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  • Chaitra Navratri : जानें कब है नवरात्रि की दुर्गा अष्टमी, किस दिन कन्या पूजन का है शुभ मुहूर्त

    Chaitra Navratri : जानें कब है नवरात्रि की दुर्गा अष्टमी, किस दिन कन्या पूजन का है शुभ मुहूर्त

    Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि हिंदू धर्म का एक बहुत पवित्र और महत्वपूर्ण पर्व है। ये नौ दिन मां दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा के लिए समर्पित होते हैं। हर दिन का अपना खास महत्व होता है, लेकिन आठवां दिन यानी अष्टमी तिथि सबसे खास माना जाता है। इस दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा की जाती है। अष्टमी तिथि का महत्व क्यों है नवरात्रि का आठवां दिन बहुत शुभ और फलदायी माना जाता है। इस दिन को दुर्गा अष्टमी या महाअष्टमी भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन मां महागौरी की पूजा करने से सभी पाप दूर होते हैं और जीवन में सुख-शांति आती है। मां महागौरी को शुद्धता, शांति और सौंदर्य का प्रतीक माना जाता है। उनकी पूजा से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है। दुर्गा अष्टमी 2026 कब है पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि की शुरुआत: 25 मार्च 2026, दोपहर 1:50 बजे। अष्टमी तिथि का समापन: 26 मार्च 2026, सुबह 11:48 बजे। उदय तिथि के अनुसार, दुर्गा अष्टमी 26 मार्च 2026 को मनाई जाएगी। इसी दिन पूजा और कन्या पूजन करना शुभ रहेगा। कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त अष्टमी के दिन कन्या पूजन करने के लिए दो विशेष शुभ समय बताए गए हैं।
    1. पहला मुहूर्त:
    • सुबह 6:18 बजे से 7:50 बजे तक
    2. दूसरा मुहूर्त:
    • सुबह 10:55 बजे से दोपहर 3:31 बजे तक
    इन समयों में कन्या पूजन करना सबसे उत्तम माना जाता है। कन्या पूजन का महत्व नवरात्रि के आठवें दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। इस दिन छोटी-छोटी कन्याओं को मां दुर्गा का रूप माना जाता है। कैसे करें कन्या पूजन
    • घर में 9 छोटी कन्याओं (या जितनी संभव हो) को आमंत्रित करें
    • उनके पैर धोकर सम्मान करें
    • उन्हें हलवा, पूरी, काला चना और खीर खिलाएं
    • भोजन के बाद उन्हें दक्षिणा, उपहार दें
    • उनके पैर छूकर आशीर्वाद लें
    मान्यता है कि कन्या पूजन करने से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और घर में सुख-समृद्धि आती है।  
  • Chaitra Navratri : नवरात्रि के चौथे दिन होगी मां कुष्मांडा की पूजा, जानिए पूजा विधि और भोग

    Chaitra Navratri : नवरात्रि के चौथे दिन होगी मां कुष्मांडा की पूजा, जानिए पूजा विधि और भोग

