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  • Delayed Marriage Reasons: विवाह में देरी होने का क्या है कारण, जान लें ज्योतिषी ने बताई ये वजह 

    Delayed Marriage Reasons: विवाह में देरी होने का क्या है कारण, जान लें ज्योतिषी ने बताई ये वजह 

    Delayed Marriage Reasons: कई लोगों को शादी में देरी होने की वजह से चिंता और तनाव होने लगता है। कभी-कभी रिश्ता बनते-बनते रुक जाता है या बात आगे नहीं बढ़ पाती। ज्योतिष के अनुसार, इसके पीछे कुंडली में ग्रहों और भावों की स्थिति जिम्मेदार हो सकती है। ऐसे में परेशान होने के बजाय कारण समझना और सही उपाय करना ज्यादा फायदेमंद होता है। आइये इसे विस्तार से जानते हैं… विवाह में देरी के ज्योतिषीय कारण
    1. सातवां भाव कमजोर होना
    ज्योतिष में कुंडली का सातवां भाव विवाह का भाव माना जाता है।
    • अगर इस भाव में अशुभ (क्रूर) ग्रह जैसे शनि, मंगल, राहु या केतु बैठे हों
    • या इन ग्रहों की दृष्टि इस भाव पर पड़ रही हो
    तो शादी में देरी हो सकती है और रिश्ते बनते-बनते टूट भी सकते हैं।
    1. शनि का प्रभाव
    • अगर शनि ग्रह सातवें भाव में हो
    • या सातवें भाव के स्वामी पर शनि की दृष्टि हो
    तो विवाह में देर होने की संभावना बढ़ जाती है।
    1. शुक्र, गुरु और मंगल की खराब स्थिति
    • ये तीनों ग्रह विवाह में महत्वपूर्ण माने जाते हैं
    • अगर ये कमजोर या प्रतिकूल स्थिति में हों
    • या अस्त (कमजोर) अवस्था में हों
    तो शादी में देरी हो सकती है, खासकर पुरुषों के मामले में।
    1. मांगलिक दोष (मंगल दोष)
    अगर कुंडली में मंगल इन भावों में हो
    • पहला
    • चौथा
    • सातवां
    • आठवां
    • बारहवां
    तो इसे मांगलिक दोष कहा जाता है। इससे शादी में देरी होती है। शादी के बाद झगड़े भी हो सकते हैं।  ऐसे लोगों को मांगलिक व्यक्ति से ही विवाह करने की सलाह दी जाती है, जिससे दोष का असर कम हो जाता है।
    1. सातवें भाव का स्वामी वक्री होना
    • अगर सातवें भाव का स्वामी ग्रह वक्री (retrograde) हो
    • तो विवाह में देरी होती है
    ऐसे लोगों की शादी अक्सर 30 साल के बाद होती है। विवाह में देरी के उपाय
    1. शनि से जुड़े उपाय
    अगर शनि के कारण देरी हो रही है:
    • शनिवार को सरसों के तेल का दीपक जलाएं
    • पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाएं
    • गरीब और जरूरतमंद लोगों की मदद करें
    1. गुरु ग्रह को मजबूत करना
    गुरु मजबूत होने से विवाह के योग अच्छे बनते हैं। इसके लिए:
    • पीली चीजों का दान करें जैसे:
    •  केला
    • हल्दी
    •  चना
    • पीले कपड़े
    1. सातवें भाव के अनुसार उपाय
    अगर सातवां भाव कमजोर है:
    • उस भाव से जुड़े ग्रह की शांति के उपाय करें
    • जैसे जिस ग्रह का प्रभाव हो, उसके अनुसार पूजा या दान करें
    1. ज्योतिषाचार्य से सलाह लें
    अगर लंबे समय से शादी में बाधा आ रही है। किसी अनुभवी ज्योतिषी से अपनी कुंडली दिखाएं। सही मार्गदर्शन से समस्या का समाधान मिल सकता है।  
  • बाबा बर्फानी की पहली झलक आई सामने, 6 से 7 फीट ऊंचा बना शिवलिंग, देखें वीडियो

    बाबा बर्फानी की पहली झलक आई सामने, 6 से 7 फीट ऊंचा बना शिवलिंग, देखें वीडियो

    Dharam News : अमरनाथ यात्रा शुरू होने से पहले श्रद्धालुओं के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। शनिवार को पवित्र अमरनाथ गुफा में प्राकृतिक रूप से बनने वाले बाबा बर्फानी के हिम शिवलिंग की पहली तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि लगभग 6 से 7 फीट ऊंचा शिवलिंग आकार ले चुका है। सबसे पहले वहां सुरक्षा में तैनात जवानों ने बाबा बर्फानी के दर्शन किए। इस वर्ष अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई 2026 से शुरू होगी और 9 अगस्त 2026 तक चलेगी। श्रद्धालुओं में यात्रा को लेकर काफी उत्साह देखा जा रहा है।

