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  • इन 5 राशि वालों को मिलता हैं बेस्ट लाइफ पार्टनर

    हर कोई अपने जीवन में करियर, अच्छी नौकरी चाहता है। इन सब के अलावा सब की चाह होती है कि उसे बेस्ट लाइफ पार्टनर मिले जिसके साथ वह अपने जीवन के सुख-दुख को बांट सके। इंसान की लव लाइफ का संबंध ज्योतिष से भी होता है। ज्योतिष शास्त्र में जैसे करियर, नौकरी, आर्थिक स्थिति के बारे में बताया जाता है वैसे ही दांपत्य जीवन या लव लाइफ के बारे में बताया गया है। हम आपको ऐसी 5 राशियों के बारे में बताएंगे जिन्हें जीवन में अच्छे लाइफ पार्टनर मिलते हैं।

    वृषभ राशि वाले रहें इन 3 राशि वालों से सावधान | vrishabha rashi ke shatru

    वृषभ राशि का स्वामी ग्रह शुक्र होते हैं। इस ग्रह के कारण वृषभ राशि के जातकों में दूसरे लोगों को आकर्षित करने का गुण होता है। इनका स्वभाव अच्छा होता है जिससे लोग खुद इनकी ओर खिंचे चले आते हैं। पार्टनर के लिए काफी रोमांटिक होते हैं और कुछ भी करने के लिए तत्पर रहते हैं। इस राशि के जातक एक ही पार्टनर के लिए लोयल होते हैं और रिश्ता लंबा निभाते हैं।

    Mithuna Raashi | मिथुन राशि वाले रहें इन 3 राशि वालों से सावधान

    मिथुन राशि के स्वामी ग्रह बुध हैं। इनका स्वभाव काफी अच्छा होता है। इन लोगों की मीठी बोली होती है जिससे वह दूसरे लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर लेते हैं। यहां तक की दुश्मन भी इनके दोस्त बन जाते हैं। किसी भी निर्णय को बहुत शांति से लेते हैं। ये अपने पार्टनर को काफी अच्छी तरह से संभालते हैं। अगर इनकी लड़ाई भी हो जाए तो ये शांत तरीके से पार्टनर को समझाते हैं और सब कुछ सोर्ट कर लेते हैं।

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    कन्या राशि के जातकों को भी जीवन में अच्छे लाइफ पार्टनर मिलते हैं। इनका स्वामी ग्रह भी बुध होता है। ये लोग अपने पार्टनर को हर तरीके से प्यार जताते हैं। ये लोग अपने पार्टनर की कदर करते हैं और जीवनसाथी ही इन लोगों का सबसे अच्छा दोस्त होता है। कन्या राशि के जातक अपने मन में कुछ बात नहीं रखते, इस कारण से इनका जीवन बहुत सुख-शांति के साथ बितता है।

    तुला राशि का स्वामी ग्रह शुक्र होता है। इनकी लव लाइफ काफी अच्छे से बितती है। प्यार के लिहाज से ये लोग काफी गंभीर होते हैं और इन्हें जीवनसाथी भी समझने वाला मिलता है। पार्टनर के लिए ये लोग कुछ भी कर सकते हैं। अगर इनका पार्टनर से ब्रेकअप भी हो जाए तो फिर अंत तक रिश्ते को जोड़ने की कोशिश करते हैं।

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    कुंभ राशि का स्वामी ग्रह शनि हैं। इन लोगों को जीवन में एक ही पार्टनर मिलता है जिसके साथ अपनी पूरी जिंदगी बिताते हैं। इन लोगों की आर्थिक स्थिति भी काफी अच्छी रहती है जिस कारण से ये अपने पार्टनर को हर सुख-सुविधा देते हैं। कुंभ राशि के जातक अपने पार्टनर की गलतियों पर लड़ते झगड़ते नहीं हैं बल्कि समझकर रिश्ते को मजबूत बनाए रखते हैं।

  • जानिए क्यों मनाये जातें है 9 दिन के शारदीय नवरात्रि  

    जानिए क्यों मनाये जातें है 9 दिन के शारदीय नवरात्रि  

    Shardiya Navratri 2023: अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवमी तक शारदीय नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। नवरात्रि के नौ दिन शक्ति की साधना के लिए सर्वश्रेष्ठ माने जाते हैं। यह त्योहार लोगों को आध्यात्मिक रूप से जागृत करने और उन्हें देवी दुर्गा की कृपा प्राप्त करने का अवसर प्रदान करता है। शारदीय नवरात्रि 15 अक्टूबर 2023 से शुरू हो जाएगी।आइए जानते हैं नवरात्रि में घटस्थापना मुहूर्त, महत्व और नौ दिन तक क्यों मनाई जाती है शारदीय नवरात्रि।

    नवरात्रि 9 दिन तक क्यों मनाई जाती है 

    शारदीय नवरात्रि की शुरुआत घटस्थापना से होती है और आखिरी दिन विजया“विजयादशमी (दशहरा) के रूप में मनाया जाता है, जिसमें भगवान राम ने लंकापति रावण को और देवी दुर्गा ने महिषासुर को मारकर विजय प्राप्त की थी। एक कथा के अनुसार, माता भगवती देवी दुर्गा ने महिषासुर नामक असुर के साथ नौ दिन तक युद्ध किया उसके बाद नवमी की रात्रि को उसका वध किया। उस समय से देवी माता को ‘महिषासुरमर्दिनी’ के नाम से जाना जाता है। तभी से मां दुर्गा की शक्ति को समर्पित नवरात्रि का व्रत करते हुए इनके 9 स्वरूपों की पूजा की जाती है।