    Chaitra Navratri 2026 : नवरात्रि का चौथा दिन मां दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कुष्मांडा को समर्पित होता है। चैत्र नवरात्रि में यह दिन 22 मार्च को मनाया जाएगा। मान्यता है कि मां कुष्मांडा ने अपनी एक हल्की सी मुस्कान से पूरे ब्रह्मांड की रचना की थी। इसलिए इन्हें सृष्टि की आदि शक्ति कहा जाता है। मां कुष्मांडा का स्वरूप बहुत ही शांत, सौम्य और आकर्षक माना जाता है। इनकी पूजा करने से जीवन के दुख, रोग और परेशानियां दूर होती हैं और सुख-समृद्धि आती है। मां कुष्मांडा का स्वरूप मां कुष्मांडा अष्टभुजा (आठ भुजाओं वाली) देवी हैं और सिंह (शेर) पर सवार रहती हैं। उनके आठ हाथों में अलग-अलग वस्तुएं होती हैं:
    • कमंडल
    • धनुष
    • बाण
    • कमल का फूल
    • अमृत से भरा कलश
    • चक्र
    • गदा
    • जाप माला
    माना जाता है कि मां कुष्मांडा सूर्य मंडल के भीतर निवास करती हैं और उसी से पूरे संसार को ऊर्जा देती हैं। मां कुष्मांडा की महिमा धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां कुष्मांडा की पूजा से सभी दुख और कष्ट दूर होते हैं। व्यक्ति को लंबी उम्र और यश की प्राप्ति होती है। जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है। दुर्गा सप्तशती में बताया गया है कि जब चारों ओर अंधकार था, तब मां कुष्मांडा ने ही सृष्टि की रचना की। पूजा की सामग्री मां कुष्मांडा की पूजा के लिए ये सामग्री रखें:
    • कलावा
    • कुमकुम
    • अक्षत (चावल)
    • घी
    • धूप
    • चंदन
    • तिल
    • पीली मिठाई
    • पीले कपड़े
    • पीली चूड़ियां
    मां कुष्मांडा की पूजा विधि पूजा करते समय इन आसान चरणों का पालन करें:
    1. सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें (पीले रंग के कपड़े शुभ माने जाते हैं)।
    2. सबसे पहले कलश की पूजा करें।
    3. इसके बाद मां कुष्मांडा की पूजा शुरू करें।
    4. हाथ में फूल लेकर मां को प्रणाम करें।
    5. सच्चे मन से ध्यान करते हुए यह मंत्र बोलें:
    “सुरासंपूर्णकलशं रूधिराप्लुतमेव च, दधाना हस्तपद्माभ्यां कुष्मांडा शुभदास्तु में।”
    1. मां को पंचामृत से स्नान कराएं।
    2. घी का दीपक जलाएं।
    3. लाल फूल, कुमकुम और चंदन अर्पित करें।
    4. फल और मिठाई का भोग लगाएं।
    5. “ॐ कुष्माण्डायै नम:” मंत्र का जाप करें।
    6. गणेश जी और मां की आरती करें।
    7. पूजा में हुई गलती के लिए क्षमा मांगें।
    8. अंत में शंख बजाकर पूजा पूरी करें और प्रसाद बांटें।
    मां कुष्मांडा को लगने वाला भोग मां कुष्मांडा को पीला रंग बहुत प्रिय है, इसलिए भोग में पीले रंग की चीजें चढ़ाना शुभ माना जाता है:
    • केसर पेठा या केसरिया हलवा
    • मालपुआ और बताशे
    • दही और हलवा
    • सिंघाड़े के आटे का हलवा
    • आलू या बादाम का हलवा
    कुछ लोग इस दिन पेठे (फल) की भी भेंट चढ़ाते हैं। सच्चे मन से आराधना करने से जीवन में सुख, शांति और सफलता मिलती नवरात्रि का चौथा दिन मां कुष्मांडा की पूजा का विशेष दिन है। सच्चे मन से उनकी आराधना करने से जीवन में सुख, शांति और सफलता मिलती है। मां की कृपा से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है।  
  • Chaitra Navratri 2026 : वैष्णो देवी यात्रा के लिए खास इंतजाम, श्रद्धालुओं को इस बार मिलेगी ये सुविधा

    Chaitra Navratri 2026 : वैष्णो देवी यात्रा के लिए खास इंतजाम, श्रद्धालुओं को इस बार मिलेगी ये सुविधा

    Chaitra Navratri 2026 : कल से शुरू हो रहे चैत्र नवरात्र को देखते हुए श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने यात्रा को आसान और सुरक्षित बनाने के लिए खास तैयारी की है। बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सचिन वैश्या ने बताया कि हर साल की तरह इस बार भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है। अभी तक करीब 15 लाख से ज्यादा लोग दर्शन कर चुके हैं और आने वाले दिनों में यह संख्या और बढ़ सकती है।

    यात्रा मार्ग पर पूरी सुविधा उपलब्ध
    श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए पूरे रास्ते में साफ-सफाई, पीने के पानी, बिजली और चिकित्सा सुविधाओं का पूरा इंतजाम किया गया है। जगह-जगह सहायता केंद्र बनाए गए हैं, जहां यात्रियों को जानकारी और मदद मिल सकेगी।

    फूलों से सजा मंदिर, भक्ति का माहौल
    नवरात्र के मौके पर वैष्णो देवी मंदिर को सुंदर फूलों से सजाया गया है। इससे पूरे क्षेत्र में भक्ति और आध्यात्मिक माहौल बना हुआ है। सुबह और शाम के समय मंदिर परिसर में देश के जाने-माने और स्थानीय भजन गायक अपनी प्रस्तुति देंगे, जिससे श्रद्धालुओं को खास अनुभव मिलेगा।

    व्रत रखने वालों के लिए खास भोजन
    जो श्रद्धालु व्रत रखते हैं, उनके लिए भोजनालयों में फलाहार (व्रत वाला खाना) की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए मुफ्त बैटरी से चलने वाली गाड़ियों की सुविधा भी दी जा रही है, ताकि वे आसानी से यात्रा कर सकें।