    पिछले साल 7 फीट ऊंचा था हिम शिवलिंग
    जानकारी के अनुसार, वर्ष 2025 में अमरनाथ गुफा में बना प्राकृतिक हिम शिवलिंग लगभग 7 फीट ऊंचा था। इस बार भी शिवलिंग का आकार तेजी से बढ़ रहा है और यात्रा शुरू होने तक इसके और बड़ा होने की संभावना जताई जा रही है।

    यात्रा मार्ग पर अब भी जमी है भारी बर्फ
    अमरनाथ यात्रा के दोनों प्रमुख मार्गों पर अभी भी काफी मात्रा में बर्फ मौजूद है। सामान्य क्षेत्रों में 6 से 8 फीट तक बर्फ जमी हुई है, जबकि हिमस्खलन प्रभावित इलाकों में बर्फ की मोटाई 10 से 12 फीट तक पहुंच रही है।

    सीमा सड़क संगठन (BRO) लगातार बर्फ हटाने का काम कर रहा है। अब तक बालटाल मार्ग पर लगभग 9 किलोमीटर और नुनवान-पहलगाम मार्ग पर करीब 8 किलोमीटर ट्रैक से बर्फ हटाई जा चुकी है। इसके साथ ही रास्तों को 12 फीट चौड़ा करने, सड़क की सतह मजबूत बनाने, रिटेनिंग वॉल और कल्वर्ट तैयार करने का काम भी तेजी से चल रहा है।

    श्रद्धालुओं को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं
    इस बार अमरनाथ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था पहले से ज्यादा बेहतर की जा रही है। बेस कैंप में पारंपरिक टेंटों की जगह प्री-फैब्रिकेटेड और फाइबर से बने आधुनिक ढांचे तैयार किए जा रहे हैं।

    इन संरचनाओं में अचानक मौसम बदलने, तेज बारिश और तापमान गिरने जैसी परिस्थितियों से बेहतर सुरक्षा मिलेगी। हर इमारत में 48 कमरे बनाए गए हैं और प्रत्येक कमरे में अटैच्ड वॉशरूम की सुविधा होगी। इसके अलावा गर्म और ठंडे पानी की व्यवस्था भी उपलब्ध रहेगी।

    हर इमारत में होगी पैंट्री सुविधा
    श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए हर भवन में पैंट्री की भी व्यवस्था की जा रही है। इन आधुनिक सुविधाओं के निर्माण का काम करीब तीन साल पहले शुरू हुआ था, जो अब लगभग पूरा होने की स्थिति में है।

    संवेदनशील इलाकों में नहीं लगाए जाएंगे कैंप
    यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए प्रशासन ने इस बार कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। जिन स्थानों पर बाढ़, बादल फटने या अन्य प्राकृतिक आपदाओं का खतरा रहता है, उन्हें “नो-एंट्री जोन” घोषित किया गया है।

    बालटाल और नुनवान दोनों मार्गों को पहले से ज्यादा चौड़ा किया गया है और पुलों को भी मजबूत बनाया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी संवेदनशील या जोखिम वाले क्षेत्र में कैंप नहीं लगाए जाएंगे।

    3.6 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने कराया पंजीकरण
    अमरनाथ यात्रा 2026 के लिए श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। अब तक 3.6 लाख से अधिक लोग यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं। हालांकि यात्रा मार्गों पर अभी भी कई स्थानों पर 10 से 12 फीट तक बर्फ मौजूद है, लेकिन अधिकारियों का दावा है कि 15 जून तक दोनों मार्ग पूरी तरह से यात्रा के लिए तैयार कर दिए जाएंगे।

    दो मार्गों से शुरू होगी यात्रा
    इस साल यात्रा 3 जुलाई से दो प्रमुख मार्गों—बालटाल-सोनमर्ग मार्ग और पारंपरिक नुनवान-पहलगाम मार्ग—से शुरू होगी। यात्रा की अवधि 57 दिनों की होगी और इसका समापन रक्षा बंधन तथा सावन पूर्णिमा के पावन अवसर पर होगा।

    ग्रुप रजिस्ट्रेशन हुए बंद
    यात्रा के लिए 5 से 30 लोगों के समूहों का पंजीकरण बंद कर दिया गया है। हालांकि, अकेले यात्रियों और छोटे समूहों के लिए सीटें उपलब्ध रहने तक रजिस्ट्रेशन जारी रहेगा।

    इन बैंकों के जरिए हो रहा है रजिस्ट्रेशन
    श्रद्धालु पंजाब नेशनल बैंक, जम्मू-कश्मीर बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और यस बैंक की निर्धारित शाखाओं के माध्यम से यात्रा के लिए पंजीकरण करा सकते हैं।