    शारदीय नवरात्रि में व्रत का महत्व

    नव का शाब्दिक अर्थ है नौ और नया. शारदीय नवरात्रि से प्रकृति सर्दी की चाहर में सिकुड़ने लगती है. ऋतु में परिवर्तन होने लगता है।यही वजह है कि नवरात्रि की अवधि में उपासक संतुलित और सात्विक भोजन कर अपना ध्यान चिंतन और मनन में लगाते हैं और स्वंय को भीतर से शक्तिशाली बनाते हैं। इससे ऋतु परिवर्तन का बुरा असर उसकी सेहत पर नहीं पड़ता। इसके साथ ही मां दुर्गा की पूजा पूर्ण शुद्धि के साथ संपन्न कर पाते हैं।

    शारदीय नवरात्रि में ‘रात्रि’ पूजा का महत्व 

    नवरात्रि की 9 रातें बहुत खास मानी जाती है।कहते हैं इसमें व्यक्ति व्रत, पूजा, मंत्र जाप, संयम, नियम, यज्ञ, तंत्र, त्राटक, योग कर नौ अलौकिक सिद्धियां प्राप्त कर सकता है। पुराणों के अनुसार रात्रि में कई तरह के अवरोध खत्म हो जाते हैं। रात्रि का समय शांत रहता है, इसमें ईश्वर से संपर्क साधना दिन की बजाय ज्यादा प्रभावशाली है. रात्रि के समय देवी दुर्गा की पूजा से शरीर, मन और आत्मा. भौतिक, मानसिक और आध्यात्मिक सुख प्राप्त होता है।

    नवरात्रि की 9 शक्तियां 

    नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के नौ रूप पूजे जाते हैं, जिन्हें नवदुर्गा के रूप में जाना जाता है- शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, और सिद्धिदात्री।

  • भारत का एक ऐसा रहस्यमयी मंदिर जो अपने आप हो जाता है गायब!

    भारत का एक ऐसा रहस्यमयी मंदिर जो अपने आप हो जाता है गायब!

    ब्रह्मा मंदिर (पुष्कर, राजस्थान): यह भगवान ब्रह्मा का एकमात्र ऐसा मंदिर है जिसे पूरे विश्व में जाना जाता है. कहा जाता है कि मुगल शासक औरंगजेब के शासन काल में मंदिरों को नष्ट करने के आदेश के बाद जो एकमात्र मंदिर बचा था वह यही है. इस मंदिर का निर्माण 14वीं शताब्दी में किया गया था. इसके निर्माण को लेकर कई रोचक कथाएं कही जाती हैं. मंदिर के बगल में ही एक मनोहर झील है जिसे पुष्कर झील के नाम से जाना जाता है. पुष्कर झील हिन्दुओं के एक पवित्र स्थान के रूप में जानी जाती है.

    चाइनीज काली मंदिर (कोलकाता): कोलकाता के टांगरा में एक 60 साल पुराना चाइनीज काली मंदिर है. इस जगह को चाइनाटाउन भी कहते हैं. इस मंदिर में स्थानीय चीनी लोग पूजा करते हैं. यहीं नहीं दुर्गा पूजा के दौरान प्रवासी चीनी लोग भी इस मंदिर में दर्शन करने आते हैं. यहां आने वालों में ज्यादातर लोग या तो बौद्ध हैं या फिर ईसाई. इस मंदिर की खास बात यह है कि यहां आने वाले लोगों को प्रसाद में नूडल्स, चावल और सब्जियों से बनी करी परोसी जाती है.

    स्तंभेश्वर महादेव मंदिर (कावी, गुजरात): आप यह कल्पना नहीं कर सकते लेकिन यह बात सच है कि यह मंदिर पल भर के लिए ओझल हो जाता है और फिर थोड़ी देर बाद अपने उसी जगह वापिस भी जाता है. यह मंदिर अरब सागर के बिल्कुल सामने है और वडोदरा से 40 मील की दूरी पर है. खास बात यह है कि आप इस मंदिर की यात्रा तभी कर सकते हैं जब समुद्र में ज्वार कम हो. ज्वार के समय शिवलिंग पूरी तरह से जलमग्न हो जाता है

    ओम बन्ना मंदिर (जोधपुर, राजस्थान ): जोधपुर में ओम बन्ना का मंदिर अन्य सभी मंदिरों से बिल्कुल् ही अलग है. ओम बन्ना मंदिर की विशेषता है कि इसमें पूजा की जाने वाले भगवान की मूर्ति नहीं है बल्कि एक मोटरसाइकिल और उसके साथ ही ओम सिंह राठौर की फोटो रखी हुई है, लोग उन्हीं की पूजा करते हैं. इस मोटरसाइकिल के बारे में कहा जाता है कि इसी मोटरसाइकिल से 1991 में ओम सिंह का एक्सिडेंट हो गया था. एक्सिडेंट में ओम सिंह की तत्काल मौत हो गई. लोकल पुलिस मोटरसाइकिल को पुलिस थाने लेकर चली गई लेकिन दूसरे दिन मोटरसाइकिल वापस एक्सिडेंट वाली जगह पर पहुंच गई.