    नई सुविधाएं भी जोड़ी गईं
    इस साल यात्रा में कुछ नई सुविधाएं भी शामिल की गई हैं। श्रद्धालुओं के लिए साधना स्थल और यज्ञशाला बनाई गई है, जहां वे पूजा-पाठ और हवन कर सकते हैं।

    सुरक्षा के कड़े इंतजाम
    श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए कड़ी व्यवस्था की गई है। केंद्रीय रिजर्व पुलिस, जम्मू-कश्मीर पुलिस, सेना और श्राइन बोर्ड के सुरक्षाकर्मी हर जगह तैनात हैं। पूरे यात्रा मार्ग पर 24 घंटे निगरानी रखी जा रही है और आधुनिक कैमरों से हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है।

    श्रद्धालुओं से अपील
    श्राइन बोर्ड ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और यात्रा को सुचारु बनाने में सहयोग करें। साथ ही सभी को नवरात्र की शुभकामनाएं देते हुए माता वैष्णो देवी से सब पर कृपा बनाए रखने की प्रार्थना की गई है।

     

  • जानें इस बार महाअष्टमी और किस तारीख को मनाया जाएगा राम जन्मोत्सव, देखें लिस्ट

    जानें इस बार महाअष्टमी और किस तारीख को मनाया जाएगा राम जन्मोत्सव, देखें लिस्ट

    Dharam News: हिंदू धर्म में नवरात्रि के दिन बेहद पवित्र और महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इन नौ दिनों में भक्त माता दुर्गा के नौ स्वरूपों की श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा करते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई पूजा से माता दुर्गा भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं और जीवन के दुख-दर्द दूर करती हैं। चैत्र मास में आने वाली नवरात्रि को चैत्र नवरात्रि कहा जाता है। साल 2026 में चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च से होने जा रही है। इन नौ दिनों में अष्टमी और नवमी तिथि को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। इस साल अष्टमी और राम नवमी की तिथि को लेकर लोगों के मन में थोड़ी उलझन बनी हुई है। ऐसे में आइए आसान शब्दों में जानते हैं कि महाअष्टमी और राम नवमी 2026 में कब मनाई जाएगी और इनका क्या महत्व है।

    महाअष्टमी 2026 कब है?
    साल 2026 में महाअष्टमी 26 मार्च, गुरुवार के दिन मनाई जाएगी। नवरात्रि का आठवां दिन माता दुर्गा के महागौरी स्वरूप को समर्पित होता है। इस दिन भक्त पूरे विधि-विधान के साथ माता महागौरी की पूजा-अर्चना करते हैं। महाअष्टमी के दिन घरों और मंदिरों में विशेष पूजा की जाती है। कई लोग इस दिन कन्या पूजन भी करते हैं, जिसमें छोटी कन्याओं को माता का रूप मानकर उन्हें भोजन करवाया जाता है और उपहार दिए जाते हैं।

    राम नवमी 2026 कब है?
    चैत्र नवरात्रि के नौवें दिन राम नवमी का पर्व मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान राम का जन्म हुआ था। साल 2026 में राम नवमी 26 मार्च को मनाई जाएगी। मान्यता है कि भगवान राम का जन्म मध्याह्न काल में हुआ था, इसलिए कई स्थानों पर इस समय विशेष पूजा और आरती की जाती है। वहीं उदयातिथि के अनुसार कुछ लोग 27 मार्च को भी राम नवमी का पर्व मना सकते हैं।

    महाअष्टमी का धार्मिक महत्व
    नवरात्रि का आठवां दिन यानी महाअष्टमी पूजा-पाठ के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों जैसे देवी भागवत पुराण और मार्कंडेय पुराण में भी अष्टमी और नवमी तिथि को विशेष फलदायी बताया गया है। इस दिन माता महागौरी की पूजा करने से जीवन की परेशानियां दूर होती हैं और घर में सुख-शांति का वास होता है। महाअष्टमी के दिन कन्या पूजन का भी विशेष महत्व होता है।

    राम नवमी का महत्व
    राम नवमी हिंदू धर्म का एक प्रमुख त्योहार है। इस दिन भगवान राम की पूजा की जाती है और कई लोग व्रत भी रखते हैं। मान्यता है कि राम नवमी के दिन पूजा करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है।

    इसके अलावा यह दिन भगवान राम के आदर्श जीवन और उनके सिद्धांतों को याद करने का भी अवसर होता है। इस दिन मंदिरों में विशेष पूजा, भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

     

     