    इस साल 5 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद
    अधिकारियों का मानना है कि इस वर्ष अमरनाथ यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या 5 लाख का आंकड़ा पार कर सकती है। पिछले वर्ष 2025 में लगभग 4.14 लाख श्रद्धालुओं ने बाबा बर्फानी के दर्शन किए थे, जबकि 2024 में यह संख्या 5.10 लाख से अधिक रही थी। अमरनाथ यात्रा 2026 को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं और प्रशासन का लक्ष्य श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुविधाजनक और यादगार यात्रा अनुभव प्रदान करना है।

     

  • आज से शुरु होगा अधिकमास, इस महीने में करें ये काम, प्रसन्न होंगे भगवान विष्णु

    आज से शुरु होगा अधिकमास, इस महीने में करें ये काम, प्रसन्न होंगे भगवान विष्णु

    धर्म: अधिकमास इस बार 17 मई यानी से शुरु हो रहा है। इसका समापन 15 जून तक होगा। यह अतिरिक्त महीना हर साल नहीं आता परंतु वैदिक ज्योतिष के अनुसार, इसे खास तौर पर हमारे कैलेंडर को संतुलित करने के लिए जोड़ा जाता है। चंद्र कैलेंडर लगभग 354 दिनों का होता है परंतु सौर कैलेंडर 365 दिनों का। ऐसे में दोनों के बीच तालमेल बनाए रखने के लिए अधिकमास रखा जाता है ताकि हमारे त्योहार सही मौसम में ही आएं। परंतु यह सिर्फ कैलेंडर ठीक करने के लिए नहीं है। धार्मिक दृष्टि से यह महीना बहुत खास माना जाता है। यह महीना भगवान विष्णु को समर्पित होता है। मान्यताओं के अनुसार, इस पूरे महीने में किए गए पूजा-पाठ, दान और ध्यान का फल कई गुना बढ़ जाता है, इसलिए इसे एक तरह से पूरे महीने चलने वाला आध्यात्मिक उत्सव भी कहते हैं। अधिकमास को पुण्य कमाने का सबसे अच्छा समय माना जाता है। यह एक ऐसा मौका है जिसे आपको गंवाना नहीं चाहिए। इस पूरे महीने में ध्यान अच्छे और निस्वार्थ कामों पर रखना चाहिए। इससे मन और आत्मा शुद्ध होती है।

    दान जरुर करें

    अधिकमास में किया गया दान बहुत फलदायी माना जाता है। यह सिर्फ पैसे का दान नहीं है बल्कि भावना में भी सबसे जरुरी होती है। अन्न दान, वस्त्र दान या दीप दान आप कर सकते हैं। जरुरतमंदों की मदद करना इस महीने का सबसे सीधा और असरदार उपाय माना जाता है।

    धार्मिक ग्रंथ पढ़ें

    इस समय आप भगवदगीता, श्रीमद्भागवत पुराण या रामायण जैसे पवित्र ग्रंथ पढ़ सकते हैं। इससे ज्ञान बढ़ेगा और जीवन को सही दिशा मिलती है। इसको सिर्फ पढ़े नहीं बल्कि उसकी बातों को अपने जीवन में उतारने की कोशिश करें।

    जप और तप जरुर करें

    इस महीने में मंत्र जाप और व्रत करना भी बहुत ही लाभदायक माना जाता है। ऊं नमो भगवते वासुदेवाय नम: मंत्र का रोज जाप करें। यदि संभव हो तो तुलसी की माला से 108 बार जप करें। व्रत रखने से मन और इंद्रियों पर नियंत्रण आता है और ध्यान भगवान में लगता है।

    भगवान विष्णु की पूजा करें

    यह महीना भगवान विष्णु को समर्पित होता है। ऐसे में उनकी पूजा सबसे जरुरी मानी जाती है। रोज विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। सत्यनारायण व्रत कथा सुनना या पढ़ना भी बहुत ही शुभ माना जाता है। यहां बड़ी पूजा नहीं बल्कि सच्चे मन से की गई भक्ति ज्यादा महत्वपूर्ण होती है।

    न करें ये काम

    इस दौरान शुभ काम जैसे शादी, मुंडन और गृह प्रवेश। नया घर, गाड़ी या महंगे गहने न खरीदें। नया बिजनेस शुरु करना, घर बनवाना या किसी प्रोजेक्ट की शुरुआत करना टालें क्योंकि ये सभी काम करने से हमारी इच्छाओं और भौतिक सुखों से जुड़े होते हैं। अधिकमास हमें सिखाता है कि थोड़े समय के लिए इन चीजों से ध्यान हटाकर अपनी आत्मा और अध्यात्म पर ध्यान दें।