    करनी माता का मंदिर (राजस्थान): बिकानेर से 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित देशनोक शहर में करनी माता का मंदिर है. यहां पहुंचने पर आपको इंसानों से ज्यादा शायद आपको चूहे नजर आएंगे. मान्यता है कि ये चूहे मंदिर में स्थित करनी माता की संतानें और वंशज हैं. कथाओं के अनुसार करनी माता, देवी दुर्गा की अवतार मानी जाती हैं जो बचपन से ही लोक कल्याण करने लगी थीं इसलिए उनका नाम करनी माता पड़ गया. ऐसी मान्यता है कि करनी माता के सौतेले बेटे की मृत्यु हो जाने पर माता ने यमराज को उनके बेटे को जीवित करने का आदेश दिया. माता के आदेशानुसार उनका बेटा जीवित तो हो गया लेकिन वह चूहा बन गया. माता ने जिस जगह अपना देह त्याग किया वहीं आज करनी माता का मंदिर बना है और मंदिर में हजारों चूहे खुलेआम घूमते नजर आते हैं.

    हडिंबा देवी मंदिर (हिमाचल प्रदेश): मनाली में हडिंबा देवी मंदिर, भारत के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है. इस मंदिर का आकर्षण इसकी संरचना है जिसे जापान की एक शैली ‘पगोडा’ से लिया गया है. यह पूरा मंदिर लकड़ी से बनाया गया है. पुरातत्वविदों की मानें तो इस मंदिर का निर्माण 1553 में किया था.

    शिव मंदिर (वाराणसी, उत्तर प्रदेश): आपको जानकार हैरानी होगी कि इस मंदिर का निर्माण किसी पहाड़ या समतल जगह पर नहीं किया गया है बल्कि यह मंदिर पानी पर बना है. कहने का अर्थ है कि यह शिव मंदिर आंशिक रूप से नदी के जल में डूबा हुआ है. बगल में ही सिंधिया घाट ,  जिसे शिन्दे घाट भी कहते हैं, इस मंदिर की शोभा बढ़ाता है. इस मंदिर में आध्यात्मिक कार्य नहीं होते और यह फिलहाल बंद है. इस मंदिर के बारे में जानने के लिए आज भी लोग जिज्ञासा रखते हैं.

  • इस मंदिर को माना जाता है श्रापित, दर्शन करने के बाद  महिलाएं हो जाती हैं विधवा

    इस मंदिर को माना जाता है श्रापित, दर्शन करने के बाद  महिलाएं हो जाती हैं विधवा

    नई दिल्ली: Secret of Kartikeya Temple: हमारे देश में लाखों मंदिर हैं जहां भक्त दर्शन कर भगवान से अपनी कामनाएं पूरी होने की प्रार्थन करते हैं. लेकिन कई मंदिरों को श्रापित भी माना जाता है। आज हम आपको एक ऐसे ही मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे श्रापित माना जाता है. ऐसा कहा जाता है, कि इस मंदिर में अगर किसी महिला ने भगवान के दर्शन कर लिए तो वह विधवा हो जाती है। ये मंदिर महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। महाभारत का युद्ध कुरुक्षेत्र में लड़ा गया. जहां भगवान कृष्ण ने गीता के उपदेश दिए थे। इसी लिए कुरुक्षेत्र की भूमि को आज भी धार्मिक और ऐतिहासिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। 

    भगवान शिव के पुत्र का मंदिर

    बता दें कि हर साल हजारों की संख्या में श्रद्धालु कुरुक्षेत्र की पावन भूमि के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।  ये श्रापित मंदिर कुरुक्षेत्र में ही है। कुरुक्षेत्र से करीब 20 किमी दूर पिहोवा में स्थित सरस्वती तीर्थ पर भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय का मंदिर है।  इस मंदिर के गर्भगृह में भगवान कार्तिकेय की पिंडी मौजूद है। ऐसी मान्यता है, कि पिंडी का महिलाओं को दर्शन नहीं करने चाहिए। अगर कोई महिला ऐसा करती है तो उसके पति की मृत्यु हो जाती है और वह सात जन्मों तक विधवा रहती है। 

    मंदिर के बाहर लगा है बोर्ड

    इसीलिए मंदिर के बाहर एक बोर्ड लगाया गया है. जिसमें इसी बात का जिक्र है, कि महिलाएं मंदिर में पिंडी के दर्शन न करें।  इसके साथ ही मंदिर में प्रवेश करने पर स्थानीय महंत भी महिलाओं को इस बात की जानकारी देते हैं।  इसीलिए महिलाओं को हिदायत दी जाती है, कि वह गर्भगृह के बाहर से ही कार्तिकेय महाराज का आशीर्वाद लें। बता दें कि सबसे अनोखी बात ये है कि ये नियम सिर्फ महिलाओं पर लागू नहीं है, बल्कि छोटी और नवजात बच्चियों को भी गर्भगृह में प्रवेश करने की मनाही है। 