  • इस दिन लगेगा साल का दूसरा Surya Grahan, सूतक काल में भूलकर भी न करें ऐसे काम

    इस दिन लगेगा साल का दूसरा Surya Grahan, सूतक काल में भूलकर भी न करें ऐसे काम

    धर्म: साल 2026 में होने वाले खगोलीय घटनाक्रमों में सूर्य ग्रहण भी खास माना जा रहा है। हिंदू धर्म में सूर्य ग्रहण का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व बताया गया है इसलिए इस दौरान कई नियमों का पालन करने की परंपरा है। ग्रहण के समय पूजा-पाठ, खान-पान और दैनिक कार्यों को लेकर खास सावधानियां बरती जाती हैं। ऐसे में लोग यह जानने के लिए उत्सुक रहते हैं कि साल का अगला सूर्य ग्रहण कब लगेगा। उसका प्रभाव भारत में दिखाई देगा या नहीं। साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को लगा था लेकिन यह भारत में दिखाई नहीं दिया। अब लोगों की नजर साल के दूसरे सूर्य ग्रहण पर है। आइए आपको बताते हैं कि साल का दूसरा सूर्यग्रहण कब लगेगा।

    ग्रहण की तारीख और समय

    साल 2026 का दूसरा सूर्यग्रहण 12 अगस्त को लगने वाला है। इसी दिन हरियाली अमावस्या भी पड़ रही है जिससे इस दिन का धार्मिक महत्व और भी ज्यादा बढ़ जाता है। यह ग्रहण रात 9:04 मिनट पर शुरु होगा। 13 अगस्त की सुबह 4:25 मिनट पर खत्म होगा। यह सदी का दूसरा लंबी अवधि तक दिखने वाला सूर्य ग्रहण है हालांकि यह सूर्य ग्रहण भारत में नजर नहीं आएगा ऐसे में यहां सूतक काल नहीं लगेगा।

    क्या करें ग्रहण में?

    . सूतक काल के दौरान कोई भी नया और शुभ काम न करें जैसे शादी, मुंडन या गृह प्रवेश न करें। . इस दौरान मन ही मन में गायत्री मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र और सूर्य मंत्र का जाप करें। . इसके बाद घर और मंदिर साफ करें। . देसी घी का दीपक जलाकर भगवान की पूजा अर्चना करें। . सूतक काल शुरु होने से पहले खाने-पीने की चीजों में तुलसी की पत्ते डालकर रखें।

    क्या न करें?

    . ग्रहण के दौरान पूजा पाठ न करें। . भगवान की मूर्तियों को स्पर्श न करें। . भोजन न खाएं। . चाकू, सुई जैसी धारदार वस्तुओं का इस्तेमाल करें। . सगाई, विवाह जैसे शुभ काम न करें। . तुलसी के पत्ते न तोड़ें। . किसी भी वाद-विवाद न करें। . किसी के बारे में नेगेटिव विचार न रखें।
  • इस दिन से शुरु होंगे Chaitra Navratri, अष्टमी पर कन्या पूजन के लिए शुभ रहेगा ये मुहूर्त

    इस दिन से शुरु होंगे Chaitra Navratri, अष्टमी पर कन्या पूजन के लिए शुभ रहेगा ये मुहूर्त

    धर्म: नवरात्रि में पूरे 9 दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरुपों की पूजा की जाती है। खासतौर पर चैत्र नवरात्रि को बहुत ही अहम माना जाता है। चैत्र नवरात्रि से ही हिंदू नववर्ष की शुरुआत होती है। साल 2026 में चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरु होकर 27 मार्च तक मनाई जाएगी। इन नौ दिनों में देवी के नौ रुपों की आराधना की जाती है। नवरात्रि के दौरान अष्टमी और नवमी तिथि बहुत ही खास मानी जाती है। इस बार चैत्र नवरात्रि कब से शुरु होंगे इसको लेकर लोग कंफ्यूजन है। आइए आपको बताते हैं कि चैत्र नवरात्रि कब से शुरु होंगे और इसके लिए घटस्थापना का क्या मुहूर्त है।

    इस वजह से खास है अष्टमी

    नवरात्रि के आठवें दिन को अष्टमी कहते हैं। यह दिन देवी पूजा के लिए बहुत शुभ माना जाता है। धार्मिक ग्रंथ जैसे देवी भागवत पुराण और मार्केंडय पुराण में अष्टमी और नवमी तिथि का खास महत्व बताया गया है। मान्यताओं के अनुसार, इस दिन यदि आप सच्चे मन से मां दुर्गा की आराधना करेंगे तो आपके जीवन की सभी बाधाएं दूर होंगी। भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होगी। इस दिन कन्या पूजन भी काफी लोग करते हैं जिसमें छोटी बालिकाओं को देवी का स्वरुप मानकर उनकी पूजा की जाती है।