    पूरे महीने का व्रत और नियम

    जो लोग अधिकमास में अपनी भक्ति को और गहरा बनाना चाहते हैं उनके पूरे महीने व्रत रखना चाहिए। यह एक कठिन लेकिन बहुत ही फलदायी साधना मानी जाती है। यदि आप यह व्रत करेंगे तो आपको एक सही दिनचर्या अपनानी होती है। इस दौरान आपका भोजन बहुत साधारण और सात्विक होना चाहिए। दिन में सिर्फ एक बार खाना खाएं और उसमें प्याज, लहसुन, अनाज और मांसाहर से पूरी तरह परहेज करें। फल, दूध और व्रत में खाए जाने वाले आहार जैसे साबूदान आदि का सेवन करें। आपकी दिनचर्या ब्रह्म मुहूर्त उठकर स्नान और पूजा से शुरु होनी चाहिए। यह व्रत शरीर को कष्ट देने के लिए नहीं बल्कि मन को शांत करने और भगवान की भक्ति में लगाने के लिए किया जाता है।  
  • इस दिन मनाई जाएगी शनि जयंती, जानें शुभ मुहूर्त और उपाय

    इस दिन मनाई जाएगी शनि जयंती, जानें शुभ मुहूर्त और उपाय

    नई दिल्ली: सूर्य और छाया पुत्र शनि देव का जन्म ज्येष्ठ अमावस्या पर हुआ था। इस दिन साल शनि जयंती 16 मई 2026 को है। शनि देव प्रसन्न हो तो अपने भक्तों का कुछ भी अनिष्ट नहीं होने देते हैं। इस दिन वट सावित्री व्रत भी किया जाता है। शनि जयंती के दिन शनि देव की सूर्यास्त के बाद पूजा करनी चाहिए। शनि जयंती पूजा का शुभ मुहूर्त भी देखें। 13 साल बाद ऐसा संयोग आया है जब शनि जयंती शनिवार के दिन पड़ रही है। ये दिन और तिथि दोनों ही शनि देव को प्रिय है।

    साल में 2 बार आती है शनि जयंती

    उत्तर भारत में शनि जयंती अमावस्या को मनाई जाती है जो 16 मई को है। वहीं दक्षिण भारत में शनि जयंती वैशाख अमावस्या तिथि पर आती है। ज्येष्ठ अमावस्या 16 मई 2026 का सुब 5.11 पर शुरु होगी और अगले दिन 17 मई 2026 को सुबह 1.30 पर इसका समापन होगा। शनि देव की पूजा के लिए रात 7.05 से रात 8.23 तक मुहूर्त है।

    शनि जयंती पर करें उपाय

    . इस मौके पर सबसे खास अनुष्ठानों में शनि तैलाभिषेकम और शनि शान्ति पूजा है। शनि जयंती के दिन सुबह स्नान ध्यान आदि करने के बाद पीपल की जड़ में कच्चा दूध, गंगाजल और साफ जल चढ़ाएं। 11 बार परिक्रम करें। . शनि देव का नाम लेते हुए लोहा, जामुन, काला तिल, काले जूते तेल का दान करें।

    इन लोगों का मिलता है शनि देव का आशीष

    भगवान शनि निष्पक्ष न्याय में विश्वास करते हैं। अपने भक्तों को सौभाग्य और समृद्धि देते हैं। जिन लोगों पर भगवान शनि का आशीर्वाद नहीं होता। उन्हें जीवन में कड़ा परिश्रम करने के बाद भी किसी प्रकार का कोई फल नहीं मिलता है और वो वर्षों तक बिना कुछ प्राप्त किए परिश्रम करते रहते हैं।

    शनि क्यों होते हैं नाराज

    . गरीब, लाचार और असहाय लोगों को प्रताड़ित करने वाले व्यक्ति पर भी शनि देव खुश नहीं होते हैं। जब उस व्यक्ति के जीवन में शनि की दशा आती है और तो फिर उसे शारीरिक, मानसिक और आर्थिक कष्टों का सामना करना पड़ता है। शनि की मार उस पर पड़ती है। . शराब, जुआ, चोरी, हत्या या बाकी तामसिक प्रवृत्ति में लिप्त लोगों को शनि देव का प्रकोप सहन करना पड़ता है।
  • Surya Grahan 2026: कर्क राशि में लगेगा सबसे लंबा सूर्यग्रहण, इन राशियों के शुरु होंगे बुरे दिन

    Surya Grahan 2026: कर्क राशि में लगेगा सबसे लंबा सूर्यग्रहण, इन राशियों के शुरु होंगे बुरे दिन

    धर्म: साल 2026 का दूसरा सूर्यग्रहण 12 अगस्त को लगाने जा रहा है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, यह ग्रहण कर्क राशि और अश्लेषा नक्षत्र में लगेगा। सावन के महीने में लगने वाला यह ग्रहण खगोलीय और आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद खास माना जा रहा है जिसका सीधा असर देश-दुनिया सहित सभी राशियों पर पड़ेगा।