    भगवान कार्तिकेय की पिंडी पर चढ़ाया जाता है तेल

    धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, कार्तिकेय महाराज की पिंडी पर सरसों का तेल चढ़ाने की परंपरा है।  धार्मिक मान्यता के मुताबिक, कार्तिकेय ने मां पार्वती से क्रोधित होकर अपने अपने शरीर का मांस और रक्त अग्नि को समर्पित कर दिया था। तब भगवान शिव ने उन्हें पिहोवा तीर्थ पर जाने के लिए कहा था।  इसके साथ ये भी मान्यता है कि कार्तिकेय के गर्म शरीर को ठंडा करने के लिए ऋषि-मुनियों ने सरसों का तेल उन पर चढ़ाया था।  जब उनके शरीर को शीतला मिल गई तो कार्तिकेय पिहोवा तीर्थ पर ही पिंडी के रूप में विराजित हो गए। 

  • 19 साल बाद बना सावन यह संयोग, भक्तों पर बरसेगी शिव-गौरी की असीम कृपा

    19 साल बाद बना सावन यह संयोग, भक्तों पर बरसेगी शिव-गौरी की असीम कृपा

    अकाल मृत्यु वो मरे जो करे काम चांडाल का ,
    काल भी उसका क्या करे जो भक्त है महाकाल का”

    हिंदू धर्म में सावन का बहुत महत्व है। इस बार यह पावन महीना 4 जुलाई यानि आज से शुरु हो रहा है। मान्यता के अनुसार, इस महीने विधि-विधान से पूजा -पाठ करने से सारी मनोकामनाएं पूरी होती है। पंचांग के अनुसार,  इस साल सावन का महीना 4 जुलाई से शुरू होकर 31 अगस्त तक चलेगा। इस बार सावन पूरे 59 दिनों का होगा। इसका बड़ा कारण सावन के महीने में अधिकमास का योग है। वैसे तो हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक 3 साल में अधिक मास आता है। लेकिन सावन में ऐसा संयोग पूरे 19 साल बाद बन रहा है। जिसमें 8 सोमवार को व्रत किए जाएंगे। सावन का पहला सोमवार 10 जुलाई और आखिरी सोमवार 28 अगस्त को पड़ेगा। इस बार सावन का पहला सोमवार का शुभ मुहूर्त शाम को 5 बजकर 38 मिनट से 7 बजकर 22 मिनट तक चलेगा। इस दौरान भगवान भोलेनाथ का व्रत करें। इसके साथ ही शिव का अभिषेक भी करें। ऐसा करने से सभी कष्ट दूर होंगे और आपकी सभी मनोकामना पूरी होगी।

    जानें क्यों है इस बार का सावन 58 दिन का 

    वैदिक पंचांग की गणना सौर मास  और चंद्र मास के आधार पर की जाती है चंद्रमास -354 दिन का होता है और सौर मास -365 दिन का होता है   ऐसे में 11 दिन का अंतर आजाता है। 3 साल के बाद यह कुल 33 दिन हो जाते है इसलिए हम इसे अधिक मास बोलते है।  इसी वजह से इस साल सावन में  1 महीना बढ़ गया  है। इसलिए इस बार सावन 2 महीने का होने वाला है। यानि इस बार भगवन शिव के भक्तों को 4 नहीं बल्कि 8 सोमवार मिलेंगे  भगवन शिव को प्रसन्न करने के लिए। 

    जानें  कब-कब होंगे सावन के 8 सोमवार

    • हिंदू पंचांग के अनुसार, सावन का महीना 04 जुलाई से शुरू होगा। अधिक मास के कारन  सावन में 8 सोमवार रहेंगे। 
    • 10 जुलाई- सावन का पहला सोमवार 
    • 17 जुलाई- सावन का दूसरा सोमवार
    • 24 जुलाई- सावन का तीसरा सोमवार
    • 31 जुलाई- सावन का चौथा सोमवार
    • 07 अगस्त – सावन का पांचवा सोमवार 
    • 14 अगस्त- सावन का छठा सोमवार
    • 21 अगस्त-  सावन का सातवां सोमवार
    • 28 अगस्त- सावन का आठवां सोमवार
    • 31 अगस्त- सावन समाप्त 

    अधिकमास की तिथि

    18 जुलाई- सावन का अधिकमास शुरू।
    16 अगस्त- सावन के अधिकमास समाप्त।

    क्या है  सावन के सोमवार की मान्यता

    इसको लेकर ये मान्यता है कि सावन के सोमवार का व्रत रखने से सभी मनोकामना पूरी होती है। यह व्रत सुहागिन महिलाओं को जरुर करना चाहिए। इस व्रत को करने से सौभाग्यवती का आशिर्वाद मिलता है। ये व्रत अगर कुंवारी कन्याएं रखती हैं तो उन्हें सुयोग्य वर की प्राप्ति होती है।

    सावन में ऐसे करें भगवान शिव की पूजा

    • सावन के दिन सबसे पहले सुबह उठकर स्नान करें।
    • इसके बाद शिव मंदिर या घर में शिवलिंग पर गंगाजल या दूध चढ़ाएं।
    • इसके बाद फूल-फल भगवान को समर्पित कर दे।
    • शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने की मान्यता है।
    • भोलेनाथ की पूजा कर पवित्र मंत्र ‘ओम नमः शिवाय’ का जाप करें।
    • महामृत्युंजय मंत्र का जाप भगवान शिव के नाम पर 108 बार किया जाता है।
    • इसके बाद भगवान से अपनी मनोकामना के लिए भगवान से प्रार्थना करें।