    26 मार्च को रखा जाएगा अष्टमी का व्रत

    साल 2026 में अष्टमी का व्रत 26 मार्च को रखा जाएगा। इस दिन भक्त विशेष पूजा अर्चना करते हैं। कन्या पूजन करके मां दुर्गा से सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली का आशीर्वाद मांगते हैं। कई लोग इस दिन अपनी कुल देवी का पूजन भी करते हैं और परिवार की समृद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं।

    शुभ मुहूर्त

    25 मार्च 2026 को दोपहर 1:50 बजे से शुरु होगा और 26 मार्च 2026 की सुबह 11:48 बजे तक रहेगा। इस दौरान आप कभी भी अष्टमी की पूजा कर सकते हैं।

    पूजा के शुभ मुहूर्त

    इस दिन सुबह का मुहूर्त 6:20 AM से लेकर 7:52 AM तक रहेगा। दूसरा मुहूर्त सुबह 10:56 AM से लकर 2:01 PM और शाम का मुहूर्त 5:06 PM और 9:33 PM तक का है।    
  • साल का पहला चंद्रग्रहण आज, शुरु हुआ सूतक काल, भूलकर भी न करें ऐसी गलतियां

    साल का पहला चंद्रग्रहण आज, शुरु हुआ सूतक काल, भूलकर भी न करें ऐसी गलतियां

    धर्म: 3 मार्च यानी की आज साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने वाला है। यह एक खंडग्रास चंद्र ग्रहण है जो सिंह राशि और पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में लगने वाला है। यह भारत में भी नजर आएगा। इसका सूतक काल भारत में भी माना जाएगा। चंद्र ग्रहण आज दोपहर 3:20 पर शुरु होगा और शाम को 6:46 पर खत्म होगा। इसका सूतक काल सुबह 6:20 मिनट पर शुरु हो चुका है। यह चंद्र ग्रहण भारत के कई बड़े शहरों में नजर आने वाला है। धर्म: 3 मार्च यानी की आज साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने वाला है। यह एक खंडग्रास चंद्र ग्रहण है जो सिंह राशि और पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में लगने वाला है। यह भारत में भी नजर आएगा। इसका सूतक काल भारत में भी माना जाएगा। चंद्र ग्रहण आज दोपहर 3:20 पर शुरु होगा और शाम को 6:46 पर खत्म होगा। इसका सूतक काल सुबह 6:20 मिनट पर शुरु हो चुका है। यह चंद्र ग्रहण भारत के कई बड़े शहरों में नजर आने वाला है।

    इन जगहों में दिखेगा चंद्र ग्रहण

    चंद्र ग्रहण आज शाम को भारत के कई बड़े शहरों में दिखने वाला है। दिल्ली-एनसीआर सहित कोलकाता, चेन्नई, मुंबई, बेंगलुरु, अहमदाबाद, हैदराबाद, पटना, भुवनेश्वर, शिलॉन्ग, कोहिमा, गुवाहटी, इम्फाल और ईटानगर में दिखेगा। भारत के अलावा एशिया में भी कई जगहों पर चंद्र ग्रहण नजर आएगा। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीका में भी यह चंद्र ग्रहण नजर आने वाला है। नॉर्थ साउथ अमेरिका और प्रशांत महासागर के आस-पास भी ग्रहण का नजारा दिखने को मिलेगा।

    ग्रहण के दौरान रखें ध्यान

    सूतक काल और चंद्र ग्रहण में प्रेग्नेंट महिलाओं, बुजुर्गों, बच्चों और रोगियों को खास ध्यान रखने की जरुरत होती है। सूतक काल में भी इन लोगों को खास ध्यान रखना पड़ता है। जरुरत पड़ने पर यह खान-पान कर सकते हैं परंतु घर से बाहर निकलने या कोई जोखिम भरा काम करने से बचें। खासतौर पर नुकीली या धारदार चीजों का इस्तेमाल न करें। घर से बाहर किसी भी सुनसान जगह पर बिल्कुल न जाएं।

    इन जगहों पर दिखेगा खंडग्रास चंद्र ग्रहण

    आज शाम देश में कई जगहों पर खंडग्रास चंद्र ग्रहण दिखाई देगा। दिल्ली-एनसीआर समेत बिहार, चंडीगढ़, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, कर्नाटक, केरल, लक्षद्वीप, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, उड़ीसा, पुडुचेरी, राजस्थान, तेलंगाना, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश में लोग खंडग्रास चंद्र ग्रहण देख पाएंगे।