    कर्क राशि और अश्लेषा नक्षत्र पर प्रभाव

    यह ग्रहण विशेष तौर पर कर्क राशि में लग रहा है। इसके स्वामी चंद्रमा हैं। अश्लेषा नक्षत्र में होने के कारण कर्क राशि वालों को मानसिक बैचेनी और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इस दौरान जातकों को धैर्य रखने और विवादों से बचने की सलाह दी जाती है। कर्क राशि और अश्लेषा नक्षत्र होने में होने के कारण कर्क राशि वालों को मानसिक बैचेनी और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इस दौरान जातकों को धैर्य रखने और विवादों से बचने की सलाह दी जाती है। ज्योतिषियों के अनुसर, कर्क के अलावा मेष, तुला और मकर राशि के जातकों के लिए समय चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

    कर्क

    ग्रहण इसी राशि में है इसलिए मानसिक तनाव और सेहत में गिरावट आ सकती है। दुर्घटना के योग भी बन रहे हैं।

    मेष

    पारिवारिक कलह और माता की सेहत को लेकर परेशानी बढ़ सकती है। प्रापर्टी के विवाद में न पड़े।

    तुला

    कार्यक्षेत्र में अपमान या नौकरी जाने का खतरा हो सकता है। आर्थिक निवेश से बचें।

    मकर

    वैवाहिक जीवन में तनाव और साझेदारी के बिजनेस में बड़ा घाटा होने की आशंका है।

    इन राशियों के लिए वरदान साबित होगा ग्रहण

    सभी राशियों के लिए यह बुरा नहीं है। मिथुन, कन्या और मीन राशि के लोगों के लिए यह सूर्य ग्रहण भाग्य के द्वारा खोल सकता है। व्यापार में वृद्धि, रुका हुआ वापिस मिलना और कार्यस्थल पर मान-सम्मान बढ़ने के प्रबल योग बन रहे हैं।

    ग्रहण का समय

    यह ग्रहण भारतीय समयानुसार रात में शुरु होगा। शास्त्रों के अनुसार, सूर्य ग्रहण का सूतक काल ग्रहण शुरु होने से 12 घंटे पहले लग जाता है हालांकि भारत में रात होने के कारण इसकी दृश्यता नहीं होगी जिससे यहां सूतक के कड़े नियम लागू नहीं होंगे।

    उपाय और दान

    ग्रहण के नेगेटिव प्रभाव से बचने के लिए आदित्य हृद्य स्त्रोत का पाठ करें। ग्रहण खत्म होने के बाद सामार्थ्य अनुसार, गेंहू तांबा या गुड़ का दान करना शुभ रहेगा। गर्भवती महिलाओं के इस दौरान विशेष रुप से भगवान का ध्यान करने का सलाह दी जाती है।  
  • UPSC Crack कर रहे छात्रों को पढ़ा रही Teacher, Premanand Maharaj से मिलने पहुंची वृंदावन, देखें वीडियो

    UPSC Crack कर रहे छात्रों को पढ़ा रही Teacher, Premanand Maharaj से मिलने पहुंची वृंदावन, देखें वीडियो

    धर्म: यूपीएससी की तैयारी कर रहे छात्रों के बीच मशहूर पूर्व सिविल सर्विस अधिकारी डॉक्टर तनु जैन वृंदावन में प्रेमानंद महाराज का आशीर्वाद लेने पहुंची। छात्रों के बीच वह तनु मैम के नाम से भी बहुत मशहूर हैं। अन्य भक्तों की तरह तनु जैन भी एक सवाल लेकर प्रेमानंद महाराज के दरबार आई थी। उनका सवाल था कि भक्ति मन से करना जरुरी है लेकिन कई बार मन और बुद्धि में द्वंद सा हो जाता है आखिर इससे कैसे निपटा जाए।

    नामजप करिए

    इसे बारे में प्रेमानंद महाराज ने कहा कि – ‘नामजप करिए’। नाम जप से बुद्धि प्रवीण हो जाती है। इससे मन निर्मल होगा और द्वंद खत्म होंगे। भजन के बिना ये द्वंद नष्ट नहीं होगा। इसके बाद प्रेमानंद महाराज ने एक श्लोक पढ़ते हुए कहा कि मन और बुद्धि को तब तक आराम नहीं मिलेगा। जब तक भजन नहीं करोगे इसलिए खूब भजन करो। काउंटर या माला की मदद से नामजप करो। राम कृष्णा, हरि, राधा, किसी का नाम भी जप लो। नाम जप से हो व्यक्ति को मंगल होगा और तन-मन बुद्धि पवित्र हो जाएगी। इसके बाद सवाल आया है कि नामजप में रुचि कैसे होगी? इस पर प्रेमानंद महाराज ने कहा कि – नियमपूर्वक लंबे काल तक नामजप किया जाए तो अपने आप रुचि हो जाती है। जब भजन करते हुए हमारी पाप प्रवृत्ति का नाश होगा तो रुचि बढ़ने लगेगी। आपकी दिलचस्पी बिल्कुल ऐसे बढ़ जाएगी।
     