    बता दें कि आज से पूरे 19 साल पहले साल 2004 में सावन माह में अधिकमास लगा था। अधिक मास लगने के कारण इस बार भक्तों को महादेव की पूजा के लिए पूरे 8 सोमवार मिलेंगे। इसके अलावा सुहागिन महिलाओं को पूरे 9 मंगला गौरी व्रत रखने को मिलेगा। कुल मिलाकर कहें तो इस बार भगवान शिव की असीम कृपा शिव भक्तों पर पूरे महीने बरसने वाली है। अधिकमास को ही कई लोग मलमास या पुरुषोत्तम मास भी कहते हैं। चुकी अधिकमास में सूर्य संक्रांति नहीं होती इसी कारण से इस महीने को मलीन माह यानी मलमास कहा जाता है। मलमास के पूरे महीने में विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश या उपनयन संस्कार जैसे कोई भी शुभ कार्य नहीं होते हैं।

  • आज का राशिफल, 1 जून 2023

    आज का राशिफल, 1 जून 2023

    आज का राशिफल, 1 जून 2023

    मेष:  उत्साहवर्द्धक सूचना मिलेगी। भूले-बिसरे साथियों से मुलाकात होगी। फालतू खर्च होगा। बड़ा काम करने का मन बनेगा। कारोबार में लाभ होगा। शेयर मार्केट व म्युचुअल फंड आदि मनोनुकूल लाभ देंगे। भाइयों का सहयोग मिलेगा। आत्मसम्मान बना रहेगा। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। लाभ होगा।

    वृष: चोट व रोग से बाधा संभव है। झंझटों में न पड़ें। दुष्टजन हानि पहुंचा सकते हैं। यात्रा लाभदायक रहेगी। भेंट व उपहार की प्राप्ति होगी। कारोबार में वृद्धि होगी। रोजगार प्राप्ति के प्रयास सफल रहेंगे। समय अनुकूल है, लाभ लें। प्रमाद न करें। पार्टनरों का सहयोग मिलेगा। प्रसन्नता रहेगी।
    मिथुन: विवाद को बढ़ावा न दें। फालतू खर्च पर नियंत्रण रखें। कुसंगति से बचें। घर-परिवार की चिंता रहेगी। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। किसी व्यक्ति के उकसाने में न आएं। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। आय बनी रहेगी। व्यवसाय ठीक चलेगा।

    कर्क: डूबी हुई रकम प्राप्त हो सकती है, प्रयास करें। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। निवेशादि मनोनुकूल लाभ देंगे। नौकरी में प्रभाव बढ़ेगा। व्यापार में लाभ बढ़ेगा। किसी मांगलिक कार्य में भाग लेने का अवसर मिल सकता है। पारिवारिक सहयोग मिलेगा। घर-बाहर सुख-शांति बनी रहेगी।

    सिंह: योजना फलीभूत होगी। कार्यस्थल पर परिवर्तन संभव है। सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। मित्रों का सहयोग कर पाएंगे। निवेश शुभ रहेगा। नौकरी में कार्यभार तथा अधिकार दोनों बढ़ सकते हैं। बाहर जाने की योजना बनेगी। शत्रुओं का पराभव होगी। घर-बाहर प्रसन्नता रहेगी।

    कन्या: कानूनी अड़चन दूर होकर स्थिति मनोनुकूल रहेगी। कारोबार में वृद्धि के योग हैं। धन प्राप्ति सुगम होगी। नौकरी में चैन रहेगा। लंबे समय से रुके कार्यों में गति आएगी। धार्मिक अनुष्ठान में भाग लेने का अवसर मिल सकता है। सत्संग का लाभ मिलेगा। जल्दबाजी न करें। व्यवसाय ठीक चलेगा।

    तुला: बुरी खबर मिल सकती है, धैर्य रखें। स्वास्थ्य का पाया कमजोर रहेगा। काम करने की इच्छा नहीं होगी। विवाद से क्लेश संभव है। बनते कामों में बाधा उत्पन्न होगी। मेहनत अधिक और लाभ कम रहेगा। नौकरी में कार्यभार रहेगा। घर में तनाव रह सकता है। दूसरे लोग आपसे अधिक अपेक्षा करेंगे।

    वृश्चिक: स्वास्थ्य का ध्यान रखें। उत्साह की अधिकता तथा व्यस्तता रहेगी। राजकीय बाधा दूर होगी। कारोबार ठीक चलेगा। महत्वपूर्ण निर्णय लेने में जल्दबाजी न करें। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। भाग्य अनुकूल है, लाभ लें। घर-बाहर सभी ओर से सहयोग प्राप्त होगा। प्रसन्नता रहेगी।
    धनु: स्थायी संपत्ति में वृद्धि हो सकती है। प्रॉपर्टी के कामकाज बड़ा लाभ दे सकते हैं। निवेश शुभ रहेगा। नौकरी में प्रशंसा मिलेगी। रोजगार मिलेगा। उन्नति के मार्ग प्रशस्त होंगे। पार्टनरों से मतभेद दूर होंगे। जल्दबाजी में कोई निर्णय न लें। स्वास्थ्य कमजोर रह सकता है। लापरवाही न करें।

    मकर: रचनात्मक कार्य पूर्ण व सफल रहेंगे। पार्टी व पिकनिक का आयोजन होगा। आय में वृद्धि होगी। परीक्षा व साक्षात्कार में सफलता प्राप्त होगी। व्यस्तता रहेगी। स्वादिष्ट व्यंजनों का आनंद प्राप्त होगा। व्यापार-व्यवसाय लाभदायक रहेगा। घर-बाहर सभी ओर से सफलता तथा प्रसन्नता प्राप्त होगा।