    नासा ने भी किया अलर्ट

    नासा के अनुसार, 3 मार्च की शाम को चंद्र ग्रहण लगेगा जिस समय चंद्रमा पूरी तरह से पृथ्वी की छाया से ढका होगा तब वो गहरे लाल रंग का नजर आएगा। इसको ब्लड मून कहते हैं। चंद्रमा लाल रंग का इसलिए दिखता है क्योंकि सूर्य की रोशनी पृथ्वी के वायुमंडल से होकर मुड़ जाती है। इस बार पूर्ण चंद्र ग्रहण का नजारा करीबन 58 मिनट तक नजर आएगा। यह इस्टर्न, एशिया, ऑस्ट्रेलिया, प्रशांत महासागर और अमेरिका के अलग-अलग हिस्सों में नजर आएगा। इसको देखने के लिए टेलिस्कोप की भी जरुरत नहीं पड़ेगी।

    सूतक काल में न करें ये गलतियां

    सूतक काल शुरु हो चुका है। इस दौरान पूजा-पाठ या देवी-देवताओं की मूर्ति को हाथ न लगाएं। इस दौरान कोई शुभ मांगलिक काम भी नहीं करने चाहिए। किसी नए काम की शुरुआत न करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूतक काल में बाल, नाखून या दाढ़ी बनवाना या तेल मालिश भी नहीं करनी चाहिए। इसके अलावा खाने-पीने से परहेज करें। बाहर किसी से मिलने से भी परहेज ही करें।
  • भारत में कब से शुरु होगा Ramadan, जानें क्या कहता है Islamic Calendar?

    भारत में कब से शुरु होगा Ramadan, जानें क्या कहता है Islamic Calendar?

    धर्म : इस्लामिक कैलेंडर का सबसे पवित्र महीना रमजान भारत के साथ-साथ दुनियाभर के मुसलमानों के लिए रोजा (उपवास), प्रार्थना और दान का महीना है। कुछ लोग पहले से ही इस बात को जानना चाहते हैं कि आखिर भारत में रमजान कब शुरु होगा और ईद उल फितर कब मनाई जाएगी।

    भारत में इस समय मनाई जाएगी रमजान

    इस्लाम धर्म में रमजान इस्लामी चंद्र कैलेंडर के अनुसार मनाया जाता है जो चांद दिखने पर आधारित है। इस वजह से इसकी शुरुआत की तारीख हर साल बदलती रहती है और स्थानीय स्तर पर चांद दिखने की स्थिति के आधार पर अलग-अलग देशों में इसके समय में बदलाव देखने को मिलता है। भारत में रजमान 2026 की शुरुआत इस साल 19 फरवरी 2026 गुरुवार से हो सकती है हालांकि धार्मिक अधिकारियों के द्वारा चांद देखे जाने के बाद ही इसकी सटीक तिथि पता चल पाएगी। रमजान के दौरान मुसलमान आमतौर पर व्रत रखते हैं जिनको रोजा कहते हैं। इस दौरान अल्लाह की प्रार्थना और दान का खास महत्व होता है। रमजान के दौरान मुसलमान पूरे महीने सुबह से शाम तक रोजा रखते हैं और दिन के समय भोजन, पेय और अन्य शारीरिक जरुरतों से बचा जाता है। रमजान के महीने में नमाज पढ़ना, कुरान पढ़ना और जकात व सदका सहित दान-पुण्य भी किया जाता है।

    रमजान की अवधि

    रमजान का महीना 29 से 30 दिनों का होता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि अगला चांद कब दिखाई देता है। आखिरी के 10 दिनों में तरावीह और कियाम उल-लैल नाम की खास प्रार्थना पर जोर दिया जाता है। भारत में ईद-उल-फितर इस्लामी कैलेंडर का जरुरी त्योहार है जो रमजान के खत्म होने का प्रतीक माना जाता है और आमतौर पर प्रार्थनाओं, दावतों और उपहारों के आदान-प्रदान के साथ मनाया जाएगा। भारत में ईद-उल-फितर 2026 के चंद्रमा के आधार पर 20 या 21 मार्च 2026 को पड़ने की उम्मीद है। इस्लाम में इस त्योहार की शुरुआत में मस्जिदों और खुले मैदानों में आयोजित खास ईद की नमाज से होती है इसके बाद उत्सव के भोज का आनंद उठाया जाता है। इस दिन लोग एक-दूसरे को गले लगाकर शुभकामनाएं देते हुए। बच्चों को ईदी देने के साथ जकात के रुप में जरुरतमंदों को दान किया जाता है। इसे ईद की नमाज से पहले अदा करना जरुरी होता है।        
  • Mahashivratri 2026: महादेव के 10 दिव्य गुण जो अपनाते ही मिलेगा सुख, शांति और सफलता