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    जैसे गरीब या लालची व्यक्ति की धन में होती है। ऐसे व्यक्ति को यदि नामजप छोड़ने के लिए त्रिभुवन की राजलक्ष्मी भी दे दी जाए तो वह इस सौदे को स्वीकार नहीं करेंगे। दिल्ली की तनु जैन ने साल 2015 में यूपीएससी की सिविल परीक्षा पास की थी। वह आर्म्ड फोर्सेस हेडक्वार्टर सिविल सर्विसेज में सहायक निदेशक के पद पर कार्यरत थी। उन्होंने 7 साल बाद सिविल सर्विस की नौकरी छोड़ दी। आज तथास्तु नाम से अपना IAS कोचिंग इंस्टिट्यूट चला रही है। तनु जैन ने दिल्ली के कैम्ब्रिज स्कूल से पढ़ाई के बाद मेरठ के सुभारती मेडिकल कॉलेज से बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी में डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने एलएलबी की डिग्री हासिल की है। तनु जैन ने यूपीएससी की तैयारी को लेकर तीन किताबें भी लिखी हैं। सोशल मीडिया पर उनकी बातों और विचारों से प्रेरणा लेकर कई छात्र यूपीएससी की तैयारी में जुटे हैं। एक इंटरव्यू में तनु जैन ने बताया था कि वो बचपन में बहुत पढ़ाकू नहीं थी। खेद-कूद में उनका मन ज्यादा लगता था हालांकि पढ़ाई में वह बहुत बुरी भी नहीं थी। बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी (बीडीएस) के दौरान उन्हें सिविल सर्विस के एग्जाम के बारे में पता चला और उनकी यूपीएससी की जर्नी यहीं से शुरु हुई।
  • घर में रखा है शंख तो इन नियमों का रखें खास ध्यान…. वास्तु शास्त्र से जुड़े ये जरूरी नियम

    घर में रखा है शंख तो इन नियमों का रखें खास ध्यान…. वास्तु शास्त्र से जुड़े ये जरूरी नियम

    Rules For Conch: सनातन धर्म में शंख को बहुत पवित्र और शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि समुद्र मंथन से निकलने वाले 14 रत्नों में शंख का भी विशेष स्थान है। इसे देवी-देवताओं का प्रिय माना जाता है और यह सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत भी है। शंख का इस्तेमाल पूजा, आरती और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों में सदियों से होता आया है। धार्मिक मान्यता है कि घर में शंख रखने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में सुख-समृद्धि आती है।

    शंख रखने की सही दिशा
    वास्तु शास्त्र के अनुसार, शंख को घर के पूजा स्थल में रखना सबसे अच्छा होता है। इसे हमेशा साफ और स्वच्छ जगह पर रखें।
    शुभ दिशा
    • उत्तर दिशा
    • पूर्व दिशा
    • ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा)
    इन दिशाओं में शंख रखने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है और देवी लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है।

    शंख से जुड़े नियम
    1. शंख को केवल सजावट के लिए न रखें। इसे धार्मिक भावना के साथ रखें।
    2. पूजा के समय शंख बजाना शुभ माना जाता है, लेकिन हर शंख बजाने योग्य नहीं होता।
    3. दक्षिणावर्ती शंख: यह लक्ष्मी का प्रतीक है और इसे केवल पूजा में रखें।
    4. वामावर्ती शंख: इसे बजाया जा सकता है।

    शंख रखने में अक्सर होने वाली गलतियां
    1. गंदे स्थान पर शंख रखना
    शंख को कभी भी गंदे या अपवित्र जगह पर न रखें। ऐसा करने से इसके सकारात्मक प्रभाव खत्म हो जाते हैं।
    2. एक ही शंख से जल और ध्वनि दोनों काम करना
    पूजा में जल भरने और बजाने के लिए अलग-अलग शंख रखें।
    3. रात में शंख बजाना
    रात में शंख बजाना अशुभ माना जाता है। इसे केवल सुबह और शाम की आरती के समय बजाएं।
    4. शंख को सीधे जमीन पर रखना
    शंख को हमेशा किसी साफ कपड़े या आसन पर रखें।
    5. टूटा हुआ शंख रखना
    अगर शंख टूट गया है तो उसे घर में न रखें। टूटा शंख नकारात्मक ऊर्जा का संकेत माना जाता है।

    शंख रखने के लाभ
    • शंख की ध्वनि से वातावरण शुद्ध होता है।
    • नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
    • मानसिक शांति और सकारात्मक सोच बढ़ती है।
    • घर में सुख-समृद्धि और धन की वृद्धि होती है।

     