    कुंभ: विवाद को बढ़ावा न दें। किसी व्यक्ति के व्यवहार से स्वाभिमान को ठेस पहुंच सकती है। दु:खद समाचार मिल सकता है। बेकार बातों की तरफ ध्यान न दें। दौड़धूप अधिक होगी। नौकरी में मातहतों का सहयोग कम मिलेगा। कार्य की अधिकता रहेगी। जल्दबाजी न करें।

    मीन: मेहनत का फल पूरा-पूरा मिलेगा। यात्रा लाभदायक रहेगी। सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। मित्रों का सहयोग कर पाएंगे। बड़ा काम करने का मन बनेगा। पारिवारिक सहयोग मिलेगा। आय में वृद्धि होगी। भाग्य अनुकूल रहेगा। रुके कार्य पूरे होंगे। प्रसन्नता रहेगी। किसी प्रभावशाली व्यक्ति से परिचय होगा।
  • साल का पहला चंद्रग्रहण, 139 साल बाद बन रहा बेहद दुर्लभ संयोग, जाने कब से लगेगा सूतक

    साल का पहला चंद्रग्रहण, 139 साल बाद बन रहा बेहद दुर्लभ संयोग, जाने कब से लगेगा सूतक

    नई दिल्ली: सूर्य ग्रहण के बाद अब साल का पहला चंद्रग्रहण लगने वाला है। साल का पहला चंद्र ग्रहण अगले महीने की पांच तारीख को लगेगा। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ऐसा माना जाता है कि चंद्र ग्रहण तब लगता है जब सूर्य और चंद्रमा के बीच पृथ्वी आ जाती है। शास्त्र के जानकारों की मानें तो इस बार चंद्रगहण तुला राशि पर लगने वाला है। यह चंद्र ग्रहण बेहद खास रहने वाला है क्योंकि ये ग्रहण 139 साल बाद बुद्ध पूर्णिमा पर लगने वाला है। हालांकि ऐसा कहा जा रहा है कि 05 मई को पड़ने वाला चंद्र ग्रहण एक उपच्छाया चंद्र ग्रहण होगा, जो भारत में दिखाई नहीं देगा। इसलिए इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा। लेकिन यह चंद्र ग्रहण यूरोप, मध्य एशिया, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका, अटलांटिक, हिंद महासागर और अंटार्कटिका जैसी जगहों पर दिखाई देगा। भारतीय समयानुसार, यह चंद्र ग्रहण इन देशों में रात 8 बजकर 44 मिनट से लेकर मध्य रात्रि करीब 1 बजकर 02 मिनट तक रहेगा।

    वैज्ञानिक अर्थ

    चंद्र ग्रहण तब होता है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा संरेखित होते हैं इसलिए पृथ्वी दोनों के बीच आ जाती है और चंद्रमा कुछ समय के लिए पृथ्वी की छाया में चला जाता है।

    गर्भवती महिलाएं रखें इस बातों का ध्यान

    1. चंद्रग्रहण के समय गर्भवती महिलाओं को घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए।
    2. ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को खाना पकाने या खाने से बचना चाहिए।
    3. गर्भवती महिलाएं भूलकर भी चाकू-कैंची या किसी भी धारदार चीज का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

    क्या न करें

    1. चंद्र ग्रहण के दौरान क्रोध न करें, क्रोध करने से अगले 15 दिन आपके लिए खतरनाक हो सकते हैं।
    2. चंद्र ग्रहण के दौरान भोजन ग्रहण न करें। साथ ही पूजा पाठ करना भी वर्जित माना जाता है।
    3. चंद्र ग्रहण के दौरान किसी भी सुनसान जगह या श्मशान भूमि के पास नहीं जाना चाहिए। इस दौरान नकारात्मक शक्तियां काफी ज्यादा हावी रहती हैं।
    4. चंद्र ग्रहण के दौरान व्यक्ति को किसी भी नए काम की शुरुआत नहीं करनी चाहिए। माना जाता है कि ग्रहण के दौरान नकारात्मक ऊर्जा अधिक रहती है।
    5. ग्रहण की अवधि में पति-पत्‍नी को शारीरिक संबंध नहीं बनाने चाहिए। ऐसा करने से आपके घर की सुख-शांति खराब हो सकती है।

    चंद्र ग्रहण के दौरान क्या करें

    1. चंद्र ग्रहण के दौरान सिर्फ भगवान के मंत्रों का जप करना चाहिए, जो कि दस गुना फलदायी माना जाता है।
    2. चंद्र ग्रहण के बाद शुद्ध जल से स्नान करके, गरीबों का दान देना चाहिए।
    3. चंद्र ग्रहण के बाद पूरे घर को शुद्ध करना चाहिए। ऐसा करने से घर की सभी नकारात्मक शक्तियां दूर हो जाती है।
    4. ग्रहण के समय गायों को घास, पक्षियों को अन्न, जरूरत मंदों को वस्त्र दान देने से अनेक गुना पुण्य प्राप्त होता है।
    यह ग्रहण रात 8 बजकर 44 मिनट से लेकर मध्य रात्रि करीब 01 बजकर 02 मिनट तक रहेगा। इस चंद्र ग्रहण की अवधि लगभग 04 घंटे 15 मिनट की होगी। साथ ही चंद्र ग्रहण तुला राशि में लगना जा रहा है और यहां चंद्रमा केतु की युति बन रही है। ऐसे में चंद्रमा की पहली दृष्टि मेष राशि पर होगी। इसलिए इस चंद्र ग्रहण से मेष और तुला राशि वालों को सावधान रहना होगा।