    Mahashivratri 2026: महादेव के 10 दिव्य गुण जो अपनाते ही मिलेगा सुख, शांति और सफलता

    Mahashivratri 2026: भगवान शिव को देवों के देव महादेव कहा जाता है। वे केवल विनाश के देवता नहीं हैं, बल्कि दया, त्याग, प्रेम, संतुलन और आध्यात्मिक शक्ति के प्रतीक हैं। उनका जीवन हमें सही तरीके से जीने की प्रेरणा देता है। यदि हम उनके गुणों को अपने जीवन में अपनाएं, तो हम एक बेहतर और संतुलित जीवन जी सकते हैं। महादेव का आशीर्वाद पाने का सबसे सच्चा तरीका यही है कि हम उनके गुणों को अपने व्यवहार में उतारें। आइए भगवान भोलेनाथ के 10 दिव्य गुणों को विस्तार से समझते हैं।
    1. सरलता (सादगी का महत्व)
    भगवान शिव सादगी का सबसे बड़ा उदाहरण हैं। वे साधारण वेशभूषा में रहते हैं और उन्हें किसी प्रकार का दिखावा या आडंबर पसंद नहीं है। उनका जीवन हमें सिखाता है कि सच्ची महानता सादगी में ही होती है। जीवन में कैसे अपनाएं:
    • दिखावा और अहंकार से दूर रहें।
    • सरल जीवन जीने की आदत बनाएं।
    • अपनी पहचान सादगी से बनाएं।
    1. धैर्य (शांत रहने की शक्ति)
    भगवान शिव अत्यंत शांत और धैर्यवान हैं। चाहे परिस्थिति कितनी भी कठिन क्यों न हो, वे हमेशा संतुलित रहते हैं। धैर्य हमें सही निर्णय लेने में मदद करता है। जीवन में कैसे अपनाएं:
    • जल्दबाजी में निर्णय न लें।
    • कठिन समय में शांत रहने की कोशिश करें।
    • हर समस्या को समझदारी से हल करें।
    1. करुणा (दूसरों के लिए दया)
    जब समुद्र मंथन से विष निकला और पूरे संसार पर संकट आया, तब भगवान शिव ने दुनिया को बचाने के लिए स्वयं विष पी लिया। यह उनकी करुणा और त्याग का सबसे बड़ा उदाहरण है। जीवन में कैसे अपनाएं:
    • जरूरतमंद लोगों की मदद करें।
    • दूसरों के दुख को समझने की कोशिश करें।
    • दयालु और सहानुभूतिपूर्ण बनें।
    1. संतुलन (जीवन में सामंजस्य)
    भगवान शिव सृजन और विनाश दोनों के देवता हैं। यह हमें सिखाता है कि जीवन में हर चीज का संतुलन जरूरी है। जीवन में कैसे अपनाएं:
    • काम और परिवार के बीच संतुलन रखें।
    • सफलता मिलने पर भी विनम्र रहें।
    • जीवन के हर क्षेत्र में संतुलित सोच रखें।
    1. क्षमा (माफ करने का गुण)
    भगवान शिव अपने भक्तों की गलतियों को आसानी से क्षमा कर देते हैं। क्षमा करने से मन शांत रहता है और रिश्ते मजबूत बनते हैं। जीवन में कैसे अपनाएं:
    • मन में द्वेष और नफरत न रखें।
    • दूसरों की गलतियों को माफ करना सीखें।
    • सकारात्मक सोच बनाए रखें।
    1. आत्मसंयम (खुद पर नियंत्रण)
    भगवान शिव गहन तपस्या और ध्यान में लीन रहते हैं, जो उनके आत्मसंयम को दर्शाता है। आत्मसंयम हमें गलत रास्ते पर जाने से बचाता है। जीवन में कैसे अपनाएं:
    • अपनी इच्छाओं और क्रोध पर नियंत्रण रखें।
    • अनुशासन में रहकर जीवन जिएं।
    • गलत आदतों से दूर रहें।
    1. निर्भीकता (निडर बनने की सीख)
    भगवान शिव को भस्म और नागों के साथ दिखाया जाता है, जो उनकी निडरता का प्रतीक है। वे हमें सिखाते हैं कि डरकर नहीं, बल्कि साहस से जीवन जीना चाहिए। जीवन में कैसे अपनाएं:
    • चुनौतियों से भागें नहीं, उनका सामना करें।
    • आत्मविश्वास बढ़ाएं।
    • सही काम करने में डरें नहीं।
    1. समानता (सबको एक समान देखना)
    भगवान शिव के लिए सभी समान हैं — देव, दानव और मानव। वे किसी के साथ भेदभाव नहीं करते। जीवन में कैसे अपनाएं:
    • जाति, धर्म या स्थिति के आधार पर भेदभाव न करें।
    • सभी के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार करें।
    • समानता की भावना रखें।
    1. ध्यान और आध्यात्मिकता (मन की शांति का मार्ग)
    भगवान शिव ध्यान और योग के प्रतीक माने जाते हैं। ध्यान से मन शांत होता है और जीवन में स्पष्टता आती है। जीवन में कैसे अपनाएं:
    • रोज कुछ समय ध्यान करें।
    • आत्मचिंतन की आदत डालें।
    • मानसिक शांति को प्राथमिकता दें।
    1. त्याग और समर्पण (निस्वार्थ जीवन)
    भगवान शिव का जीवन त्याग और समर्पण का संदेश देता है। वे हमेशा दूसरों की भलाई के लिए कार्य करते हैं। जीवन में कैसे अपनाएं:
    • स्वार्थ से ऊपर उठकर सोचें।
    • परिवार और समाज के लिए योगदान दें।
    • सेवा भावना रखें।
    भगवान शिव के ये गुण हमें जीवन को सही दिशा देने की प्रेरणा देते हैं। यदि हम सादगी, धैर्य, करुणा, क्षमा, संतुलन और आत्मसंयम जैसे गुणों को अपने जीवन में अपनाते हैं, तो हमारा जीवन सफल, शांत और सुखी बन सकता है। यही महादेव की सच्ची भक्ति है।      
  • घर या मंदिर कहां पर पूजा करने से मिलेगा ज्यादा फल, Premanand Maharaj ने दिया जवाब

