभीर बीमारियों के शिकार थे. मुशर्रफ 2001 से 2008 तक पाकिस्तान के राष्ट्रपति रहे. इसके पहले वो आर्मी चीफ भी रहे चुके थे. परवेज मुशर्रफ को करगिल की जंग के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया जाता है. उन्होंने ही पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री मियां नवाज शरीफ का तख्तापलट किया था.

    आपको बताते चलें कि मुशर्रफ मार्च 2016 में इलाज कराने के लिए दुबई गए थे, तभी से वह वहीं अपना इलाज करा रहे थे. इसके पहले भी कई बार उनकी मौत की खबर आ चुकी थीं लेकिन तब उनके परिवार ने उन खबरों का खंडन किया था. लंबी बीमारी के दौरान वो कई बार वेंटिलेटर पर रहे. लेकिन इस बार वो जिंदगी की जंग हार गए.

    पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ को फांसी की सजा सुनाई गई है. पाकिस्तान के इतिहास में पहली बार पेशावर हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस वकार अहमद सेठ की अध्यक्षता में विशेष अदालत की तीन सदस्यीय पीठ ने ऐसी सजा सुनाई थी.