  • वैशाख अमावस्या आज और कल, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

    वैशाख अमावस्या आज और कल, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

    नई दिल्ली: इस साल वैशाख अमावस्या पर एक ही दिन में तीन तरह के सूर्य ग्रहण दिखेंगे, जिसे वैज्ञानिकों ने हाइब्रिड सूर्य ग्रहण कहा है। माना जाता है कि वैशाख अमावस्या के दिन पितरों के तर्पण बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। वैशाख मास कृष्ण पक्ष की अमावस्या को वैशाखी अमावस्या के रूप में मनाया जाता है। इस बार संयोग से 100 साल बाद हाइब्रिड सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है। इस बार सूर्य ग्रहण 20 अप्रैल, गुरुवार को लगने जा रहा है। मान्यता है कि अमावस्या के दिन पितरों के नाम दान करना बड़ा ही फलदायी होता है। लेकिन इस बार यह सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखेगा। इसलिए सूर्य ग्रहण का अमावस्या पर कोई असर नहीं होगा।

    वैशाख अमावस्या की अवधि

    इस बार वैशाख अमावस्या 20 अप्रैल को पड़ रही है। साथ ही इसी दिन सूर्य ग्रहण भी दिखेगा। वैशाख अमावस्या का मुहूर्त 19 अप्रैल से सुबह 11 बजकर 23 मिनट से शुरू होगा और इसका समापन 20 अप्रैल को सुबह 09 बजकर 41 मिनट पर होगा। 20 अप्रैल को सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 05 बजकर 51 मिनट से लेकर रात 11 बजकर 11 मिनट तक रहेगा।

    सूर्य ग्रहण की अवधि

    यह ग्रहण सुबह 7 बजकर 4 मिनट से शुरू होगा और दोपहर 12 बजकर 29 मिनट पर खत्म होगा। इस सूर्य ग्रहण की अवधि 5 घंटे 24 मिनट की होगी। इस सूर्य ग्रहण के दो दिन बाद देवगुरु बृहस्पति का गोचर होगा। यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा इसलिए इस ग्रहण का सूतक काल नहीं माना जाएगा। लेकिन इस सूर्य ग्रहण का असर सभी राशियों पर पड़ेगा।

    वैशाख अमावस्या पर कर सकते हैं ये काम

    सूर्योदय से पहले उठकर तीर्थ स्नान करें। ये न कर पाएं तो घर पर ही पानी में गंगाजल की कुछ बूंदे और तिल डालकर नहाएं। उगते हुए सूरज को तांबे के लौटे से जल चढ़ाएं। दिनभर व्रत रखने और जरुरतमंद लोगों को दान देने का संकल्प लें। पितरों की तृप्ति का संकल्प लेकर जल, अन्न का दान करें। ऐसा करने से पितरों का आशीर्वाद मिलता है व पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होने की मान्यता है। इस दिन गाय की पूजा करें। गाय को हरा चारा खिलाने से पितृ प्रसन्न होते हैं। पितरों की तृप्ति के लिए लोटे में पानी, दूध, तिल और चावल डालकर पीपल के पेड़ पर चढ़ाएं। पीपल को छूकर प्रणाम करें। पेड़ के नीचे घी का दीपक जलाएं और 5 या 7 परिक्रमा करें।मंदिरों या अन्य जगहों पर जरुरतमंद लोगों को खाना खिलाएं, जलदान करें और जरुरत के मुताबिक चीजें दें। मंदिर जाकर शनि देव की मूर्ति पर तिल का तेल चढ़ाएं। तिल के तेल से ही दीपक भी लगाएं।

    शनिदेव की पूजा विधि

    अमावस्या पर शनि पूजा का भी विशेष महत्व है, इसलिए लकड़ी की चौकी पर काला कपड़ा बिछाएं। शनिदेव की मूर्ति या चित्र, यंत्र और सुपारी स्थापित करके सरसों के तेल का दीपक जलाएं। शनि देव पर सिंदूर, कुमकुम, काजल लगाकर उन्हें नीले फूल अर्पित करें और शनि देव को भोग लगाएं।

    जानें कहां-कहां दिखेगा ये सूर्य ग्रहण

    यह सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा. यह सूर्य ग्रहण चीन, अमेरिका, माइक्रोनेशिया, मलेशिया, फिजी, जापान, समोआ, सोलोमन, सिंगापुर, थाइलैंड, कंबोडिया, अंटार्कटिका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, वियतनाम, ताइवान, पापुआ न्यू गिनी, इंडोनेशिया, फिलीपींस, दक्षिण हिंद महासागर और दक्षिण प्रशांत महासागर जैसी जगहों पर दिखाई देगा।

  • आज का पंचांग, 15 मार्च 2023

    आज का पंचांग, 15 मार्च 2023

    आज 15 मार्च, 2023 बुधवार चैत्र माह के कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि है | हिन्दू कैलेंडर और पंचांग से जाने आज का शुभ मुहूर्त, अशुभ समय और राहुकाल | लोकेशन Ujjain, Madhya Pradesh, India 