  • 100 साल बाद Akshaya Tritiya पर बनेगा खास संयोग, पूजा के लिए शुभ रहेगा ये समय

    100 साल बाद Akshaya Tritiya पर बनेगा खास संयोग, पूजा के लिए शुभ रहेगा ये समय

    धर्म: इस साल अक्षय तृतीया बहुत ही खास होने वाली है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस बार ऐसा दुर्लभ महासंयोग बन रहा है जो करीबन 100 साल बाद देखने को मिल रहा है। कई शुभ योगों का एक साथ बनना इस दिन को और भी शक्तिशाली बना रहा है। मान्यताओं के अनुसार, इस बार तिथि पर किए गए शुभ काम का फल कई गुना बढ़कर मिलता है। जीवन में स्थायी-सुख-समृद्धि लाता है।

    100 साल बाद बनने वाला है दुर्लभ महासंयोग

    इस बार अक्षय तृतीया पर आयुष्मान योग, सौभाग्य योग, गजकेसरी योग, त्रिपुष्कर योग, रवि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग जैसे कई शुभ संयोग एक साथ बन रहे हैं। सूर्य और चंद्रमा की मजबूत स्थिति इस दिन की शुभता को और भी ज्यादा बढ़ा रही है। ऐसे में यह दिन धन, सफलता और नई शुरुआत के लिए खास माना जा रहा है।

    पूजा का शुभ समय क्या है?

    अक्षय तृतीया 19 अप्रैल को मनाई जाएगी। इस दिन पूजा का शुभ समय सुबह 10:49 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक रहेगा। खरीददारी का शुभ मुहूर्त सुबह 10:49 बजे से लेकर पूरे दिन शुभ रहेगा। इस दिन तृतीया तिथि सुबह से शुरु होकर अगले दिन तक प्रभावी रहेगा। इस दौरान सोना-चांदी खरीदना, निवेश करना और नए काम शुरु करना बहुत शुभ माना जाता है।

    पूजा विधि

    अक्षय तृतीया के दिन सबुह जल्दी उठकर स्नान करें। साफ कपड़े पहनें और घर के मंदिर में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रति स्थापित करें। उन्हें पीले फूल, धूप, दीप और नैवेद् अर्पित करें। इसके बाद ऊं नमो भगवते वासुदेवाय नम: मंत्र का जाप करें। पूजा के अंत में आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें।    
  • इस दिन से शुरु होगी Amarnath Yatra, जानें कैसे करें Registration?

    इस दिन से शुरु होगी Amarnath Yatra, जानें कैसे करें Registration?

    जम्मू-कश्मीर: अमरनाथ यात्रा 2026 की घोषणा हो गई है। श्री अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड के अनुसार, इस साल की वार्षिक तीर्थयात्रा 3 जुलाई 2026 से शुरु होगी। इसका समापन 28 अगस्त 2026 को रक्षा बंधन से शुरु होगी। इस बार यात्रा कुल 57 दिनों तक चलेगी। इसमें लाखों श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है। यात्रा के औपचारिक आरंभ से पहले भगवान शिव का आशीर्वाद लेने के लिए पहले पूजा का आयोजन किया जाएगा। यह विशेष पूजा ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन यानी की 29 जून 2026 को संपन्न होगी। इसी दिन से यात्रा के लिए आध्यात्मिक वातावरण तैयार हो जाता है।

    ऐसे करवाएं रजिस्ट्रेशन

    खराब मौसम के कारण से जल्द खत्म होने वाली अमरनाथ यात्रा 4.14 लाख श्रद्धालु पहुंचे बाबा के दरबार श्रद्धालुओं की सुरक्षा और भीड़ के प्रबंधन के लिए अग्रिम पंजीकरण जरुरी है। इस साल रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया 15 अप्रैल 2026 से शुरु हो जाएगी। भक्त ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों के जरिए अपना पंजीकरण करवा सकते हैं। देशभर में स्थित जम्मू-कश्मीर बैंक, पीएनबी (PNB), एसबीआई (SBI) और यस बैंक (Yes Bank) की 554 शाखाओं पर जाकर रजिस्ट्रेशन करवाया जा सकता है। श्राइन बोर्ड की अधिकारिक वेबसाइट और मोबाइल ऐप के जरिए भी पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध रहेगी।

    स्वास्थ्य प्रमाणपत्र है जरुरी

    अमरनाथ की यात्रा ज्यादा ऊंचाई और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाली होती है। ऐसे में पंजीकरण के लिए अधिकृत डॉक्टरों के द्वारा जारी किया गया है। अनिवार्य स्वास्थ्य प्रमाणपत्र जरुरी है। बिना स्वास्थ्य जांच और वैध परमिट के किसी भी यात्री को आगे बढ़ाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