    घर या मंदिर कहां पर पूजा करने से मिलेगा ज्यादा फल, Premanand Maharaj ने दिया जवाब

    धर्म: वृंदावन के प्रेमानंद जी महाराज एक ऐसे संत है जो भक्तों को सिर्फ धर्म ही नहीं बल्कि जीने की कला और सदमार्ग पर भी चलना सिखाते हैं। उनका यह कहना है कि ईश्वर से जुड़ने का सबसे आसान तरीका है उनका निरंतर स्मरण करना। आए दिन प्रेमानंद महाराज के पास भक्त अपने सवाल लेकर पहुंचते हैं जिनका सवाल महाराज बहुत ही शांतिपूर्वक देते हैं। अब हाल ही में कुछ समय एक भक्त ने महाराज से सवाल पूछा था कि घर में पूजा करने और मंदिर में पूजा करने में क्या अंतर है। इसका जवाब महाराज ने अब दिया है।

    दोनों में क्या अंतर है?

    प्रेमानंद महाराज ने जवाब देते हुए कहा कि – घर में पूजा करने और मंदिर में पूजा करने में क्या अंतर है। इस पर प्रेमानंद महाराज ने कहा कि अंतर है। घर की पूजा मंदिर में जाकर तीर्थस्थान और धाम में जाकर पूजा इन सभी का अपना खास फल होता है। घर में 1000 माला का जाप, गौशाला में 1000 माला के जप के बराबर होता है। तीर्थस्थान में जाकर 1 माला जपने से आपको 1000 के बराबर माला जपने का फल मिलता है। वृंदावन में एक माला जपने का अर्थ होता है एक लाख बार माला जपना है। लोग इसलिए मंदिर जाते हैं तीर्थस्थान की यात्रा करते हैं। साधु-संत के पास जाते हैं। बड़े-बड़े मंदिरों का दर्शन करते हैं क्योंकि वहां जाकर उन्हें शांति और ज्यादा फल मिलता है। घर के भजन और मंदिर के भजन में अंतर है।

    घर से ज्यादा मंदिर की पूजा में फायदेमंद

    सिर्फ इतना ही नहीं प्रेमानंद महाराज ने यह भी बताया कि घर की उपासना से ज्यादा फल आपको मंदिर में उपासना करने से फायदा होगा। गंगा के किनारे पर जाकर उपासना करना या माला जपने का फल भी अलग और ज्यादा होगा। गंगाजल के अंदर खड़े होकर यदि माला जपते हैं तो उसका फल भी अलग होगा। ये पद्दतियां है। अलग-अलग तरीके से भजन करने की पवित्र नदियों जैसे कि गंगा, यमुना, सरस्वती और नर्मदा, गौशाला और देवालय में जाना और वहां पर पूजा करना। इससे आपको कई गुऩा फायदा मिलेगा।