    चैत्र कृष्ण पक्ष अष्टमी, अनला संवत्सर विक्रम संवत 2080, शक संवत शुभकृत् 1944, फाल्गुन |आज है मीन संक्रांति, शीतला अष्टमी, कालाष्टमी and बुधाष्टमी व्रत|

    आज अष्टमी तिथि 06:45 PM तक उपरांत नवमी | नक्षत्र ज्येष्ठा 07:33 AM तक उपरांत मूल 06:24 AM तक उपरांत पूर्वाषाढ़ा | सिद्धि योग 12:52 PM तक, उसके बाद व्यातीपात योग | करण बालव 07:38 AM तक, बाद कौलव 06:46 PM तक, बाद तैतिल 05:46 AM तक, बाद गर | आज राहु काल का समय 12:36 PM – 02:05 PM है | आज 07:33 AM तक चन्द्रमा वृश्चिक उपरांत धनु राशि पर संचार करेगा |

    विक्रम संवत – 2080, अनला
    शक सम्वत – 1944, शुभकृत्
    पूर्णिमांत – चैत्र
    अमांत – फाल्गुन

    तिथि
    कृष्ण पक्ष अष्टमी   – Mar 14 08:22 PM – Mar 15 06:45 PM
    कृष्ण पक्ष नवमी   – Mar 15 06:45 PM – Mar 16 04:39 PM

    नक्षत्र
    ज्येष्ठा – Mar 14 08:13 AM – Mar 15 07:33 AM
    मूल – Mar 15 07:33 AM – Mar 16 06:24 AM
    पूर्वाषाढ़ा – Mar 16 06:24 AM – Mar 17 04:47 AM

    करण
    बालव – Mar 14 08:22 PM – Mar 15 07:38 AM
    कौलव – Mar 15 07:38 AM – Mar 15 06:46 PM
    तैतिल – Mar 15 06:46 PM – Mar 16 05:46 AM
    गर – Mar 16 05:46 AM – Mar 16 04:39 PM

    योग
    सिद्धि – Mar 14 03:13 PM – Mar 15 12:52 PM
    व्यातीपात – Mar 15 12:52 PM – Mar 16 10:06 AM

  • गर्लफ्रेंड पटाने की मिल रही है कोचिंग, ट्विटर पर लड़की ने दिया ऑफर

    गर्लफ्रेंड पटाने की मिल रही है कोचिंग, ट्विटर पर लड़की ने दिया ऑफर

    विदेशों में तो डेटिंग ऐप का चलन था ही, अब ये भारत में भी तेज़ी से बढ़ रहा है. खासतौर पर बड़े शहरों में तो युवा धड़ल्ले से अपना पार्टनर ढूंढने के लिए डेटिंग ऐप का इस्तेमाल करते हैं. हालांकि हर किसी को इसमें कामयाबी नहीं मिल पाती है. ऐसे में गलती कहां हो जाती है, ये तो इंसान सोचता ही है लेकिन उसे सच्चाई बताने वाला कौन हो? इसी का सॉल्यूशन एक लड़की ने पेश किया है.

    पहले लोगों के लिए पार्टनर आमतौर पर लोग अपने आसपास या दोस्तों की मदद से ही ढूंढ लेते थे लेकिन डेटिंग ऐप्स का ऑप्शन आने के बाद उनके पास विकल्प बढ़े हैं. ऐसे में कनफ्यूज़न भी बढ़ा और इस आपदा में अवसर लेने वालों की भी कमी नहीं है. एक लड़की ने इस समस्या का हल देने के लिए अपनी एक सर्विस शुरू की है, जिसका विज्ञापन उसे ट्विटर पर डाला है. लड़की का कहना है कि वो अपने एक्सपीरियंस के आधार पर लड़कों को लड़कियां पटाना सिखाएगी.

    सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर पर @VandanaJain_ नाम की आईडी ने लड़की ने अपनी अनोखी सर्विस का प्रचार किया है. उसने लिखा – ‘मैं लड़कों को बताऊंगी कि वे डेटिंग ऐप पर क्या करें और क्या नहीं. कैसी फोटो डालें और कैसे बात शुरू करें वगैरह. मैंने ये चीज़ें अपनी सहेलियों से डिस्कस की हैं और मैं आपको मदद दे सकती हूं. अगर आप पर्सनल पेड सेशन चाहते हैं तो कमेंट या DM करके बताएं.’ लड़की के इस ट्वीट के बाद तो कमेंट्स की बहार आ गई.

    इस ट्वीट के बाद तो लोगों ने गजब की प्रतिक्रियाएं दीं. लड़की ने एक कमेंट के जवाब में ये भी बताया कि उसका कैलेंडर बुक हो चुका है और लोगों का ज़बरदस्त रेस्पॉन्स आ रहा है. इस पोस्ट पर कई मज़ेदार प्रतिक्रियाएं भी देखने को मिलीं. एक यूज़र ने कहा – ‘मछली नहीं बता सकती मछलियां कैसे पकड़ें, ये तो मछुआरा बताएगा.’ वहीं एक यूज़र ने लिखा कि वो भी ऐसी सर्विस शुरू करना चाहता है तो वहीं एक यूज़र ने इस सर्विस को GroomRoom का नाम दे डाला.