    यात्रा मार्ग और तैयारी

    यह यात्रा पारंपरिक पहलगाम मार्ग और बालटाल मार्ग दोनों ही रास्तों से संचालित की जाएगी। प्रशासन ने भक्तों के लिए सुरक्षा, चिकित्सा शिविर और ठहरने की व्यवस्था को अभी से अंतिम रुप देना शुरु कर दिया है। तीर्थयात्रियों को सलाह दी जाती है कि वो अपने साथ गर्म कपड़े और जरुरी दवाईयां रखें।  
  • 19 April से बदलेगी इन राशियों की किस्मत, शनि चलेंगे उल्टी चाल

    19 April से बदलेगी इन राशियों की किस्मत, शनि चलेंगे उल्टी चाल

    धर्म: वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा को मन और भावनाओं का कारक माना जाता है इसलिए इसका गोचर काफी अहम होता है। चंद्रमा लगभग हर दिन अपना नक्षत्र बदलता है जिसका सीधे व्यक्ति के मूड, सोच और फैसलों पर पड़ता है। ज्योतिष के अनुसार, अब चंद्रमा के वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा को मन और भावनाओं का कारक माना जाता है इसलिए इसका गोचर काफी अहम होता है। ज्योतिष के अनुसार, जब चंद्रमा शुभ नक्षत्र में होता है तो धन लाभ, सफलता और नए मौके मिलते हैं। वहीं अशुभ स्थिति में तनाव, उलझन और खर्च बढ़ सकते हैं स्थिति में तनाव, उलझन और खर्च बढ़ सकते हैं। अप्रैल 2026 में चंद्रमा कुल 19 बार नक्षत्र परिवर्तन करेगा। महीने की शुरुआत 1 अप्रैल को हस्त नक्षत्र से होगी जबकि 30 चंद्रमा चित्रा नक्षत्र में रहेगा। ऐसे में यह महीना सभी राशियों के लिए अलग-अलग अनुभव लेकर आएगा।

    वृषभ राशि

    वृषभ राशि के लोगों के लिए यह समय आर्थिक से मजबूत बना सकता है। आय के नए, स्त्रोत बन सकते हैं। कामकाज में सम्मान मिलेगा। परिवार का सहयोग बना रहेगा। निवेश से भी फायदा मिलने के संकेत हैं।

    मिथुन राशि

    मिथुन राशि वालों के लिए किस्मत का साथ मिलेगा। नौकरी और व्यापार में तरक्की हो सकती है। धन में वृद्धि होगी। रिश्तों में मिठास बनी रहेगी। मेहनत का अच्छा परिणाम मिलेगा।

    कर्क राशि

    इस राशि के लोगों के लिए यह समय थोड़ा उतार-चढ़ाव वाला हो सकता है। खर्च बढ़ सकते हैं। काम में रुकावट आ सकती है। मानसिक तनाव महसूस हो सकता है इसलिए धैर्य रखना जरुरी है।

    सिंह राशि

    राशि वालों के लिए यह समय सफलता लेकर आ सकता है। करियर में प्रगति होगी। धन लाभ के अच्छे मौके मिलेंगे। समाज में आपकी पहचान बढ़ेगी। नई जिम्मेदारियां मिल सकती है।

    कन्या राशि

    राशि के लिए यह समय शुभ रहेगा। रुके हुए काम पूरे होंगे। आर्थिक स्थिति बेहतर होगी। नौकरी में प्रमोशन के संकेत हैं। परिवार में सुख-शांति बनी रहेगी।

    तुला राशि

    तुला राशि वालों को इस महीने मिश्रित परिणाम मिल सकते हैं। कुछ काम पूरे होंगे तो कुछ में देरी हो सकती है। खर्चों पर नियंत्रण रखना जरुरी होगा। फैसले सोच-समझकर लेने होंगे।

    वृश्चिक राशि

    वृश्चिक राशि के लोगों के लिए यह लाभकारी रहेगा। धन लाभ और करियर में ग्रोथ के संकेत हैं। आपकी मेहनत की सराहना होगी। परिवार का साथ मिलेगा।

    धनु राशि

    इस दौरान चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। काम में रुकावट और तनाव बढ़ सकता है। खर्च भी बढ़ सकते हैं इसलिए सावधानी से काम लेना जरुरी है।

    मकर राशि

    मकर राशि के लिए यह समय नए अवसर लेकर आ सकता है। आय में वृद्धि होगी। करियर में सफलता मिलेगी। परिवार में खुशी का माहौल रहेगा और आपके प्रयास सफल होंगे।

    कुंभ राशि

    राशि वालों के लिए समय मिला-जुला रहेगा। कुछ काम सफल होंगे। कुछ अटक सकते हैं। धैर्य बनाए रखना जरुरी है। सोच-समझकर फैसले लें।

    मीन राशि

    मीन राशि के लोगों को इस महीने थोड़ा सावधान रहने की जरुरत है। खर्च बढ़ सकते हैं। मन थोड़ा परेशान रह सकता है। जल्दबाजी से बचे। स्वास्थ्य का ध्यान रखें।